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Kumauni Holi - कुमाऊंनी होली: एक सांस्कृतिक विरासत

Started by पंकज सिंह महर, January 04, 2008, 02:44:23 PM

हेम पन्त

राधा-कृष्ण के प्रेम पर आधारित एक  और भक्तिमय खड़ी होली

हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

कौन शहर के कुंवर कन्हैय्या- कौन शहर के कुंवर कन्हैय्या
कौन शहर राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

मथुरा शहर के कुंवर कन्हैय्या- मथुरा शहर के कुंवर कन्हैय्या
बरसाने राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

कौन वरण के कुंवर कन्हैय्या- कौन वरण के कुंवर कन्हैय्या
कौन वरण राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

सांवरे वरण के कुंवर कन्हैय्या- सांवरे वरण के कुंवर कन्हैय्या
गौर वरण राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

कितने बरस के कुंवर कन्हैय्या- कितने बरस के कुंवर कन्हैय्या
कितने बरस राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

सात बरस के कुंवर कन्हैय्या- सात बरस के कुंवर कन्हैय्या
बारह बरस राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

काहे की ये खम्ब बने हैं- काहे की ये खम्ब बने हैं
काहे की लागी डोरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

अगर चन्दन के खम्ब बने हैं- अगर चन्दन के खम्ब बने हैं
रेशम की लागी डोरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

एक पर झूले कुंवर कन्हैय्या- एक पर झूले कुंवर कन्हैय्या
दूजे पर राधा गौरी- हरि धरे मुकुट खेले होरी
हरि धरे मुकुट खेले होरी, सिर धरे मुकुट खेले होरी

हेम पन्त

एक प्रसिद्ध होली में कृष्ण जन्म का विवरण

भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

भर भादों की रातिया में- भर भादों की रातिया में
कृष्ण लियो अवतार राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

कौन की कोख में जनम लियो है- कौन की कोख में जनम लियो है
कौन खिलाये गोद राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

देवकी की कोख में जनम लियो है- देवकी की कोख में जनम लियो है
यशोदा खिलाये गोद राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

चारों चौकी सोई गई है- चारों चौकी सोई गई है
खुल गये ब्रज किवाड़ राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

ले बालक वासुदेव चले हैं- ले बालक वासुदेव चले हैं
पहुंचे यमुना तीर राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

ले बालक वासुदेव चले हैं- ले बालक वासुदेव चले हैं
पहुंचे यमुना तीर राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

लेकर बालक वार गये हैं- लेकर बालक वार गये हैं
गोकुल जा पहुंचाय राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

जब ये बालक गोकुल पहुंचे- जब ये बालक गोकुल पहुंचे
हो रही जय-जयकार राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में
भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका- भलो जनम लियो मथुरा में

हेम पन्त

एक प्रसिद्ध होली में काशी शहर का विवरण

शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

आधी काशी में बामन बनिया- आधी काशी में बामन बनिया
आधी काशी सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

काही करन को बामन बनिया- काही करन को बामन बनिया
काही करन को सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

सेवा करन को बामन बनिया- सेवा करन को बामन बनिया
पूजा करन को सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

देवी को पूजे बामन बनिया- देवी को पूजे बामन बनिया
शिव को पूजे सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

क्या इच्छा पूजे बामन बनिया- क्या इच्छा पूजे बामन बनिया
क्या इच्छा पूजे सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

नव सिद्धि पूजे बामन बनिया- नव सिद्धि पूजे बामन बनिया
अष्ट सिद्धि पूजे सन्यासी- शिव के मन हो
शिव के मन माहीं बसे काशी- शिव के मन हो

हेम पन्त

राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम को समर्पित एक और खड़ी होली

नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया
नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया

काहे की ये बनि रे बांसुरिया- काहे की ये बनि रे बांसुरिया
काहे को बनो बीन, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया
नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया

हरे बांस की बनि ये बांसुरिया- हरे बांस की बनि ये बांसुरिया
सोने को बन्यो बीन, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया
नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया

के सुर की तेरि बनि है बांसुरिया- के सुर की तेरि बनि है बांसुरिया
के सुर को बन्यो बीन, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया
नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया

छै सुर की मेरि बनि है बांसुरिया- छै सुर की मेरि बनि है बांसुरिया
दो सुर को मेरो बीन, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया
नदि यमुना के तीर, कदम्ब चड़ि कान्हा बजा गयो बांसुरिया

हेम पन्त

भर शिशि भरि दे गुलाल, मेरो पिया होलि को खिलय्या
चहुँ दिशि उड़ो है गुलाल, मेरो पिया होलि को खिलय्या
सौ शिशि भरि दे गुलाल, मेरो पिया होलि को खिलय्या

वृन्दावन की कुन्ज गलिन में- वृन्दावन की कुन्ज गलिन में
कुन्ज गलिन में कृष्ण गलिन में- मेरो पिया होलि को खिलय्या
भर शिशि भरि दे गुलाल, मेरो पिया होलि को खिलय्या

एक क्यारी में बोऊं में अबीरा- एक क्यारी में बोऊं में अबीरा
दूजे में बोऊं रे गुलाल- मेरो पिया होलि को खिलय्या
भर शिशि भरि दे गुलाल, मेरो पिया होलि को खिलय्या

हेम पन्त

होली के समय गाने जाने वाले गीतों के विभिन्न रूप हैं.. देखिये यह दार्शनिक अन्दाज में सन्देश देती हुई होली

सुमिरो सीता राम भया तुम हिरा जनम ना पाओगे..
इस कलियुग में दो ही बड़े हैं
इस कलियुग में दो ही बड़े हैं - एक ब्राह्मण एक गाय भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे..

कुल तारन को गाय बनी है
कुल तारन को गाय बनी है - कर्मन को यो विप्र भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे..

इस कलियुग में दो ही बड़े हैं
इस कलियुग में दो ही बड़े हैं- एक गंगा एक राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे...

पाप कटन को गंगा बनी है
पाप कटन को गंगा बनी है- नाम जपन को राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे...

इस कलियुग में दो ही बड़े हैं
इस कलियुग में दो ही बड़े हैं- एक माता एक पिता भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे...

जनम-जनम दे सुख दे माता
जनम-जनम दे सुख दे माता- पालन को यो पिता भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे
सुमिरो सीता राम भया, तुम हिरा जनम ना पाओगे...

हेम पन्त

होली की शुरुआत चीर बांधने से ही होती है, उस समय यह होली गाई जाती हैKaile bandhi cheer.wmv

हेम पन्त


हेम पन्त


पंकज सिंह महर


(परदेशी पिया के होली पर घर न आने से उदास विरहिणी की होली, जिसमें वह अपने पति से शिकायत कर रही है कि जहां आज होली के दिन में जहां सभी देवगण अपनी पत्नियों के साथ और सभी नाते-रिश्तेदार अपनी पत्नियों के साथ होली खेल रहें हैं, वहीं मैं अपना मन मार रही हूं, लीजिये----)

नयनवां रस के भरे, सईयां आओगे कौन घड़ी,
गणपति भी खेलें, रिद्धि संग होली,
हमही रहे मन मारे, बलमा जी आओगे कौन घडी।
ब्रह्मा भी खेलें, सरस्वती संग होली.
हमही रहे मन मारी, सईयां आओगे कौन घड़ी॥
विष्णु भी खेलें, लक्ष्मी संग होली,
हमही रहे मन मारे, बलम जी आओगे कौन घड़ी।
शंकर भी खेलें, पार्वती संग होली,
हमही रहे मन मारे, सईयां आओगे कौन घड़ी॥
राम भी खेलें, सिया संग होली,
हम ही रहे मन मारे, बलम जी आओगे कौन घड़ी।
कॄष्णा भी खेलें, राधा संग होली,
हमही रहें मन मारे, सईयां आओगे कौन घड़ी॥
सासुल भी खेलें, ससुर संग होली,
हमही रहे मन मारे, बलम जी आओगे कौन घड़ी।
जेठ भी खेलें, जेठानी संग होली,
हमही रहे मन मारे, सईयां आओगे कौन घड़ी॥
देवर भी खेलें, देवरानी संग होली,
हमही रहे मन मारे, बलम जी आओगे कौन घड़ी।
ननद भी खेलें, नन्दोई संग होली,
हमही रहे मन मारे, सईयां आओगे कौन घड़ी॥