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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
August 28 · Edited
आ जाओ भगवन मेरे ......२

आ जाओ भगवन मेरे ......२
बैठा हूँ नैन बिछाये
कब से तेरी राह लगाये
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

विश्व के अधिनायक तुम हो
प्रथम पूज्य के भारक तुम हो
मैं सेवक तुम हो स्वामी
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

शिव पर्वती बालक तुम हो
कार्तिके के भ्राता तुम हो
मूषक की आपकी सवारी
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

ऋद्धि-सिद्धि के तुम हो दाता
तुम ही प्रभु मेरे भाग्य-विधाता
प्रभु और कितना मैं बाट निहरों
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

भगवन इतना विलंब ना लाओ
सिहासन आप बिन खाली पड़ा है
दस दिन इस पर विराजमान हो जाओ
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

आ जाओ भगवन मेरे ......२
बैठा हूँ नैन बिछाये
कब से तेरी राह लगाये
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
12 hours ago
दशोटण /दशूटन अथवा नामकरण संस्कार का जौनpuri -गढ़वाली लोक गीत
बोला बोला सगुन बोला , बोला बोला सगुन बोला
गणपति आंगुणी बढ़ई बाजे ,गणपति आंगुणी बढ़ई बाजे
सुधि -बुधि देवी का आनंद छाये ,सुधि -बुधि देवी का आनंद छाये
विष्णु जी का आंगुणी बढ़ई बाजे ,विष्णु जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
लक्ष्मी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे ,लक्ष्मी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
ब्रह्मा जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, ब्रह्मा जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
ब्रह्माणी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, ब्रह्मणी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
नारैण जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, नारैण जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
बाबा जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, बाबा जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
माँ जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, माँ जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
धौळी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे, धौळी जी का आंगुणी बढ़ई बाजे
तू ह्वेलु बेटा देवतौं को जायो
तू ह्वेलु बेटा कुल को उज्याळो
आज जाया तेरा नाम धर्याले
तू जाया कुल को राखी नाउ

(Reference- Madhuri Manuraj Barthwal, Shailvani Tritiy Varshik Visheshank, 2004, page 63)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
16 hours ago
माता ब्रांडी ,पिता ओल्डमौंक
कवि -हरीश जुयाल

ओम नमो गुरु को आदेशा
माता ब्रांडी ,पिता ओल्डमौंक
तीन लोक तारिणी , थ्री ऐक्स डागिणी , लाल नागिणी
चेतक बियर को आदेशा
व्हिस्की पीर को आदेशा
टिंचरी जोगिणी कु जुहार
ठर्रा जोगी कू नमस्कार
अनंत झांझ्यों मस्तक चढ़ाई
फुलमुंड्या कच्ची तुम्हारो भाई
कंटर नाथ कच्ची थड़कंतो आयो
जिकुड़ी जळन्तो आयो
अन्दडी सड़न्तो आयो
भट्टा बैठन्तो आयो
ख्याळा म्याळौ मा तेरी बयाळ चले
दफ्तर बजारौं मा तेरी बयाळ चले
बरात की जिया तेरी बयाळ चले
दावत की हिया तेरी बयाळ चले
दस दिशा चार खूंटो कुमौ गढ़वाल जले
किसने हाणी किसने छाणी
छाण छूण के कांच कु गिलास ल्यायो
फिर सर नीचे टांग अगास करायो
एक दिन झांझी ले बोतळ पर ताणी लगायो
लूण की गारी में प्याज की दाणी चपायो
पैगमारी मुष्टिमारी
लात मारी हाथ मारी
किस किस पै हाथ चलायो
किस किस पै लात चलायो
पटवारी पे हाथ चलायो
महिलावर्ग पै लात चलायो
हाथ चलाकर पणकोखी फोड़े
लात गज्याके टंगडी तोड़े
टंगड़ी तोड़ के जेल डळवायो
पुलिस की दुल्लती को सल्लाम
दीवान की हस्ती को सल्लाम
टूटती सांकी को सल्लाम
xxx ...
महिला मंगलदल घाण पड़े ( मूसल की मार )
पब्लिक का डांड पड़े
जेल साँचा , पियक्कड़ कांचा
दारु छोड़ कुटजोवाचा
नी छोड़ी तो
च्यस -च्यस -घुट -घुट
सक्क सक्क
स्वाहा

Copyright@ Harish Juyal

Contact -09568021039

harishjuyalkutaj2012@gmail.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अरी पहाड़ी नारी ! तू मेरी सौतन री !

चबोड़ ? चखन्यौ ? - भीष्म कुकरेती

s = अधा अ

मि तैं तुम मिसेज अबोध बंधु बहुगुणा , श्रीमती डंडरियाल , श्रीमती रघुवीर सिंह अयाल , श्रीमती केशवान , श्रीमती असवाल , मिसेज पराशर गौड़ , श्रीमती विनोद जेठुरी , मिसेज जगमोहन जयाड़ा , मिसेज बालकृष्ण भट्ट , श्रीमती राजेन्द्र सिंग फरियादी या मिसेज गीतेश नेगी कुछ बि बोलि सकदां पर मि ढोल बजैक , तुरही फूंकिक , डौंर बजैक , थाळी छणकैक , कंटर पीटिक ऐड़ैक , बीच बजार मा धै लगैक बुलणु छौं बल स्या पहाड़ी औरत मेरी सौतन , सौत च।

तैं पहाड़ की जनानीन मि तैं वै दिन से इ जलाण -कुढ़ाण शुरू कौर आल छौ जैदिन बटे मी तैं यी याने म्यरो हजबैंड जी ब्यौ बाद पहाड़ से दिल्ली लेकि ऐ छा। यी कवि हृदयी त नि छन बल्कण मा बकळि जिकुड़ी का छन पर असल मा गढ़वाली कवि छन।

सुहाग रातक दुसर सुबेर यी मि तैं लेकी दिल्ली ऐ गे छा अर यूंन तब अंदो आंद 'पहाड़ की नार की द्वी साल बाद सुहाग रात ' पर बड़ी हाहाकारी कविता लेखिक छ्पवै छे अर तब से मेरी समज मा ऐ गे पहाड़ की नारी मेरी सौत री !

दुसर कविता मा यूंन पहाड़ की नारी ठंड मा , ऐड़ी मा सुबेर सुबेर मुंहअंधेरे उठिक जंदर पीसण , घाम आण पर घमघम कुटणो वर्णन करी छौ अर पहाड़ की नारी की असह्य कठण जिंदगी वर्णन से एक कवि सम्मेलन मा श्रोताओं तैं रुलै छौ अर इथगा बढ़िया असलियतबादी कविता से अपण दगड्या कवियों तैं जळै छौ। पर म्यार कजे की कविनजर मे पर नि पौड़ी कि मी बि त प्रवास मा पैल यूंक भाइ पढ़ै वास्ता फिर अपण बच्चों की खातिर दिल्ली मा 4 डिग्री की ठंड ह्वेन या ह्वेन 44 डिग्री को उमळतो मि सुबेर 4 बजी बिजिक कामधाम मा लग जांद छौ। म्यार सुकुमार हृदयी कजे तैं मेरी मेनत , परिवार का वास्ता शरीर खपाई की जिंदगी मा कुछ बि करुणा नि दिखे बस पहाड़ी नारी की एवरेस्ट की ऊकाळ वळि जिंदगी दिखे अर युंकुंण त जन बुल्यां प्रवासी नारी राजसी ठाठ करदारी नारी ह्वावु।

मेरा यूँ हृदय विदारकी कवि पति तैं पहाड़ की नारीक लखड़ निड़ाण से लेकि लखड़ों बोझ से पिलसीं -पिल्चीं जिंदगी अवश्य दिख्याई किन्तु इतना दशाब्द्यूं मा इन नि दिखे कि यूंकि धर्मपत्नी बि मिट्टी तेल लीणो बान चार चार घंटा राशनै दुकान मा हर हफ्ता खड़ी रैंदी . नारी पीड़ा प्रेमी मेरो कवि हज्बैंड यदि एक कविता मेरी परेशानी पर बि लेखी लींद तो मि कबि बि नि सोचदु की पहाड़ी नारी मेरी सौत च।

पहाड़ की नारी को मैत नि जै सकणो असमर्थता पर तो मेरा कवि पतिन करुण रस मा डुबाइं -भिगाइं खंड काव्य लेखिक जयश्री सम्मान प्राप्त कार किंतु अपण घौरम अपण पत्नी का वूं रिसदा घावूं तैं दिखद , महसूस करदा बिसर गेन जु घाव यूंक पत्नी तैं पिछला बीस साल से पहाड़ नि जै सकणो असमर्थता से पैदा ह्वेन। वाह हे गढ़वाली कवि ! पहाड़ की नारी का मैत प्रेम माँ तो , टीस , असह्य करुणा किंतु प्रवासी नारी ज्वा मैत से बिमुख करे गे वींक मैतै खुद पर एक बि आंसू ना ? पहाड़ी नारी की खुद की कीमत बेशकीमती हीरा अर प्रवासी नारी का आंसू की क्वी कीमत ना ? वाह रे गढ़वाली का सुनामधन्य कवि !

हे कवि माराज ! पहाड़ की अनपढ़ नारी जब पटवारी का खसरा मा अंगूठा लगान्दी तो तुम अपणी कविता मा दुनिया की सब स्कूलों तैं जमींदस्त करणै वकालात करदा छया किन्तु दिल्ली मा चालीस साल रैक बि मि अबि बि सरकारी कागजुं मा अंगूठा हि लगांदु किंतु आपन कबि नि स्वाच कि मी बि एक अनपढ़ नारी छौं ? क्या आप तैं ख़याल बि आयि कि खाली पहाड़ ही ना इख दिल्ली मा बि में सरीखा अनपढ़ नारी छन ?

अबि तुमर एक खंड काव्य प्रकाशित ह्वे जैक नाम च 'एकुलास कु बुढ़ापा '। इ खंडकाव्य पर आप तैं उत्तराखंड कवि शिरोमणि पुरूस्कार बि मील। ये खंड काव्य मा तुमन पहाड़ मा एक इन बुडड़ी वर्णन कार ज्वा पहाड़ का एक गां मा कथगा इ सालुं से शहर मा रौण वाळ नाती नतिण्यूं जग्वाळ मा बैठीं च। पर हे पहाड़ नारी प्रेमी कबि मेरि जग्वाळ पर बि त कलम चलाओ कि मि दिल्ली मा रौंद बि दिल्ली मा रौण वाळ अपण नाती नतिण्यूं द्वी साल शकल दिखण से बेजार छौं। मेरी क़ुदसा पर कलम चलाण मा तुमतै किलै शरम लगदि ?

पहाड़ी नारी तो सौभाग्यवती च कि वींक दुखों पर कलम चलाण वाळ गढ़वाळ मा बि छन अर प्रवास मा बि छन किन्तु मै सरीखा बेबस प्रवासी जनानी पर जब प्रवासी साहित्यकार ही कलम नि चालांदन तो गढ़वाल का साहित्यकार किलै प्रवासी जनानी तैं याद कारल ?

रामु का बुबा जी ! पहाड़ की श्यामु ब्वे पर त तुम खूब कलम चलाणा रौंदा तो तुमर काखमा बैठीं रामु की मा तैं बि साहित्य मा भूलां -बिसरां कबि कब्यार जगा दिलावो ना ! मी बि त गढ़वाली नार छौं !

Copyright@ Bhishma Kukreti 29 /8/ 2014
*लेख में घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
August 28
एक गढ़वाली कविता जिस पर आज तक सबसे अधिक 'वन्स मोर '-वन्स मोर ' मिले हैं !

Fur Ghindudi: A Long Dramatic Poem for Common Man's Enjoyment

आलेख -भीष्म कुकरेती

आज के कवि हरीश जुयाल 'कूट्ज' शायद नाराज हो जाएँ ; कन्हया लाल डंडरियाल के भक्त मुझसे रूठ जायं किन्तु यह एक असलियत है कि स्व गिरधारी लाल थपलियाल 'कंकाल ' की कविता 'फुर घिंडुड़ी आजा : पधानु का छाजा' पर दर्शकों से सबसे वन्स मोर मिले हैं।


'फुर घिंडुड़ी आजा : पधानु का छाजा'

कवि : गिरधारी लाल थपलियाल 'कंकाल

प्यार की त छुईं इनि कुछ नि लांदो मोल
घिंड्वा घिन्डुड़ी मा ब्वल्द औ बणौला घोल।
फुर घिंडुड़ी आजा !
पधानु का छाजा !!
चाड़ नी जु छ्वीं लगऊँ ,
केकु तेरा नेडु अऊँ ,
इन्ना समझि तन्नी छऊं ,
कुछ नि तेरो काsज
पधानु का छाजा !!

तन्नी छै तु कैन बोलि
अपड़ा मनै बात खोलि,
मिन ता सोचि थकीं होलि
इच्छि थौ ता खा जा !
पधान का छाजा !!
जाण कनै कैकि रीत ,
मर्दु कि क्या च प्रतीत ,
दुन्या झट म्यसौन्द गीत,

अपड़ा अपड़ा बाठा जा जा !
पधान का छाजा !!
इति हस्यार तू चलाक ,
तड़तड़ी छ कुंगळि नाक
संगुळि सी लटकीं बुलाक,
भलि दिंदौ बिराजा
पधान का छाजा !!
xx xxx
छाल ल्हैलो साड़ी ल्हौ लो
त्वेको मी गौणा बणौलो
अब कबी नि दिल दुखौलो

राणि तू मि राजा !
पधान का छाजा !!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
August 28
कुर्सी का जागर लग्यां छन

गजलकार -जगमोहन सिंह बिष्ट
कुर्सी का जागर लग्यां छिन सुणद जा ,
वोट का खांकर बज्यां छिन सुणद जा।
बैठ दादा क्वी नि निकाळी सकुद भैर ,
गिगड़ा गागर मा भर्यां छिन दिखद जा।
घुंणडु कीलु लगौन्दन प्रीती की ,
कपाळ का टांका बुना छिन सुणद जा।
अाग गंगा मा लगीं रै सरा साल ,
माछा सब डांडा भग्याँ छिन दिखद जा।
हथगुळयुं मां धैर यूं ज्यूंदाळु तैं,
द्यब्ता सब दैण हुयां छिन दिखद जा।
जीतू की बंसुळी बणी च विधान सभा
भाग अंछर्युं का खुल्यां छिन दिखद जा।
भैजि कनकै स्यार साला पांच साल
भरणा झांझर बज्यां छिन सुणदा जा।
हिंवळी कांठ्यूं मा लगीं च यख बणाक,
देबी -दिब्ता दिल्ली मा छिन दिखदा जा।
हौळ तांगऴ नी च , घास का ढेर छिन ,
गैळु का कन दिन अयां छिन दिखद जा।
बिष्ट डिग्री फेल छिन कॉलेज की ,
ढाई आखर कुर्सी का छिन रटद जा।

खांकर = घुंघुरू
स्यार साला- धान की रुपाई के लिए पानी भरा खेत तयार करना
झांझर -पाजेब
बणाक - वनाग्नि
Copyright@ Jagmohan Bisht jsbisht27@gmail.com
Contact 09410328161

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नेता कु पशुचरित्र भाग - 1

चबोड़्या , चखन्यौर्या - भीष्म कुकरेती

s = अधा अ

ब्याळि मि अपण नातिक स्कूल ग्यों तो द्याख कि मास्टर जीन एक ऐनिमल किंगडम याने जानवरूं साम्राज्य कु बोर्ड टंग्युं छौ और मुख्य बोर्ड पर शीर्षक लिख्युं छौ नेताचारितम् याने नेताओं के मुख्य गुण और जानवरों के गुण !

मास्टरजी पढ़ाना छया -

नेता बणनो वास्ता मनुष्य तैं जानवरूं कु चरित्र अंगीकार करण आवश्यक हूंद।

गैंडा जन खलड़ी - नेता की खाल गैंडा जन म्वाट खलड़ो हूण जरूरी च कि जनता कथगा बि रोये -पीटे नेताजी की सेहत पर फरक नि पड़न चयेंद। उ नेता नी च जु जनता का दुःख से दुखी ह्वे जावु।

बेशरम लोमड़ी /स्याळ - चालाकी मा नेताओं तैं स्याळ से बि अग्वाड़ी हूण चयेंद। दुसरौ याने म्वारुं जमायुं शहद कु छत्ता पर अपण अधिकार करण मा कबि बि नि शर्माण चयेंद।

बिरळि - शांत अर ठंडो मिजाज सिखण हो त बिरळ से सिखण चयेंद , कथगा बि अभियोग लग जावन तो भी नरसिम्हा राव या मनमोहन सिंह जीक तरां शांत रौण चयेंद।

बिरळि अपण बच्चों तैं सात घौर दिखांदी - नेताओं तैं बि अपण द्वी नम्बरो कमाई कबि बि एक जगा मा या एक फॉरेन बैंक मा नि रखण चयेंद अपितु बेनामी चल अथवा अचल सम्पति तैं बराबर बदलण चयेंद। हालांकि इन सुणन मा आयि बल अच्काल बल सहारा चिट फंड , श्रद्धा चिट फंड जन कम्पनी नेताओं बेनामी धन तैं इना ऊना घुमाणा रौंदन।

कळजिंड/ कोयल - कोयल अपण अंडा कवाक घोल मा धरदी याने अपण बोझ दुसरौ पीठ मा या काँध मा डळण सिखण हो तो कोयल से या नारायण दत्त तिवाड़ी से सिखण चयेंद।

कर्रें - जब बि नेता विरोधी पार्टी का हूंद व या वा कर्रें तरां कर्र -कर्र करद।

कुत्ता - नेता तैं अपण कुर्सी का आस पास कै हैंक नेता तैं द्याख ना कि खदुळ कुत्ता का तरां भुकण शुरू कर दीण चयेंद।

कळु /तोता - चुनाव का टैम पर अच्छे दिन आएंगे की एकी रट अर चुनाव जितणो बाद रटण चयेंद अच्छे दिन लाणो वास्ता दस साल बि कम पोड़ल।

कळु /तोता - कळु तैं सूंघीक पता चल जांद कि कख फल पक्याँ छन ऊनि नेता तैं बि पता चलण चयेंद कि कख मलाई या चंदा मिलणु च।

गरुड़ - कुर्सी पर दूर से नजर पड़नै गुण गरुड़ से सिखण आवश्यक च।

चिंचुड़ - याने जनता कु खून चुस्वा

सरसु याने खटमल - शोषण करणै बड़ी सक्यात

गू खवा सुंगर - सुंगर टट्टी खाण से परेज नि करदु अर नेता शौचालय साफ़ करणो ठेका से घूस लीणम परेज नि करद।

बांदर -नकलची ! दुसरों नारा तैं अपण नारा बतैक भाषण दीण।

बकै दुसर दिन भाग 2 मा .......

Copyright@ Bhishma Kukreti 28 /8/ 2014
*लेख में घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
13 hours ago
मैं समझ गया हूँ
यंहा बिसात हार की सजी है
हार नही मान सकता फिर भी मै
बिना लड़े ही अपने से

शुभ संध्या प्रणाम दोस्तों

ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
14 hours ago
अब तो ऐसे लगता है

अब तो ऐसे लगता है
आज-कल वक़्त कैसे गुजरता है
इस समय थोड़ी देर में वो
एक ही पल बाद बदल जाता है

इन दिनों चूँकि इसलिए
जबकि की थी तुम ने मुझसे
तुम से वो मैंने सुनी बातें
अनसुना सा वो क्यों लगता है

परछाईयाँ घटती बढ़ती हैं
अपने से वो क्या कुछ कहती है
परवाह किसे पड़ी है किसकी
मर्जी जब पड़ी है खुद ही की

अब तो ऐसे लगता है
आज-कल वक़्त कैसे गुजरता है
इस समय थोड़ी देर में वो
एक ही पल बाद बदल जाता है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
August 29
हम भी अगर तेरे होते

हम भी अगर तेरे होते
मरते तेरे संग सात फेरे
दुनिया कहती हैप्पी वेडिंग टू यू

लफ्जों का ही ये खेल
दिल का दिल से मेल है
राशन में नहीं मिलता तेल है
दुनिया कहती आलवेस हैप्पी हैप्पी टू यू

चाँद है तू मै चकोर हूँ
दिल मेरे बैठा कोई चोर है
कोई कहे वन्स मोर है
दुनिया कहती हैप्पी एंडिंग टू यू

हम भी अगर तेरे होते
मरते तेरे संग सात फेरे
दुनिया कहती हैप्पी वेडिंग टू यू

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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