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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक एक रात्री को मेरी नींद टूटी और लिखने बैठा गया क्या हूँ मै

क्या हूँ मै

लगे हैं सब के सब खोने में
पाने को कौन खडा है आज यंहा
सिमटने में लगे है सब के सब यंहा
हाथ फिर भी सबके खाली यंहा
ना समझ तू ना मै भी समझ अब तक
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

जन्मा था जब सब खुश थै मै बस रोया
क्या उस वक्ता पता था मुझे मै कंहा आया
खोया बस तब से उस पल को उस कल से
जुदा जुदा होती रही हर सांस इस जां से
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

समीप समीप चला जा रहा हूँ मै कंही
मै समझ रहा हूँ क़ी मै पा रहा हूँ यंही
जो कुछ है यंही का यंही रहा जायेगा
क्या मेरे क्या तेरे साथ यंहा से जायेगा
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

जाती धर्म तू यंहा आके बस अब पायेगा
दो शब्द नाम तेरा उसमे ही तो रहा जायेगा
लड़ाकर जीवन भर जीवन से क्या पायेगा
आखिर में खुद से पूछना क्या हूँ मै
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथWednesdayमी और तुम

यखी छों
मी यखी छों
भुल्हों यखी छों
मील यखी रैण
ऐ छोडीकी
यूँ मुख मोड़ीकी
क्ख्का जैण
मील क्ख्क जैण
यखी छों
मी यखी छों
भुल्हों यखी छों
मील यखी रैण

माया यख
एक माया वख
एक दगडी दगडी
एक वख वा....वो दूर कोस
कै कुण दूँ ...मी यख दोष
बस रेगै रोष
सुधी गै मेरु जोश
यखी छों
मी यखी छों
भुल्हों यखी छों
मील यखी रैण

माटो मेरु
यख ही मिल जैण
बन बनी का फुल खिलण
फिर भी मील
यखी व्खी देखी जैण
रुला ढोंगा
फिर भी त यख
कैल चूलेण जब मील जैण
मील कखक णी जैण
यखी छों
मी यखी छों
भुल्हों यखी छों
मील यखी रैण
   

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ मै मै रहूँ तुम तुम ही रहना

गजल मेरी
एक वादा कर लो
तुम तुम ही रहना मै मै रहूंगा
चाहे भरे मै आह सनम
तुम उफ़ तक नही करना ........

हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२
रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है
मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना
अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

रोते को हसना मुश्किल बहुत ही है...२
हँसते होये को रोलना भी आसान कँहा
गर हो सके तो करना इतना करम
इन आंसूं को ना यूँ फिजूल में बहना
अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

दीखता ही नहीं हूँ इस दिल में अब...२
इस तरह मै बसा गया उस कल में अब
जब कभी बिता पल याद आ भी जाये
तब चुप ही रहना मुस्कुरा ना देना तुम
अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२
रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है
मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना
अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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मै मै रहूँ तुम तुम ही रहना गजल मेरी एक वादा कर लो तुम तुम ही रहना मै मै रहूंगा चाहे भरे मै आह सनम तुम उफ़ तक नही करना ........ हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२ रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना रोते को हसना मुश्किल बहुत ही है...२ हँसते होये को रोलना भी आसान कँहा गर हो सके तो करना इतना करम इन आंसूं को ना यूँ फिजूल में बहना अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना दीखता ही नहीं हूँ इस दिल में अब...२ इस तरह मै बसा गया उस कल में अब जब कभी बिता पल याद आ भी जाये तब चुप ही रहना मुस्कुरा ना देना तुम अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२ रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिल घर है ...

दिल घर  है
सपनो का सभी अपनों का
बीते पलों का
दिल घर  है

आ जाओ कोई भी
रह जाओ तुम यंह पर
ना टैक्स ना कोई भाड़ा
दिल घर  है

हंसी ही मिलेगी
दुःख मिठास घुलेगी
कडवाहट भूलेगी
दिल घर  है

रह लो जब तक रहना
अपना जब तक कहना
उसमे स्थिरता देखेगी
दिल घर  है

प्राण पखेरू जब उड़ जायेंगे
तब याद उस दिल को आयेंगे
कभी रहा था डेरा वो 
दिल घर  है

छलके नीर तेरा
याद एकांत आ जाउंगा
उस पल मुस्कुराऊंगा
दिल घर  है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


       
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ11 minutes agoमै मै रहूँ तुम तुम ही रहना

    गजल मेरी
    एक वादा कर लो
    तुम तुम ही रहना मै मै रहूंगा
    चाहे भरे मै आह सनम
    तुम उफ़ तक नही करना ........

    हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२
    रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है
    मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना
    अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

    रोते को हसना मुश्किल बहुत ही है...२
    हँसते होये को रोलना भी आसान कँहा
    गर हो सके तो करना इतना करम
    इन आंसूं को ना यूँ फिजूल में बहना
    अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

    दीखता ही नहीं हूँ इस दिल में अब...२
    इस तरह मै बसा गया उस कल में अब
    जब कभी बिता पल याद आ भी जाये
    तब चुप ही रहना मुस्कुरा ना देना तुम
    अपने आप से ही तुम मुझे गुम नही करना

    हँसने से बड़ा यंहा दर्द कोई नहीं है ...२
    रोने से बड़ा मर्ज यंहा अब कोई नहीं है
    मै हूँ इस तरंह ही कुछ और ना समझना
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  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ3 hours agoसंध्या का वंदन
    दिल की उड़ान
    ना बंधा था ना वो बांध गया
    चार अक्षरों मे वो सिमट गया
    आनंद जरुर आयेगा
    क्योंकी ऐ सीड़ी है भावों की
    चलो खेले
    अर्ज है की .............. 

    भावो
    ...Like ·  · Share
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ5 hours agoबस पाना वही है जंहा मेरे हरी है ....
    **********************************************
    ये भी गया वो भी गया जाना था वो चला गया
    सोच क्या पाया क्या खोया बस खोया ध्यानी 
    **********************************************
    बोल मन बस हरी हरी
    कटे तन पीड़ा मिले उस जंहा की सीमा जंहा मेरे हरी
    बोल मन बस हरी हरी

    शुभ संध्या उत्तराखंड

    आपका ध्यानी1Like ·  · Share

            
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    • Anand Gaira nice dhayni jee5 hours ago · Like
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  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ14 hours agoआस्था तेरी झूठी
    *****************************************************
    मन में धर्म रखा तन चोला केसरी रंग चड़ा अब ध्यानी
    चित्र धर्म नही दर्शता है दिन की आंखो में नजर आता है
    *******************************************************
    आपका ध्यानीLike ·  · Share

            
    • 15 people like this.
    • Sunita Chamoli NICE12 hours ago · Like
    • Write a comment...
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ14 hours agoहर्षिता: क्षणिका
    ..............................................
    देख कोई अब देखता नही ध्यानी
    या मै बिना देख ही अब चलता हूँ 
    .......................................................Like ·  · Share

            
    • 13 people like this.
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  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ14 hours agoदोस्तों वाहा वाह ........
    अर्ज है की
    ******************************************
    गर फुल ना दे सको तो मुझे काँटें दे देना
    इसी तरहं दोस्त जाते जाते कोई तेरी निशानी दे देना
    रखेंगे उसे इस दिल से लगा के ता उम्र
    हंसी नहीं दे सकोगी तो वो तेरे आंसूं दे देना
    ********************************************
    आपका ध्यानीLike ·  · Share
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ15 hours agoदिल घर है ...

    दिल घर  है
    सपनो का सभी अपनों का
    बीते पलों का
    दिल घर  है

    आ जाओ कोई भी
    रह जाओ तुम यंह पर
    ना टैक्स ना कोई भाड़ा
    दिल घर  है

    हंसी ही मिलेगी
    दुःख मिठास घुलेगी
    कडवाहट भूलेगी
    दिल घर  है

    रह लो जब तक रहना
    अपना जब तक कहना
    उसमे स्थिरता देखेगी
    दिल घर  है

    प्राण पखेरू जब उड़ जायेंगे
    तब याद उस दिल को आयेंगे
    कभी रहा था डेरा वो 
    दिल घर  है

    छलके नीर तेरा
    याद एकांत आ जाउंगा
    उस पल मुस्कुराऊंगा
    दिल घर  है

    एक उत्तराखंडी

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    • Rawat Anoop Atisunder dhyani ji...
      Dil to ghar hai apno ka, sahi kaha aapne...
      Jai badri kedar12 hours ago · Like
    • Laxmi Prasad Chamoli ahti sundar dev bumi ji9 hours ago · Like
    • Amit Singh Jadaun nice8 hours ago · Like
    • Uttara Bahuguna Shubh sandhya bhula ji. Sach kaha aapne asli ghar to dil hi hota hai. Pardesh me rhkar bhi jisme  door baithe apne sab rhate hain.3 hours ago · Like
    • Write a comment...
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ16 hours agoशुभ सबैर का वंदन प्रणाम

    नाकाम कोशिश दिल लगने की जी .....
     
    हँसा
    दिल आधा
    फिर भी फंसा
    अब गया वो पूरा
    ******************
    जाकर रहा फिर अधूरा
    ...Like ·  · Share
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथ17 hours agoना जै ऐजै

    आन्खंयों मा ऐकी
    सुपीनीया जगै की
    ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी 
    मीथै यकुली छोडीकी...२
    दिया बचनो थै तुडीकी 

    आंसू की धारा
    टिप टिप दा गार
    वोंकी चा दगडी  रे सदनी की
    ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी 
    मीथै यकुली छोडीकी...२
    दिया बचनो थै तुडीकी 

    बुरंसा सा वो हिलंसा
    कै लगो वो मैसे गाला
    घुघूती ना जा बै अब  घुरैकी
    ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी 
    मीथै यकुली छोडीकी...२
    दिया बचनो थै तुडीकी 
       
    ऐजै ऐजै स्वामी
    परती बौडी की
    गढ़देश कू ना जै ईणी छोडीकी
    ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी 
    मीथै यकुली छोडीकी...२
    दिया बचनो थै तुडीकी 

    आन्खंयों मा ऐकी
    सुपीनीया जगै की
    ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी 
    मीथै यकुली छोडीकी...२
    दिया बचनो थै तुडीकी 

    एक उत्तराखंडी

    बालकृष्ण डी ध्यानी
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    मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Hum Uttrakhandi Cha and 48 others. Photo: ना जै ऐजै आन्खंयों मा ऐकी सुपीनीया जगै की ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी मीथै यकुली छोडीकी...२ दिया बचनो थै तुडीकी आंसू की धारा टिप टिप दा गार वोंकी चा दगडी  रे सदनी की ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी मीथै यकुली छोडीकी...२ दिया बचनो थै तुडीकी बुरंसा सा वो हिलंसा कै लगो वो मैसे गाला घुघूती ना जा बै अब  घुरैकी ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी मीथै यकुली छोडीकी...२ दिया बचनो थै तुडीकी ऐजै ऐजै स्वामी परती बौडी की गढ़देश कू ना जै ईणी छोडीकी ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी मीथै यकुली छोडीकी...२ दिया बचनो थै तुडीकी आन्खंयों मा ऐकी सुपीनीया जगै की ना जै ना जै दूर छोडीकी दिया बचनो थै तुडीकी मीथै यकुली छोडीकी...२ दिया बचनो थै तुडीकी एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share
  • देव भूमि बद्री-केदार नाथYesterdayभूल बैठा था मै

    बाहर से सजा ये मेरा आशियाना
    अंदर से बिखर, और क्यों टूट पड़ा
    अहम था जो बाहर अब तक खड़ा
    ना जाने कौन सी वो कथा बुन रहा
    भूल बैठा था मै अपने आप को

    हँसते मुखड़े पे गम का चेहरा लगा हुआ
    खिलती दरकत थी वो अब पेड़ सुख हुआ
    अपने ही जाल मे आज ऐसे जकड़ा हुआ
    अपना ही था अपना ही वो सींचा हुआ
    भूल बैठा था मै अपने आप को

    कभी हरी भरी थी वो टहनीयाँ मेरी
    कभी फुल और फल से मै था लदा हुआ
    इतराता रहता उस झोकें की तरह
    उसी झोकें से मै अब घबराता हुआ
    भूल बैठा था मै अपने आप को

    भूल बैठा था ऐ सब दो पल का है
    आज उस पल को भी अपने हाथ से खोता हुआ
    अब अकेला खड़ा हूँ चारों और उजालों का साया
    अन्धेरा में अंतर आत्म पर कैसा गर्द छाया हुआ
    भूल बैठा था मै अपने आप को

    बाहर से सजा ये मेरा आशियाना
    अंदर से बिखर, और क्यों टूट पड़ा
    अहम था जो बाहर अब तक खड़ा
    ना जाने कौन सी वो कथा बुन रहा
    भूल बैठा था मै अपने आप को

    एक उत्तराखंडी

    बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ14 hours agoसंध्या का वंदन
दिल की उड़ान
ना बंधा था ना वो बांध गया
चार अक्षरों मे वो सिमट गया
आनंद जरुर आयेगा
क्योंकी ऐ सीड़ी है भावों की
चलो खेले
अर्ज है की .............. 

भावो
उमड़े जब
ना देखे बंधन
उड़ना चाहे कौन आंगन
***********************
ना सके कोई बाँध
कल कल तान
गूंजे मन
मुस्कान

आपका ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
दिल घर है ...

दिल घर  है
सपनो का सभी अपनों का
बीते पलों का
दिल घर  है

आ जाओ कोई भी
रह जाओ तुम यंह पर
ना टैक्स ना कोई भाड़ा
दिल घर  है

हंसी ही मिलेगी
दुःख मिठास घुलेगी
कडवाहट भूलेगी
दिल घर  है

रह लो जब तक रहना
अपना जब तक कहना
उसमे स्थिरता देखेगी
दिल घर  है

प्राण पखेरू जब उड़ जायेंगे
तब याद उस दिल को आयेंगे
कभी रहा था डेरा वो 
दिल घर  है

छलके नीर तेरा
याद एकांत आ जाउंगा
उस पल मुस्कुराऊंगा
दिल घर  है

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ भूल बैठा था मै

बाहर से सजा ये मेरा आशियाना
अंदर से बिखर, और क्यों टूट पड़ा
अहम था जो बाहर अब तक खड़ा
ना जाने कौन सी वो कथा बुन रहा
भूल बैठा था मै अपने आप को

हँसते मुखड़े पे गम का चेहरा लगा हुआ
खिलती दरकत थी वो अब पेड़ सुख हुआ
अपने ही जाल मे आज ऐसे जकड़ा हुआ
अपना ही था अपना ही वो सींचा हुआ
भूल बैठा था मै अपने आप को

कभी हरी भरी थी वो टहनीयाँ मेरी
कभी फुल और फल से मै था लदा हुआ
इतराता रहता उस झोकें की तरह
उसी झोकें से मै अब घबराता हुआ
भूल बैठा था मै अपने आप को

भूल बैठा था ऐ सब दो पल का है
आज उस पल को भी अपने हाथ से खोता हुआ
अब अकेला खड़ा हूँ चारों और उजालों का साया
अन्धेरा में अंतर आत्म पर कैसा गर्द छाया हुआ
भूल बैठा था मै अपने आप को

बाहर से सजा ये मेरा आशियाना
अंदर से बिखर, और क्यों टूट पड़ा
अहम था जो बाहर अब तक खड़ा
ना जाने कौन सी वो कथा बुन रहा
भूल बैठा था मै अपने आप को

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बस खोना है यंहा..............

जिसे मिटने का डर होगा
वो ही अपने घर बैठ होगा
सुखी लकड़ी को अब उसे
जलने का क्या भय होगा
गीली लकड़ी को जलने से
पहले थोडा और तपना होगा
जीवन खोना है और थोड़ा खोना है

पथ पथ बड़ा कदम तू चला
एक दिशा है वो निर्धारित
सब कुछ है उसके अधारित
शून्या है आया शून्या है जाना
कर्म का एक बेल लगना है
बांध मुठी आना खुले जाना
जीवन खोना है और थोड़ा खोना है

देखा आगे पथ पर प्रकाशा है
पीछे मत मोड़ा गहरा अंधकार है
गर तू मोड़ा पीछे क्या पायेगा
आगे बड़ा एक नया पल आयेगा
भोर तेरी होगी फिर देर सबैर सही
जब वो दर जायेगा क्या ले जायेगा
जीवन खोना है और थोड़ा खोना है

जलना है तुझे अब जल जायेगा
रखा तेरी देखकर तब तुझे समझ आयेगा
एक झोखा हवा का हों उड़ा जायेगा
उस पल तेरे हाथ कुछ ना आयेगा
तुझे एक मंजिल छोड़ दूजे मंजिल जान होगा
वंहा भी तुझे पाने ज्यादा खोना होगा
जीवन खोना है और थोड़ा खोना है

जिसे मिटने का डर होगा
वो ही अपने घर बैठ होगा
सुखी लकड़ी को अब उसे
जलने का क्या भय होगा
गीली लकड़ी को जलने से
पहले थोडा और तपना होगा
जीवन खोना है और थोड़ा खोना है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक एक रात्री को मेरी नींद टूटी और लिखने बैठा गया क्या हूँ मै

क्या हूँ मै

लगे हैं सब के सब खोने में
पाने को कौन खडा है आज यंहा
सिमटने में लगे है सब के सब यंहा
हाथ फिर भी सबके खाली यंहा
ना समझ तू ना मै भी समझ अब तक
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

जन्मा था जब सब खुश थै मै बस रोया
क्या उस वक्ता पता था मुझे मै कंहा आया
खोया बस तब से उस पल को उस कल से
जुदा जुदा होती रही हर सांस इस जां से
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

समीप समीप चला जा रहा हूँ मै कंही
मै समझ रहा हूँ क़ी मै पा रहा हूँ यंही
जो कुछ है यंही का यंही रहा जायेगा
क्या मेरे क्या तेरे साथ यंहा से जायेगा
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

जाती धर्म तू यंहा आके बस अब पायेगा
दो शब्द नाम तेरा उसमे ही तो रहा जायेगा
लड़ाकर जीवन भर जीवन से क्या पायेगा
आखिर में खुद से पूछना क्या हूँ मै
फिर भी लगा बस तू खोने में
अकेले में किस के लिये रोने में

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Annu Koti and 47 others. Photo: एक एक रात्री को मेरी नींद टूटी और लिखने बैठा गया क्या हूँ मै क्या हूँ मै लगे हैं सब के सब खोने में पाने को कौन खडा है आज यंहा सिमटने में लगे है सब के सब यंहा हाथ फिर भी सबके खाली यंहा ना समझ तू ना मै भी समझ अब तक फिर भी लगा बस तू खोने में अकेले में किस के लिये रोने में जन्मा था जब सब खुश थै मै बस रोया क्या उस वक्ता पता था मुझे मै कंहा आया खोया बस तब से उस पल को उस कल से जुदा जुदा होती रही हर सांस इस जां से फिर भी लगा बस तू खोने में अकेले में किस के लिये रोने में समीप समीप चला जा रहा हूँ मै कंही मै समझ रहा हूँ क़ी मै पा रहा हूँ यंही जो कुछ है यंही का यंही रहा जायेगा क्या मेरे क्या तेरे साथ यंहा से जायेगा फिर भी लगा बस तू खोने में अकेले में किस के लिये रोने में जाती धर्म तू यंहा आके बस अब पायेगा दो शब्द नाम तेरा उसमे ही तो रहा जायेगा लड़ाकर जीवन भर जीवन से क्या पायेगा आखिर में खुद से पूछना क्या हूँ मै फिर भी लगा बस तू खोने में अकेले में किस के लिये रोने में एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share