• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Upcoming Festivals - आने वाले स्थानीय त्यौहार

Started by पंकज सिंह महर, August 05, 2008, 11:34:17 AM

राजेश जोशी/rajesh.joshee

महाराज,
कल घुगूतिया त्यार ठैरा आप सभी को घुघूतिया त्यार और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाऎं

पंकज सिंह महर

कल १४ जनवरी, २००९ को मकर संक्रान्ति यानी उत्तरायणी का त्यौहार है, जो उत्तराखण्ड का सबसे ज्यादा प्रचलित त्यौहार है। साथ ही बागेश्वर का मेला तथा उत्तरकाशी का माघ मेला आज शुरु हो रहा है।

बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपद में आज १३ जनवरी, २००९ को मशान्ति के दिन घुघुत बनाये जायेंगे और कल यानी १४ जनवरी, २००९ को इन्हें कौव्वे को खिलाया जायेगा। शेष भागों में कल घुघुत बनाये जायेंगे और परसों सुबह कौव्वे को खिलाया जायेगा।

पंकज सिंह महर

कल यानि २७ मार्च से चैत्र के नवरात्र प्रारम्भ होंगे जो रामनवमी को समाप्त होंगे तथा कल ही संवत्सर प्रतिपदा भी है, यानि हिन्दू धर्म के अनुसार नववर्ष का प्रारंभ भी कल ही होगा।



मां महाकाली, गंगोलीहाट

इस दौरान मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा-अर्चना की जायेगी।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।
नवं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता॥।

पंकज सिंह महर

पं. केवल आनंद जोशी ( kajoshi 46 @yahoo.co.in) 

शुक्रवार दिनांक 27 मार्च से नवसंवत्सर यानी हिन्दू पंचाग का नया वर्ष विक्रम 2066 आरंभ होगा। दिनांक 13 अप्रैल सोमवार को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा। इस पद्धति के अनुसार 1 जनवरी 2009 से 26 जनवरी 2009 तक राजा चन्द्र और मंत्री सूर्य रहेंगे। 27 मार्च 2009 को नए साल का स्वामी राजा शुक्र और मंत्री चन्द्रमा होगा। विक्रम वर्ष 2066 में सभी नवग्रहों का मंत्रीमंडल और संवत्सर का फल विचार इस प्रकार से रहेगा।

नव संवत्सर ' शुभ ' का फल विचार
इस वर्ष संवत्सर का नाम शुभ है। इसका अभिप्राय यही होता है कि पृथ्वी पर वर्ष 2009-10 में खेलकूद आदि के अनेक उत्सव और आयोजन होंगे। चारों ओर मौज-मस्ती और आनंद ही आनंद रहेगा। कानून व्यवस्था अति ढीली रहेगी। खाने-पीने की वस्तुओं मे मिलावट का जोर रहेगा। इसके कारण रोग व्याधियां और लालची एवं लम्पट लोगों की गतिविधियां बढेंगी। कानून और दंड व्यवस्था की कमजोरी के कारण लुटेरों और चोरों का भय रहेगा। बड़े-बड़े राष्ट्रीय नेता और राज्य अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लांछन लगाते हुए अपने को निर्दोष सिद्ध करेंगे। पड़ोसी राज्य युद्ध के लिए ललकारेंगे। महंगाई और बेरोजगारी के बावजूद पृथ्वी पर विलास और वैभव के बड़े-बड़े आयोजन होंगे। आनंदमय वातावरण रहेगा।

राजा शुक्र फल: इसके कारण चारों तरफ गीत-संगीत रस और राग का माहौल रहेगा। तंत्र-मंत्र पर ज्यादा विश्वास करेंगे। वर्षा अधिक होगी। फल-फूलों का व्यापार ज्यादा बढे़गा। दूध-दही आदि की प्रचुरता रहेगी। फैशन और कामवासना से भरे सार्वजनिक उत्सव लोकप्रिय होंगे। महिलाएं ज्यादा मुखरित और पावरफुल होंगी।

मंत्री चंद्रमा का फल: चंद्रमा के मंत्री रहने से भारत के चारों तरफ कृषि के लिए जल उपलब्ध रहेगा । गेहूं , दलहन , तिलहन की फसल अच्छी होगी। दूध-दही की इफरात रहेगी। साग-सब्जी और फल सस्ते होंगे। ब्राह्मण और विद्वान लोगों की कद्र बढ़ेगी।

बृहस्पति फल: बृहस्पति के कारण गेहूं और मीठे पदार्थ महंगे होंगे। सोना-चांदी सस्ता होगा। फल-फूल और अनाज की कमी नहीं रहेगी।

धान्येश और दुर्गेश मंगल का फल विचार: मंगल और सूर्य , धान्येश और दुर्गेश होने से उत्तरी और पूर्वी उत्तर भारत में सीमा पर झड़पें हो सकती हैं। पुलिस और प्रशासन के बीच जहां-तहां संघर्ष होगा। कोई भयंकर लड़ाई तो नहीं होगी , लेकिन पाकिस्तान चीन नेपाल की सीमाओं पर छिटपुट झड़पें होती रहेंगी।

शनि फल: इस वर्ष रसीले पदार्थों का स्वामी शनि रहेगा। वर्षा ऋतु में रोग व्याधियां अधिक होंगी तथा बाढ़ एवं रसायनिक अपमिश्रण के कारण साग-सब्जी आदि पर जहरीले कीटाणु व्याप्त होंगे। गन्ने की फसल खराब हो सकती है। दुध देने वाले पशु बीमारी के कारण रोगी रहेंगे। भेड़-बकरी , ऊंट , गधे-घोड़े आदि पर मानवीय अत्याचार बढ़ जाएंगे।

धनेश बुध फल: बुध के प्रभाव से मीडिया प्रचार और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा पर जोर रहेगा। अच्छे पढ़े-लिखे लोगों की कद्र होगी। पाखंडी , आडम्बर की अनरगल वार्तालाप से लोगों को ठगने में कामयाब होंगे। नकली वैद्य-डॉक्टरों तथा शिक्षक-प्रशिक्षक आदि चारों तरफ फैल जाएंगे।

मेघेश: इस वर्ष दस अधिकारों में पांच अधिकार शुभ ग्रहों को , पांच अधिकार पाप ग्रहों को मिले हैं। बादल का नाम संवर्तक है , जिसका अर्थ यही है कि घनघोर घटाएं आच्छादित होंगी। हवाएं चलेंगी लेकिन , बादल बिन बरसे ही आगे बढ़ जाएगा। रोहिणी का निवास समुद्र तट पर और समय का निवास माली के घर में है। इसका अभिप्राय यह है कि जहां सिंचाई व्यवस्था है और कृषि कार्यों के साधन हैं , वहां खेती अच्छी होगी। कुल मिलाकर वर्ष 2066 भारत और आस पास के देशों के लिए मध्यम फलदायक है। 

   


Risky Pathak



संवत्सर प्रतिप्रदा         २७ मार्च २००९

राम नवमी                 ३ अप्रैल २००९

वट सावित्री                २४ मई २००९

गंगा दशहरा               ३ जून २००९

हरेला                        १६ जुलाई २००९

नाग पंचमी                 २६ जुलाई २००९

जन्ये पुन्यु,(रक्षा बंधन)   ५ अगस्त २००९

जन्माष्ठमी                   १३ अगस्त २००९

घ्यू त्यार (घृत संक्रांति)   १७ अगस्त २००९

बिरूड पंचमी                २५ अगस्त २००९ 

दूर्वाअष्ठमी                   २७ अगस्त २००९

आठों (नंदा अष्ठमी)        २८ अगस्त २००९

अनंत चतुर्दशी              ३ सितम्बर २००९

खतरुआ                     १७ सितम्बर २००९

विजयादशमी                २९ सितम्बर २००९

दीपावली                      १७ अक्टूबर २००९

गोवर्धन पूजा               १९ अक्टूबर २००९

बग्वाली(भैया दूज)         २० अक्टूबर २००९

कार्तिक पुन्यु                २ नवम्बर २००९

उत्तरैनी(मकर संक्रांति)    १४ जनवरी २०१०

बसंत पंचमी                 २० जनवरी २०१०

शिवरात्री                      १२ फरवरी २०१०

छरड़ी (होली)                १ मार्च २०१०

साभार: वर्ष २००९-२०१०, रामदत्त पंचांग, नैनीताल

Risky Pathak

वर्ष २००९-२०१० कि सन्क्रान्तिया
[/size]


मेष सन्क्रान्ति     १४ अप्रैल २००९
वॄष सन्क्रान्ति     १५ मई २००९
मिथुन सन्क्रान्ति  १५ जून २००९
कर्क सन्क्रान्ति     १६ जुलाई २००९
सिन्ह सन्क्रान्ति    १७ अगस्त २००९
कन्या सन्क्रान्ति    १७ सितम्बर २००९
तुला सन्क्रान्ति      १८ अक्तूबर २००९
वृश्चिक सन्क्रान्ति    १६ नवम्बर २००९
धनु सन्क्रान्ति        १६ दिसम्बर २००९
मकर सन्क्रान्ति      १४ जन्वरी २०१०
कुम्भ सन्क्रान्ति      १३ फ़रवरी २०१०
मीन सन्क्रान्ति       १४ मार्च २०१०

Risky Pathak

इस वर्ष के आश्विन मास के श्राद्ध

५ सितम्बर २००९ : प्रतिप्रदा श्राद्ध
६ सितम्बर २००९:  द्वितीया श्राद्ध
७ सितम्बर २००९: तृतीया श्राद्ध
८ सितम्बर २००९:  चतुर्थी श्राद्ध
९ सितम्बर २००९:  पंचमी श्राद्ध
१० सितम्बर २००९:  षष्ठी श्राद्ध
११ सितम्बर २००९:  सप्तमी श्राद्ध
१२ सितम्बर २००९:  अष्ठमी श्राद्ध
१३ सितम्बर २००९:  नवमी/ दशमी श्राद्ध
१४ सितम्बर २००९:  एकादशी श्राद्ध
१५ सितम्बर २००९:  द्वादशी श्राद्ध
१६ सितम्बर २००९:  त्रयोदशी श्राद्ध
१७ सितम्बर २००९:  चतुर्दशी श्राद्ध
१८ सितम्बर २००९:  अज्ञात तिथी श्राद्ध
[/color]

Risky Pathak

आश्विन माह के नवरात्रे

१९ सितम्बर २००९: नवरात्र आरम्भ
२० सितम्बर २००९: द्वितीय नवरात्र
२१ सितम्बर २००९: तृतीय नवरात्र
२२ सितम्बर २००९: चतुर्थ नवरात्र
२३ सितम्बर २००९: पंचम नवरात्र
२४ सितम्बर २००९: षष्ठी नवरात्र
२५ सितम्बर २००९: सप्तम नवरात्र
२६ सितम्बर २००९: अष्ठमी नवरात्र
२७ सितम्बर २००९: नवमी नवरात्र
२८ सितम्बर २००९: विजय दशमी

पंकज सिंह महर

अगस्त माह के प्रारम्भ में ही 5 अगस्त को जनै पुन्यू (जनेऊ पूर्णिमा) तथा रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जायेगा। इस दिन पुराने जनेऊ का त्याग कर नया जनेऊ पहना जाता है तथा पंडित जी द्वारा रक्षा सूत्र का बंधन किया जाता है। देश-परदेश में बसे हमारे सदस्य इसकी विधि, पूजन और इस समय उच्चारित किये जाने वाले मंत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी जन्ये पुन्यु (श्रावणी उपाकर्म-रक्षा बंधन   से प्राप्त कर सकते हैं-


इसी दिन चम्पावत जिले में विश्व प्रसिद्ध बग्वाल होगी, इसके बारे में विस्तारपूर्वक जानने के लिये निम्न लिंक पर जाने का कष्ट करें-     देवीधूरा की बग्वाल-आधुनिक युग में पाषाण युद्ध

पंकज सिंह महर

पहाड़ों में आजकल काम कम होने के कारण त्यौहारों की धूम रहती है। आने वाले प्रमुख त्यौहार निम्नवत हैं-

श्री कृष्ण जन्माष्टमी (स्मार्थ) दिनांक 13 अगस्त, 2009 को है,
श्री कृष्ण जन्माष्टमी (वैष्णव) दिनांक 14 अगस्त, 2009 को है।
घ्यू त्यार दिनांक 17 अगस्त, 2009 को मनाया जायेगा, इसी दिन संक्रान्ति भी है, इस दिन से भादो का महीना प्रारम्भ हो जायेगा। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपद में यह त्यौहार मशान्ति के दिन मनाया जाता है, इसलिये वहां यह त्यौहार 16 अगस्त को मनाया जायेगा।


साभार- http://apnauttarakhand.com/panchangevents/