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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
Sunday
कब तू बोलेली

आज बोली बोलो मी
ब्याल बोली बोलो मी
जीकोडी की गेड़ खोलो मी

मन की दिशा मन की दशा
मन मा ही दैड़ गयाई
उकेरी उकेरी की अंशुं ढोल दयाई
आज बोली बोलो मी
ब्याल बोली बोलो मी
जीकोडी की गेड़ खोलो मी

बाटा बस हेरदी रहई
आकाश थै बस टाकती रहई
जिन्दगी की ईनी बेल गयाई
आज बोली बोलो मी
ब्याल बोली बोलो मी
जीकोडी की गेड़ खोलो मी


क्दगा ब्याल क्दगा आज गयाई
गिचुडी तू सिली राई
जिकोडी कैमा ,क्ख्क बोलो मी
आज बोली बोलो मी
ब्याल बोली बोलो मी
जीकोडी की गेड़ खोलो मी

शनिवार दिनांक १३ /१० /१२ सवेरे ८ :३७ समय

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी10 hours agoमाँ मेरी

मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है
वो मेरे लिये ही अब भी वो सोचती है
अकेले मे बैठ वो चुपके चुपके
वो अब भी मेरे लिये रोती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है ..............

जना की जग जोगी वाला फेरा
एक एक कर सबको यंहा से है जाना
माँ की ममता को तू क्या जाने
उसके कलेजे मे अब भी तेरे नाम की आवाज आती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है ..............

माना पुरुष प्रधान समाज देश है मेरा
पर उसके कई हाथ ही ये घोसला सजती है
भूखा हूँ मै अपने चोंच से दाना चुगाती है
माँ मेरे लिये अब भी भूखा रहती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है ..............

परेशानी ना हो मुझको फूलों की रहा सजती है
बिछे पड़े पथ के काँटों को अपने कदमो आड़ में छुपती है
कितना भी बड़ा आदमी मै हो जाओं माँ
शीश अपना मै उसके चरणों के नीचे ही पाओं मै
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है ..............

माँ मेरी आज तेरी याद बहुत आती है

मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है
वो मेरे लिये ही अब भी वो सोचती है
अकेले मे बैठ वो चुपके चुपके
वो अब भी मेरे लिये रोती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है ..............

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी

जाल मैंने ही बुना

  रिश्तों के जाल में मै जकड़ता चला गया
  एक जुडा मुझ से ओर एक बिछोड़ता गया
  एक पल खुशी दूजे पल दुःख आता गया
  खुला आसमान काले बादलों से घिरता गया

  पैदा होआ तीन सालों तक उछान्द था मै
  अपनी ही दुनिया मै बहुत ही मस्त था मै
  सब कुछा घिरा घिरा था मुझसे तब हरबार
  एक आवाज पर मेरी सब था सब स्वीकार

  उछान्दता फुरसे कन्हा पर उड़ वो गयी
  बस्ता किताबो ओर कलम का मेल हुआ
  बंधिशों का मेरे साथ शुरू अब वो खेल हुआ
  अब चार दिवारी में बचपन मेरा कैद हुआ

  बचपन छोटा जवानी की सुनहरी भोर हुयी
  सुख प्रेम स्वपनों की तन मन की ओर हुयी
  कंही से हाथ थमा मेरा किसी ने कंही ओर
  भविष्य की रहा पर फिर मोड़ जोर शोर

  बंधता गया मै रस्सी से इस तरह अपने आप
  अपना बचपना ढूंडाता हूँ अपने बच्चो के साथ
  होगा भी वही जो हुआ था मेरे साथ कल
  खुद ही काटूंगा उनकी उड़न परवाज आज

  बुढ़ापा घिरा एक नया रिश्ता फिर जुडा गया
  बचपन मेरा फिर आंखों से मेरे वो गिरा गया
  दूर अर्थी पर सजा बसा था मेरा संसार आज
  शमशान जलती रही वो बना लाश मै आज

  रिश्तों के जाल में मै जकड़ता चला गया
  एक जुडा मुझ से ओर एक बिछोड़ता गया
  एक पल खुशी दूजे पल दुःख आता गया
  खुला आसमान काले बादलों से घिरता गया

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  बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी o
बदलती रही

पल पल बदलती दुनिया की
तस्वीर बनाता हूँ किस्सा सुनता हूँ
पल पल बदलती दुनिया की .......

एक रिश्ता यंहा बस झूठा है
दूजे पल मे ही वो बिछड जाता है
पल पल बदलती दुनिया की .......

एक रहा है सीधी साधी
अनजाने मोड़ पर वो क्यों ? मोड़ती जाती है
पल पल बदलती दुनिया की .......

तक़दीर और तस्वीर टकराती है
दिल का दर्पण बस चूर चूर होता है
पल पल बदलती दुनिया की .......

एक आवाज अकेले मे वो लगती रही
वो बस भीड़ -भाड मे भी अकेले चलती रही
पल पल बदलती दुनिया की .......

जलता ही रहा है जीवन हरबार यंहा
आखीर मे खाक होने वो क्यों डरता है
पल पल बदलती दुनिया की .......

अशकों से ही विदाई होनी थी
आते हुये भी रोना है जाते वक़्त भी रोलाना है
पल पल बदलती दुनिया की .......

पल पल बदलती दुनिया की
तस्वीर बनाता हूँ किस्सा सुनता हूँ
पल पल बदलती दुनिया की .......

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
Wednesday
बाकी सब ठीख छन

तन मन वो छुटा रत्न
बरसी पैली दी तुमण
अग्नी के समंण स्वामी
सात फेरों को बचन
टूटयां टूटयां यख बिखरयां छन
उकेरणु मी यकुली बस
बाकी सब ठीख छन

राजी रयां जुगराज रयां
स्वामी मेरा तुम जख भी रयां
आस च ये ईन दिन रात लगण
बणकी ब्योली जिकोडील सजण
आँखों की छुंयी स्वामी
गोल माथा की बिंदील बोलण
कंचा की चुडी खनकील टूटण कु बस
बाकी सब ठीख छन

हंसुली मेरी घास काटेंण
दतुली मेर पीड़ा थै छुपण
नथुली मेर बस यख सीसकण
हाथा का रेखा मा स्वामी थै खोजण
माथा का रेखा अब क्या लग्युं सोचण
मांगा टिका बिकी ग्याई स्वामी
सिंधुर की लकीर फिर भी दिखाण बस
बाकी सब ठीख छन

पैजणी उधेड़ गीत गाणी
निकली की मील लकडा कु कापटा लुका दयाई
गुलोबंद मी मा हैंस दयाई
विपदा ऐ मिल वो बेच दयाई
चांदी कु कमर पटा स्वामी मेरा
घरु व्हें ग्या ज्याद इत्गा
तुम्हरी जी थै णी समेलणु अब बस
बाकी सब ठीख छन

तन मन वो छुटा रत्न
बरसी पैली दी तुमण
अग्नी के समंण स्वामी
सात फेरों को बचन
टूटयां टूटयां यख बिखरयां छन
उकेरणु मी यकुली बस
बाकी सब ठीख छन

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बालकृष्ण डी ध्यानी
October 16
शीत ऐग्या

ठंडी ठंडी ब्यार बहणी या
ससरसा की मी ......खुद ऐणी या

देख हिमाला सफ़ेद कम्बलू उड़णु या
शीत ऋतू गढ़ देश मा आणु या

गाल लाल जनी सेब होंयां या
ऊँठ अखरोठा की दाणी जनी छिलयां या

कोयेडी पहड़ों मा रुमक ग्याई या
डाली बोटी पर अब मोल्यार छायी या

काम को स्वामी भैर परदेश ग्याँ या
घार आण छिन यानि ब्याल ऊँका रैबार आयी या

धीर ना मेरी जिकोडी अब धरैणी या
घुघूती ठंडी बथों क्या कहणी या

दिन चली जाला कणी भी रात णी सरेनी या
भोलहा मी फजल तड़ कैकी ससरसा जाणु या

ठंडी ठंडी ब्यार बहणी या
ससरसा की मी ......खुद ऐणी या

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बालकृष्ण डी ध्यानी

पछण नी ऐंद

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

कदगा फरक ऐगै तैमा
सिपडी नकुडी तेरी अब सोना नथुली नकुडी मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

मट मैली थगुली झगुली तेरी
तुतली वा बोलण तेरो , बिंदी लिपस्टीक पावडर मा सजैणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

सर दौड़ी की जाणु तेरु
बालपन मा माया लगाणु तेरु अब मैसै क्या शरमाणु तेरु
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

तेर हसणु सुवा दिल लुची जांदी सुवा
मै खिची लै जांदी सुवा तै थै ही मेर ब्योली बाणा सुवा अबत हां कैदै सुवा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

आज ओर ब्याल मा
बुरंस डाली सी फुल्यारा मा
पछण नी ऐंद सुवा अब तू जवानी की उल्लयार मा

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शनिवार दिनाक १३ /१० //१२ सवेरे ९ :३७ समय

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
क्ख्क छे अब

भोल्हम बिकी
म्यारा मुल्की तू कैकी

घाम सैलण लगे
बगत गै अकल ऐण लगे

जिकड़ी झुरण किले
लट पट किले कैण लगे

छुंई पडी वहली यख
कै बाता मा बोती वहली वख

कालू दाड सी ग्याई
झालू फिर परती की आई

बालू क्या बोलण
अब सब ईणी हरचण

जग्वाल लगा रैबार पठा
अब कैल भी णी बचण

सब बिकी यख
माटू मोल क्ख्क छे अब

सब लुटी तब
क्या व्हालो अब

भोल्हम बिकी
म्यारा मुल्की तू कैकी

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ तेरी 

तेरी आंख से निकले आंसूं 
एक एक वो मोती होंगे 
ऐ ही तेरी रहा के आगे चलकर   
मलाल पथ के ज्योती होंगे 

दिल से निकली है दुवा तेरे लिये
सरहदों की दीवारों को तोड़ते हुये
जल्द ही तू ठीख हो जाये तू 
ऐ खुदा से ये ही है दुवा
तेरी आंख से निकले आंसूं 
एक एक वो मोती होंगे........

नारी के रथ की सारथी बनना
अभी तुझे बहुत ओर भी बहुत  कुछ है सहना
तप के ही कुंदन सोना हो जायेगा 
हिना को पीसकर ही हाथों पर रचा जायेगा
तेरी आंख से निकले आंसूं 
एक एक वो मोती होंगे........

साथ तेरे है अब सारा जन्हा
मोमबती की लो पर हर दिल की दुवा
वो गोली तेरे पर चली ...वो है डरा रहा 
निडर होकर पथ पर पग अपना आगे बड़ा
तेरी आंख से निकले आंसूं 
एक एक वो मोती होंगे........

तेरी आंख से निकले आंसूं 
एक एक वो मोती होंगे 
ऐ ही तेरी रहा के आगे चलकर   
मलाल पथ के ज्योती होंगे 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ

माँ मेरी

मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है
वो मेरे लिये ही अब भी वो सोचती है
अकेले मे बैठ वो चुपके चुपके
वो अब भी मेरे लिये रोती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है ..............

जना की जग जोगी वाला फेरा
एक एक कर सबको यंहा से है जाना
माँ की ममता को तू क्या जाने
उसके कलेजे मे अब भी तेरे नाम की आवाज आती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है ..............

माना पुरुष प्रधान समाज देश है मेरा
पर उसके कई हाथ ही ये घोसला सजती है
भूखा हूँ मै अपने चोंच से दाना चुगाती है
माँ मेरे लिये अब भी भूखा रहती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है ..............

परेशानी ना हो मुझको फूलों की रहा सजती है
बिछे पड़े पथ के काँटों को अपने कदमो आड़ में छुपती है
कितना भी बड़ा आदमी मै हो जाओं माँ
शीश अपना मै उसके चरणों के नीचे ही पाओं मै
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है ..............

माँ मेरी आज तेरी याद बहुत आती है

मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगती है
वो मेरे लिये ही अब भी वो सोचती है
अकेले मे बैठ वो चुपके चुपके
वो अब भी मेरे लिये रोती है
मेरी माँ अब भी मेरे लिये आंखे भीगोती है ..............

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