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CHAR DHAM OF UTTARAKHAND - BADRINATH, KEDARNATH, GANGORTI & YAMNOTRI

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 09, 2007, 01:39:06 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

शीतकालीन गद्दी स्थल पर विराजमान हुए बाबा केदार
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ऊखीमठ। ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा केदारनाथ की उत्सव डोली रविवार को भक्ताें के जयकाराें के साथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। यहां मंदिर के वेदपाठियाें ओर पुजारियाें ने वेद मंत्रोच्चारण कर भगवान केदारनाथ की भोग मूर्ति को शीतकालीन पूजा स्थल पर विराजमान किया। अब छह माह तक भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना यहीं होगी।


28 अक्तूबर को केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद बाबा की उत्सव डोली ने प्रथम पड़ाव रामपुर और द्वितीय पड़ाव गुप्तकाशी में भक्ताें को दर्शन व आशीर्वाद दिया। रविवार सुबह लगभग नौ बजेे गुप्तकाशी से प्रस्थान कर भैसारी, विद्यापीठ होते हुए जैबरी नामक स्थान पहुंची। यहां से उत्सव डोली सिख रेजीमेंट की बैंड धुनाें के बीच साढ़े ग्यारह बजे ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची।


मंदिर प्रांगण में उत्सव डोली का प्रवेश होते ही भक्ताें ने अक्षत और पुष्प वर्षा कर केदार बाबा के जयकारे लगाए। केदारनाथ के पुजारी राजशेखर लिंग ने भोग मूर्ति को उत्सव डोली से उतारते हुए ओंकारेश्वर मंदिर के प्रधान पुजारी शिवशंकर लिंग को सौंपा। प्रधान पुजारी ने पूजा-अर्चना के बाद भोग मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया। साथ ही मूर्ति पर लगे स्वर्ण मुकुट को केदारके पुजारी राजशेखर लिंग ने रावल श्री 1008 भीमाशंकर लिंग के सिर पर सुशोभित किया।


मौके पर जिपं अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट,  शैलारानी रावत, मंदिर के कार्याधिकारी अनिल शर्मा, एनपी जमलोकी, बचन सिंह,  हर्ष जमलोकी आजि मौजूद थे।[/font]अब छह माह तक ओंकारेश्वर मंदिर में होगी पूजा-अर्चना





Source Amarujala

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केदारबाबा की उत्सव डोलीओमकारेश्वर में विराजमान



 

भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद आज रविवार को केदार बाबा की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विरामजमान हो गई है। इस अवसर दर्शनों के लिए भारी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहा है। अब शीतकाल के छह माह तक भोले बाबा की पूजा-अर्चना यहीं पर की जाएगी। गत 28 अक्टूबर को भगवान केदारनाथ के कपाट बंद हुए थे। 29 अक्टूबर को दूसरे पड़ाव गुप्तकाशी में रात्रि विश्राम के बाद आज रविवार को भगवान की उत्सव डोली निशानों के साथ 12 बजे ओमकारेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश किया। ऊषामठ भजन मंडली ने बाबा के भजन गाकर डोली का पुष्पों से भव्य स्वागत किया।

मंदिर परिसर में पूर्व से मौजूद मंदिर समिति के अधिकारियों, कर्मचारियों व क्षेत्रीय श्रद्धालुओं के भोले के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। इसके बाद डोली ने ओकारेश्वर मंदिर की तीन परिक्रमा कर पंच गद्दीस्थल ओमकारेश्वर मंदिर में विराजमान हुई। अब भगवान केदारनाथ जी की छह माह तक की पूजा-अर्चना यहीं पर की जायेगी।


Source Dainik jagran

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कपाट बंद करने के लिए पंच पूजाएं आज से शुरू
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भू बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पूर्व की प्रक्रियाएं पंच पूजाएं रविवार 13 नवंबर से शुरू कर दी जायेंगी। इसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है।

मुख्य कार्यधिकारी जगदंबा प्रसाद नंबूदरी ने बताया कि पंच पूजाओं के प्रथम दिन गणेश पूजन, द्वितीय दिन आदि केदारेश्वर के कपाट बंद तथा तीसरे दिन खाना पुस्तक की पूजाएं, चौथे दिन महालक्ष्मी का पूजन और 17 नवंबर को 3 बजकर 36 मिनट पर भगवान बदरीविशाल के भी कपाट बंद कर दिये जाएंगे। मुख्य कार्यधिकारी ने बताया कि इस वर्ष गत वर्ष की अपेक्षा आज तक 44 हजार से अधिक श्रद्धालु विगत वर्ष की अपेक्षा भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर चुके है। साथ ही सोना-चांदी, वस्त्र, बर्तन एवं अन्य कई मदों की आय को छोड़कर इस वर्ष गत वर्ष की अपेक्षा अभी तक एक करोड़ से अधिक आय बदरीनाथ मंदिर को हुई है। बदरीनाथ मंदिर के मुख्य कार्यधिकारी ने बताया कि इस वर्ष अभी तक 9 लाख 64 हजार श्रद्धालुओं ने अभी तक दर्शन किये है। बदरीनाथ मंदिर को इस दौरान मंदिर 10 करोड़ 50 लाख से अधिक की आय हुई है। उन्होंने कहा कि कड़ाके की सर्दी को देखते हुये मंदिर समिति से कई स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे है।

Source dainik jag

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शीतकाल के लिए बदरीनाथ के कपाट बंद
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वैदिक मंत्रोच्चारण और बदरीविशाल के जयकारों के बीच शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान दस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन का पुण्यलाभ अर्जित किया। अगले छह माह नारायण महालक्ष्मी के साथ गर्भगृह में विराजेंगे। जबकि भगवान की उत्सव डोली शुक्रवार को पांडुकेश्वर के लिए रवाना होगी। शीतकाल में श्रद्धालु यहां बदरीनाथ के दर्शन कर सकेंगे। इसी के साथ चार धाम यात्रा का भी समापन हो गया। उल्लेखनीय है कि गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट पहले ही बंद हो चुके हैं।

गुरुवार को ब्रहम मुहुर्त में मुख्य पुजारी केशव प्रसाद नंबूदरी के नेतृत्व में कपाट बंदी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत भगवान बदरीनाथ का महाभिषेक एवं अभिषेक पूजा की गई। परंपरा के अनुरूप भगवान को बाल भोग, राज भोग आदि चढ़ाया गया। दोपहर बाद रावल केशव प्रसाद नंबूदरी ने इस वर्ष की अंतिम विशेष पूजाएं शुरू कीं। पूजा के बीच भगवान बदरीविशाल को भारत के अंतिम गांव माणा की सुहागिनों द्वारा बनाई गई ऊन की चोली घृत (घी) का लेप कर पहनाई गई। शीतकाल के दौरान यही एक मात्र वस्त्र भगवान धारण करेंगे। दोपहर बाद शुभ मुहूर्त 3 बजकर 36 मिनट पर कपाट बंद कर दिए गए। शुक्रवार को भगवान बदरीनाथ की उत्सव डोली, उद्वव व कुबेर की मूर्तियों के साथ ही शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर के लिए विदा होगी।

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष 9 लाख 80 हजार श्रद्वालुओं ने भगवान के दर्शन किए। जबकि नगद चढ़ावे के रूप में 10 करोड़ 73 लाख की धनराशि प्राप्त हुई।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8502230.html

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मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष 9 लाख 80 हजार श्रद्वालुओं ने भगवान के दर्शन किए। जबकि नगद चढ़ावे के रूप में 10 करोड़ 73 लाख की धनराशि प्राप्त हुई


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

<blockquote> पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम |
निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम |
शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम |
जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम |
सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
यक्ष किन्नर करत कौतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम |
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
कैलाश में एक देव निंरजन शैल शिखर महेश्वरम |
राजयुधिष्ठिर करतस्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
श्री बद्री जी के पंच रत्न पढ्त पाप विनाशनम |
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य प्राप्यते फलदायकम |
</blockquote>


<blockquote> जय जय श्री बद्रीनाथ, जयति योग ध्यानी || टेक ||

निर्गुण सगुण स्वरूप, मेधवर्ण अति अनूप |
सेवत चरण स्वरूप, ज्ञानी विज्ञानी | जय...

झलकत है शीश छत्र, छवि अनूप अति विचित्र |
बरनत पावन चरित्र, स्कुचत बरबानी | जय...

तिलक भाल अति विशाल, गल में मणि मुक्त-माल |
प्रनत पल अति दयाल, सेवक सुखदानी | जय....

कानन कुण्डल ललाम, मूरति सुखमा की धाम |
सुमिरत हों सिद्धि काम, कहत गुण बखानी | जय...

गावत गुण शंभु शेष, इन्द्र चन्द्र अरु दिनेश |
विनवत श्यामा हमेश, जोरी जुगल पानी | जय...
</blockquote>

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दु:ख हरम |
गौरी गणपति स्कंद नंदी, श्री केदार नमाम्यहम |
शैल सुंदर अति हिमालय, शुभ्र मंदिर सुंदरम |
निकट मंदाकिनी सरस्वती, जय केदार नमाम्यहम |
उदक कुंण्ड है अधम पावन, रेतस कुंड मनोहरम |
हंस कुंण्ड समीप सुंदर, जय केदार नमाम्यहम |
अन्नपूर्णा सह अपर्णा, काल भैरव शोभितम |
पंच पांडव द्रोपदी सह, जय केदार नमाम्यहम |
शिव दिगम्बर भस्म धारी, अर्द्ध चंद्र विभूषितम |
शीश गंगा कण्ड फणिपति, जय केदार नमाम्यहम |
कर त्रिशूल विशाल डमरु, ज्ञान गान विशारदम |
मदमहेश्वर तुंग ईश्वर, रुद्र कल्प महेश्वरम |
पंच धन्य विशाल आलय, जय केदार नमाम्यहम |
नाथ पावन हे विशालम, पुण्यपप्रद हर दर्शनम |
जय केदार उदार शंकर पाप ताप नमाम्यहम

(http://bharatdiscovery.org)

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चारधाम यात्रा की तैयारी में जुटा प्रशासन
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चारधाम यात्रा को लेकर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इस बार यात्रा को सुगम बनाने के लिये बीआरओ ने भी युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन ने आगामी तीस मार्च तक सड़क मार्ग दुरुस्त करने के निर्देश दिये हैं।

गंगोत्री राजमार्ग का चौड़ीकरण का काम बीते तीन वर्षो से चारधाम यात्रा को प्रभावित करता आ रहा है। यही वजह है कि इस बार जिला प्रशासन ने सड़क की हालत को लेकर पहले से ही सचेत है। लिहाजा राजमार्ग को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से पहले ही पूरी तरह दुरुस्त करने का काम शुरू किया जा रहा है। धरासू से नालूपाणी के बीच सड़क पर सड़क का मलबा हटाकर डामरीकरण का काम शुरू कर दिया है। देवीधार से उत्तरकाशी तक सड़क पर पैच वर्क के जरिये गड्ढों को भरा जा रहा है, जबकि भैरोंघाटी से गंगोत्री धाम तक सड़क को पर्याप्त चौड़ाई में काट लिया गया है। दूसरी ओर, यमुनोत्री राजमार्ग छटांगा के समीप चट्टान काटने के लिये राजमार्ग निर्माण खंड ने दस दिनों तक के लिये यातायात बंद करवाया है। इसके अलावा बड़कोट से डामटा तक यमुनोत्री राजमार्ग को दुरुस्त करने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी अक्षत गुप्ता ने कहा कि यात्रा सीजन से पहले धाम के लिये दोनों राजमार्ग दुरुस्त कर दिये जाएंगे, ताकि देश विदेश से पहुंचने वाले यात्रियों को परेशानी से बचाया जा सके।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_9025288.html