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Good Work(Keep It Up) - शाबास

Started by हलिया, April 01, 2008, 03:58:34 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

मूर्तिकार कैलाश को मिला प्रदर्शनी में न्यौता
   अल्मोड़ा: राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश ने अल्मोड़ा के मूर्ति शिल्पी कैलाश सिंह को दिसंबर माह में होने वाले 29वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए अपनी कृति प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया है। अल्मोड़ा निवासी कैलाश सिंह एल्यूमीनियम के जरिये ऑरिजिन-13 शीर्षक की कृति को स्वीकृति मिली है। राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश की सचिव डॉ.बीना विद्यार्थी के प्रेषित पत्र में कहा गया है कि 29वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए उनके द्वारा बनाई गई मूर्ति ऑरिजिन-13 माध्यम एल्यूमीनियम की मूल कृति को पुरस्कार के लिए जूरी के सम्मुख रखा जाएगा। कैलाश सिंह की कृति को 29वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में स्थान मिलने पर डॉ.शेखर जोशी, डॉ.संजीव आर्या, डॉ.सोनू द्विवेदी, सुनील कुमार, राजेश मौर्य, डॉ.संतोष बिष्ट ने शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।


jagran news

   

Devbhoomi,Uttarakhand

  विदेशों तक पहुंची गौरव की तबले की धुन
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तबला वादन के क्षेत्र में नई पहचान के रूप में उभर रहे जिले के गौरव मैठाणी अब तक देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। दो वर्ष के छोटे अंतराल में गौरव ने कई उपलब्धियां अपने नाम कर जिले व राज्य की शान को ऊंचा किया है।

ऊखीमठ ब्लाक के अंतर्गत ब्राह्मण खोली निवासी 27 वर्षीय गौरव मैठाणी एक मध्यम वर्गीय परिवार से है। पिता ऋषिकेश में फार्मेसिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। प्राइमरी शिक्षा ऊखीमठ में पूरी करने के बाद जूनियर से लेकर इंटर की पढ़ाई पूर्णानंद इंटर कालेज ऋषिकेश में की। इसके बाद संस्कृति विषय से स्नातक की डिग्री गौरव ने स्वार्गाश्रम ट्रस्ट महाविद्यालय ऋषिकेश से प्राप्त की। इसके बाद तबला वादन दिलचस्पी होने से 2000 से 2006 तक अनूप संगीत साधन केन्द्र ऋषिकेश से प्रभाकर उपाधि की उपाधि हासिल की।

तबला वादन में निपुण होने के बाद वर्ष 2007 में गौरव ने संगीत की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद इसी वर्ष वह रामा कैसेट कंपनी दिल्ली पहुंचे और गढ़वाल एलबम से अपनी कला की शुरुआत की। वर्ष 2009 तक वह रामा, टी-सीरीज व नीलम कैसेट के बैनर तले गढ़वाल, हिंदी, पंजाबी, गुजराती सहित 250 एलबमों में काम किया। इस बीच उन्होंने दूरदर्शन चैनल पर सुबह-सवेरे कार्यक्रम संगीत कार्यक्रम में भी हिस्सेदारी की।

वर्ष 2010 में गौरव पुन: ऋषिकेश वापस लौटे और सिन शिवा चैरिटेबिल ट्रस्ट ऋषिकेश से जुड़े। ट्रस्ट द्वारा 7 नवंबर को गौरव की बेहतर प्रतिभा को देखते हुए जर्मनी, पेरिस, ज्यूरिक, बौस्टरलैण्ड व स्विटजरलैंड में आयोजित कार्यक्रमों के लिए चयनित किया। एक माह के दौरे में गौरव ने विदेशों में अपनी तबले की धुन की छाप छोड़ दी।
अब तक की उपलब्धियां-

1. वर्ष 2007-09 तक दिल्ली में रामा, टी-सीरीज, नीलम कैसेट में 250 एलबमों में काम किया।
2. गढ़वाली कैसे लबरा छोरी, सुभागा, रुकमा व हिंदी भजन एलबम हरे कृष्णा सहित पंजाबी, गुजराती एलबमों में जुड़े।
3. वर्ष 2008 में दिल्ली में दूरदर्शन चैनल पर सुबह-सबेरे कार्यक्रम हिस्सेदारी

4. नवंबर से दिसंबर 2010 तक जर्मनी, पेरिस, ज्यूरिक, बौस्टरलैण्ड व स्विटजरलैंड देशों में कार्यक्रमों भाग लिया।
5- अप्रैल 2010 में कलश साहित्य संस्था द्वारा सम्मानित। जिसके बाद इस दिसंबर माह में गुप्तकाशी में आयोजित चौदहवें खेल एवं सांस्कृतिक प्रतिभा सम्मान समारोह में खेल एवं आपदा प्रबंधन मंत्री खजान दास द्वारा सम्मानित किया गया।

'मेरी बचपन से ही तबला वादन में खासी दिलचस्पी रही है और उम्मीद के मुताबिक मुझे बेहतर मंच मिला है। परिजनों, क्षेत्रीय जनता व गुरुजनों के आशीर्वाद से ही मैं यहां तक पहुंचा हूं और भविष्य में प्रदेश व देश भर में अलग पहचान बनाना चाहता हूं।
गौरव मैठाणी, तबला वादक'

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7101929.html


विनोद सिंह गढ़िया


बागेश्वर के हरीश कोरंगा ने झटके दो स्वर्ण पदक

अल्मोड़ा (नरसिंहबाड़ी) निवासी हरीश कोरंगा ने पुणे में आयोजित जूनियर बालकों की राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। कोरंगा ने 3000 मीटर दौड़ 8 मिनट 41 सकेंड में पूरी की। 1500 मीटर की दौड़ चार मिनट में पूरी करके उसने राष्ट्रीय स्कूली खेलों का नया रिकार्ड भी कायम किया।
कोरंगा के कोच अंतरराष्ट्रीय धावक और ऊधमसिंहनगर के जिला क्रीड़ाधिकारी सुरेश चंद्र पांडे ने बताया कि पुणे में चल रही राष्ट्रीय स्कूली एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरीश कोरंगा ने सोमवार को 3000 मीटर और मंगलवार को 1500 दौड़ में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके दो स्वर्ण पदक झटक लिए। हरीश ने फोन पर बताया कि उसे क्रास कंट्री दौड़ में भी स्वर्ण पदक की उम्मीद है। हरिद्वार में हुई प्रदेश स्तरीय स्कूली एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उसने चार स्वर्ण पदक जीते थे।
मूल रूप से शामा भनार (बागेश्वर) के निवासी पूर्व सैनिक बलवंत सिंह कोरंगा का बेटा हरीश ऊधमसिंहनगर के जनता इंटर कालेज में दसवीं में पढ़ रहा है। नौंवी तक की पढ़ाई उसने जीआईसी अल्मोड़ा में की।

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विनोद सिंह गढ़िया

बेड़ू पाको बारो मासा' की धुन पर थिरकेंगे राजस्थानी
बागेश्वर। मन में यदि कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो सफलता उसके चरण चूमती है। भयेड़ी गांव के युवा बांसुरी वादक मोहन चंद्र जोशी इन्हीं मेहनतकश लोगों में से एक हैं। बचपन से मुरली बजाने के शौकीन इस युवक ने क्षेत्र के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में बांसुरी बजाकर विशेष पहचान बनाई है। वह आगामी 12 से 19 जनवरी तक उदयपुर राजस्थान में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में शामिल होने जा रहे हैं। मोहन ने कहा कि वह इस प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व कर देशवासियों को बेड़ू पाको बारोमासा समेत कई धुनें सुनाएंगे।
भयेड़ी गांव निवासी हरीश जोशी के 25 वर्षीय पुत्र मोहन को बांसुरी बजाने का शौक जंगल में गाय चराने के दौरान जागा। वह 14 वर्ष की आयु में अपनी दीदी के साथ उत्तरायणी मेले में आए। उन्होंने तब एक दुकान से 10 रुपये में मुरली खरीदी। वह धीरे-धीरे बांसुरी से सुर निकालने लगे। मुरली से वह भगवान श्रीकृष्ण के भजन, झोड़ा, चांचरी तथा गोपाल बाबू के गीतों के धुन सुनाया करते थे। इस समय वह भारतखंडे संगीत महाविद्यालय लखनऊ से मुरली वादन पर विशारद कर रहे हैं। वह संस्कृति विभाग के तत्वावधान में तीन जनवरी 2009 से गंजापुर गोपाल पुल बीच फैस्टिबल, 14 जनवरी 2009 में ताज महोत्सव आगरा में अपनी मुरली की फनकार पेश कर चुके हैं। राज्य स्थापना दिवस के मौके पर बालावाला देहरादून में युवा कल्याण विभाग के पाइका कार्यक्रम के उन्होंने जिले का प्रतिनिधित्व किया, इसमें उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
मोहन ने बताया कि वह 12 से 19 जनवरी को राजस्थान में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रतियोगिता में शिवरंगनी, राग बागेश्वरी तथा कुमाऊंनी के मनमोहक गीतों में 'बेड़ू पाको बारो मासा' समेत कई गीतों की धुन सुनाकर देशवासियों में उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू कराएंगे। मालूम हो कि जिले में उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है, लेकिन मेला समिति तथा प्रशासन की नजर इस उदीयमान कलाकार की तरफ आज तक नहीं पड़ी है।

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विनोद सिंह गढ़िया

आईपीएल में खेलेगा पिथौरागढ़ का उन्मुक्त
दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ हुआ करार
पिथौरागढ़। जिले के खड़कू भल्या गांव के मूल निवासी और दिल्ली रणजी टीम के युवा खिलाड़ी उन्मुक्त चंद ठाकुर अब आईपीएल के चतुर्थ संस्करण में दिल्ली डेयरडेविल्स की ओर से खेलते नजर आएंगे। हाल ही में उन्मुक्त ने दिल्ली डेयरडेविल्स से करार किया है। अपनी फेवरेट टीम के साथ करार को नए साल का नायाब तोहफा मानने वाले उन्मुक्त इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित हैं।
दिल्ली में स्कूली शिक्षक भरत चंद ठाकुर के बेटे उन्मुक्त के अनुसार टी-20 टूर्नामेंट के इस चौथे संस्करण के लिए दूसरी फ्रेंचाइजी ने भी उनसे संपर्क किया था लेकिन उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स को तरजीह दी क्योंकि दिल्ली की ओर से खेलना ही उनका सपना था। पहले दिल्ली की अंडर-19 टीम और फिर रणजी टीम की ओर से खेलते हुए उन्मुक्त का प्रदर्शन शानदार रहा। रणजी में हालांकि उन्हें सभी मैच खेलने का मौका नहीं मिला लेकिन अपने चौथे प्रथम श्रेणी मैच में उन्होंने शतक लगाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। इसी दौरान खिलाड़ियों की कमी की वजह से दिल्ली डेयरडेविल्स ने कुछ प्रैक्टिस मैचों में उन्मुक्त समेत कुछ अन्य खिलाड़ियों को बुलाया। इस युवा क्रिकेटर ने मौका नहीं चूका। अपने प्रदर्शन से कोच ग्रेग शेफर्ड और टीम मैनेजर आशीष कपूर को प्रभावित कर लिया।
उन्मुक्त अब वीरेंद्र सहवाग और टीम के विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। कहते हैं कि एक से एक अनुभवी खिलाड़ियों का साथ रोचक होगा, बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आईपीएल की तैयारी के साथ उन्मुक्त की प्राथमिकता में मार्च-अप्रैल में होने जा रही 12वीं की परीक्षा भी है। कहते हैं कि खेल के साथ पढ़ाई पर भी वह पूरा ध्यान देंगे।

http://epaper.amarujala.com/thankyou.php?sflagOut=1

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Pratyush Joshi of Uttarakhand

Bravery Awards 2010 announced for 23 Children
For the year 2010, 23 children names have been announced for bravery awards 2010 this afternoon in the national capital. The children who won the bravery awards includes fourteen boys and 9 girls. The awards will be given to them in special function at Delhi.
The Geeta Chopra award goes to 13 year old Jasmine of Kerala for her exemplary act of bravery. She saved two children from drowning. The Sanjay Chopra award goes to Pratyush Joshi of Uttarakhand for saving her sister from a leopard.
   

These awards will be presented ahead of the Republic Day celebrations. These childrens will be one of the main attactions at the Republic Day 2011.

http://www.samachartoday.com/bravery-awards-2010-announced-for-23-children/14907

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नयी दिल्ली : तेरह वर्षीय श्रुति लोधी ने गत वर्ष उत्तराखंड में पलक झपकते ही अपने दो मित्रों की जान बचाने के लिए उन्हें दूर ढकेल दिया लेकिन स्वयं को एक पेड के नीचे आने से नहीं बचा सकी.     

नवम्बर 2009 में राजस्थान के एक गांव में छह वर्षीय चम्पा कंवर ने अपनी झोपडी में लगी आग में घिरी अपनी बहन को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. हालांकि इस प्रयास के बावजूद वह अपनी सात वर्षीय बहन और स्वयं का जीवन नहीं बचा सकी.     

दोनों ही वीर बालिकाओं की वीरता का सम्मान करते हुए उन्हें मरणोपरांत वर्ष 2010 का राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देने का फ़ैसला किया गया है.     

श्रुति देहरादून में भारतीय मधुमेह संस्थान और पर्यावरण निगरानी संस्था द्वारा आयोजित 'रन टू लीव' दौड में बडी संख्या में शामिल बच्चों के साथ हिस्सा ले रही थी. दौड के दौरान अचानक एक पेड श्रुति पर गिर पडा.

लेकिन उसने इसके बावजूद चिल्लाकर अन्य बच्चों को बचने के लिए सावधान करने के साथ ही अपने सामने के दो बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें दूर धकेल दिया.

http://www.prabhatkhabar.com/news/68243.aspx

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 सेना में अफसर बनना चाहता है बहादुर प्रियांशु       
नाम: प्रियांशु जोशी, उम्र: 12 वर्ष कक्षा: सातवीं, स्कूल: केवी आईएमए। देखने में तो यह एक स्कूली बच्चे का सामान्य सा परिचय है, लेकिन प्रियांशु का परिचय यहीं तक सीमित नहीं है। इस नन्हें बालक ने इस छोटी सी उम्र में जो हौसला और साहस दिखाया उससे बड़े-बड़े भी दांतों तले अंगुली दबा दें। उसने निहत्थे होते हुए भी गुलदार से संघर्ष कर अपनी बहन को उसके चुंगल से बचाया। उसके इस अदभ्य साहस के लिए उसे संजय चोपड़ा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा गया है। 26 जनवरी को वह गणतंत्र दिवस परेड में भी शिरकत करेगा।
उत्तराखंड को वीरों की भूमि ऐसे ही नहीं कहा जाता। यह के बच्चे-बच्चे में वीरता भरी हुई है। इसी की एक मिसाल है प्रियांशु जोशी। प्रियांशु के पिता राजकुमार जोशी रिटायर फौजी हैं। उनकी मां अराधना जोशी का एक दुर्घटना में वर्ष 2004 में देहांत हो चुका है। प्रियांशु का सपना फौज में अफसर बनकर देश की सेवा करना है। प्रियांशु की बहादुरी की दास्तां एक जुलाई 2009 की है। प्रियांशु अपनी बड़ी बहन प्रियंका के साथ देहरादून के पौंधा स्थित अपनी नानी के घर से प्रेमनगर स्थित केवी आईएमए स्कूल के लिए निकला। यहां से कोई वाहन न मिलने के चलते भाई-बहन मोटरसाईकिल से लिफ्ट लेकर स्कूल को पहुंचे। वह प्रेमनगर में अमिताभ टेक्सटाइल के पास उतरे। यहां से स्कूल की दूरी बामुश्किल एक किमी है। दोनों ने जैसे ही स्कूल की सड़क पर चलना शुरू किया तो प्रियांशु की नजर दूर सड़क के किनारे घात लगाए एक गुलदार पर पड़ी। उसने अपनी बहन को इस बारे में कुछ नहीं बताया और उसका हाथ पकड़कर तेजी से स्कूल की ओर दौड़ पड़ा। यह देख कर गुलदार ने भी एक पोल पर चढ़कर प्रियंका पर छपट्टा मार दिया। प्रियंका नीचे गिर पड़ी। गुलदार के दांत उसकी गर्दन पर घुस चुके थे और उसका कान भी बुरी तरह घायल हो गया। यहां नन्हे प्रियांशु ने हिम्मत नहीं हारी। वह अपनी बहन के उपर लेट गया और अपने बैग व कोहनी से गुलदार पर प्रहार करने लगा। बाघ से लड़ते हुए वह भी लहूलुहान हो गया। इस बीच दूर से एक फौजी गाड़ी आई। उसने बच्चों को गुलदार से लड़ते देख लगातार हॉर्न बजाया। इससे गुलदार घबरा गया और प्रियांशु को पंजा मार कर भाग गया। इससे प्रियांशु के माथे पर गहरी चोट आई लेकिन वह अपनी बहन को बाघ के चुंगल से बचाने में कामयाब रहा।


(Source http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7227072.html)

Devbhoomi,Uttarakhand

मुकेश सराहनीय सेवा सम्मान से होंगे सम्मानित
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   अल्मोड़ा: स्थानीय अभिसूचना इकाई के निरीक्षक मुकेश कुमार पंत को उत्कृष्ट कार्यो के लिए सराहनीय सेवा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी पुलिस अधीक्षक पूरन सिंह रावत ने दी।
उन्होंने बताया कि श्री पंत को यह सम्मान पिथौरागढ़ में नियुक्ति के दौरान 1998 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के अवसर पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के पुत्र विशाल गुजराल की वीआईपी ड्यूटी की थी। जिसमें वह मालपा के निकट हुए भूस्खलन में उनकी प्राण रक्षा करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इसके लिए मुकेश कुमार पंत को उत्कृष्ट व सराहनीय सेवा के लिए सराहनीय सेवा सम्मान प्रदान किया जा रहा है। यह सम्मान गणतंत्र दिवस के मौके पर हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम अल्मोड़ा में प्रदान किया जाएगा।
   
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7235203.html

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शिशु मंदिर को जमीन व मकान दिया दान में

कपकोट: दूरस्थ गांव नामती चेटाबगड़ निवासी मोहन सिंह कार्की ने अपने दिवंगत पिता खड़क सिंह कार्की के नाम पर सरस्वती शिशु मंदिर को 1 नाली जमीन व 4 कमरों का मकान विद्या भारती को दान में दिया है। शिशु मंदिर भराड़ी के प्रधानाचार्य व संकुल प्रमुख भगवत सिंह कोरंगा ने बताया कि उक्त विद्यालय में 1 से 5 तक की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। गांव में आयोजित बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में बालक सिंह कोश्यारी, लछम सिंह, कुंदन सिंह, गोविंद सिंह, खीम राम आदि मौजूद थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7339698.html