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CHAR DHAM OF UTTARAKHAND - BADRINATH, KEDARNATH, GANGORTI & YAMNOTRI

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 09, 2007, 01:39:06 PM



हेम पन्त


हेम पन्त

The much-awaited action movie released worldwide in over 1000 theatres stars South Indian superstar Allu Arjun and Tamannah Bhatia in the lead roles.

The film is set in the backdrop of the Badrinath temple, in Uttarakhand.

Badri (Allu Arjun) is the protector of the Badrinath temple as foreigners over the years have been looting India's precious temples. Badri is ever devoted to his temple and his master (Prakash Raj). The atheist Alakananda (Tammana) visits the temple with her grandfather and because of circumstances she falls in love with the temple protector.

Now, the central conflict is for Badri to decide whether he wants to become the next Big Guy of the temple succeeding Prakash Raj and vowing to bachelorhood or to run away with Alakanada.

'Badrinath' is directed by VV Vinayak and is produced by Allu Aravind under Geetha Arts banner. The film is said to be made in 41 crore

The biggest attraction in the film is Allu Arjun's fight sequences for which he underwent special training in martial arts in Vietnam.

The music of the film is composed by MM Keeravani and the cinematography is done by Ravi Varman.

Source - http://english.samaylive.com/entertainment-news/676488399/badrinath-movie-review.html

हेम पन्त


Anil Arya / अनिल आर्य

Quote from: हेम पन्त on June 21, 2011, 02:55:01 AM
The much-awaited action movie released worldwide in over 1000 theatres stars South Indian superstar Allu Arjun and Tamannah Bhatia in the lead roles.

The film is set in the backdrop of the Badrinath temple, in Uttarakhand.

Badri (Allu Arjun) is the protector of the Badrinath temple as foreigners over the years have been looting India's precious temples. Badri is ever devoted to his temple and his master (Prakash Raj). The atheist Alakananda (Tammana) visits the temple with her grandfather and because of circumstances she falls in love with the temple protector.

Now, the central conflict is for Badri to decide whether he wants to become the next Big Guy of the temple succeeding Prakash Raj and vowing to bachelorhood or to run away with Alakanada.

'Badrinath' is directed by VV Vinayak and is produced by Allu Aravind under Geetha Arts banner. The film is said to be made in 41 crore

The biggest attraction in the film is Allu Arjun's fight sequences for which he underwent special training in martial arts in Vietnam.

The music of the film is composed by MM Keeravani and the cinematography is done by Ravi Varman.

Source - http://english.samaylive.com/entertainment-news/676488399/badrinath-movie-review.html
Valuable Information Hem Da. thanx

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

केदारनाथ मंदिर: वृषभ पिंड की पूजा
कहते हैं, किस्मत वालों को ही श्री केदारनाथ के दर्शन हो पाते हैं। जिस किसी ने भी बैल की पीठ के स्वरूप में विराजमान महादेव का दर्शन कर लिया, वह धन्य हो गया!
श्रीकेदारनाथका मंदिर 3593फीट की ऊंचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊंचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया, इसकी कल्पना आज भी नहीं की जा सकती है! यह मंदिर एक छह फीट ऊंचे चौकोरप्लेटफार्म पर बना हुआ है। मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, लेकिन हां ऐसा भी कहा जाता है कि इसकी स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की। मंदिर की पूजा श्री केदारनाथ द्वादश ज्योतिर्लिगोंमें से एक माना जाता है। प्रात:काल में शिव-पिंड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर आरती उतारी जाती है। इस समय यात्री-गण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं, लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। केदारनाथ के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही होते हैं। पंचकेदारकी कथा ऐसा माना जाता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के शाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। भगवान शंकर के दर्शन के लिए पांडव काशी गए, पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान हो कर केदार में जा बसे।

दूसरी ओर, पांडव भी लगन के पक्के थे, वे उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। अत:भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतध्र्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का हिस्सा पकड लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढसंकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजेजाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतध्र्यान हुए, तो उनके धड से ऊपर का हिस्सा काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथका मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथमें, नाभि मदमदेश्वरमें और जटा कल्पेश्वरमें प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदारकहा जाता है। यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं। यात्रा का संदेश

दृढसंकल्प, आत्मविश्वास और परिश्रम के अभाव में श्री केदारनाथ की दुर्गम पथरीलीराह पर चढाई संभव नहीं है। वास्तव में, यह यात्रा स्वर्गीय आनंद का स्त्रोत है। यहां न केवल मनोहर दृश्यावलियोंको सतत निहारने का आनंद मिलता है, बल्कि यह संदेश भी मिलता है कि संकट के रास्तों पर चले बिना सफलता के पुष्प नहीं खिल सकते हैं। भगवान शंकर भले ही भोलेनाथहों, लेकिन उन्होंने भ्रातृहत्या के लिए पांडवों को सहज ही क्षमा नहीं कर दिया।


http://shivbhakt.blogspot.com/2009/09/blog-post_8006.html
भक्तों की निर्मल भक्ति के आगे भले ही भगवान झुके हों, लेकिन उन्होंने बार-बार अंतध्र्यान हो कर, यह संदेश दे दिया कि वे व्यर्थ की हिंसा को पसंद नहीं करते।

पांडव भगवान शंकर से क्षमा प्राप्त कर बदरीधामकी ओर गए, जहां से स्वर्गारोहण का मार्ग प्रशस्त हुआ। अत:हम कह सकते हैं कि हिमालय का क्षेत्र देवलोक के समान है, जहां से स्वर्गारोहण का मार्ग खुलता है। इसलिए श्री केदारनाथ की यात्रा तप और साधना के समान है, जो हमें ईश्वर की गरिमा-महिमा का दर्शन कराकर आनंद से भर देती है।


Devbhoomi,Uttarakhand

चार धामों के रास्ते बंद छह हजार यात्री फंसे



  गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशी/जागरण टीम: गढ़वाल की सड़कों पर आफत थमने का नाम नहीं ले रही है। बदरीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के राजमार्ग पूरे दिन नहीं खुले। सिरोबगड़ में मलबा आने से केदारनाथ धाम की यात्रा भी रुक गई है। अवरुद्ध राजमार्गो पर करीब छह हजार यात्रियों के फंसे होने की सूचना है। उनके सामने खान पान की परेशानी भी खड़ी हो गई है। प्रशासन और बीआरओ ने बुधवार शाम तक चारधाम यात्रा सुचारु होने की उम्मीद जताई।

चौबीस घंटे पहले बंद ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग को चमोली-जोशीमठ के बीच टंगणी, कंचनगंगा, लामबगड़, हनुमान चट्टी आदि स्थानों में मंगलवार की शाम साढ़े चार बजे तक यातायात के लिए खोल दिया गया था। मंगलवार को हनुमान चट्टी के पास बदरीनाथ हाईवे भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया। इससे बदरीनाथ को जाने वाले करीब पांच हजार यात्री रास्ते में फंसे हैं। सीमा सड़क संगठन के ओसी मेजर जसबिंदर ंिसंह के मुताबिक हाइवे पर यातायात सुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच सिरोबगड़ स्लाइडिंग जोन का मलबा सड़क पर आने से बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग सोमवार की रात से अवरुद्ध हुआ, सुबह सात बजे इसे खोल दिया गया, लेकिन तीन घंटे के बाद फिर से मार्ग बंद हो गया। यहां करीब पांच सौ यात्री फंसे हैं। कुछ छोटे वाहन खांकरा-छांतीखाल-डुंगरीपंथ मोटरमार्ग से गुजारे गए। उप जिलाधिकारी दीपेन्द्र नेगी का कहना है कि मार्ग से मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

Source Dainik Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

पौराणिक मान्यताओं को समेट अन्नकूट मेला आज

 
केदारनाथ धाम में प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के एक दिन पहले आयोजित होने वाले अन्नकूट (भतूज) मेला कई पौराणिक मान्यताओं को समेटे हुए है। मध्य रात्रि से शुरू होने वाले मेले में स्थानीय लोगों के साथ ही देशी-विदेश के श्रद्धालु भी शिरकत करते हैं। शुक्रवार रात दो बजे से शुरू होने वाला मेले में भोले बाबा के श्रृंगार का नजारा अद्भुत होता है।
श्रावण मास की चतुर्दशी के दिन विश्व प्रसिद्ध तीर्थधाम केदारनाथ में बदरी-केदार मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहित समाज के साथ ही स्थानीय जनता की ओर से अन्नकूट मेले की परंपरा चली आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मेले का आयोजन मध्य रात्रि से शुरू होता है और सुबह तक संपन्न होता है।

किवंदती है कि इस दिन शिवलिंग को नए अनाज झंगोरा, चावल, कौंणी आदि के लेप से उनका श्रृंगार किया जाता है और इसमें पाए जाने वाले विष को भोले बाबा ग्रहण करते हैं। भगवान शिव की पूजा दो बजे रात्रि से चार बजे सुबह तक होती है। इसके बाद पांच बजे स्नान करने के उपरांत शिवलिंग से अन्नकूट का लेप निकालकर इसका अन्यत्र विसर्जन किया जाता है। तत्पश्चात सभी भक्त भोले बाबा के दर्शन करते हैं।

वहीं मेले के आयोजन के लिए केदारनाथ मंदिर को भी विशेष रुप से सजाया जाता है। तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं। मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि मेला के आयोजन के लिए मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्था की है। तैयारियों को भी अंतिम रुप दे दिया गया है। शुक्रवार को मेले का आयोजन किया जाएगा और इसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है




Source Dainik jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

केदार धाम व यमुनोत्री के कपाट बंद
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भैया दूज के पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए गए। शीतकालीन प्रवास के लिए बाबा केदार की उत्सव डोली गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए रवाना हो गई, जबकि यमुना की भोग मूर्ति को को खरसाली स्थित यमुना मंदिर में स्थापित किया गया।


शुक्रवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर के मुख्य पुजारी राजशेखर लिंग ने विधि विधान के साथ सुबह साढ़े आठ बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद किए। इसके बाद सिख रेजीमेंट बैंड की धुन के बीच बाबा केदार की उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हो गई।

रामपुर में रात्रि विश्राम के बाद डोली 29 अक्टूबर को गुप्तकाशी पहुंचेगी और 30 अक्टूबर को गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। यहीं पर छह माह भोले बाबा की पूजा अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा, एसपी विमला गुंज्याल, सिख रेजीमेंट के सीओ बी.मनरी के अलावा तीर्थ पुरोहित आदि मौजूद थे।


दूसरी ओर खरसाली गाव से प्रात:काल पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार शनिदेव की डोली मां यमुना को लेने यमुनोत्री धाम को रवाना हुई। डोली के पहुंचने के बाद दोपहर बाद करीब सवा दो बजे सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यमुनोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इसके बाद शनिदेव की डोली की अगुआई में यमुना की भोगमूर्ति शाम को खरसाली गाव पहुंची।

विशाल उत्सव के साथ मां यमुना की भोगमूर्ति को यमुना मंदिर में स्थापित किया गया। शीतकाल में श्रद्धालुओं को मां यमुना के दर्शन उनके मायके खरसाली में ही होंगे। इस अवसर पर तीर्थपुरोहित, मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे।

Source dainik jagran