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CONDOLENCE - शोक संदेश

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 21, 2008, 10:56:11 AM

पंकज सिंह महर

मसूरी, जागरण कार्यालय: उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास में मसूरी गोलीकांड का अध्याय राजेंद्र शाह के जिक्र के बिना अधूरा रह जाता है। इस कांड में उन्होंने जनप्रतिनिधि रहते हुए जिस तरह बहादुर सिपाही की भूमिका निभाई, वह आज भी यहां के लोगों के मन-मस्तिष्क में ताजा है। खासकर वह घटना, जब सेंट मेरी अस्पताल में आंदोलनकारियों के शव रखे हुए थे और उन्होंने अधिकारियों को कहा था कि उनमें हिम्मत है तो मेरे सीने में गोली मारकर दिखाओ। इससे वहां का वातावरण भावुक और तनावयुक्त हो गया था। ऐसे सच्चे और साहसी आंदोलनकारी के असामयिक निधन से पर्यटन नगरी ामगीन है। खटीमा कांड के विरोध में 2 सितंबर, 1994 जुलूस निकाल रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस और पीएसी ने मसूरी में गोलियां चला दी थीं। इसमें एक पुलिस अधिकारियों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। इस कांड से तत्कालीन विधायक राजेंद्र सिंह शाह अत्यंत क्षुब्ध हो गए थे। उन्होंने इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश विधानसभा से इस्तीफा देने दे दी थी। वे तत्कालीन डीएम राकेश बहादुर व एडीएम तनवर जफर अली पर खूब बिफरे। सेंट मेरी में आंदोलनकारियों के शव रखे हुए थे। उस वक्त राजेंद्र शाह भावुक हो गए। वे अफसरों पर बिफर पड़े। उन्होंने ललकारा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे उन पर गोली मारें। यह सुनकर डीएम व पुलिस के अधिकारी सन्न रह गए। इस घटना के तत्काल बाद राजेंद्र शाह पर रासुका लगा दी गई। राजेंद्र शाह के निधन पर मसूरी के लोग गमजदा हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों व संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विधायक जोत सिंह गुनसोला, उरत्ताखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष देवी गोदियाल, महिला आंदोलनकारी सुभाषिनी बत्र्वाल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में राजेंद्र शाह ने सच्चे सिपाही की भूमिका निभाई थी। टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष व राज्य आंदोलनकारी हुकम सिंह रावत, डा. हरिमोहन गोयल, भाजपा नेता अमीचंद मंगला, मदनमोहन शर्मा, राधेश्याम तायल, अनीता सक्सेना आदि ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।


हेम पन्त

शाह जी जैसे उत्तराखण्ड के सपूत के असमय देहावसान की खबर को सुनकर बहुत दु:ख हुआ. भगवान मृत आत्मा को शान्ति दें.

Rajen

शाह जी के असमय देहावसान की खबर को सुनकर बहुत दु:ख हुआ.
भगवान मृत आत्मा को शान्ति दें. 

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Bhagwan Mritatma ko shaanti de. Mera Pahad parivar ki sanvedana Shah ji ke parivaar ke saath hain.

पंकज सिंह महर


हिंदी के प्रसिद्ध और सफल विज्ञान कथा लेखक यमुना दत्त वैष्णव अशोक सिद्धहस्त कथाकार ही नहीं, इतिहास के शोधार्थी भी रहे। उनकी कहानियों में कुमाऊं के सामाजिक परिवेश के बखूबी दर्शन होते हैं। उनकी कहानियों में कुमाऊं के इतिहास, समाज, रीति- रिवाज, परंपराओं, अंधविश्वासों, गरीबी और राजनीति के दर्शन होते हैं। यमुनादत्त वैष्णव अशोक का शुक्रवार को निधन हो गया था। उनके पुत्र तारकेंद्र वैष्णव मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के ओएसडी हैं। दो अक्टूबर 1915 को अल्मोड़ा के धौलरा गांव में जन्मे यमुनादत्त वैष्णव ने बीएसएसी तक शिक्षा पाई। 1938 से 1949 तक वे एक्साइज इंस्पेक्टर रहे। 1950 से 1968 तक एक्साइज सुपरिटेंडेट रहे और 1969 से 1973 तक असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर रहे। नौकरी के दौरान और उसके बाद वे अनवरत साहित्य सृजन करते रहे। उनका महापंडित राहुल सांकृत्यायन से भी घनिष्ठ संबंध रहा। राहुल की कुमाऊं यात्रा के दौरान उनसे उनकी भेंट हुई थी। यमुनादत्त वैष्णव अशोक के लगभग एक दर्जन उपन्यासों में चक्षुदान, अन्न का आविष्कार, अपराधी वैज्ञानिक, हिम सुंदरी, शैलवधू, ये पहाड़ी लोग, राजुली मालूशाही, दोपहर को अंधेरा, हत्यारा ताल, पर्वतारोही और पंगु शामिल हैं। उनके कथासंग्रह अस्थि पंजर, शैलगाथा, भेड़ और मनुष्य, अप्सरा का सम्मोहन, श्रेष्ठ वैज्ञानिक कहानियां, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां काफी चर्चित हुए। नशे का अभिशाप, मद्य निषेध, कुमाऊं और गढ़वाल के दर्शनीय स्थल, संस्कृति संगम उत्तरांचल आदि निबंध संग्रहों के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए भी सूर्य की कहानी और चांद तारों की कहानी नामक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने कुमाऊं का इतिहास पुस्तक भी लिखी। 


श्री वैष्णव जी के निधन से उत्तराखण्डी साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई है, मेरा पहाड़ परिवार श्री वैष्णव जी के परिवार के दुःख में अपने को सहभागी बनाते हुये परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Very sad news.

May god the departed soul rest in peace.

Quote from: पंकज सिंह महर/Pankaj on March 16, 2009, 11:04:41 AM

हिंदी के प्रसिद्ध और सफल विज्ञान कथा लेखक यमुना दत्त वैष्णव अशोक सिद्धहस्त कथाकार ही नहीं, इतिहास के शोधार्थी भी रहे। उनकी कहानियों में कुमाऊं के सामाजिक परिवेश के बखूबी दर्शन होते हैं। उनकी कहानियों में कुमाऊं के इतिहास, समाज, रीति- रिवाज, परंपराओं, अंधविश्वासों, गरीबी और राजनीति के दर्शन होते हैं। यमुनादत्त वैष्णव अशोक का शुक्रवार को निधन हो गया था। उनके पुत्र तारकेंद्र वैष्णव मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के ओएसडी हैं। दो अक्टूबर 1915 को अल्मोड़ा के धौलरा गांव में जन्मे यमुनादत्त वैष्णव ने बीएसएसी तक शिक्षा पाई। 1938 से 1949 तक वे एक्साइज इंस्पेक्टर रहे। 1950 से 1968 तक एक्साइज सुपरिटेंडेट रहे और 1969 से 1973 तक असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर रहे। नौकरी के दौरान और उसके बाद वे अनवरत साहित्य सृजन करते रहे। उनका महापंडित राहुल सांकृत्यायन से भी घनिष्ठ संबंध रहा। राहुल की कुमाऊं यात्रा के दौरान उनसे उनकी भेंट हुई थी। यमुनादत्त वैष्णव अशोक के लगभग एक दर्जन उपन्यासों में चक्षुदान, अन्न का आविष्कार, अपराधी वैज्ञानिक, हिम सुंदरी, शैलवधू, ये पहाड़ी लोग, राजुली मालूशाही, दोपहर को अंधेरा, हत्यारा ताल, पर्वतारोही और पंगु शामिल हैं। उनके कथासंग्रह अस्थि पंजर, शैलगाथा, भेड़ और मनुष्य, अप्सरा का सम्मोहन, श्रेष्ठ वैज्ञानिक कहानियां, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां काफी चर्चित हुए। नशे का अभिशाप, मद्य निषेध, कुमाऊं और गढ़वाल के दर्शनीय स्थल, संस्कृति संगम उत्तरांचल आदि निबंध संग्रहों के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए भी सूर्य की कहानी और चांद तारों की कहानी नामक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने कुमाऊं का इतिहास पुस्तक भी लिखी। 


श्री वैष्णव जी के निधन से उत्तराखण्डी साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई है, मेरा पहाड़ परिवार श्री वैष्णव जी के परिवार के दुःख में अपने को सहभागी बनाते हुये परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
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खीमसिंह रावत

                                              shaldhanjali

prakriti ka niyam-jana hi hai jisaka janm huaa hai/
kintu kuch log hi hote hai jo samaj ko apane jeewan ka saar de jate hai/

mritaaatma ko prabhu ke charno me sthan mile, shok sansapat privar ko prabhu shakti de /



हेम पन्त

बहुत दुखद खबर है. वैष्णव जी उत्तराखण्ड के सम्मानित बुद्धिजीवियों में अग्रणी थे... हमारी ओर से भावभीनी श्रद्धांजली...

Rajen

 

एक दुखद समाचार : उत्तराखंड के जननायक  श्री बी. आर. टम्टा का एक मार्च,09 को नौएडा में निधन हो गया.  श्रीमती इंदिरा गांधी के शाशन काल में श्री बी. आर. टम्टा दिल्ली के निगम आयुक्त थे.  अपनी साफ़ छबि और कुशल प्रशाशनिक क्षमता के कारण श्री टम्टा न केवल उत्तराखंड बल्कि दिल्ली की जनता के भी बहुत प्रिय थे.  श्री टम्टा ने अपनी प्रतिभा से उत्तराखंड का नाम रोशन किया.  हार्दिक सम्बेदना के साथ ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



The contribution of Tamta Ji will be remembered long to the State formation. May his soul rest in peace !


Quote from: Rajen on March 19, 2009, 04:21:06 PM


एक दुखद समाचार : उत्तराखंड के जननायक  श्री बी. आर. टम्टा का एक मार्च,09 को नौएडा में निधन हो गया.  श्रीमती इंदिरा गांधी के शाशन काल में श्री बी. आर. टम्टा दिल्ली के निगम आयुक्त थे.  अपनी साफ़ छबि और कुशल प्रशाशनिक क्षमता के कारण श्री टम्टा न केवल उत्तराखंड बल्कि दिल्ली की जनता के भी बहुत प्रिय थे.  श्री टम्टा ने अपनी प्रतिभा से उत्तराखंड का नाम रोशन किया.  हार्दिक सम्बेदना के साथ ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.