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Domestic Treatment - घरेलू उपचार, उत्तराखण्ड की महान औषधीय परम्परा

Started by पंकज सिंह महर, January 23, 2008, 04:10:25 PM

पंकज सिंह महर

साथियो,
       जैसा कि आप सभी जानते हैं कि औषधीय उपचार में उत्तराखण्ड का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। उत्तराखण्ड में ॠषि-मुनियों के पास औषधियों का अतुलित भंडार था और कुछ जानकारियां हमारे बुजुर्गों के पास भी थी, जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज वह घर बैठे स्थानीय औषधियों से कर देते थे। लेकिन उनकी विद्या उनके साथ ही चली गयी, आप सबने देखा होगा कि हमारे उत्तराखण्ड में झाड़-फूंक कर पैरालाइसिस तक सही हो जाता है। नाड़ी देखकर ही सटीक बीमारी वैद्य बता देते हैं।
      हम इस topic के अन्तर्गत कुछ बीमारियों के देशी नुस्खे share करेंगे, जो हमारी दादी-नानियां हमें बचपन में दिया करती थीं।

पंकज सिंह महर

खांसी का अचूक इलाज-
आधा चम्मच अदरक का रस एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सोते समय लेने से खांसी दूर हो जाती है।

पंकज सिंह महर

खांसी की एक दवा मेरी नानी बताती थी
अमरुद के १० पुष्ट पत्ते ४ गिलास पानी में डालकर उबालें, जब एक गिलास पानी रह जाये तो उसे छानकर पी लें, खांसी दूर।

पंकज सिंह महर

हरड़ चूसते रहने से भी खांसी में आराम मिलता है, काली मिर्च के दाने चूसने से भी खांसी में आराम मिलता है।

पंकज सिंह महर

किलमोडे़ की जड़ के छोटे पीस कर रात भर एक गिलास पानी मे भिगोकर सुबह पीने से मधुमेह (डायबीटीज) में आराम मिलता है।

पंकज सिंह महर

गहत की दाल का रस पीने से पथरी (स्टोन) की समस्या खत्म हो जाती है।

पंकज सिंह महर

हींग या गन्द्रयाणी खाने से गैस की समस्या से बचा जा सकता है।

पंकज सिंह महर


पंकज सिंह महर

सरसों के तेल में दो नींबू निचोड़ कर गरम कर सिर में लगाने से रुसी (पात) खत्म हो जाती है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

महर जी,

बहुत की अच्छा विषय है.. ..

मैंने देखा है कन्द्ली और सुयूना जिसे बिच्छू घास से भी जाना जाता है. इसे मोओच आने भी इस्तेमाल करते है जिसे सूजन कम होता है.