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Khadia Mines In Uttarakhand - खडिया के खान

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 07, 2008, 02:57:24 PM

क्या खडिया के खान उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रो मे रोज़गार पैदा कर सकते है ?

Yes
19 (67.9%)
No
9 (32.1%)

Total Members Voted: 28

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खड़िया का भुगतान न होने से भड़के ग्रामीणFeb 06, 11:01 pm

बागेश्वर। खनन पट्टाधारक द्वारा किसानों को खड़िया खनन का भुगतान नहीं किये जाने से नाराज कांडा के ग्रामीणों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने भुगतान न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में सिलखेत के ग्रामीणों ने कहा है कि खनन पट्टाधारक श्रीमती नंदिता तिवारी द्वारा गांव के नाप खेतों में खड़िया खनन किया जा रहा है। खड़िया की निकासी के बाद भी उन्हे इसका भुगतान नहीं किया जा रहा है। बार बार भुगतान की मांग करने के बाद भी 7 माह पुराना भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिस कारण ग्रामीणों की आर्थिक हालत दयनीय हो गयी है। पट्टाधारक द्वारा भुगतान करने की बजाय अन्यत्र स्थान से खड़िया निकाली जा रही है। ग्रेडिंग व तौल के मामले में भी काश्तकारों को गुमराह किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि उनके खेत बर्बाद हो गये है जो कि अब खेती योग्य भी नहीं रहे। उन्होंने जिलाधिकारी से तुरंत भुगतान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि खेतों का भुगतान नहीं किया गया तो उन्हे मजबूर होकर आमरण अनशन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



हीरा सिह राणा जी यह कविता जो पूरी दंग से खडिया खनन को validate करता है :

  त्यर पहाड़ म्यर पहाड़
है दुखो का ड्यर पहाड़

राजनीति तोड़ पहाड़
ठेकेदारों ले फोड़ पहाड़.

यानी ठेकेदारों ने पहाड़ पूरी दंग से फोड़ दिया है ! जगह -२ पर खडिया खनन जिसे की लोगो किसी प्रकार का कोई रोजगार नहीं मिल रहा है !


Devbhoomi,Uttarakhand

अब बौर नदी भी उगलेगी सोना

SOURCE DAINIK JAGARN

हल्द्वानी(नैनीताल)। गौला नदी में खनन शुरू न होने से निराश लोगों के लिए एक खुशखबरी है। अब बौर नदी में भी खनन शुरू होगा, इसके लिए 10 लाख घनमीटर चुगान का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन से हरीझंडी मिलते ही निकासी शुरू कर दी जायेगी।

नैनीताल व ऊधमसिंहनगर को मिलाने वाली बौर नदी में भारी मात्रा में उपखनिज है। गौला से निकासी न होने पर वनविभाग ने बौर नदी में खनन कराने की योजना तैयार की है।

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक बौर नदी में खनन की संभावनाओं को तलाशने के लिए वर्ष 2007-08 में ही केन्द्रीय मृदा, जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान देहरादून तथा वन विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने सर्वेक्षण किया था।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक उपखनिज चुगान के लिए तराई केन्द्रीय वन प्रभाग क्षेत्र के बरहनी रेंज में बहने वाली इस नदी के गड़प्पू-पीपलपड़ाव वन मोटरमार्ग के नीचे दक्षिणी क्षेत्र में 70 हेक्टेयर वास्तविक क्षेत्रफल आंका गया। करीब आठ किमी लम्बाई वाली इस चुगान योग्य नदी की चौड़ाई 80 मीटर बतायी गयी है।

बताया जाता है कि कमेटी ने नदी में क्षरण व भूमि को कटान से रोकने के लिए नदी के किनारों पर पत्थरों की दीवार बनवाने का भी सुझाव दिया है। कुछ माह पूर्व ही वन विभाग की ओर से नदी से उपखनिज चुगान की अनुमति के लिए विभागीय नोडल अधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया था परन्तु खनन क्षेत्र के सापेक्ष क्षतिपूरक वृक्षारोपण का जिक्र प्रस्ताव में न होने के कारण उसे वापस कर दिया गया।

इसके बाद उक्त क्षतिपूर्ति के लिए भूमि संरक्षण वन प्रभाग रानीखेत के प्रभागीय वनाधिकारी ने सिविल क्षेत्र में क्षतिपूरक योजना तैयार कर दिया जिसके आधार पर विभाग ने आपत्ति का निराकरण करते हुए समग्र प्रस्ताव पुन: नोडल अधिकारी को भेजा है।

सूत्रों के अनुसार दो दिनों पूर्व भेजे गये इस नये प्रस्ताव को स्वीकार कर लिये जाने की पूरी उम्मीद है। प्रभागीय वनाधिकारी तराई केन्द्रीय वन प्रभाग डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि पहले भेजे गये प्रस्ताव में क्षतिपूरक वृक्षारोपण की जो आपत्ति लगी थी उसका समाधान कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बौर नदी में उपखनिज के चुगान की अनुमति मिल जाती है तो अग्रिम कार्रवाई विभाग की ओर से की जाएगी।




Devbhoomi,Uttarakhand


         उत्तराखंड में कौनसा खनिज कि क्षेत्र में मिलता है
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खनिज                                   प्राप्ति क्षेत्र



१-जिप्सम                            देहरादून,टिहरी गढ़वाल,नैनीताल,अल्मोड़ा

२-संगमरमर                         देहरादून

३-फास्फैटिक शैल                 देहरादून और गढ़वाल

४-ग्रेफाइट                             अल्मोड़ा,नैनीताल और गढ़वाल

५-मैग्नेसाईट                        अल्मोड़ा,व पिथौरागढ़

६-सोपस्टोन                         बागेश्वर व चमोली

७-गंधक                               नंदप्रयाग

८-चूने का पत्थर                   अधिकांस उत्तराखंड में 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


There is definitely need a agitation like this whole over the Uttarakhand to stop Bhoomi mafia.

Go through this news.
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and mafia becoming active: Social activists
Tribune News Service

Nainital, January 25
A large number of social activists took out a rally here today expressing concern over the continuing rampant exploitation of Uttarakhand's natural resources. Shouting slogans against the fact that the denizens of the state were losing their rights over land, forest and water resources, the protesters, who were primarily women, marched on the Mall Road and went on to submit a memorandum to the district administration.

The rally followed a 'padyatra' undertaken by the social activists following a call given by the Jagriti Mahasangh at Ramgarh, Dhari and Betalghat.

The activists had marched from Mauna Lavaishal in Ramgarh to Santbunga and Dhanachuli to take stock of the scenario in the rural areas.

They came across instances of people selling off vast tracts of their land to people from outside at a very nominal price. This has led to a big question mark over their existence in the days to come.

With the elements of the land mafia allegedly becoming active, the people of the region are now living in fear, they said.

The activists have called for active intervention at various levels to check this trend.
http://www.tribuneindia.com/2010/20100126/dun.htm#5