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Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)

Started by Risky Pathak, July 12, 2008, 09:18:39 PM

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हेम पन्त

Sabhi logo ko Harela Parv ki Haardik Shubhkamnayein....

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

हरेला की हार्दीक बधाईया.......

Lal Dashe,
Lal Bagwae,
Ji raya,
Jaag raya,
Dub jash panpiya,
Ber jash Faliya,
Siyawak jai budhi he jo,
siyowak jash Traan he jo,
Ganga yamuna pani barabar Ajar Amar he jao....

rajeshpant4u

हरेला की हार्दीक बधाईया.......

हेम पन्त

नैनीताल। बदलते समय के साथ आज त्यौहार भी धीरे-धीरे अपना स्वरूप बदल रहे है। आज लोग कम से कम समय में ही त्यौहारों पर पूजन आदि निपटाना चाहते है। पहाड़ों में उल्लास पूर्ण ढंग से मनाए जाने वाले हरेले पर्व में मिट्टी से बनने वाली शिव परिवार की प्रतिमाएं अर्थात डिकारे बनाना तो दूर लोग डिकारे के विषय में जानते तक नहीं हैं। कुमाऊं अंचल में कुमाऊंनी पारम्परिक लोक कला का अपना एक इतिहास रहा है। लोक शिल्प डिकारे खेतों की सौंधी मिट्टी को लेकर बनी लक्ष्मी, गणेश, कौटिल्य व भगवान शिव की प्रतिमाओं को ही डिकारे कहा जाता है। डिकारे बनाने के लिए महिलाएं कई सप्ताह पूर्व खेतों की मिट्टी को कूटकर भिगोने के उपरांत उसमें रूई मिलाकर डिकरे तैयार करती है। उसके बाद शुरू होता है प्रतिमाओं का श्रृंगार। गिली मूर्तियों के सूख जाने के बाद चावल के घोल से तैयार बिस्वार से डिकारे की रूप सज्जा की जाती है। डिकारे निर्माण के समय महिलाएं मांगलिक गीत भी गाती है। डिकारे निर्माण के उपरांत कर्क संक्रांति से एक दिन पूर्व हरकाली पूजा की जाती है। दूसरे दिन श्रावण संक्रांति को देवी-देवताओं को हरेला अर्पित करने के बाद घर के सदस्यों के सिरों पर घर के बुजुर्ग महिलाएं शुभ आशीष वचनों के साथ धारण कराती है तथा सायंकाल के वक्त इन डिकारों को जल स्रोत के समक्ष विसर्जित किया जाता है। कुमाऊंनी अंचल में लोग जहां बेहद आस्था व श्रद्धा के साथ हरेला पर्व मनाते तो है परंतु आधुनिकता की दौड़ में अपनी परम्परा को पूरी तरह नहीं निभाते। विगत कई वर्षो से परम्पराओं को जीवित रखने की कोशिश करते पारम्परिक लोक चित्रकार ब्रजमोहन जोशी त्यौहारों पर आधुनिकता के बढ़ते हस्तक्षेप से व्यथित है। उनका कहना है कि घर की बुजुर्ग महिलाएं इन परम्पराओं की असली गुरू की भूमिका निभा सकती है और आने वाली पीढ़ी तथा घर की बहू-बेटियों को इन त्यौहारों की जानकारी दें तो हमारी परम्पराएं शायद बच सकें।

नमस्कार ... दिन शुभ हो मंगलमय हो

हरेले की बधाई और हार्दिक शुभ कामनाये.
जी रया जग रया , धरती बराबर चकाव है जाया , आकाश बराबर उच्च है जाया.
सिल पिस बैरी दाव खाया , यो दिन यो मास भैटने रया.  

rajeshpant4u

हरेला की हार्दीक बधाईया....... :D

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

सभी उत्तराखंडी मित्रों को हरेला की शुभकामनाएं।
हरेला आते ही मन में एक हिलोर सी उठती है
याद आते हैं वे दिन जब कई दिन पहले से ही हरेला की तैयारियां शुरू हो जाया करती थी।

हरेला के दिन मां या बड़ी दीदी लोग हरेला लगाते थे -

लाग हरयाई, लाग दशें, लाग बग्वा
लाग उतरेंणी लाग पंचमी लागो सब त्योहार

स्यू क पराण हैजो, स्याव की बुद्धि है जो
एकै इकास है जो पांचै पचास है जो

दुब जब मौवे जाए, ब्यर जस फौवे जाए
जांठि टेकि बे माव हैं जाए, घुन टेकि बेर भ्यार जाए

झालों मालों है जाए।

with regard :-   Mohan C Bahuguna

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Harela is remarkably an ultimate Uttarakhandi festival that is been celebrated to welcome the rainy season. This festivity falls on the first day of Shravan, (which is of course today as per Hindu Panchanga). Ten days before the due date, seeds of either five or seven kinds of grains are mixed together and sown in pots inside the darkroom, The sowing is done either by the head of the family or the family priest. It is done ceremoniously and water is sprinkled  daily till  last day worship. In addition, one day before the actual celebration of the festival (last day of Month Aasarh) mock weeding is been done with small wooden hoes. Gaily painted images of Shiva and Parvati and their off springs are prepared and worshipped on the Shankranti day. Yellowish -green shoots Harela are placed on the head gear.

In every house AMA-BUBU/IZA-BABU use to bless with following words

JEE RAYA JAGI RAYA, DUBE JAI PANAPIYA, SYAU JAI BUDHDHI HOO, SHERAK JAI TARAN HOO, GAONK PADHAAN HAI JAYA,,,,

The consequence of Harela lies in the fact that it provides an opportunity to the cultivator to experiment the quality or flaw of seeds in small scale which suppose to use in mass scale, at the same time for young dudes (like me ) its time to get pocket money from elders. 

Once again I wish you all a very happy Harela. Bhagwan se yehi prarathana hai "is prithwi ko global warming se dure rakhna aur sada such&samridhdhi banaye rakhna"


Best Wishes and Regards


sanjupahari

पंकज सिंह महर

रोग शोक निवारणार्थ प्राण रक्षक वनस्पते, इदा गच्छ नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते

हरेला पर्व आप सभी के लिये मंगलमय हो, सुखमय, शांतिमय हो। यह पर्व आप सभी के घर में सुख, शांति, समृद्धि, ऎश्वर्य लेकर आये। आप सभी सफलता के नित नये सोपान चढ़ते रहें।

जय उत्तराखण्ड!

Risky Pathak

हरेला मेले की तैयारियां पूरी उद्घाटन आज
जागरण कार्यालय, भीमताल: बुधवार से नगर में शुरू होने वाले हरेला मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मल्लीताल स्थित रामलीला मैदान में हरेला खेल एवं सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में इस बार ढाई सौ से अधिक दुकानें लगी हैं। मेला परिसर में चारो ओर से लाइटिंग की व्यवस्था कर पूरे क्षेत्र को बिजली से चकाचांैध कर दिया गया है। मेले का उद्घाटन बुधवार को सांसद केसी सिंह बाबा अपराह्न 2 बजे करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उक्रांद के केन्द्रीय अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल तथा विशेष अतिथि सांसद प्रतिनिधि डा. हरीश बिष्ट होंगे। मेला समिति द्वारा इस बार मेले को भव्य रूप दिया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले मेले में इस बार हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। नगर के स्कूलों समेत विभिन्न स्थानों से सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। समिति के अध्यक्ष सुभाष जोशी ने बताया कि मेले की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेला परिसर में सफाई, पानी व चिकित्सा व्यवस्था आदि के पूरे इंतजाम कर दिए हैं। इसके अलाव पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरत रही है। तैयारियों को लेकर समिति संरक्षक मनोहर लाल चौधरी, व्यवस्थापक जगदीश पांडे, सचिव कमलेश रावत, लोकनाथ गिरि, ललित लोहनी, संदीप पांडे, चंदन बिष्ट, खीमानन्द दुम्का, उपापति भट्ट आदि ने मेला परिसर का निरीक्षण किया। हरेला पर्व के अवसर पर 16 जुलाई बुधवार को भीमताल विकासखंड के सभी प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में अवकाश रहेगा। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की भीमताल शाखा की मांग पर खंड शिक्षा अधिकारी ने अपने कोटे से हरेला अवकाश घोषित किया है। संघ के मंत्री हरीश पाठक ने बताया कि अब बुधवार स्कूल बंद रहेंगे।