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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
April 1 at 11:25pm ·

वो थोड़ सा पानी

ये....जिंदगी क्या
उसकी बंदगी है क्या
सूखे गले को थोड़ा पानी
थोड़ी सी तेरी मेहरबानी
वो थोड़ सा पानी......२

गर्मी के हलाहल में
सूरज की इस तपन में
ढूंढे कहाँ हम मृग तृष्णा
बन जाऊं तुम हमारे कृष्णा
वो थोड़ सा पानी......२

अमृत वो असर कर दे
जीवन को हमारे सरल कर दे
हम बेजुबानों को थोड़ घर दे
सुस्ता लें इतना सफर दें
वो थोड़ सा पानी......२

ये....जिंदगी क्या
उसकी बंदगी है क्या
सूखे गले को थोड़ा पानी
थोड़ी सी तेरी मेहरबानी
वो थोड़ सा पानी......२

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
April 1 at 7:58am ·

किस ने ये दिन बनया

आज उसने मुझे बनया
फिर उसने मुझे बुलाया
मुर्ख दिवस में मुझे फिर मुर्ख बनया
आने को कहा ,और वो ना आये
ये दिल ये दिल
किस ने ये दिन बनया
आज उसने मुझे बनया
फिर उसने मुझे बुलाया

कितना हमने अपने
आप को था समझया
प्यार था तुझ से प्यार के लिये आया
फिर आपने हमारा मजाक बनया
ये दिल ये दिल
किस ने ये दिन बनया
आज उसने मुझे बनया
फिर उसने मुझे बुलाया

कोई और होता तो
वो देख कभी नही आता
अपने को अपने पर ही
देख तुझे इतना ना हँसता
ये दिल ये दिल
किस ने ये दिन बनया
आज उसने मुझे बनया
फिर उसने मुझे बुलाया

अब तो समझ ले प्यार मेरा
बैठ हूँ अब तक राह में तेरे
ना बना मुझे आज मूर्खों का राजा
बस अपने दिल का राजा बना
ये दिल ये दिल
किस ने ये दिन बनया
आज उसने मुझे बनया
फिर उसने मुझे बुलाया

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
March 31 at 11:21pm ·

देख किसी का दिल ना टूटे

देख किसी का दिल ना टूटे
तेरा टूटे कोई बात नही ...२
देख किसी का दिल ना टूटे

हम ने दे दी वो हंसी उनको ...२
वो आँख हँस दिये हम रो दिये कोई बात नहीं
देख किसी का दिल ना टूटे

बाँध के रख दे बात ये दिल से ...२
तुझ से ना छूटे उससे छूटे कोई बात नहीं
देख किसी का दिल ना टूटे

जीवन हो एक बहती नदिया ...२
बहाव ऐसा हो बाँध भी आ जाये कोई बात नहीं
देख किसी का दिल ना टूटे

सुख दुःख एक रास्ता मंजिल का
चलना है हमे मिले ना मिले कोई बात नहीं
देख किसी का दिल ना टूटे

देख किसी का दिल ना टूटे
तेरा टूटे कोई बात नही ...२
देख किसी का दिल ना टूटे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

वो खारे मोती

आँखें नम है ,बस यही गम है
आती जाती साँसें ,बस थम थम है
आँखें नम है

सुबहा की पहली बूँद पड़ी ज़मीं पर
शबनम ओस के वो खारे मोती झिलमिल है
रुसवा है कोई हर रोज आज किसी से
वहशत का बना अब अपना ही घर है

पीत का छाया यंहा अब इतना असर है
शाद भी आज गुमशुदा हो फिर रहा बेफ़िक्र है
उफ़ताद छिड़ा है अब हर ओर हिज्र का
दारू ही अब सब पर तक़मील हुआ है

बुँदे छलकी कदम लड़खड़ाये
गिरते पड़ते हम मैख़ाने से घर को आये
अपने को संभले या संभले उनको
अब यूँ ही उम्र गुजरी अब ये ही पसर है

आँखें नम है ,बस यही गम है
आती जाती साँसें ,बस थम थम है
आँखें नम है

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
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रुसवा = Disgraced,वहशत = Solitude, Grief, Fear,पीत = Love, Affection,शाद =,Cheerful, Happy,उफ़ताद = Calamity,हिज्र = Separation,दारू = Medicine, Remedy &तक़मील = Getting over with, Taking to a conclusion

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
March 29 at 10:33pm ·

तुम कहो तो ......

तुम कहो तो
आप के लिए हम समाचार बन जायें
घघुति बनकर
ये पहाड़ उड़ उड़ जायें
तेरे आने की खबर सुनायें
आप की खातिर
ढोल दामों बजायें
माशों बाजों की सुरीली धुन पे
चलो गढ़वाली गीत गायें
देली आप की
हम फूलों से सजायें
तुम कहो तो
आप के लिए हम समाचार बन जायें
वहीँ पास बैठी होगी
तेरी बोई ब्वारी भूली
तेरे इंतजार में
उनके आँसूं में
आप की हंसी को फैलायें
मंगल गीत का
आप के लिए तिलक लगायें
दीपक की ज्योत
में संग चलो दीपवाली बनायें
छूटे नन्हों के साथ
बूढ़ों को खिल खिलायें
चलो पहाड़ जायें
तुम कहो तो
आप के लिए हम समाचार बन जायें
सूखती नदियां
बिलखते खलिहान
रोता पहाड़
भूखा गढ़वाल
पूरी तरहं खाली होने से पहले
चलो उस रिक्त स्थानो में
आप की पूर्ति कर दें
इस को आपकी
स्फूर्ति दे दें
छूट ते सांसों को
चलो जिंदगी दे दें
तुम कहो तो
आप के लिए हम समाचार बन जायें

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी
March 29 at 1:17am ·

पहाड़ भी अब फिर बुलायें

लो फिर चलने लगी हैं हवायें
पहाड़ भी अब फिर बुलायें
मुसफ़िर चल अपने घर को
अपने घर में ही अब चैन आये
लो फिर चलने लगी हैं हवायें ..........

तुझे छोड़ ने के वक्त ,मुझे ऐसा लगा
जैसे कोई दीवाने का हो ,सब लूट गया
कैसी ये मज़बूरी दे दी उसने इतनी दुरी
एक जान को उसने क्यों जुदा कर दिया

पल पल वो याद आये
हर पल अब वो ही पुकारे ये ....
लो फिर चलने लगी हैं हवायें
पहाड़ भी अब फिर बुलायें

सुनहरी याद सा वो मेरे दिल मे बसा
दूर हूँ उससे मै पर ना हूँ मै जुदा
मै एक बहती नदी वो समंदर मेरा
तुझ से जुदा होकर भी कैसे हूँ मै जुदा

संग संग वो साथ आये
हर पल अहसास जगाये ये
लो फिर चलने लगी हैं हवायें
पहाड़ भी अब फिर बुलायें

एक उत्तराखंडी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा उत्तराखंड दिखाऊंगा

मैं अपने पहड़ों पे गीत लिखता जाऊंगा
इन नजारों में तो पल पल मरता जाऊंगा
रात भर जाग कर उस गीत को सजाऊंगा
मेर इस बने गीत को मेरा पहाड़ा गायेगा

सुबह होते ही उस गीत को मै गाऊंगा
बहती नदिया धार संग में तो बहता चला जाऊंगा
कभी आरु तो कभी सेब डाली में लह लहाऊंगा
कभी नारंगी खटी मीठी मीठास में घुलता जाऊंगा

सड़क के मोड़ संग में तो मोड़ता जाऊंगा
मेरी देवभूमि को मै अब अपनो को दिखाऊंगा
बद्री-केदार के चरणो में मै अब झुक जाऊंगा
सभी देबी-देब्तों के मंदिर में घंडियाल बजाऊंगा

डंडा कंठो के इन उजाड़ों में मै अब पाया जाऊंगा
काफल किन्गोड़ा हिसलों दाणी से में ललचाऊंगा
अपने खेत खलिहान में अब अन्न बन जाऊंगा
हरे भरे जंगलों हिलांस घुघूती बन उड़ा जाऊंगा

ढोल दामो गढ़वाली गीतों में मै झूम जाऊंगा
कौथिक तुझे घुमाने तिमल सैण ले जाऊंगा
माँ भगवती बालकुंवारी के तुझे मै दर्शन करूंगा
इसी बहने तुझे पिंगली झलेबी बाल मिठाई खिलाऊंगा

आ चल तुझे मेरे गाँव गांवालों से मिलाऊंगा
बड़े बुजर्गों का असीस पा कर मै तर जाऊंगा
बांदों में बांद नखर्याली बांद से तुझे मिलाऊंगा
चल इस गर्मी में तुझे मै मेरा उत्तराखंड दिखाऊंगा

एक उत्तराखंडी

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ये मेरु बेटा .......

वो....देख मेरा कुडू कूड़ा नि व्है जाई
रुमकु पौड़ी सुरुक झट झौल ना पौड़ी जाई
पितृ बस्यों इष्टों का ठौर ना टूटी जाई
मेरु पहाड़ मेरु रै तू बिराणो ना व्है जाई

वो..... जैल समै वैल कमै
गंगा की बोगती न्यार ने मिथे सुनै
बोगी जख जख जोगी आंयां वख वख
तपोवन की ई भूमि व्हैगे हरै भरै

वो....... सोची ले समझी ले
पह्ड़ा जनी अपरा खुठा जमीं ले
छे ताकत तैम ले इच्छा शक्ति तू मैमा
ईं देवभूमि थे अपरी कर्मभूमि बनै

वो......सब हर्चण पैलू सब खर्चण से पैलू
ज्योतिं जिंदगी का बाटों भटकन से पैलू
अपरा मन दगडी तू कुछ देर त बचै
क्या बोल्ळी तेर जिकोड़ी तू सब थे सुनै

एक उत्तराखंडी

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday at 12:29am ·

श्री परशार गौड़ सर जी ने एक गीत का मुखडे गीत बनाने का प्रयास है

छुँयालूं न दुन्या मा

छुँयालूं न दुन्या मा
मैं बदनाम कयाली...2.
वींकी तस्वीर अब
मैंन सिराणा धैर्याली... ....2।

कख लगाण छविं वींकी
कै बाटा धार मिळ छोड्याळी
सिराणा धरि तस्वीर दगडी
वींकी मिन सारि बात बोल्याली
छुँयालूं न दुन्या मा
मैं बदनाम कयाली...2.

माया कु रंग मिल
विं दगडी अंफि रंग्याली
अपरी कुटमदरी सुप्निया
मेर सौजन्डया मिल देख्याली
छुँयालूं न दुन्या मा
मैं बदनाम कयाली...2.

यकुली देख देखिकी तेथे
मिल यूँ आंख्युं थे सेख्याली
ये मेर बुरंसा की डाली
झट बण जा तू अब मेर ब्योलि
छुँयालूं न दुन्या मा
मैं बदनाम कयाली...2.

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक शहर था पल में टूट गया

एक शहर था पल में टूट गया
कुछ हिस्सा उसका पीछे छूट गया

श्रण में ये दुनिया बदल गयी
हिचकोले ली और वो कुछ बोल गयी

अब तक मेरे साथ था पास था वो
अब उसका सांसों से नाता रूठ गया

खंडहर खंडहर बना पल में जीवन है
काठ का बना था वो भी ढह गया

रुदान ही रुदान छाया अब सर्वत्र है
आँखों ने आँसूं से फिर नाता जोड़ दिया

खोया क्या और क्या पाया मैंने
इस अहम में सारा जीवन झोंक दिया

एक शहर था पल में टूट गया
कुछ हिस्सा उसका पीछे छूट गया

बालकृष्ण डी ध्यानी
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