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CONDOLENCE - शोक संदेश

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 21, 2008, 10:56:11 AM

पंकज सिंह महर


साथियो,
बड़े दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि भीमताल निवासी फ्रेड दा (फ्रेडरिक स्मेटाचेक जूनियर) का कल निधन हो गया है। भीमताल के संरक्षण के लिये उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किये हैं, बांज के जंगल का संरक्षण और संवर्द्धन, तितलियों का संग्रहालय, जंगली जानवरों का संरक्षण आदि कामों के लिये इन्हें जाना जाता है।
सच्चे मायनों में उत्तराखण्ड प्रेमी फ्रेड दा को मेरा पहाड़ परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

फ्रेड दा के बारे में जानने के लिये - इस लिंक पर जांये।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

This is very sad news. May God his soul rest in peace.


Quote from: पंकज सिंह महर on February 15, 2010, 10:30:53 AM

साथियो,
बड़े दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि भीमताल निवासी फ्रेड दा (फ्रेडरिक स्मेटाचेक जूनियर) का कल निधन हो गया है। भीमताल के संरक्षण के लिये उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किये हैं, बांज के जंगल का संरक्षण और संवर्द्धन, तितलियों का संग्रहालय, जंगली जानवरों का संरक्षण आदि कामों के लिये इन्हें जाना जाता है।
सच्चे मायनों में उत्तराखण्ड प्रेमी फ्रेड दा को मेरा पहाड़ परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

फ्रेड दा के बारे में जानने के लिये - इस लिंक पर जांये।

राजेश जोशी/rajesh.joshee

पंकज जी,.
आज सुबह जैसे ही अखबार देखा तो फ़्रेडरिक साब के निधन जिनको बचपन से हम फ़्रेडी साब के नाम से सुनता आ रहा हूं का समाचार पढ़कर बड़ा ही दु:ख हुआ।  मेरे गृहनगर भीमताल के निवासी होने के कारण मेरे घर के ठीक सामने पहाड़ी पर स्थित फ़्रेडी साब का बंगला, हमारे घर के नीचे रोड से गुजरती उनकी फ़ीयेट या बाद में जिप्सी कार और कभी भीमताल बाजार में लोगों से कुमाऊनी में बतियाते फ़्रेडी साब, सारे चित्र एक एक कर नजर आने लगे।  बचपन में उनके बारे में सबसे पहले जानकारी मेरे सहपाठियों से पहली कक्षा में हुयी। क्रिसमस के दिन मेरे सहपाठियों (जो उनके घर के पास रहते थे) उनके घर पर जाने के लिए उत्साह देखने लायक होता था।  एक पर्यावरणविद के रूप में उनसे कभी मिलना नही हुआ पर उनका तितलिय़ो का संग्रह बचपन में कौतूहल का विषय जरूर रहा।  वह भी अगर जुगाड़ु होते तो पद्मभूषण नही तो पद्म्श्री तो मिल ही जाता, क्य़ोंकि आजकल सब जुगाड़ से मिल रहा है।  लेकिन अपने क्षेत्र और जनता का प्यार जिसे मिले उसे सरकारी पुरस्कार से क्या मतलब, शायद गीता का संदेश उन्होने बहुत पहले ही आत्मसात कर लिया था।  विधाता ने उनके लिए दिन भी चुना वसंत का मौसम और प्रेमियों के त्यौहार प्रेम चौदश(वेलेण्टाइन डे) को, और उनके आस-पास वही गांव वाले अपना कोई परिजन नही। वेलेण्टाइन डे को उनका इस तरह जाना भीमताल और उत्तराखण्डवासियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



मेरापहाड़ निर्मल पाण्डेय जी के इस अचानक मर्त्यु और शोक व्यक्त करता है !

भगवान् उनकी आत्मा को शांति दे !
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे निर्मल पांडे


नैनीताल। बैंडिट क्वीन का विक्रम मल्लाह अचानक दुनिया के रंगमंच को अलविदा कह गया। जिसने भी सुना कि अभिनेता निर्मल पांडे अब हमारे बीच नहीं रहे, एकाएक विश्वास सा नहीं हुआ।

सरोवरनगरी नैनीताल की नाट्य संस्था युगमंच से बालीवुड तक का सफर तय करने वाले सिने अभिनेता निर्मल पांडे ने बालीवुड के प्रसिद्ध निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में दस्यु सुंदरी फूलन देवी के पति विक्रम मल्लाह के किरदार को जिस जीवंत रूप में प्रस्तुत किया उसे देखकर बालीवुड के कई फिल्म निर्माता व निर्देशक उनकी अभिनय शैली के कायल हो उठे।

उन्हे बैंडिट क्वीन के बाद फिल्मों में कई चुनौती पूर्ण रोल मिले, जिन्हे अपनी उत्कृष्ट अभिनय शैली के दम पर उन्होंने बखूबी अंजाम दिया। उन्हे फिल्म दायरा में अभिनेत्री का किरदार निभाने को मिला तो उन्होंने इस चुनौती को भी सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस अभिनय के लिए उन्हे फ्रांस में आयोजित कांस फिल्म फेस्टीवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला। निर्मल पांडे की रुचि बचपन से ही अभिनय की ओर थी। सीआरएसटी इंटर कालेज में पढ़ाई के दौरान से ही वह नाटकों में अभिनय करने लगे। नगर की रामलीलाओं में भी उन्होंने अपनी अभिनय कला का जौहर दिखाया। वर्ष 1989 में नाटय संस्था युगमंच से जुड़ गए। राष्ट्रीय नाटय विद्यालय नई दिल्ली से अभिनय की डिग्री लेने के बाद निर्मल ने करीब 75 से अधिक नाटकों में अभिनय करने के साथ ही दर्जनों नाटकों का निर्देशन भी किया। कुछ साल पूर्व निर्मल ने तारा आटर््स लंदन के साथ भी काम किया।

निर्मल ने नैनीताल की नाटय संस्था युगमंच द्वारा प्रस्तुत जिस लाहौर नई देख्यां, हैमलेट, अजुवा बफौल, अंधायुग, अनारो, सराय की मालकिन, मेन विदाउट शैडोज, एल्डरसन, कुछ तो करो आदि नाटकों में अभिनय के साथ ही निर्देशन भी किया। वर्ष 1986 में निर्मल मुंबई चले गए। निर्मल के अचानक इस संसार से चले जाने से सिने व कला प्रेमी शोक मगन् है। फिल्मों में काम करने के बावजूद निर्मल की रंगमंच के प्रति बेताबी कम नहीं हुई और मुंबई में ही नाटय संस्था बना डाली और अंधायुग जैसा चर्चित नाटक करने बालीवुड के रंगक्षेत्र में धूम मचा दी।

कई फिल्मों में मनवाया अभिनय का लोहा

नैनीताल: फिल्म अभिनेता निर्मल पांडे ने बेहद चर्चित रही फिल्म बैंडिट क्वीन के अलावा कई अन्य हिन्दी फिल्मों में अपनी जानदार अभिनय शैली का लोहा मनवाया। उन्होंने औजार, इस रात की सुबह नहीं, दायरा, हद कर दी आपने, गॉड मदर, ट्रेन-टू-पाकिस्तान, प्यार किया तो डरना क्या के अलावा हम तुम पर मरते है जैसी फिल्में बालीवुड को दी। इसके अलावा उन्होंने कई भोजपुरी फिल्मों तथा एलबम में भी काम किया। कई टीवी धारावाहिकों के जरिए भी वह दर्शकों के करीब रहे। निर्मल ने दक्षिण भारत की कई फिल्मों में भी अभिनय करते हुए उत्कृष्ट कला का नमूना पेश किया।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6194399.html


पंकज सिंह महर

विश्वास ही नहीं होता कि निर्मल दा नहीं रहे, बालीवुड के आसमान में उत्तराखण्ड का चमकता तारा अब नहीं टिमटिमायेगा। इस खबर को सुनते ही बरबस ही आंसू निकल आये। स्व० श्री निर्मल पाण्डे अकेले ऐसे उत्तराखण्डी थे, जिन्होंने बहुत ही कम समय में इतनी ख्याति अर्जित की थी।
भगवान मृत आत्मा को परमगति दे और उनके परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति भी प्रदान करे।

मेरा पहाड़ परिवार इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के शोक में सहभागी है।

खीमसिंह रावत


Dinesh Bijalwan

By movietalkies
Friday Feb 19 12:14 AM
One cardiac arrest put paid to all his acting plans. Actor Nirmal Pandey was pulled into the dark throes of death, after he succumbed to a heart attack at Mumbai on the noon of Feb 18.


The talented actor breathed his last at Mumbai's Holy Spirit Hospital. Sudhir Mishra who directed Pandey in 'Iss Raat Ki Subah Nahin' told the media, "I am completely taken aback."


Scriptwriter Atul Tiwari, scriptwriter ('Mission Kashmir') and Pandey's senior at NSD, too rushed to the venue and confessed to "being in a state of shock."


Pandey, an acolyte of the National School Of Drama (NSD), soared to fame with his first rate histrionics in 'Bandit Queen.' 'Godmother,' wherein he shared screen space with Shabana Azmi too had earned him a fair share of fame. Last week his Telugu flick 'Kedi', starring Nagarjuna, was released to a heartening response from cinegoers.


Actors, filmmakers and professionals from the fraternity are expected to pay their last visits to the dear departed actor.

After reading this--- I am really shocked. 

पंकज सिंह महर

निर्मल दा को श्रद्धांजलि स्वरुप एक लेख-

http://www.merapahad.com/nirmal-pandey-passed-away/

Rajen

Sad news !!!
May the departed sour Rest In Peace.