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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानीOctober 3छ्लावा

कब तक चलेगा
कब तक..........छलेगा
मन तन को
तन मन को बाँवरे

छलेगा ऐ उजाला दूर तक
अंधेरे साजिश करेंगे
खोजेगा मन फिर भी
तन तुझको ढुंड़ा करेगा
कब तक चलेगा
कब तक..........छलेगा
मन तन को
तन मन को बाँवरे

एक दीपक तो जलाओ
उजाले अँधेरे को करीब लाओ
मुझे मेरी परछाई से मिलाओ
क्या निकलेगा कोई रास्ता
कब तक चलेगा
कब तक..........छलेगा
मन तन को
तन मन को बाँवरे

निष्ठुर है बड़ा
तुझको रास नहीं आयेगा
चालाकी से दूर कंही चला जायेगा
पलक झपक ओझल हो जायेगा
कब तक चलेगा
कब तक..........छलेगा
मन तन को
तन मन को बाँवरे

उम्र भर जुदाई दे जायेगा
मुखौटा ओढ़ रह जायेगा
छ्लावा छल जायेगा
हाथ तेरे कुछ ना आयेगा
कब तक चलेगा
कब तक..........छलेगा
मन तन को
तन मन को बाँवरे
 
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Ved Dhyani and 48 others. Photo: छ्लावा कब तक चलेगा कब तक..........छलेगा मन तन को तन मन को बाँवरे छलेगा ऐ उजाला दूर तक अंधेरे साजिश करेंगे खोजेगा मन फिर भी तन तुझको ढुंड़ा करेगा कब तक चलेगा कब तक..........छलेगा मन तन को तन मन को बाँवरे एक दीपक तो जलाओ उजाले अँधेरे को करीब लाओ मुझे मेरी परछाई से मिलाओ क्या निकलेगा कोई रास्ता कब तक चलेगा कब तक..........छलेगा मन तन को तन मन को बाँवरे निष्ठुर है बड़ा तुझको रास नहीं आयेगा चालाकी से दूर कंही चला जायेगा पलक झपक ओझल हो जायेगा कब तक चलेगा कब तक..........छलेगा मन तन को तन मन को बाँवरे उम्र भर जुदाई दे जायेगा मुखौटा ओढ़ रह जायेगा छ्लावा छल जायेगा हाथ तेरे कुछ ना आयेगा कब तक चलेगा कब तक..........छलेगा मन तन को तन मन को बाँवरे एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी11 hours agoआशिक मै भी

कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है 
जाना होता है कंही और कंही चला जाता हों
ऐसा भी क्या? कभी तुम्हरे साथ होता है
जैसा वो अब मेरे साथ होता है   
कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है ......

सपने तो उसके दिन रात आते है 
अकेले मै चुपके उससे बात करता हूँ 
एक बार नहीं हजार बार प्यार का इजहार करता हूँ 
सामने आते ही गुमसुम क्यों हो जाता हूँ
कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है ......

दिल की धड़कन की रफ़्तार होती है 
सांसों की सांसों के साथ मुलकात होती है 
बस आँखों ही आँखों मै क्यों बात होती है 
होंट सिले के सिले रह जाते हैं जब  वो पास होते हैं 
कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है ......

गली मै उसके अब दिन रात गुजरते हैं 
हल्की सी एक झलक पाने दिल बेकरार रहता है 
कैसी कशिश है उसमे  खुदा जाने मेरे
खुदा से भी अब मुझे वो प्यारा लगता है 
कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है ......

कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है 
जाना होता है कंही और कंही चला जाता हों
ऐसा भी क्या ? कभी तुम्हरे साथ होता है
जैसा वो अब मेरे साथ होता है   
कभी कभी मेरे साथ ऐसा होता है ......

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
Wednesday
बाबाजी मेरा क्ख्क छे

दादा दादी यख छन मेरा
मंजी मेरी यकुली किले
पुंछुणु छा ये सवाल मैसे ही मी
किंवी देल मी थैई जवाब कोई
दादा दादी यख छन मेरा
मंजी मेरी यकुली किले .............

पढाई लिखैई स्कूला जाणु मेरु
हेरदी रै बाबा तै थै पराणु मेरु
देखा बाबा बोई दगडी मी ओरों का पास
किले मेरा बाबाजी ना मेरा साथ
दादा दादी यख छन मेरा
मंजी मेरी यकुली किले .............

बार -तियोहरा मा मी बाबाजी खोजा
बाबाजी बचे मैसै चिठ्ठी ,मोबाईल भेष मा
कण करम करा व्होला पीछाण जन्म मील
ये जन्मा मीलणु मीथै वोंका फल
दादा दादी यख छन मेरा
मंजी मेरी यकुली किले .............

खोजी खोजी मी अब थगगयुं
बाबाजी गैन कै घार कै संसार
माया माया क्या छा ऐ माया
आपरा बाल बच्चों से क्या बड़ी ऐ माया
दादा दादी यख छन मेरा
मंजी मेरी यकुली किले .............

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
October 9
छुटूयाँ वो धागा

देखा कंन छुटूयाँ वो धागा
कंन तोडीकी वो भागा

वा वो उकाली का बाटा
अपरा गों-गोल्युं थै तू लाटा

बालपन वो लाटूपंन
गोरंदों चराणी वा बंसरी की धुन

रुक ना पै बाबा बोई रुण
आँखी रुण दी रै बस रुणझुण रुणझुण

क्या मिलै तैथै रै हमरु गुण
अपरी ही माटू से किलैगै छोरा फूंड़

बिता दीण बुलांदा रैदा हम थै बेटा
वो खुद का धागों हमूण ऊंण बुन

देखा कंन छुटूयाँ वो धागा
कंन तोडीकी वो भागा

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
October 8
दोष कैकु

मेर मन मा
नी माणी मेरा मन ना मान
दोष कैकु च तू जानी
मेर मन तू जाण

ऐ लुटी वो लुटी
नेतओं ना अपुरी खोचुली भोरी
दोष कैका मुंडा धोरी
दारू का बोतल पी तू थोड़ी

मेर मन मा
नी माणी मेरा मन ना मान
दोष कैकु च तू जानी
मेर मन तू जाण

डैम का डैम बणा
सुरंगों ने गढ़ खोदयां
वनसंम्पदा जली वा भी लुटी
तेरा एक वोट पर

मेर मन मा
नी माणी मेरा मन ना मान
दोष कैकु च तू जानी
मेर मन तू जाण

तिल जरा सोची
विचार कैर अब तू थोड़ी
मुर्गी टंगड़ी बकरों की रान मा
कर्तव्य भी अपरा भूली

मेर मन मा
नी माणी मेरा मन ना मान
दोष कैकु च तू जानी
मेर मन तू जाण


एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
October 5
कर विचार

इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू
आपरा थै भूली
भैर क्ख्क रैयाँदु
इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू

फिरदी रैंद रै
जुनी सी चखुली
बाण ऐ बन मा
ऐ जंद देर सवेर
अंशुं भी ऐ मन मा
इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू

उकाली कु उकाला
नी केंटेंदू नी भुल्दु रै
उंधारु कु उधारु
चढ़दी जंद नी चुकेदू रै
इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू

अपरा थै रूले की
यकुली यकला छुडैकी
माया आला भी जाली
जो माया छुडैकी गै
कब कंण परती आली
इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू

इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू
आपरा थै भूली
भैर क्ख्क रैयाँदु
इन नी मिलदु
सुख नी सुखदु
दुःख नी सरदू

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ11 hours agoशीत ऐग्या 

ठंडी ठंडी ब्यार बहणी या 
ससरसा की मी ......खुद ऐणी या 

देख हिमाला सफ़ेद कम्बलू उड़णु या 
शीत ऋतू गढ़ देश मा आणु या 

गाल लाल जनी सेब होंयां या 
ऊँठ अखरोठा की दाणी जनी छिलयां या 

कोयेडी पहड़ों मा रुमक ग्याई या 
डाली बोटी पर अब मोल्यार छायी या

काम को स्वामी भैर परदेश ग्याँ या 
घार आण छिन यानि ब्याल ऊँका रैबार आयी या   

धीर ना मेरी जिकोडी अब धरैणी या
घुघूती ठंडी बथों क्या कहणी या 

दिन चली जाला कणी भी रात णी सरेनी या 
भोलहा मी फजल तड़ कैकी    ससरसा जाणु या   

ठंडी ठंडी ब्यार बहणी या 
ससरसा की मी ......खुद ऐणी या 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मैया घर  आयी 

आयी  है  मईया  मेरे  घर 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
मेरी मैया कै लिये सजा सुंदर भवन 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

भक्तों लगाओ तुम अपना तन मन 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
जगाओ खुद को जगराते के लिये 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

शक्ती दाती दुःख  हरती माता 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
सबकी अलग ख्याती ,फल दाती माता 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

भर देगी खाली भंडरा तू लगा भंडरा 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
तज लेगी तेरे जीवन सारे कष्ट तू उठा जर कष्ट 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

नौ भक्ती रूप मे समाई मेरी माता 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
लाल चुनर उडकर आयी मेरी माता 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

आरती प्रसाद के सजे देखो थाल
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
अखंड दिये की लो जलाओ दिन रात 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

मईया का जयकार लगाओ मेरे साथ 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
ढोलक ओर मंजीरों मारो अब थाप 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर   

भक्तों टूट जाये ना ऐ लय
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
मईया रखैगी सबका ख्याल 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
जोश मे उमडों भक्तों आज 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

जीवन भर का मैया जी  का साथ 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
मैया जी आना अगले बरस भी मेरे घर 
नौ दिनों नौ रातों  के  लिये 
आयी है मईया मेरे घर 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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पछण नी ऐंद

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

कदगा फरक ऐगै तैमा
सिपडी नकुडी तेरी अब सोना नथुली नकुडी मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

मट मैली थगुली झगुली तेरी
तुतली वा बोलण तेरो , बिंदी लिपस्टीक पावडर मा सजैणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

सर दौड़ी की जाणु तेरु
बालपन मा माया लगाणु तेरु अब मैसै क्या शरमाणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

तेर हसणु सुवा दिल लुची जांदी सुवा
मै खिची लै जांदी सुवा तै थै ही मेर ब्योली बाणा सुवा अबत हां कैदै सुवा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

एक उत्तराखंडी

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शनिवार दिनाक १३ /१० //१२ सवेरे ९ :३७ समय

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पछण नी ऐंद

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

कदगा फरक ऐगै तैमा
सिपडी नकुडी तेरी अब सोना नथुली नकुडी मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

मट मैली थगुली झगुली तेरी
तुतली वा बोलण तेरो , बिंदी लिपस्टीक पावडर मा सजैणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

सर दौड़ी की जाणु तेरु
बालपन मा माया लगाणु तेरु अब मैसै क्या शरमाणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

तेर हसणु सुवा दिल लुची जांदी सुवा
मै खिची लै जांदी सुवा तै थै ही मेर ब्योली बाणा सुवा अबत हां कैदै सुवा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

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