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Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)

Started by Risky Pathak, July 12, 2008, 09:18:39 PM

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Risky Pathak

हरेला: हरयाव

हरेला उत्तराखंड का १ प्रमुख त्यौहार है| हरेला उत्तराखंड की संस्कृति का १ विभिन्न अंग है| ये त्यौहार सामाजिक सोहार्द के साथ  साथ कृषि व मौसम से भी सम्बन्ध रखता है|

हरेला: भिन्न प्रकार के खाद्यानों के बीजो को एक साथ उगाकर, दस दिन के बाद काटा जाता है| 

हरेला साल में तीन बार मनाया जाता है|

१. चैत्र: चैत्र मास के प्रथम दिन बोया जाता है और नवमी को काटा जाता है|
२. श्रावण: श्रावन लगने से नौ दिन पहले अषअड़ में बोया जाता है और १० दिन बाद काटा  जाता है|
३. आशिवन: आश्विन  नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा  के दिन काटा जाता है|

पिठां (तिलक), चन्दन और अक्षत के साथ थाली में रखा हुआ हरेला..


Risky Pathak

श्रावण मास के हरेला का अपना महत्व है| जैसे की विदित है की श्रावण मास भगवान शंकर के प्रिय मास है, इसलिए इस हरेले को कही कही हर-काली के नाम से भी जन जाता है|

चैत्र व आश्विन मास के हरेले मौसम के बदलाव के सूचक है|
चैत्र मास के हरेला गर्मी के आने की सूचना देता है और आश्विन मास के हरेला सर्दी के आने की सूचना|

Risky Pathak

हरेला काटने से १० दिन पहले हरेला बोया जाता है|
१ थाली या टोकरी में मिटटी दाल के उसके ऊपर विभिन्न प्रकार के बीज छिडके जाते है| ये बीज ५ या ७ प्रकार के होते है| जैसे गेहूं, धान, जौ, गहत, मास, सरसों, भट्ट| फ़िर इन सबके ऊपर मिटटी रख दी जाती है| और उस टोकरी या थाली को घर में ही दयाप्तन थान(मन्दिर) में रख दिया जाता है| और रोज थोड़ा थोड़ा पानी छिड़का जाता है| ३-४ दिन के बाद उन बीजो में से अंकुर निकल जाते है| ९-१० दिन के बाद ४-५ इंच के छोटे छोटे पौधे निकल जाते है, इन्हे ही हरयाव(हरेला कहा जाता है)| दसवे दिन इनको काटा जाता है|

Risky Pathak

सूर्य की रोशनी से दूर रहने के कारण इनका रंग पीला होता है| काटने के बाद इसे देवता को चढ़या जाता है| फ़िर घर के सभी सदस्यों को ये लगाया जाता है| यहा लगाने से अर्थ है की सर व कान पर हरेला के तिनके रखे जाते है|

हरेला शुभ कामनाओं के साथ रखा जाता है| छोटे बच्चो को हरेला पैर से ले जाकर सर तक लगाया जाता है| इसके साथ ही १ शुभ गीत "जी रये-जाग रये" गाया जाता है| इस गीत में दीर्घायु होने की कामना की जाती है|   

Risky Pathak

हरेला काटने के बाद इसमे अक्षत-चंदन डालकर भगवान को लगाया जाता है|

हरेला घर मे सुख, समृधि व शान्ति के लिए बोया व काटा जाता है| हरेला अच्छी कृषि का सूचक है| हरेला इस कामना के साथ बोया जाता है की इस साल फसलो को नुक्सान ना हो|

हरेला के साथ जुड़ी ये मान्यता है की जिसका हरेला जितना बडा होगा उसे कृषि मे उतना ही फायदा होगा|

Risky Pathak

आप सब लोगो को हरेला की शुभकामनाये|
श्रावण मास का हरेला इस साल १६ जुलाई को काटा जाएगा| और उसी दिन को हरेला मनाया जाएगा|

Risky Pathak

Aisa Mana Jata Hai Ki Jiska Harela Sahi Nahi Jamta, Use Is Sal Kheti Mein Fayda Nahi Hoga.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Oh great. .

On 16th July is Harela Festivel in UK. This festivel is also known for plantation. People do plantation on this day and make prepare some dishes.

This day is also considered augment of Sawan Ritu.

hem

लाग्  हरेला लाग् दसैं लाग् बगवाल जीरये जागिरये
धरती जस आगव आकाश जस चाकव है जये
सूर्ज जस तराण स्यावे जसि बुद्धि हो
दूब जस फलिये
सिल पिसि भात खाये, जांठि टेकि झाड़ जाये



(हरियाला तुझे मिले,जीते रहो, जागरूक रहो, पृथ्वी के समान धैर्यवान,आकाश के समान प्रशस्त (उदार) बनो, सूर्य
के समान त्राण, सियार के समान बुद्धि हो, दूर्वा के तृणों के समान पनपो,इतने दीर्घायु हो कि (दंतहीन) तुम्हें भात भी पीस कर खाना पड़े और शौच जाने के लिए भी लाठी का उपयोग करना पड़े )   

                              १६ जुलाई हरेला की शुभकामनायें                   

Risky Pathak


लाग बग्वाई, लाग बसंत पंचमी
लाग हर्यावा, लाग बिरुर पंचमी

जी रए, जाग रए

हिमाल में हयू छन तक, गंग ज्यू में पानी छन तक
सिल ल्वाड़ भात खान तक, जात टेक बेर हगन जाण तक

स्याव जै बुद्धि ऐ जो , सि जै तरान
आकाश बराबर उच् है जै, धरती बराबर चकोव

जी रए, जाग रए, बची रए