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Upcoming Festivals - आने वाले स्थानीय त्यौहार

Started by पंकज सिंह महर, August 05, 2008, 11:34:17 AM

पंकज सिंह महर

कल मुझे समय नहीं मिल पाया और बाद में ध्यान भी नहीं रहा। कल यानी २१ अगस्त को बिरुड़ पंचमी थी, इस दिन पहाड़ों में पांच या सात प्रकार के दाल/अन्न को भिगाया जाता है और नन्दाष्टमी जिसे आठों भी कहा जाता है, उस दिन बनाया जाता है। तब तक भिगाये गये बिरुड़ को रोज पानी के धारे पर ले जाकर धोया जाता है।

पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड के कई अंचलों में आठों का त्यौहार मनाया जाता है, यह त्यौहार शिव-पार्वती को समर्पित है। नन्दा यानी पार्वती को पूरा उत्तराखण्ड अपनी बेटी मानता है और पिथौरागढ़ में मनाये जाने वाले इस त्यौहार को वहां की नन्दा जात ही कहा जा सकता है।

      शुक्ल पंचमी के दिन यहां की महिलायें विरुड़ भिगाती हैं और दूसरे दिन शुद्ध जल से धोकर नये दूव की डोर धारण करती हैं, ये विरुड़ नन्दा को चढ़ाये जाते हैं। अष्टमी के दिन कुंवारी कन्या सोंवा के पौधे से गमरा यानी गौरा बनाती हैं और डलिया में रखी जाती है। वहां पर एक चादर में माल्टा, नारंगी आदि स्थानीय फलों को एक चादर में डाल कर उछाला जाता है, यदि किसी कन्या के पास फल आकर गिरता है तो माना जाता है कि इस साल उसका ब्याह हो जायेगा। फिर डलिया को सिर पर रखकर गाजे-बाजे के साथ गांव में लाया जाता है और गौरा (नन्दा) के जन्मदिन से लेकर ससुराल जाने तक के गीत गाये जाते हैं, गमरा को घर के भीतर रखते समय ब्राहमण विधि-विधान से पूजा करते हैं। पिथौरागढ़ में इस पर्व को आठों कहा जाता है और सारे गांव के लोग आंठों गीत गाते हैं, जिन्हें "खेल" कहा जाता है। नवमी के दिन महेश्वर यानी शिव जी को लाया जाता है और उनको भी गमरा के साथ रखा जाता है। विधि-विधान से दोनों की पूजा-अर्चना होती है और उनके गीत गाये जाते हैं, एक गांव में एक गमरा-महेश्वर लाने की प्रथा है। उसके कुछ दिनों बाद इन दोनों डोलियों को मंदिर में ले जाया जाता है और अश्रुपूर्ण विदाई दी जाती है, इसे गमरा सिलाना कहा जाता है। यह भी नन्दा जात का एक रुप है।
     इसका और विवरण हेम पंत जी से अपेक्षित है।

Risky Pathak

Ajkal Me Bhi Thoda Vyast Hu.
Isliye Panchami, Satu, Athu ke baare me bta nahi paya.

Chalo Pankaj Daa Ne Bta Dia...


पंकज सिंह महर

कल यानी २३ अगस्त, २००८ को व्रत की जन्माष्टमी है, परसो 24 अगस्त को गृहस्थों के लिये जन्माष्टमी व्रत आधे ही दिन है। इसलिये जन्माष्टमी कल ही मनाई जायेगी और व्रत रात १२.०० बजे खुलेगा।

सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनायें।

Risky Pathak

बिरुड पंचमी = २१ अगस्त को थी
सातु = २३ अगस्त
आठु= २४ अगस्त

जन्माष्टमी = २३ अगस्त| पहाडो में ये २३ अगस्त के दिन ही मनाई जायेगी|

Risky Pathak

Bhadrapad ki antim tithi ko Khatrua mnaaya jaata hai....

is din gaay bailo ki poja hoti hai.....


Happy Belated Khatarua.... on 16 september


Risky Pathak


पंकज सिंह महर

कल यानी १३ नवम्बर, २००८ को बूढी दिवाली है, इसे अन्य स्थानों में गंगा स्नान तथा गुरु नानक जन्मदिवस के रुप में भी मनाया जाता है।

पहाड़ों में इसे बूढी़ दिवाली के नाम से जाना जाता है, इस दिन दीप जलाकर पूजा आदि करने का प्रावधान है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवतागण दीपावली का त्यौहार मनाते हैं।

हेम पन्त

सातूं- आठु के नाम से प्रसिद्द त्यौहार पिथौरागढ व कुमाऊं के अन्य इलाकों में बहुत उत्साह से मनाया जाता है .स्त्रियाँ इस अवसर पर ब्रत रखती है. "गमारा" के नाम से पार्वती का पूजन होता है.घास से बने हुए शिव पारवती बनाये जाते है.और प्रतिदिन उनकी पूजा होती है. अंतिम दिन उन्हें सिला (पवित्र स्थान पर रख देना) दिया जाता है. इसी अवसर पर पहले दिन स्त्रियाँ शिव पार्वती के पूजन के समय सप्त ग्रंथि युक्त डोर धारण करती हैं. इस अवसर पर शिव पारवती, राम लक्ष्मण के उल्लेख युक्त गीत गए जाते हैं.


घास से बनाये गये गौरा व महेश के पुतले

हेम पन्त

खतङुवा अश्विन मास (सितम्बर मध्य) में कन्या संक्रात के दिन मनाया जाता है. उस दिन खूब घास लाकर एकत्र की जाती है. और अँधेरा होने पर गाय-भैंस के गोठ में सफाई करके रोग-बिमारी रूपी खतङुवा को भगाया जाता है. जले हुए मशाल लेकर लोग एक स्थान पर एकत्र होते हैं और खतङुवा घास के बने पुतले जलाते हैं.



जलाने को तैयार खतङुवा की एक फोटो