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Chaitra Navratras - चैत्र नवरात्र : नौर्त- मां दुर्गा के नौ रुपों

Started by हलिया, April 04, 2008, 12:55:44 PM

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हलिया

बिष्ट जी, नवरात्र आपके लिये मंगलमय हों और मां का आशिर्वाद आपको प्राप्त हो। जय माता की।

Quote from: मोहन सिंह बिष्ट/THET PAHADI on April 07, 2008, 03:09:32 PM
wah da wah yehi mata ke nau rupo ke darshan ho gaye hai

jai mata di

पंकज सिंह महर



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पंकज सिंह महर

चंद्रघंटा
मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम 'चन्द्रघंटा' है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन (आज) इन्हीं के विग्रह की उपासना की जाती है। इनका यह रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनकी कृपा से समस्त पाप और बाधाएं विनष्ट हो जाती हैं।

मां चंद्रघंटा: पूजा से मिटती बाधाएं

तीसरे नवरात्र में मां चंद्रघंटा के विग्रह का पूजन होता है। माथे पर अर्धचंद्र के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि मां युद्ध के लिए उद्यत हैं। शांति और कल्याण के स्वरूप वाली इस देवी का रंग स्वर्ण के समान है। चंद्रघंटा की कृपा से साधक अलौकिक वस्तुएं प्राप्त कर सकता है। इनके ध्यान से कल्याण और सद्गति प्राप्त होती है। इनकी पूजा से पाप और बाधाएं मिट जाती हैं। इनकी पूजा का मंत्र है:

पिंडज प्रवारुढ़ा चंडको पास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मत्थां चंद्रघंटेति विश्रुता।।

पंकज सिंह महर

मां दुर्गा के नौ रुप

1. शैलपुत्री‍
माँ दुर्गा का प्रथम रूप है शैलपुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म होने से इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्र की प्रथम तिथि को शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इनके पूजन से भक्त सदा धनधान्य से परिपूर्ण रहते हैं।

2. ब्रह्मचारिणी

माँ दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। माँ दुर्गा का यह रूप भक्तों और साधकों को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है।

3. चंद्रघंटा

माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है। इनकी आराधना तृतीया को की जाती है। इनकी उपासना से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। वीरता के गुणों में वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश होता है, आकर्षण बढ़ता है।

4. कुष्मांडा

चतुर्थी के दिन माँ कुष्मांडा की आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है।

5. स्कंदमाता

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन आपकी उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी है। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती है।

6. कात्यायनी

माँ का छठा रूप कात्यायनी है। छठे दिन इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है।

7. कालरात्रि

नवरात्रि की सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, तेज बढ़ता है।

8. महागौरी

देवी का आठवाँ रूप माँ गौरी है। इनका अष्टमी के दिन पूजन का विधान है। इनकी पूजा सारा संसार करता है। पूजन करने से समस्त पापों का क्षय होकर कांति बढ़ती है। सुख में वृद्धि होती है, शत्रु-शमन होता है।

9. सिद्धिदात्री

माँ सिद्धिदात्री की आराधना नवरात्र की नवमी के दिन की जाती है। इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो माँ की कृपा का पात्र बनता ही है। वाकसिद्धि व शत्रु नाश हेतु मंत्र भी बता दें। इनका विधि-विधान से पूजन-जाप करने से निश्चित फल मिलता है।

शत्रु नाश हेतु :- ॐ ह्रीं बगुलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हामकीलय बुद्धिविनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।
वाकसिद्धि हेतु :- ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नम: ॐ वद बाग्वादिनि स्वाहा

हलिया

अन्यारैकि आदत पड़ि जैं जकैं, उनूकैं उज्याव् लै पिणांApr 08, 02:10 am

अल्मोड़ा। नव संवत्सर प्रतिपदा के अवसर पर लीला खोलिया के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में नगर के अनेक वरिष्ठ व उदीयमान कवियों ने भागीदारी की। गोष्ठी की शुरूआत उदय किरौला ने सरस्वती वंदना से की।

गोष्ठी में गोविन्द बल्लभ बहुगुणा ने सामाजिक सरोकारों से विमुख होते समाज पर कटाक्ष करते हुए कुमाऊंनी कविता पेश की-

'काथ क्वीड़ सब टीवी क् भितेर फैगे,

कान भितेर मोबाइल न्हैगे।'

नीरज पंत ने कहा-

'किसी रोज कोई कबाड़ी आकर ले जाएगा तुम्हारी नदी को, तुम देखते रहना।'

कुमाऊंनी के वरिष्ठ कवि रतन सिंह किरमोलिया ने अपनी व्यंग रचना कुछ इस प्रकार कही-

'अन्यारैकि आदत पड़ि जैं जकैं, उनूकैं उज्याव् लै पिणां।'

कवि गोष्ठी की आयोजक श्रीमती लीला खोलिया ने अपनी कुमाऊंनी कविता कुछ इस अंदाज में पढ़ी-

'अलबैर मुस् के हैगीं एक औरी बात,

सिती में लै मुख मैं मारि जानी लात।'

डा.हयात रावत ने कुमाऊंनी रचना पढ़ते हुए कहा-

'आपण् भरि भाण् भकार, हमूं है छोड़ी तौ उधार।'

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हिन्दी व कुमाऊंनी के सशक्त हस्ताक्षर जगदीश जोशी ने इस प्रकार कहा-

'डर न्है कै की, कै कै धर्म कैं,

डर छू उनरि दुकान कैं ..।'

गोष्ठी में विपिन जोशी 'कोमल', आनंद सिंह बिष्ट सहित अनेक कवियों ने कविता पढ़ी।


दैनिक जागरण से साभार:

हलिया

धूमधाम से मनाया गया नव संवत्सरApr 08, 02:10 am

कर्णप्रयाग (चमोली)। नव संवत्सर वर्ष प्रतिपदा समिति कर्णप्रयाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में क्षेत्र की सभी शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने दीनदयाल पार्क में रंगारंग प्रस्तुतियां पेश की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक अनिल नौटियाल ने हिंदू संस्कृति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए। इस अवसर पर विहिप के जिलाध्यक्ष चिंतामणि सेमवाल, उमादत्त थपलियाल, सरदार संत सिंह, शेर सिंह राणा, दिनेश उनियाल आदि ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदू संस्कृति से ही समाज में समरसता का वातावरण बन सकता है। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या मंदिर, उमा पब्लिक स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर, लिटिल फ्लावर, गुडलक सहित सभी शिक्षण संस्थाओं के छात्रों ने आकर्षक लोकगीत व लोकनृत्य प्रस्तुत किए।