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Good Work(Keep It Up) - शाबास

Started by हलिया, April 01, 2008, 03:58:34 PM

सत्यदेव सिंह नेगी

जीवन सरल बनाएं
आधुनिक जीवन अत्यधिक असंतोषजनक बनता जा रहा है। यह हमें प्रसन्नता नहीं प्रदान करता। इसमें बहुत सी जटिलताएं हैं, बहुत सी इच्छाएं हैं। हम अत्यधिक आवश्यकताओं से स्वयं को मुक्त करें और ईश्वर के साथ अधिक समय व्यतीत करें। अपने जीवन को सरल बनाएं। अपने अंतर में, अपनी आत्मा से प्रसन्न रहें। हम अपने बचे हुए समय को ध्यान में लगाएं, जो ईश-संपर्क प्रदान करता है तथा शांति एवं प्रसन्नता रूपी जीवन की वास्तविकताओंकी प्राप्ति में सच्ची प्रगति प्रदान करता है।
अपना जीवन सरल बनाएं और उतने में ही आनन्द लें जो हमें ईश्वर ने दिया है। अपना खाली समय स्वाध्याय में लगाएं। ईश्वर की मौन वाणी समस्त प्राणी-जगत का आधार है,धर्म-ग्रन्थों के माध्यम से और हमारे अंत:करण के माध्यम से सदा हमें पुकारती रहती है। चिरस्थायी आनंद प्राप्ति के लिए भौतिक धन-संपदा पर विश्वास करना उचित नहीं है। सरल जीवन के द्वारा हमें सर्वसंतुष्टिदायकप्रसन्नता प्राप्त होती है। सादगी का अर्थ है इच्छाओं और आसक्तियोंसे मुक्त रहना और आंतरिक रूप से परमानन्द में मग्न रहना। सरलता से जीवनयापन करने के लिए हमें प्रबल मन और अदम्य इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हम अभाव में रहें, बल्कि हम उसी के लिए प्रयास करें और उसी में संतोष करें जिस चीज की हमें वास्तव में आवश्यकता है। जब हमारी अंतरात्मा मानसिक रूप से सांसारिक वस्तुओं का परित्याग कर देती है, तो हमें स्थायी रूप से संतुष्टि करने वाले आनंद की प्राप्ति होने लगती है। जब हम ईश्वर की इच्छा के अनुसार अपने कर्मो का चयन करते हैं, तो जीवन सरल हो जाता है। यदि हम अपना मन निर्मल रखें, तो हम सदा ईश्वर को अपने साथ पाएंगे। हम अपने प्रत्येक विचार में उनकी झलक देखेंगे। एक निर्मल हृदय निर्मल विचारों का परिणाम होता है। हम स्वयं एक छोटे बच्चे के समान सरल बनकर,आसक्ति रहित,सच्चा एवं भोला बनकर ब्रह्म चैतन्य प्राप्त करने की चेष्टा करके उस दिव्य अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं। भक्त अंत: प्रज्ञा से परिपूर्ण हो जाता है जो शिशु समान निष्कपट होता है, संशय रहित होता है, सत्यनिष्ठा से पूर्ण होता है तथा विनम्र एवं ग्रहणशील होता है। ऐसा भक्त ईश्वर को प्राप्त करता है।

सत्यदेव सिंह नेगी

समर्पण का भाव
जन्म और मृत्यु के अंतराल का नाम जीवन है। यह जीवन आदमी को बडे सौभाग्य से मिलता है। आदमी के लिए यह स्वर्णिम अवसर है, पर जीवन पाकर मनुष्य बहक जाता है, जबकि जीवन पाने का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य है आवागमन से मुक्ति पाना। आदमी यहां एषणाओंकी पूर्ति में ऐसा फंस जाता है कि उसे अपना लक्ष्य ही नहीं याद रहता। कोई पुत्र व्यामोह में, कोई वित्त के अर्जन में अनैतिक कार्यो की ओर बढ जाता है। जीवन का भयावह पक्ष है लोकेषणा।इन व्यामोहोंके कारण काम, क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह से ग्रस्त होकर पुनरपि जननंपुनरपि मरणंकी यात्रा करता रहता है।
इस यात्रा से बचने के उपाय सभी धर्म युगों से देते आए हैं। ऋषि, मुनि, संत साधन बताते चले आ रहे हैं। परमात्मा को पाने हेतु पहला सोपान समर्पण कहा गया है। बहुत से उदाहरण हैं जिन्होंने समर्पण भाव से शरणागत होकर अपने जीवन को कृतकृत्यकर लिया है। समर्पण से जितने मानसिक विकार होते हैं स्वयं ही विसर्जितहो जाते हैं। आदमी अंतर्मुखी होकर अपनी आत्मा को, अपने को जान लेता है। जब आत्म साक्षात्कार की मनोदशा साकार होती है तब आदमी पूर्णरूपेण अपने को परमचेतना,परमात्मा को अर्पित कर देता है। समर्पण भाव से ही परमात्ममिलन संभव है। समर्पण भाव से ही राम की सेवा में रत हनुमान भारत के सर्वमान्य पूजनीय हो गए। संत तुलसीदास जी राम की शरणागत होकर- सीय राम मैं सब जग जानी के प्रति समर्पित होकर विश्व कवि महान संत हो गए। मीराका समर्पण अपने गिरधर गोपाल के प्रति जग जाहिर है- मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरोन कोई- पांव में घुंघरू बांध मीरानाचती रही। अत:जन्म मरण से मुक्त होने का सरल उपाय है अपने को ईश्वर की शरण में समर्पित कर देना। परमात्मा को भक्ति से पाया जा सकता है युक्ति से नहीं। यदि हम ईश्वर के प्रति समर्पित हैं तो प्रभु हमारा कल्याण अवश्य करेंगे। हम जितनी ही अपनी श्रद्धा को बलवती करेंगे उतना ही हम अपने आत्मबल को बलवान बनायेंगे। हमारी श्रद्धा जितनी ही सजल होगी हम अपने लक्ष्य के उतने ही निकट होंगे, चाहे वह प्रभु मिलन की बात हो या किसी आत्मीयजनको पाने का सुख। किसी के प्रति असीम आदर का प्रतीक है श्रद्धा, जिसमें समर्पण भी समाहित है।

शाबास नेगी जी बहुत अच्छा ज्ञान कराया है यह आपने

विनोद सिंह गढ़िया

बागेश्वर के मोहित भट्ट को मिला अमूल विद्यार्थी अवार्ड

बागेश्वर। गुजरात मिल्क फेडरेशन लिमिटेड आनंद द्वारा बागेश्वर जनपद के छात्र मोहित भट्ट को अमूल विद्या श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हे यह अवार्ड बुधवार को राजकीय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ने प्रदान किया।

गुजरात मिल्क फेडरेशन लिमिटेड द्वारा प्रतिवर्ष यह अवार्ड प्रदान किया जाता है। इस वर्ष विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट रहने पर राजकीय इंटर कालेज बागेश्वर के छात्र मोहित भट्ट को पुरस्कार प्रदान किया। मोहित ने वर्ष 2009 की हाईस्कूल परीक्षा में 73 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। फाउंडेशन की ओर से भेजे गए इस अवार्ड को प्रधानाचार्य प्रमोद तिवारी ने मोहित को प्रदान किया। एक सादे समारोह में पुरस्कार प्रदान करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि वर्तमान युग प्रतियोगिता का युग है तथा प्रत्येक बच्चे को ऊंचे लक्ष्य तय कर मेहनत करनी चाहिए।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6623436.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Ek Chalis ki last Local Film by sanjay Khanduri ... was recently graced   with the Silver Palm Award in Mexico International Film Festival this   year.
 
  Says Khanduri, "Ek Chalis... was selected amongst films   from 20 different countries and has won in the category of 'Excellence   in filmmaking'. I and my producers 'Quartet Films' are very proud and   thankful to the international jury at festival for recognizing our film   at such high stature. We see this recognition purely as God's gift as we   had never attempted to send our film to different festivals and had   hired no one to promote our film abroad."
 
  From India to Mexico,   how did it all happen? "Mexico has a very similar tradition and culture   as we Indians", he smiles, "I am sure this is why the film has connected   a chord there."http://www.bollywoodhungama.com/news/2010/08/05/14435/index.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हेमलता राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित


पिथौरागढ़। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांस की प्रधानाध्यापिका हेमलता जोशी   को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के   लिए चुने जाने पर जिले के तमाम शिक्षकों ने खुशी जताई है। श्रीमती जोशी   पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस के रोज दिल्ली में राष्ट्रपति से यह पुरस्कार   प्राप्त करेंगी।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6654847.html

सत्यदेव सिंह नेगी

  डा. राजन गुप्ता को मारीशस से बुलावा
    ऋषिकेश। ऋषिकेश आटोनोमस पीजी कालेज के डा. राजन कुमार गुप्ता मारीशस में 16 सितंबर से होने वाली तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस आफ इनवायरमेंटल रिसर्च में शिरकत करेंगे। कई अंतरराष्ट्रीय गोष्ठियों में सूक्ष्मजीवों पर शोधपत्र प्रस्तुत कर चुके डा. गुप्ता को इस बार मारीशस से बुलावा आया है। डा. गुप्ता ने बताया कि तीन दिवसीय गोष्ठी में वह सूक्ष्म जीवों द्वारा आग्रेनिक फारमिंग विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।

Devbhoomi,Uttarakhand

                                          कानकून में लहराएगा उत्तराखंड का परचम                                        =======================



                                कानकून में लहराएगा उत्तराखंड का परचम                                                                                                                                           

इस बार कानकून (मेक्सिको) विश्व वातावरण महासम्मेलन में उत्तराखंड का परचम लहराने वाला है।
मुख्यमंत्री  डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने इसकी मजबूत बुनियाद रख दी है। तब तक  उत्तराखंड अकूत वन संपदा एवं पर्यावरण संतुलन के लिए किये गये तमाम अभिनव  प्रयोगों में एक मुकाम हासिल कर लेगा। इन दिनों इन अभिनव प्रयोगों की  उच्चस्तर पर समीक्षा हो रही है और धरातल पर परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

मुख्यमंत्री  हरित योजना, स्पर्श गंगा, हर्बल गार्डन और पिरूल के व्यावसायिक दोहन के  लिए राज्य के तमाम इलाकों में तेजी से काम हो रहा है। इससे महासम्मेलन तक  उत्तराखंड 50 लाख टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन को कम कर भारत समेत दुनिया  के तमाम राज्यों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर देेगा। यही नहीं  ग्लेशियरों को पिघलने से बचाने के लिए भोज के जंगल विकसित करने की पहल भी  महासम्मेलन में उत्तराखंड को वाहवाही मिल सकती है।

उत्तराखंड के 53  हजार 657 वर्ग किमी क्षेत्रफल में 35 हजार 651 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जंगल  का है। निर्विवाद रूप से दुनिया के पर्यावरण संतुलन के लिए उत्तराखंड की  महत्वपूर्ण भूमिका है। अब मुख्यमंत्री डा. निशंक इस भूमिका में एक नये  'हरित अध्याय' जोड़ने जा रहे हैं। यह अध्याय उत्तराखंड को राष्ट्रीय फलक पर  एक नया मुकाम देने जा रहा है।

पर्यावरण एवं वन सलाहकार समिति के  उपाध्यक्ष अनिल बलूनी ने इस संबंध में बताया कि राज्य के सभी जनपदों में  उनकी मौलिक पहचान के तहत पौधरोपण किया जा रहा है। इसमें हल्दू, देवदार,  बांज से लेकर तमाम छायादार पौधे लगाये जा रहे हैं। अब तक 65 लाख पौधे रोपे  जा चुके हैं। सीएम की महत्वाकांक्षी 'स्पर्श गंगा' योजना यूरोप की 'राइन'  और इंग्लैंड की 'थेम्स' नदी में चले अभियान से आगे निकल गई है।

उन्होंने  बताया कि यूरोप और इंग्लैंड में नदियों को साफ सुथरा करने के लिए केवल  सरकारी अभियान चला था, जबकि उत्तराखंड में महिला और युवक मंगल दलों की  भागीदारी से स्पर्श गंगा अभियान एक जनांदोलन के रूप में सामने आया है।  इससे लोगों में गंगा में मिलने वाली हजारों नदी-नाले-गदेरों को साफ-सुथरा  रखने की संस्कृति विकसित हुई है। गंगा के किनारे रीवर वन विकसित किया जा  रहा है।

http://www.samaylive.com/regional-hindi/uttarakhand-hindi/99618.html

Vinod Jethuri


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

                छवि को राष्ट्रीय वीरता   पुरस्कार देने का प्रस्ताव
          उत्तरकाशी, जागरण कार्यालय: जिला पंचायत की बैठक में गुलदार से   मुकाबला कर अपनी और अपनी दो बेटियों की जान बचाने वाली छवि देवी को   राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिलाए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। डुंडा   क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्या पुष्पा गौतम ने सदन में यह प्रस्ताव पेश   किया था।
इसी वर्ष 18 जुलाई को खट्टूखाल गांव की 37 वर्षीय महिला छवि देवी   पत्‍‌नी सुमेर सिंह गांव से चार किमी दूर अपनी छानी में सोई हुई थी। रात   करीब एक बजे गुलदार छानी में घुसा और छवि देवी को गर्दन से पकड़ कर घसीटता   हुआ बाहर तक ले आया, लेकिन इस महिला ने हिम्मत से काम लेते हुए गुलदार के   पेट में लात मारने के साथ ही दोनों हाथों से उसका जबड़ा पकड़कर चीर दिया। इस   प्रतिरोध से बौखलाया गुलदार अपने शिकार को वहीं छोड़कर भाग गया। बुरी तरह   जख्मी छवि देवी अपनी पांच भैंसों को छानी में सुरक्षित बांधकर रात को ही   अपनी दोनों बेटियों को लेकर गांव पहुंची। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि   उत्तरकाशी के बाद देहरादून से भी उसे रेफर कर पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती   कराया गया। इस साहसी महिला को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिलाने का प्रस्ताव   जिला पंचायत की बैठक में पेश करते हुए सदस्य पुष्पा गौतम ने कहा कि छवि को   इलाज के लिये वन विभाग की ओर से छवि देवी को उपचार के लिये पांच हजार   रुपये की सहायता के रूप में प्रदान किये गए। इसमें अधिकांश धनराशि विभागीय   औपचारिकता पूर्ण करने में ही समाप्त हो गई। सदन में मौजूद सदस्यों ने इस   प्रस्ताव का स्वागत किया और अपनी सहमति जताई। जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण   सिंह चौहान ने माना कि पहाड़ की महिलाएं अपनी रोजमर्रा के जीवन में हर वक्त   संघर्ष करती हैं। इसीलिये इस तरह के संकट आने पर वह डटकर सामना करने में   सक्षम हो जाती हैं।
   http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6785898.html