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Khadia Mines In Uttarakhand - खडिया के खान

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 07, 2008, 02:57:24 PM

क्या खडिया के खान उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रो मे रोज़गार पैदा कर सकते है ?

Yes
19 (67.9%)
No
9 (32.1%)

Total Members Voted: 28

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Mahar Ji,

You are very right. This is the issue pinching us. Our people are being cheated by these profit maker Lease Holders. I don't know whether Uttarakhand Govt can enforce any law on this or not. But possibilities of setting up cosmetic and other kinds of small industries are very much there. 

Sakar to tabi jaagegi, jab tak koi Jan aandolan nahi hoga. 


Quote from: Pankaj/पंकज सिंह महर on July 07, 2008, 04:04:21 PM
बहरहाल! मुद्दा यह है कि क्या खड़िया खनन एक उद्योग बन सकता है।

बिल्कुल बन सकता है, स्थानीय बेरोजगारों के लिये इस पर आधारित उद्योग बनाये जा सकते हैं। सौंदर्य प्रसाधन के जितने भी उत्पाद हैं, वे सब खड़िया से ही बनते हैं, इसकी मूर्तिया बन सकती है, चाक (स्कूल में प्रयुक्त होने वाली) का उद्योग लगाया जा सकता है। मेडीसिनल खड़िया के प्रसंस्करण का उद्योग लगाया जा सकता है। क्योंकि जब हमारे खेत से खडिया हजारों कि०मी० दूर मुंबई और दिल्ली में उत्पाद बना सकती है तो यहां क्यों नहीं बना सकती?
        लेकिन आज तक का अनुभव रहा है कि खड़िया का भी आम आदमी की तरह मात्र शोषण ही हुआ है, उसके दाम हल्द्वानी में मात्र पिसने के बाद ४००-५०० रु० क्विंटल हो जाता है, जब कि काश्तकार इसे ८०-९० रु० क्विंटल बेचता है। खड़िया एक ऎसा खनिज है जो स्थानीय लोगों की नियति को बदल सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब स्थानीय लोग इसकी पहल करें और मांग करें तथा सरकार और शासन-प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुये सार्थक पहल करें।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

One more thing has come to light that people are selling their lands to make easy money but after khaida is taken out from their field. Rehabilitation work is not being done which has changed the look of these areas drastically.

हेम पन्त

उत्तराखण्ड में खडिया के अलावा भी अन्य खनिज व धातुओं की प्रचुरता है... किसी समय तांबा उद्योग पहाडों में भारी मात्रा में लोगों को रोजगार सुलभ करता था.

जब तक खनिज संपदा दोहन को स्थानीय लोगों के उत्थान के लिये प्रयोग नहीं किया जायेगा, यह पहाड को गर्त में ले जाने का काम ही करेगा. पंकज दा ने देवलथल का उदाहरण दिया है... मैं भी देवलथल की स्थिति जानता हूं. लोगों ने अपने खेतों को खोद कर खडिया बेच दी, या फिर उन्हें बाहर के लोगों को औने-पौने दामों पर बेच दिया. खेतों की जगह गड्डे रह गये हैं. यही लोग अब खडिया माफिया की खदानों में मजदूर की हैसियत से काम करने को मजबूर हैं.

स्थिति बहुत नाजुक है. पर्यावरण को जो नुकसान हुआ उस पर भी लम्बी-चौडी चर्चा की जा सकती है.

यह कहा जा सकता है कि लोगों को अपने और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोच-विचार करके, अपने हकों को समझ कर सुनियोजित तरीके से खडिया खदान को रोजगार के रूप में अपनाना चाहिये. मेरे ख्याल से सहकारिता के द्वारा इस काम को बेहतर तरीके से किया जा सकता है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Bilkul sahmat ho Hem Ji aap se.

Quote from: H.Pant on July 07, 2008, 04:38:18 PM
उत्तराखण्ड में खडिया के अलावा भी अन्य खनिज व धातुओं की प्रचुरता है... किसी समय तांबा उद्योग पहाडों में भारी मात्रा में लोगों को रोजगार सुलभ करता था.

जब तक खनिज संपदा दोहन को स्थानीय लोगों के उत्थान के लिये प्रयोग नहीं किया जायेगा, यह पहाड को गर्त में ले जाने का काम ही करेगा. पंकज दा ने देवलथल का उदाहरण दिया है... मैं भी देवलथल की स्थिति जानता हूं. लोगों ने अपने खेतों को खोद कर खडिया बेच दी, या फिर उन्हें बाहर के लोगों को औने-पौने दामों पर बेच दिया. खेतों की जगह गड्डे रह गये हैं. यही लोग अब खडिया माफिया की खदानों में मजदूर की हैसियत से काम करने को मजबूर हैं.

स्थिति बहुत नाजुक है. पर्यावरण को जो नुकसान हुआ उस पर भी लम्बी-चौडी चर्चा की जा सकती है.

यह कहा जा सकता है कि लोगों को अपने और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोच-विचार करके, अपने हकों को समझ कर सुनियोजित तरीके से खडिया खदान को रोजगार के रूप में अपनाना चाहिये. मेरे ख्याल से सहकारिता के द्वारा इस काम को बेहतर तरीके से किया जा सकता है.



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

See some more photographs of khadia mines and the look area. These Photographs have been provided by Mr Keshav Bhatt, Journalist from Bageshwar.






पंकज सिंह महर

खड़िया के अवैध दोहन से संबंधित एक समाचार-
सुन्यूड़ा में अवैध खड़िया खननMar 28, 03:03 am

बागेश्वर: जनपद में अवैध खड़िया खनन पर प्रशासन नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। धपोली व चिडंग में अवैध खड़िया खनन की शिकायतों का निबटारा भी नहीं हो पाया था कि कांडा के सुन्यूड़ा गांव में ग्रामीणों की सहमति के बगैर खड़िया खनन करने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध खड़िया खनन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गिरीश कांडपाल के आवास पर संपन्न बैठक में वक्ताओं ने कहा कि खनौली के सुन्यूड़ा गांव में विगत चार सालों से खड़िया का खनन किया जा रहा है। इसके लिए खेत मालिकों की सहमति भी नहीं ली गयी है। अवैध खनन से जमीन धंस रही है तथा मकानों को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। लोगों को अपनी आजीविका को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। खनन ठेकेदारों द्वारानाम मात्र के पैसे देकर ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा है। कृषि योग्य भूमि को खोद देने से काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। खनन ठेकेदारों को खनन के लिए मना करने पर ग्रामीणों को डराया धमकाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील इलाकों में खनन कर रहे खनन ठेकेदारों को तुरंत हटाया जाए। अन्यथा ग्रामीण आंदोलन करते हुए खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाएंगे। 


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


This is true.

Quote from: Pankaj/पंकज सिंह महर on July 08, 2008, 11:53:20 AM
खड़िया के अवैध दोहन से संबंधित एक समाचार-
सुन्यूड़ा में अवैध खड़िया खननMar 28, 03:03 am

बागेश्वर: जनपद में अवैध खड़िया खनन पर प्रशासन नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। धपोली व चिडंग में अवैध खड़िया खनन की शिकायतों का निबटारा भी नहीं हो पाया था कि कांडा के सुन्यूड़ा गांव में ग्रामीणों की सहमति के बगैर खड़िया खनन करने का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध खड़िया खनन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गिरीश कांडपाल के आवास पर संपन्न बैठक में वक्ताओं ने कहा कि खनौली के सुन्यूड़ा गांव में विगत चार सालों से खड़िया का खनन किया जा रहा है। इसके लिए खेत मालिकों की सहमति भी नहीं ली गयी है। अवैध खनन से जमीन धंस रही है तथा मकानों को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। लोगों को अपनी आजीविका को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। खनन ठेकेदारों द्वारानाम मात्र के पैसे देकर ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा है। कृषि योग्य भूमि को खोद देने से काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। खनन ठेकेदारों को खनन के लिए मना करने पर ग्रामीणों को डराया धमकाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील इलाकों में खनन कर रहे खनन ठेकेदारों को तुरंत हटाया जाए। अन्यथा ग्रामीण आंदोलन करते हुए खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाएंगे। 


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

In these photos you can see how the entire area has been dugged out. 1000 of tons khadia is sold form these areas every year.

Quote from: M S Mehta on July 08, 2008, 11:05:41 AM

I am giving some photographs of area of Bageshwar Reema and see the Khaida mines work there.