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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरी दो पंक्तीयाँ श्री अटल जी के लिये जन्म दिन की बहुत बहुत बधाइयां  अटल जीby देव भूमि बद्री-केदार नाथ on Tuesday, December 25, 2012 at 1:02am ·
वो है अटल

अडिग रहा राह बड़ी
ना झुकनेवाला वो ज़िद्दी
कठोर, मज़बूत इरादों पाला
हठीला है वो है अटल

अविचल, अचल, छवी भरा
दृढ़,स्थिर वो मन सरोवर
कवी हिर्दय कमल सुंदर 
समबुद्धि से पग पघारे पथ 
हठीला है वो है अटल

अनिवार्य ही रहा अनंत
ठोस उसका रहा वो पल
कल-कल मुंज मुस्कानधारा
बहती रही वो सतत
हठीला है वो है अटल

अडिग रहा राह बड़ी
ना झुकनेवाला वो ज़िद्दी
कठोर, मज़बूत इरादों पाला
हठीला है वो है अटल


एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत


अटल बिहारी वाजपेयी


जन्म दिन की बहुत बहुत बधाइयां


अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म: २५ दिसंबर, १९२४ ग्वालियर) भारत के पूर्व प्रधान मंत्री हैं। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया।


राजनीतिक जीवन


वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं और सन् १९६८ से १९७३ तक वह उसके अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन् १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली लेकिन हिम्मत नहीं हारी और सन् १९५७ में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँच कर ही दम लिया। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। सन् १९६८ से ७३ तक वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में वह सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनाई।१९८० में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। ६ अप्रैल, १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी जी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् १९९७ में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। १९ अप्रैल, १९९८ को पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।सन् २००४ में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भा०ज०पा० के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबन्धन (एन०डी०ए०) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से कांग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा०ज०पा० विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। सम्प्रति वे राजनीति से सन्यास ले चुके हैं।


कवि के रूप में अटल


अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे। वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी। इसमें ऋंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर "यक शहन्शाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम हसीनों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक" की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया। वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता। राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेकों आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी।


अटल जी की प्रमुख रचनायें


उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं :मृत्यु या हत्याअमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)कैदी कविराय की कुण्डलियाँसंसद में तीन दशकअमर आग हैकुछ लेख: कुछ भाषणसेक्युलर वादराजनीति की रपटीली राहेंबिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।


जीवन के कुछ प्रमुख तथ्य


अटल जी एक ऐसे नेता है जिन्होने जो देश-हित में था वही किया|आजीवन अविवाहित रहे।वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता (ओरेटर) एवं सिद्ध हिन्दी कवि भी हैं।परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये। सन् १९९८ में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया जिसे अमेरिका की सी०आई०ए० को भनक तक नहीं लगने दी।अटल सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया अपितु सफलता पूर्वक से संचालित भी किया।अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था।इन सबसे अलग उनके व्यक्तित्व का सबसे बडा गुण है कि वे सीधे सच्चे व सरल इन्सान हैं। उनके जीवन में किसी भी मोड पर कभी कोई व्यक्तिगत विरोधाभास नहीं दिखा।


वाजपेयी सरकार के कार्य


सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया। संरचनात्मक ढाँचे के लिए कार्यदल; सॉफ्टवेयर विकास के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल; केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया, साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत आदि के माध्यम से बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये। राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं। इनके अलावा आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिये मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन बुलाया, उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया, आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया तथा ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की। ये सारे तथ्य सरकारी विग्यप्तियों के माध्यम से समय समय पर प्रकाशित होते रहे हैं।


अटल जी की टिप्पणियाँ


चाहे प्रधान मन्त्री के पद पर रहे हों या नेता प्रतिपक्ष; बेशक देश की बात हो या क्रान्तिकारियों की, या फिर उनकी अपनी ही कविताओं की; नपी-तुली और बेवाक टिप्पणी करने में अटल जी कभी नहीं चूके। यहाँ पर उनकी कुछ टिप्पणियाँ दी जा रही हैं।"भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।""क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ ।""मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है।"


जय हिंद जय भारत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथSundayकोशिश ही हौसला है
   
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती
बैठे बैठे घर के अंदर बात नही बनती बच्चों दल नही गलती
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

अपने आप को तुम जानो अपने अंतर को पहचानो
बिना खुद से डरे मौत से आंखें चार नहीं होती बच्चों बात नही बनती
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

पग पथिक बन अकेले चलना होगा आगे खुद को बढना होगा
वो काँटों चलना तेरा अब फूलों से बात नही बनती बच्चों दल नही गलती
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

एक लक्ष्य हो तेरा द्रिड उठा धनुष भेद दे निशान
देर सवेर आराम की बातें अब कम नही करती बच्चों साथ नही देती
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

तुझको ही हरना है आँखों के आंसूं  वो मोती हैं तेरे
गुरु चरण माँ पिता आशीष सदा साथ तेरे बच्चों सदा साथ तेरे
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

देखो देश बोला रहा है बाट तुम्हरी निहार रहा है 
तुम ज्योती हो कल के बच्चों बोलो अब मीलके बच्चों बोलो अब मीलके
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती
बैठे बैठे घर के अंदर बात नही बनती बच्चों दल नही गलती
कोशिश करने वालों की हार नही होती हार नही होती

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भाग्या का लेखा मेरा

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

बत्ती बलण मण दीप बुझेकी
यकुली रैंण जिकोड़ी झुरेकी
अंशुं रुंदा रैंदा सदनी को बोई
सण बार ऐदा ओर यकुल चला जांद
कैका भाग मा क्या दुःख दागडायूँ
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

मी तेरु सरू तू मेरु सारु बोई
मुल्क मेरु सदनी को उजाड़ू
खैरी की कमाणी उकालों को पाणी
तू भरदा रैं एक गढ़ छोडी सरदा रै
कैक भाग क्ख्क छ वैकु माटू
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतBy: देव भूमि बद्री-केदार नाथ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ2 hours agoमाँ

जय मात दी ,जय मात दी ,जय मात दी

रास्ता तेरा  मुश्किल 
माँ हो मेरी माँ .................मेरी माँ ...२

ऊँचें परबत बैठी माता
देखे रास्ता माँ .................मेरी माँ ...२

जल्दी कदम बढवो   
जयकार माँ ...............मेरी माँ ...२

लाल चुनरी ओढे बैठी
दुःख हरने माँ  .................मेरी माँ ...२

भक्तों भीड़ लगी माता
दरस दिखदो माँ  ...............मेरी माँ ...२ 

दर आयी माता 
झोली भरो  माँ  .................मेरी माँ ...२ 

रास्ता तेरा  मुश्किल 
माँ हो मेरी माँ .................मेरी माँ ...२

जय मात दी ,जय मात दी ,जय मात दी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ बड़ बोला नेता मेरा
*******************************
नेता मेरा पांच साल तू सुस्ता लेता 
स्त्री पर बोल क्यों तू गुस्सा लेता है
चुप चाप ही रहता तू अच्छा रहता
कंन,मुंह,आंख बंद तू अच्छा दीखता   
********************************

आपका ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ13 hours agoचला चला

आया सूरज चला चला
दिन भी यूँ ही बढ़ चला

प्रहर पल पल चला चला
समय का कांटा बढ़ चला

चलते चलते संध्या आयी
थकन लगी सुस्ता चला

थोड़ा लुफ्ता उठाकर चला चला
एक रेखा  की ओर  में बढ़ चला

अँधेरा आया रात्री वो चला चला
सुख निद्रा तज कर बढ़ चाला

हर प्रहर मे यूँ ही बांटा रहा
चलना था बस यूँ ही चला चला 

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ13 hours agoक्ख्क रैगे

क्ख्क रैगे तू
तू क्ख्क हर्ची
छनी टूटी गै छे परसी
गोउड़ बलदा फिरदा सड़की
व्हैगै तू बस अब खरकी
क्ख्क रैग्याँ तू
तू क्ख्क हर्ची ...........

ओंझो बैरी छे
तू क्दगा गैरी छे
दुःख णी सरेनु मेरु
तू खैरी मेरी छे
व्हैगै तू बस अब सैरी छे
क्ख्क रैगे तू
तू क्ख्क हर्ची ...........

बांझों का बजरा
खेती पुंगडो दगड़
कैल णी छोडी कसर
पिच्गै पाणी गगर
व्हैगै तू बस अब सगर
क्ख्क रैगे तू
तू क्ख्क हर्ची ...........

क्ख्क रैगे तू
तू क्ख्क हर्ची
छनी टूटी गै छे परसी
गोउड़ बलदा फिरदा सड़की
व्हैगै तू बस अब खरकी
क्ख्क रैग्याँ तू
तू क्ख्क हर्ची ...........

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथYesterdayतेरा चोला

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

अलख जगाले ,उस धाम की
अलख जगाले ,साईं राम  की

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

जीवन बंदे ,बंद हथेली रेत सी
सरका जाये ,वो जीवन ऐसा ..२

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

सिमेटता जाये तू , कहे सब कुछ मेरा
पगला है या तू ,  तुझ पर माया का फेरा

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

बंद आँखों से देखले ,जो खोली आँखों से देख ना पाया
चंचल मन काबू रख अपना ,उसने ही तुझे मार्ग से भटकाया

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

साईं के घर देर है,अँधेरा तेरे बुद्धी पर छाया
पड़े छाया जब साई की .मैंने साईं तुझ मे पाया

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

अलख जगाले ,उस धाम की
अलख जगाले ,साईं राम  की

तेरा छूटा जाये, रे चोला तेरा
तेरा छूटा जाये, रे मौला तेरा .....२

एक उत्तराखंडी

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देव भूमि बद्री-केदार नाथ23 hours agoवो चेहरा जब दिखता है

वो चेहरा जब भी दिखता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

देख सीने में ,गम ये जलता है
उस सिगरेट के धुँयें में ,वो अब भी हंसता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

आंसूं बनके ,ये दिल अब पिघलता है
आँखों से ये ,जब यूँ बह निकलता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

डूबा ही जाता उस इश्क के दरिया में
गम के समंदर की ओर बस वो चलता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

समंदर में जाकर भी खुद से ही वो लड़ता है
वंहा जा मैखाने में अंगूर की बेटी से झगड़ता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

अंगूर की बेटी ने भी मुझे रुसवा किया
एक को फंसा ना था सबको फंसा दिया है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

अंगूर के रम के साथ बस अब गम चलता है
शाम सवेरे उसका वो चेहरा .अब भी हंसता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............

वो चेहरा जब भी दिखता है
देख सीने में ,गम ये जलता है ...............


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथYesterdayखामोश हो गई जनसंघर्षो की बुलंद आवाज

जाने माने कम्युनिस्ट नेता और उत्तरकाशी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कमलाराम नौटियाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने देहरादून के सीएमआइ अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिवंगत नौटियाल के निधन से जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है।

उत्तरकाशी में जनसंघर्षो की आवाज बुलंद करने वाले कमला राम नौटियाल जीवन के 83वें वर्ष में सदा के लिये खामोश हो गए। लंबे समय से देहरादून के सीएमआइ में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर उनका निधन हो गया। उनके देहांत की खबर मिलते ही उत्तरकाशी जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। सुबह से ही उनके उत्तरकाशी स्थित आवास पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दिवंगत के परिजनों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कल (आज) केदारघाट पर किया जाएगा। बुधवार को ही उनकी पार्थिव देह को लेकर पुत्र दिनेश नौटियाल, पुत्री डॉ.मधु नौटियाल व अन्य परिजन देहरादून से उत्तरकाशी पहुंचे। वर्ष 1971 से 1977 तक उत्तरकाशी नगर पालिका के अध्यक्ष रहने के साथ ही उन्होंने जिले में सीपीआइ की कमान भी संभाली। क्षेत्र के विभिन्न जनांदोलनों का नेतृत्व करने के साथ ही उत्तरकाशी के आधुनिक स्वरूप की नींव रखने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

नई टिहरी: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड कमलाराम नौटियाल के निधन पर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया है। यहां आयोजित शोक सभा में भाकपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि कामरेड कमलाराम नौटियाल गरीब किसान एवं मजदूरों के मसीहा थे। शोक व्यक्त करने वालों में भाकपा नेता खुशीराम उनियाल, चंदन सिंह नेगी, जयप्रकाश पांडेय, जगदीश कुलियाल, होश्यिार सिंह रावत, माला मिश्रा, प्रेमा रावत, एटक के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र नेगी, पूर्णानंद कोठारी, गोविंद राज आदि शामिल थे। — with Pramodchandra Kandpal and 47 others. Photo: खामोश हो गई जनसंघर्षो की बुलंद आवाज जाने माने कम्युनिस्ट नेता और उत्तरकाशी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कमलाराम नौटियाल का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने देहरादून के सीएमआइ अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिवंगत नौटियाल के निधन से जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तरकाशी में जनसंघर्षो की आवाज बुलंद करने वाले कमला राम नौटियाल जीवन के 83वें वर्ष में सदा के लिये खामोश हो गए। लंबे समय से देहरादून के सीएमआइ में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर उनका निधन हो गया। उनके देहांत की खबर मिलते ही उत्तरकाशी जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। सुबह से ही उनके उत्तरकाशी स्थित आवास पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। दिवंगत के परिजनों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कल (आज) केदारघाट पर किया जाएगा। बुधवार को ही उनकी पार्थिव देह को लेकर पुत्र दिनेश नौटियाल, पुत्री डॉ.मधु नौटियाल व अन्य परिजन देहरादून से उत्तरकाशी पहुंचे। वर्ष 1971 से 1977 तक उत्तरकाशी नगर पालिका के अध्यक्ष रहने के साथ ही उन्होंने जिले में सीपीआइ की कमान भी संभाली। क्षेत्र के विभिन्न जनांदोलनों का नेतृत्व करने के साथ ही उत्तरकाशी के आधुनिक स्वरूप की नींव रखने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। नई टिहरी: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड कमलाराम नौटियाल के निधन पर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया है। यहां आयोजित शोक सभा में भाकपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि कामरेड कमलाराम नौटियाल गरीब किसान एवं मजदूरों के मसीहा थे। शोक व्यक्त करने वालों में भाकपा नेता खुशीराम उनियाल, चंदन सिंह नेगी, जयप्रकाश पांडेय, जगदीश कुलियाल, होश्यिार सिंह रावत, माला मिश्रा, प्रेमा रावत, एटक के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र नेगी, पूर्णानंद कोठारी, गोविंद राज आदि शामिल थे।5Like ·  · Share