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Khadia Mines In Uttarakhand - खडिया के खान

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 07, 2008, 02:57:24 PM

क्या खडिया के खान उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रो मे रोज़गार पैदा कर सकते है ?

Yes
19 (67.9%)
No
9 (32.1%)

Total Members Voted: 28

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चन्द्रशेखर करगेती17 minutes ago
खदान और चुगान की बहस में खुद गया पहाड़
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टीवी चैनलों में अवैध खनन और उनको ढोने के लिए नदियों के पाटों में खड़े जेसीबी डंपरों, ट्रकों, ट्रैक्टरों की तस्वीरें दिखाई जा रहीं हैं। अधिकारी, कर्मचारी, मंत्री, हाई-वे पर आते-जाते नदियों में होते हुए खनन देख रहें हैं। लेकिन वे सब चुप हैं। जंगलात विभाग तो बिल्कुल निष्क्रिय बना रहता है। उत्तराखंड में पहले जो अवैध खनन रात के अंधेरे में किया जाता था, अब वह दिन दिहाड़े किया जा रहा है ।

इसके साथ ही खनन माफियाओं का दुस्साहस देखिए, वे बाधा बन रहे अधिकारियों को कुचल देने तक में नहीं हिचक रहें हैं । खनन माफियाओं के प्रति दिखाई गई कमजोरी का खामियाजा सरकारी अधिकारी या कर्मचारी ही नहीं भुगत रहें हैं, आम जनता भी भुगत रही है। खदान से छोड़े गड्ढों में बच्चे डूबे हैं, पुलिया, पुलों के पाए ढहे हैं, निजी मकानों, भवनों की नीवें चरमराई हैं, सड़कों को नुकसान हुआ है, वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं । कई पहाड़ी गांवों से लगातार शिकायतें आ रहीं हैं कि अवैध खनन से उनके गांवों को खतरा है। हाल में ही ऐसी पुकार उत्तरकाशी की यमुना घाटी के कई गांवों से आई हैं ।

दूसरी ओर, सरकार की तरफ से भी इसे वैध बताया जा रहा है । खदान को चुगान बताकर जायज ठहराया जा रहा है । न इसे केंद्र सरकार रोक पा रही है और न ही राज्य सरकार । दो साल पहले पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश का नदियों में खदान हो रहा है या चुगान, इस पर राज्य सरकार से टकराव हुआ था । केंद्र इसे चुगान मानता रहा है । उसने नदियों में खदान न होने देने की अपनी नीति के अनुरूप 2010 में लगभग पूरे साल ही राज्य की नदियों से रेत-बजरी निकालना रोक दिया था । न्यायालय भी सरकार की चुगान होने की दलीलों से ज्यादा सहमत नहीं लगते हैं । कुछ एक सरकारी वैज्ञानिकों  के तर्कों को छोड़ दें, तो  वैज्ञानिक परिभाषा में जो हो रहा है, उसे चुगान नहीं कहा जा सकता है ?  जो खनिज  नदी सतह से निकाल कर लादे जा रहें हैं, वे चुगे जा रहें हैं, खोदे नहीं जा रहे, इस बात को वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टि से सिद्ध करने के लिए जो काम करना चाहिए, वह हो नहीं  रहा है ।

न वैज्ञानिक, न अधिकारी और न सरकार किसी की भी इसमें दिलचस्पी नहीं है । वैसे इसे अब भी किया जा सकता है । इसके लिए नदियों में पिछले वर्षों की रेत-बजरी की सतह व अगले साल की सतह की मोटाई भी नापनी होगी । कुल अंतर ही सच बता देगा ।

स्थानीय लोग भी अब नदियों में अवैध खनन का विरोध कर रहे हैं । इससे क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की बढ़ोतरी के अलावा, स्थानीय खेतों, रास्तों और पुलों को भी नुकसान हो रहा है । हमें यह भी समझना होगा कि नदियों में ज्यादा बजरी-पत्थर आना चिंता का विषय होना चाहिए । यह बताता है कि पहाड़ों में जलागम क्षेत्रों की स्थिति खराब होती जा रही है । इससे खेती और आवासीय क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है ।


(आभार: वीरेन्द्र पैन्यूली, सामाजिक कार्यकर्ता)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




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  • बृजराजसिंह रावत, Harish Rawat, Krishna Nayal and 9 others like this.
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  • Jiwan S Danu Iresh oh god15 minutes ago · Like
  • Sunil Negi · 179 mutual friendsUnfortunate and highly worrisome13 minutes ago · Like
  • Lk Kandpal · 34 mutual friendslovely pic10 minutes ago · Like
  • Shanti Sharma PONTI KE MAL ME SAB KA HISSA HAI BHAI KHARIYA HO YA PHIR..............9 minutes ago · Like
  • Mahi Mehta You can imagine the havoc...People are living fearing. This area is already in Earthquake Zone 5. In summer, this entire area covered with the dust of Khadia.. and people get sick.8 minutes ago · Like · 1
  • Sunil Negi · 179 mutual friendsIt's like murdurous assault being made in the soul of Uttrakhand.6 minutes ago · Unlike · 1
  • Kumud Upadhyaya · 18 mutual friendsपोंटी तो एक प्रतीक मात्र है. हमाम में सब............6 minutes ago · Like
  • Harish Rawat Ye sab former MLA balwant singh bhoriyal ki kartut hain .......jis wajah se jayada  mining huwi waha ....jara mining ke deep mai jaana aap6 minutes ago · Like · 1
  • Mahi Mehta कैसे लुट गया यह पहाड़ को देखने वाला नहीं है और कोई सुनने वाला !  भू माफिया लोगो के हाथो जा रही है लोगो की जान ! यह फोटो नाकुरी .. रीमा की है जहाँ हजारो ट्रक खड़िया महीने निकाली जाती है! फोटो के यह दृश्य खुद व्या करता है पहाड़ भयावक दुःख !4 minutes ago · Like
  • Sunil Negi · 179 mutual friendsInki khaber leni chahiye ye kaise UK ke saath gaddari ker rahe hainabout a minute ago · Like

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दफौट के खेतों में हो रहा खड़िया खनन

जाका, बागेश्वर : दफौट क्षेत्र में ग्रामीणों के नाप खेतों में जबरन खडि़या खनन किया जा रहा है। कई बार जिला प्रशासन को शिकायत करने के बाद भी रोक नहीं लगायी जा रही है। गत दिवस विधायक ललित फस्र्वाण ने गांव का भ्रमण किया तो ग्रामीणों ने अपना दुखड़ा विधायक को सुनाया।

खोलाखेत के ग्रामीणों ने बताया कि किसी भी ग्रामीण से अनापत्ति नहीं ली गयी है। जबकि खनन से पूर्व खेत मालिक की एनओसी जरूरी होती है। खान मालिक द्वारा अवैध रूप से ट्राली लगायी गयी है। ग्रामीणों ने इस बात की जानकारी विधायक ललित फस्र्वाण को देते हुए अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की है। विधायक ने जिला प्रशासन को आदेश दिये हैं कि वह खनन पर प्रभावी तरीके से रोक लगायें। विधायक ने चमड़थल, जल्थाकोट, सात चौंरा, माल्ता आदि गांवों का भ्रमण कर जनसमस्याएं सुनीं। उन्होंने विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाएं देखीं। शिक्षकों की अनुपस्थिति पर नाराजी व्यक्त की। सातचौंरा- चमड़थल रोड निर्माण की धीमी गति पर भी नाराजी व्यक्त की। इस दौरान क्षेत्र के विकास के लिए 3 लाख रुपया देने की घोषणा की गयी। भ्रमण में उनके साथ रमेश चंदोला, आनंद तिवारी, कुंदन दफौटी, नवीन रावल, गोकुल देव, ललिता प्रसाद जोशी, कैलाश तिवारी, नवीन रौतेला, हीरा बल्लभ तिवारी, नवीन राम,प्रकाश जोशी, राकेश अंडोला आदि मौजूद थे।

http://www.jagran.com/uttarakhand/bageshwar-10083391.html

पी . एस . भाकुनी

भौगोलिक दृष्ठि से देखें  तो किसी भी प्रकार की माईनिंग (चाहे वह खड़िया ही क्यों न हो) से पैदा किये गए रोजगार का मैं   प्रबल विरोध करता हूँ, यहाँ तक की हिमालय की गोद में बनाये जा रहे किसी भी छोटे अथवा बड़े बांधों  का भी।
मेरा यह विरोध पर्यावरण एवं पर्वतीय जीवन के संरक्षण  हेतु जारी रहेगा, लेकिन मेरी सुनेगा कौन? बहरहाल मुझे गर्व होता है की मैं उस गाँव का निवासी हूँ जहाँ पर आज से लगभग तीस -पैंतीस वर्ष पूर्व खड़िया खनन के विरूद्ध छेड़ा गया अहिंसात्मक आन्दोलन की तत्कालीन भारतीय पर्यावरणविदों ने ही नहीं अपितु सात समुन्द्र पार के पर्यावरण प्रेमियों ने भी अपने-अपने तरीके से भूरी-भूरी प्रशंसा की है, गाँव खीराकोट की महिलाओं द्वारा चलाये गए उक्त सफल आन्दोलन की विस्तृत जानकारी हेतु एक लिंक यहाँ भी उपलब्ध है।
http://www.livingnonviolence.com/2011_06_01_archive.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बागेश्वर : जनपद के चिड़ंग गांव में खडि़या खान मालिकों की सह पर लंबे समय से अवैज्ञानिक रूप से खनन किया जा रहा है, जिस कारण गांव के कई परिवारों के मकानों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि कई बार प्रशासन से अनुरोध के बाद भी अफसर मौन हैं। परेशान ग्रामीणों ने जनपद के प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीण जगदीश सिंह चौहान ने जनपद के प्रभारी मंत्री समेत जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दुखड़ा सुनाया है। मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि क्षेत्र के चिड़ंग गांव में खान मालिक द्वारा अवैध रूप से धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध कर खनन पर रोक लगाने की विनती की गई है। बावजूद इसके उनकी ओर से अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा सका है। उन्होंने कहा है कि अवैध खनन से गांव के कई मकानों अब खतरे की जद में आ चुके हैं। ऐसे में कभी भी किसी बड़े हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। कहा कि कई बार जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की जा चुकी है, परंतु कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जो कि प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर शीघ्र अवैध खनन न रोका गया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खडि़या उद्योग से मिला नौ करोड़ का राजस्व

जाका, बागेश्वर : जनपद में संचालित खडि़या उद्योग से अकेले शासन को नौ करोड़ 36 लाख से अधिक का राजस्व मिला है। इसके अलावा सीधे तौर पर हजारों लोगों को रोजगार मिला। खडि़या से मिलने वाले राजस्व में वर्ष 2011 से उत्तरोत्तर प्रगति हुई है।
जनपद में खडि़या उद्योग प्रमुख उद्योग के रूप में है खडि़या उद्योग होने के कारण हजारों लोगों को यहां पर रोजगार मिला है। साथ ही यहां के ट्रांसपोर्टर भी इससे जुड़े हुए हैं। जनपद में वित्तीय वर्ष 2010-11 में अकेले खडि़या उद्योग से दो करोड़ 97 लाख 34 हजार का राजस्व प्राप्ति हुई थी जबकि 2011-12 में चार करोड़ 55 लाख 73 हजार रुपये का राजस्व वसूला गया। वर्ष 2012-13 में यह बढ़कर नौ करोड़ 36 लाख 98 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसमें खडि़या निकासी के रवन्ने से प्राप्त राशि के समेत ही अवैध खनन करने वालों पर जुर्माना भी वसूला गया है। आंकड़ों पर नजर डाली जाय तो वित्तीय वर्ष 2011-12 के बाद इसमें अपेक्षाकृत वृद्धि हुई है।
:::::::: इनसेट
  जिलाधिकारी महोदय के निर्देश व मार्गदर्शन पर राजस्व वसूली पर ध्यान दिया गया जिससे तीन वर्ष में अकेले खडि़या से राजस्व वृद्धि में चार गुना वृद्धि आई है भविष्य में प्रयास किया जाएगा कि इसमें और अधिक वृद्धि की जाय। उन्होंने अपने कार्यकाल में खनन नियमों का उल्लंघन करने पर एक करोड़ का जुर्माना वसूला गया है।
  - इं राजपाल लेघा, खान अधिकारी

source -

http://www.jagran.com/uttarakhand/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खड़िया खोदने के लिए ताक पर कायदे कानून

बागेश्वर। कांडा क्षेत्र में खड़िया खनन के मामले में पट्टाधारकों की मनमानी चल रही है। वे लीज क्षेत्र के बाहर भी धड़ल्ले खनन कर रहे हैं। खनन के मलबे को गड्ढों के बजाए नालों में डाला जा रहा है। गणुवा सिरमोली में सिंचाई गूल और पैदल रास्ता ध्वस्त कर दिया गया है। निरीक्षण के बाद खान अधिकारी ने दो व्यवसायियों पर अर्थदंड ठोक एक पट्टाधारक के रमन्ने जब्त कर लिए हैं। दो को चेतावनी दी गई है।
कांडा क्षेत्र की खड़िया खानों में ये अनियमितताएं खान अधिकारी राजपाल लेघा और कांडा के तहसीलदार बहादुर सिंह कुमाल्टा ने निरीक्षण के दौरान पकड़ी गईं। खान अधिकारी ने बताया कि कांडे कन्याल के चक बखतिया में एक खान में लीज क्षेत्र से बाहर खनन हो रहा था। इनमें अनुमानित 100 टन खड़िया निकाली गई है। इसके लिए खान मालिक से दो लाख का अर्थ दंड वसूला जाएगा। इसी क्षेत्र में एक अन्य खान में लीज क्षेत्र से बाहर दो जगहों पर खनन किया है। यहां से 25 हजार रुपये अर्थदंड वसूलने की संस्तुति की गई है। सुनार गांव की खान में खनन के बाद गड्ढे नहीं भरे गए हैं। इससे बारिश के मौसम में अनुसूचित जाति की बस्ती को खतरा पैदा हो सकता है। खान स्वामी को गड्ढे भरने निर्देश दिए गए हैं। गणुवा सिरमोली में खनन के दौरान ढाई सौ मीटर लंबी सिंचाई नहर और पैदल मार्ग को क्षति पहुंचाई गई है। हरे पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है। मलबा गधेरे में डाल दिया गया है। जिसके कारण भूकटाव हो सकता है। खान स्वामी की रवन्ना बुक को जब्त किया गया है। जसपुर में एक खान का मलबा गधेरे में डाला गया है। खान स्वामी को मलबा हटाने की चेतावनी दी गई है।
http://www.amarujala.com

विनोद सिंह गढ़िया

खड़िया खनन के लिए होड़ मची - 64 खानों के लिए यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों ने दिखाई दिलचस्पी

बागेश्वर जिले में खड़िया खदान के लिए होड़ सी मची हुई है। अनेक स्थानों पर हो रहे बेतहाशा और अनियंत्रित खनन से गांव छलनी हो चुके हैं। बावजूद इसके अब तक 398 लोगों ने जिले के कई गांवों में मौजूद खड़िया खनन के लिए आवेदन किए हैं। आवेदन करने वालों में उत्तराखंड के अलावा उप्र और दिल्ली, हिमाचल और मध्य प्रदेश के लोग बताए जा रहे हैं। जिले के अन्य हिस्सों के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र की खड़िया पर अधिकतर लोगों की नजर गढ़ी हैं। ऐसे में घायल हिमालय की क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मालूम हो कि जिले के पुंगरघाटी, कांडा, कपकोट और खरेही पट्टी के विभिन्न हिस्सों में खड़िया की कुल 64 खानें हैं। इनमें से 60 एमएल(माइनिंग लीज) तो चार पीएल(प्रोस्पेक्टिंग लीज) हैं। इन खानों से वर्ष में लाखों टन खड़िया खोदी जाती है। पहले मजदूरों से खदान होता था अब अधिक फायदे के लिए डेढ़ दर्जन से भी अधिक खान मालिक जेसीबी मशीनें लगाकर खदान कर रहे हैं। इस धंधे से जहां सरकार को अच्छा खासा राजस्व प्राप्त हो रहा है वहीं कई खाली हाथों को भी रोजगार मिल रहा है। खान मालिकों की भी अच्छी चांदी कट रही है। इस धंधे से हो रही अच्छी खासी आमदनी को देखते हुए अब तक 398 लोगों ने जिले के विभिन्न हिस्सों में मौजूद खड़िया के लिए आवेदन दिए हैं। मालूम हो कि यह जिला बाढ़ भू-स्खलन की दृष्टि से संवेदनशील तो भूकंप की दृष्टि से जोन पांच में आता है। इन आपदाओं से हर साल भारी नुकसान हो रहा है। जिस तरह जिले के विभिन्न हिस्सों में खड़िया के लिए आवेदन लगाए गए हैं यदि वह स्वीकृत हो गए तो गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

• गणेश उपाध्याय- अमर उजाला