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Domestic Treatment - घरेलू उपचार, उत्तराखण्ड की महान औषधीय परम्परा

Started by पंकज सिंह महर, January 23, 2008, 04:10:25 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Baba Ramdev Yog Trust claims to have discovered "Sanjivani Booti"



Baba Ramdev, who has created a vast following through his "Yog-Gyan", has now come up with his latest discovery. Reportedly, Baba Ramdev's yog trust has declared that they have discovered "Snajivini Booti" from Drongiri Parvat located in Chamoli district of Uttarakhand.

Baba Ramdev, following this announced that this is a really big discovery and further thanked the team members led by Acharya Balkrishan, who worked really hard to find this herb in the vast area spread at the hill.

Balkrishan reported that Sanjivani booti has qualities and properties of four different herbs, which are mrita sanjivani, vishalaya karni, sawarn karni and sandhani.

The team, which went on to trace the herb by trekking to Dronagiri earlier this month was also accompanied by Prof Hariram Pandey, an ayurveda expert and Kaushal Kumar. Yesterday the team returned back to Haridwar.

In the holy tale of Ramayana, sanjivani was brought by lord Hanumana, who flew to Drona Paravat to get it for the cure of Lakshaman, who gets injured and falls unconscious during a fight with Meghnaad.


पंकज सिंह महर

कहीं पर चोट लग जाने पर यदि घाव हो जाये तो-
१- हिसालू की कोमल पत्तियां पीस कर घाव पर लगाने से खून बहना बंद हो जायेगा और घाव भी जल्दी भरेगा।
२- घिंघारु की कोमल पत्ती को पीस कर भी घाव पर लगाने से भी आराम होता है।
३- अतर (चरस) और चीनी एक साथ पीसकर लगाने से भी आराम होगा।
४- घाव पर पिसी लाल मिर्च लगाने से घाव पकेगा नहीं और भरेगा भी, इसे घाव पर लगाने से जलन भी महसूस नहीं होती है।

पंकज सिंह महर

गाय के घी का औषधीय गुण
१- अधकपाली (आधे सिर में दर्द) होने पर गाय का ताजा घी सुबह और शाम नाम में डालने से हमेशा के लिये रोग दूर हो जाता है।
२- हाथ-पांव में जलन होने पर गाय के घी से मालिश करने पर आराम मिलेगा।
३- अतर-गांजे या भांग का नशा ज्यादा हो जाय तो गाय का घी पिलाने से लाभ होता है।
४- शराब के नशे को उतारने के लिये भी इसका प्रयोग होता है, दो तोले गाय के घी में दो तोला चीनी मिलाकर देने में १५ मिनट में नशा कम हो जायेगा।
५- जले घाव को पानी से धोकर गाय का घी लगाने से फफोले कम हो जाते हैं और जलन कम हो जाती है।
५- बच्चों को कफ की शिकायत हो जाये तो पुराने गाय के घी से छाती और पीठ पर मालिश करने से तुरन्त आराम मिलता है।
६- हिचकी रोकने के लिये आधा चम्मच गाय का घी पिलाने से हिचकी रुक जाती है।
७- सांप के काटने पर ५० से २०० ग्राम गाय का ताजा घी पिलाकर ४०-४५ मिनट बाद जितना गर्म पानी पी सकें, पिलायें। इसके बाद उल्टी-दस्त होंगे, इसके बाद विष का प्रभाव कम होने लगेगा।

पंकज सिंह महर

मुसकुट्टों (मस्से) का उपचार
मुसकुट्टों के ऊपर मूली के पत्ते रगड़ने से कुछ दिनों में यह समाप्त हो जाते हैं।

टोटका
जितने मुसकुट्टे शरीर पर हो रहे हैं, उतनी काली मिर्च के दाने इतवार की सुबह कपड़े में बांधकर मस्सों के ऊपर घुमाकर चौराहे पर फेंक देने से भी यह नष्ट हो जाते हैं।

पंकज सिंह महर

सूखी खुजली (खुश्की) का इलाज-

हजारी (गेंदा) के पत्तों को शरीर पर २-३ दिन रगड़ने से खुश्की की समस्या खत्म हो जाती है।

पंकज सिंह महर

खांसी तथा दमे का उपचार

१- केले का पत्ता सुखाकर किसी बर्तन में जलाकर उसकी राख को शहद के साथ खाने से आराम मिलता है।
२- बाज के पुराने पेड़ की छाल की राख बनाकर शहद से साथ खाने से भी इस रोग में आराम मिलता है।
३- बाज के बक्कल (छाल) को पानी में उबाल कर पीने से भी इस रोग में लाभ मिलता है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Thanx Pankaj Da for so many information.

Quote from: पंकज सिंह महर on November 04, 2008, 02:50:29 PM
गाय के घी का औषधीय गुण
१- अधकपाली (आधे सिर में दर्द) होने पर गाय का ताजा घी सुबह और शाम नाम में डालने से हमेशा के लिये रोग दूर हो जाता है।
२- हाथ-पांव में जलन होने पर गाय के घी से मालिश करने पर आराम मिलेगा।
३- अतर-गांजे या भांग का नशा ज्यादा हो जाय तो गाय का घी पिलाने से लाभ होता है।
४- शराब के नशे को उतारने के लिये भी इसका प्रयोग होता है, दो तोले गाय के घी में दो तोला चीनी मिलाकर देने में १५ मिनट में नशा कम हो जायेगा।
५- जले घाव को पानी से धोकर गाय का घी लगाने से फफोले कम हो जाते हैं और जलन कम हो जाती है।
५- बच्चों को कफ की शिकायत हो जाये तो पुराने गाय के घी से छाती और पीठ पर मालिश करने से तुरन्त आराम मिलता है।
६- हिचकी रोकने के लिये आधा चम्मच गाय का घी पिलाने से हिचकी रुक जाती है।
७- सांप के काटने पर ५० से २०० ग्राम गाय का ताजा घी पिलाकर ४०-४५ मिनट बाद जितना गर्म पानी पी सकें, पिलायें। इसके बाद उल्टी-दस्त होंगे, इसके बाद विष का प्रभाव कम होने लगेगा।

पंकज सिंह महर

तुलसी से विभिन्न रोगों का उपचार-

वैसे तो कहा जाता है कि तुलसी के पांच पत्ते रोज चबाने चाहिये, तुलसी खास तौर से रक्त विकार और त्वचा रोगों में बहुत लाभदायी है।

सर्दी-जुकाम

तुलसी से पत्तोंको या मंजरी को या दोनों को हल्के काली मिर्च के चूर्ण के साथ उबाल लिया जाय और गुनगुना कर दिन में दो-तीन बार पीने से लाभ होता है।

गले का दर्द

तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर चाटने से गले का दर्द हटता है, पानी गुनगुना कर उसमें तुलसी का रस और नमक मिलाकर गरारा करने से लाभ मिलेगा।

हल्के बुखार के लिये

तुलसी के पत्तों या मंजरी चाय की तरह उबाल कर गरम-गरम घूंट दिन में ४-५ बार पीने से बुखार हट जायेगा।

कहीं पर जल जाने पर

तुलसी के पत्तों का रस और दही की मलाई या नारियल का तेल फेंट कर जले हुये स्थान पर लेप करने से फफोले भी बैठ जायेंगे और जलन भी कम होती है।

कान का दर्द

कान में दर्द हो या मवाद निकलता हो तो मवाद को रुई से साफ करके तुलसी के पत्तों का रस डालने से मवाद का आना बंद हो जायेगा और दर्द कम हो जायेगा।     

मलेरिया बुखार

जाड़ा लगकर बुखार आने पर तुलसी की पत्तियां और मंजरी को उबाल कर तथा २-४ दाने कालीमिर्च का चूर्ण डालकर दिन में ३-४ बार बुखार उतरने तक पीने से आराम मिलेगा।

मुख से दुर्गन्ध

समय-समय पर ४-५ पत्ते चबाने से कफ भी खुलेगा और मुख से आ रही दुर्गन्ध भी खत्म हो जायेगी।

बच्चों की उल्टी

तुलसी के ताजे पत्तों का रस छोटी इलायली के बीजों के साथ देने से फायदा होता है।

दांत के दर्द, पायरिया, मसूड़े के दर्द के लिये

तुलसी के पंचांग (जड़, पती, डण्ठल, फूल और बीज) को पानी में उबालते-उबालते आधा रहने दें। इस काढ़े से गुनगुना होने पर कुल्ला करने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा मसूड़ों का दर्द और पायरिया भी खत्म हो जाता है।

पंकज सिंह महर

मोच का घरेलू उपचार


कहीं पर भी मोच आ जाने पर लीसे (चीड़ के पेड़ से निकलता है) का लेप मोच वाली जगह पर लगा कर बाहर से कपड़ा बांधने से २-३ दिन में मोच का दर्द और सूजन खत्म हो जाता है।

मोच वाली जगह पर गरम पानी में गो मूत्र और नमक डाल कर सेकें।

पंकज सिंह महर

पिल (फोड़े-फुंसियों का उपचार)

१- शहद और चूने का लेप फोड़े पर करने से तुरन्त दर्द से आराम मिलेगा और जल्द ही मवाद भी बाहर आ जायेगा।
२- सिसूंण/कंडाली (बिच्छू घास) जाति का एक पेड़, जिसे अलसिसूंण कहा जाता है (जिसका प्रयोग रस्सी आदि बनाने में किया जाता है) की जड़ को साफ कर उसे चन्दन की तरह घिसकर फोड़े पर लगा दें, अगर मवाद निकलने का रास्ता बन रहा हो तो, उसे जगह को छोड़कर बाकी चारों ओर लगा दें, २-३ दिन में मवाद बाहर आ जायेगा और घाव भी भर जाये़गा तथा घाव का निशान भी नहीं रहेगा।
३- पारी नाम की घास के पत्तों को पीसकर फोड़े पर लगाने से भी लाभ होता है।