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Natural Disaster:Cloud Burst in Uttarkashi Chamoli & Other parts of Uttarakhand

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 04, 2012, 03:50:17 PM

Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand


Harish Rawat


Devbhoomi,Uttarakhand

आफत की बरसात ने जमकर तबाही मचाई। टौंस व रवांई घाटी में तीन दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही है। मोरी क्षेत्र के पंचगाई पट्टी के 12 गांव में जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। क्षेत्र में डेढ़ दर्जन से अधिक झूला, आरसीसी व लकड़ी के पैदल पुल बहने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। इस कारण इस क्षेत्र के ग्रामीणों के सामने अब खाद्यान्न संकट पैदा हो गया है।

तहसील मुख्यालय मोरी में स्वास्थ्य केंद्र व ट्राइसेम भवन की दीवारें गिरने से खतरा पैदा हो गया है। भारी बरसात के चलते अंदेशा जताया जा रहा है कि तीन दर्जन से अधिक भेड़-बकरी पालक चांग सिल, बराड़ सर आदि बुग्यालों में फंस गए हैं।

पंचगाई पट्टी में पार्क क्षेत्र में सुपीन नदी के भारी बहाव के चलते किमगाड, खोदी, सावणी झुलापुल, केवरा, देवसारी, बेंचा, ठऊड़ा गाड़, खेड़ा, लोका कमेडी आरसीसी पुलिया सहित तिसिंचा, किमुगाड़्र, सिंगारा, साईडी, पनारा, मांजीघट, सुपिंडा, समुल्डा व लोंका कनेडी पर बने लकड़ी के पैदल पुल बह गए हैं।

Devbhoomi,Uttarakhand

 कुदरत इस कदर क्रूर होगी। यह तो सोचा भी न था। बाढ़ से तबाह उत्तरकाशी में दो भाइयों को ऐसा निर्णय लेना पड़ा, जिसकी कल्पना से भी रूह सिहर उठे। पिता की चिता के लिए लकड़ियों का इंतजाम नहीं हो सका तो शव को बोरे में बांधकर गंगा माई को समर्पित कर दिया।


यह नजारा था उत्तरकाशी के जड़ भरत घाट का। बीस वर्षीय राजेश और उसका छोटा भाई सत्रह वर्षीय राजेंद्र हाथ में एक बोरा पकड़े हुए थे। राजेंद्र ने कुछ अगरबत्तियां जलाई और बोरे के चारों ओर तीन बार घुमा दीं। उसके बाद दोनों ने तीन अन्य साथियों की मदद से बोरे पर पत्थर बांध कर उसे नदी में डाल दिया।


पूछने पर उन्होंने बताया कि वे हिना गांव के रहने वाले हैं और बीते दो हफ्तों से जिला अस्पताल में पिता जीवन सिंह का इलाज करवा रहे थे। पिता दमे के मरीज थे। इसी बीच बाढ़ ने तबाही मचाई और गंगोरी पुल टूट गया। उनका अपने गांव से संपर्क भी टूट गया।

रविवार की सुबह पिता इहलोक सिधार गये। घर में मां और बहन को मालूम नहीं है कि पिता की मौत हो गई है। अस्पताल से पिता की लाश लेकर दोनों निकले। साथ में अस्पताल का एक कर्मचारी भी था। लाश को बोरे में भरकर नदी के तट पर पहुंचे। बाढ़ के हालात में चिता का इंतजाम करना मुमकिन नहीं था।

इसलिये मृत देह को नदी में डुबाने का फैसला कर लिया। दो और लोग उनके साथ इस काम में मदद करने लगे। रस्म निभाने के लिये अगरबत्ती सिर पर घुमा दी। उसके बाद दोनों भाई पथराई निगाहों से नदी के प्रबल वेग को देर तक निहारते रहे।


Sabhar Dainik Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand



रुद्रप्रयाग : भारी बारिश ने जिले में जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही बारिश के चलते लगभग 55 गांवों में आवश्यक वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है। एक सप्ताह से ढाई दर्जन मोटर मार्ग अवरुद्ध पडे़ हैं। लेकिन अब तक प्रशासन ने मोटर मार्ग खोलने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है।

पैदल मार्गो की हालत भी खस्ताहाल है। इन रास्तों पर ग्रामीणों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना पड़ रहा है। प्रशासन की सुस्ती के चलते फिलहाल मोटर मार्ग खुलने के आसार कम ही दिख रहे हैं। इन प्रभावित गांवों में राशन, कैरोसीन, रसोई गैस समेत कई आवश्यक वस्तुएं की किल्लत शुरू हो गई है। रुद्रप्रयाग के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस का कहना है कि मोटर मार्ग को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। मलबा हटाने के लिए जेसीबी की मदद ली जा रही है।

प्रभावित गांव

जखोली विकास खंड के 23 गांव

अगस्तमुनि विकास खंड के 18 गांव

ऊखीमठ विकास खंड के 14 गांव
  Dainik jagran

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


उत्तरकाशी में कुदरत का  कहर

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भरथू असीगंगा इलाके में बादल फटने से बाढ आ गई है। एक न्यूज चैनल के अनुसार जिसमें 31 लोगों के बह जाने की खबर है। असी जल विद्युत परियोजना में लगे 19 कर्मचारी गंगा में बह गए हैं जबकि 110 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। भारी बारिश के कारण भागीरथी नदी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। पूरे उत्तरकाशी में बिजली गुल है तथा संचार व्यवस्था ठप पड गई है। बादल फटने से गंगोत्री नेशनल हाईवे का बडा हिस्सा बह गया है।