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Domestic Treatment - घरेलू उपचार, उत्तराखण्ड की महान औषधीय परम्परा

Started by पंकज सिंह महर, January 23, 2008, 04:10:25 PM

पंकज सिंह महर

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on March 24, 2009, 02:34:41 PM

Timoor
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This is one kind of tree found in Uttarakhand which can be used in tooch ache. In gone days, people used to use it a Datoon.

It has other health benefits also.

तिमूर (कुमाऊनी) टिमरु (गढ़वाली) वज्रदन्ती (हिन्दी)

तिमूर पहाड़ों में नीम की तरह दातून के प्रयोग में लाया जाता है। यह एक कांटेदार पेड़ होता है, जिसपर छोटे-छोटे फल लगते हैं और इन दानों को चबाने पर झाग भी बनता है। यह दांत दर्द की अचूक औषधि है, दांत से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या इसकी टहनी से दातून करने या दाने चबाने से दूर हो जाती है।
       इसकी सूखी टहनी भी काफी मजबूत होती है, इसे प्रायः लाठी के रुप में भी प्रयोग किया जाता है, साथ ही दानेदार होने के कारण इसका उपयोग एक्यूप्रेशर के तौर पर भी किया जाता है।

पंकज सिंह महर

५ पत्ते तुलसी और ५ पत्ते पुदीने के मिलाकर बीड़ा सा बनाकर मुंह में रख लें और चबाते रहें, गैस और बदहजमी से शर्तिया मुक्ति मिलेगी।

हेम पन्त

यह पहाड़ की नमी वाली ढलानों पर बहुतायत से मिलने वाला पौधा है. इसकी जड़ों को "बन सुपारी" कहा जाता है. इसकी जड़ों को धो-सुखा कर प्रयोग करने पर पेट की पथरी गल जाती है.
   


Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: पंकज सिंह महर on March 24, 2009, 04:18:06 PM
Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on March 24, 2009, 02:34:41 PM

Timoor
=======

This is one kind of tree found in Uttarakhand which can be used in tooch ache. In gone days, people used to use it a Datoon.

It has other health benefits also.

तिमूर (कुमाऊनी) टिमरु (गढ़वाली) वज्रदन्ती (हिन्दी)

तिमूर पहाड़ों में नीम की तरह दातून के प्रयोग में लाया जाता है। यह एक कांटेदार पेड़ होता है, जिसपर छोटे-छोटे फल लगते हैं और इन दानों को चबाने पर झाग भी बनता है। यह दांत दर्द की अचूक औषधि है, दांत से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या इसकी टहनी से दातून करने या दाने चबाने से दूर हो जाती है।
       इसकी सूखी टहनी भी काफी मजबूत होती है, इसे प्रायः लाठी के रुप में भी प्रयोग किया जाता है, साथ ही दानेदार होने के कारण इसका उपयोग एक्यूप्रेशर के तौर पर भी किया जाता है।


विनोद सिंह गढ़िया

हाथ, पैर आदि में मोच आने पर : चूख (बड़ा नींबू-पहाड़ों में मिलता है) के दाने को आग में पकाकर चोटिल भाग को सेकने से लाभ मिलता है।

हमारे शरीर के किसी भी अंग में मोच आने या हल्की भीतरी चोट आने पर एक दाना बड़ा नीबू (चूख) का लें, उस नीबू के दाने को आग में पका लें। जब यह चूख (नींबू) अच्छी तरह से पक जाए, इसको दो भागों में काट लीजिये। फिर इसमें थोड़ा सा नमक मिलाएं। गरम-गरम आधे नींबू (चूख) से चोटिल भाग की  थपथपाकर सेकें। पीड़ित को लाभ पहुंचेगा।  हमारे यहाँ शरीर के किसी भी भाग में मोच आने पर यही विधि प्राथमिक उपचार के रूप अपनाई जाती है।

Sunita Sharma Lakhera

सहदेवी का पौधा (vernonia cinerea )

सहदेवी का छोटा सा पौधा हर जगह खरपतवार की तरह पाया जाता है . इसके नन्हें नन्हें जामुनी रंग के फूल होते हैं .इसका पौधा अधिक से अधिक एक मीटर तक ऊंचा हो सकता है . सहदेवी का पौधा नींद न आने वाले मरीजों के लिए सबसे अच्छा है ! इसे सुखाकर तकिये के नीचे रखने से अच्छी नींद आती है . इसके नन्हे पौधे गमले में लगाकर सोने के कमरे में रख दें !. बहुत अच्छी नींद आएगी !.
यह बड़ी कोमल प्रकृति का होता है . बुखार होने पर यह बच्चों को भी दिया जा सकता है . इसका 1-3 ग्राम पंचांग और 3-7 काली मिर्च मिलाकर काढ़ा बना कर सवेरे शाम लें . यह लीवर के लिए भी बहुत अच्छा है ! अगर रक्तदोष है , खाज खुजली है , त्वचा की सुन्दरता चाहिए तो 2 ग्राम सहदेवी का पावडर खाली पेट लें . अगर आँतों में संक्रमण है , अल्सर है या फ़ूड poisoning हो गई है , तो 2 ग्राम सहदेवी और 2 ग्राम मुलेटी को मिलाकर लें . केवल मुलेटी भी पेट के अल्सर ठीक करती है !