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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुक उत्तराखंड
May 24
हर्ष पुरी न कविता को करी जखा श्री गणेश
सिंह नाद को सिंह जखा
नेगी जना गीतों संत जखा
तारादत्त का सदैयी जख
तोता कृष्णा प्रेम पथिक जख
घुमक्कड़ जीवानंद श्रीयाल जख
कवि अबोध का भुम्याल जखा
चातक जना लेखक जख
डंडरियाल जना कवि इखा
दुनिया मा चक्रवियु रचाण वाला डी आर पुरोहित जखा
नरेन्द्र कठैत का व्यंग बाण जखा
गणी जना एंकर छाली बाच जखा
वीरेन्द्र पंवार जगदम्बा चमोला जखा
ओम प्रकाश सेमवाल मदन डुकलान जखा
लोकेश नवानी गजल जखा

मधुसुधन थपलियाल जख
और नयी छवली भरिया कवि कतगा हजार इखा
वखा नयी पीडी शर्माणी गड्वाली बुन्न मा यार इखा
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

त्येरी स्वाणी मुखडी की सौ
घुमी दुन्या का कतगा गौ
नि द्यखी त्येरी सी मुखडी
त्येरी स्वाणी मुखडी की सौ
चल लि चल मिथे बि अपणा गौ
वखी रौला त्येरी ठौ
मि बि त देखु कुच वा मयाली मौ
जखा जल्मी इनी स्वाणी मुखडी
सच बोनु छोऊ
त्येरी स्वाणी मुखडी की सौ
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुक उत्तराखंड
April 11


टोपली बन बनिकी
हर देस की
अपणी पहचाण चा
अपणी शान चा
मुंड एक चा
जखा जा टोपली पैणा
टोपली पैनावा लुगो तै
टोपली मा राज चा
टोपली मा काज चा
टोपली मा राजनीती का रंग छन अनेक
टोपली बिना मुंड नांगु चा
टोपली की टोप जन्दा ज्यू
उही मातबरो का मुंड
टोपली कु ताज चा
रचना ......... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता वो चित्र सोजन्य - महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'
© सर्वाधिकार सुरक्षित —

"पाली-पोषी जौन, ज्वान बनायी
हे! दिदा मिन ऊनु तें,
बुड्या छन मा छोड्यली...

हाथ पकड़ी जौन, मेरी खुट्यो ते समाड़ी
हे! काका मिन ऊनैर,
खुशियोंक टांग टोड्यली...

पढ़े-लिखे जौन, आज काबिल बनायी
हे! बौड़ा मि ऊनु ते,
आज कनके बिसरी ज्ञायी

कभी माया कु लोभ, कभी सुखों का बाना
हे! माँजी लाडु तेरो,
बाटु बिरडी ज्ञायी...

रिटी-रिटिक सैरी पिरथी, जब याद 'घौर' आई
हे! बाबा अब ता,
'आजाद' गढ़देश 'फ़र्गी' ज्ञायी...

लाडु छौं मि तुमारो, गलती ह्वे ज्ञायी
हे! ब्वै-बाबा मेरा,
मिते माफ करी द्याई...!"

(घौर- घर, फ़र्गी- वापस लौटना)

महेन्द्र सिंह राणा 'आजाद'

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जाकिर हुसैन जन तबला वादक
बिस्मिल्लाह खान जन शहनाई वादक
मी भी बणी सक्दू छौ पर......
मेरी जिंदगी त
जौ की फुन्फरी अर
तेलका कनस्तर बजाण मा कटे।
धोनी अर सचिन जन
मी भी खेली सकदु छौ पर
मेरी जिंदगी त .........
वे पुरण जुलाब का बौल सिलण मा कटे।
एबरेस्ट पर चढण क्वी बडी बात नी
पर मेरी जिंदगी त........
काचा लखणू कु
बाणों अर डाळौ मा कटे।
कई मैडल दौड़ मा,
मी भी जीती सकदु छौ
पर मेरी जिंदगी त...
सारियों का बान्दर भगाण मा कटे।
शेक्सपियर जन कविता सोनेट
मी भी लेखी सकदु छौ पर,
मेरी जिंदगी त......
निगोळ की कलम अर
पाटी पर लिखणा कु
कमेणा खुज्याण मा कटे।
लेखणा कु उन त बहुत कुछ च,
पर मेरी जिंदगी त.....
सुचण मा कटे।
http://atulgusain.blogspot.in/
©अतुल जाखी(सर्वाधिकार सुरक्षीत)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बैठ्युं छों परदेश मा

बैठ्युं छों परदेश मा
खुद ल्गणी च म्यार देश की
कंण व्हाला वो कया खाल वो
अब कया करणा व्हाला वो
बैठ्युं छों परदेश मा...............

धीर देणु वहालू ,बी कुई निच
बोई मेरी वख यकुली च
ईं विपदा ईं पीड़ा मा
कंण के गुजरी करणी वहाली वो
बैठ्युं छों परदेश मा...............

आंसूं का रेघा ना थम दा थ्मेंदा
ई कलजी मा रेघ कंण खिचैन्दा
रूंणु छों ऊमाल उकेरणा कुण
अपरी मजबूरी रेघा पूस ना कुण
बैठ्युं छों परदेश मा...............

देबात म्यारा अब तुम्ही छन
बद्री-केदरा तेरा दरसाणा कु मील ऐण
बाट अपरा खुल दयां ये विपदा थे हेरदायां
सब थे सफल सुफल कुशल राख्यां
बैठ्युं छों परदेश मा...............

बैठ्युं छों परदेश मा
खुद ल्गणी च म्यार देश की
कंण व्हाला वो कया खाल वो
अब कया करणा व्हाला वो
बैठ्युं छों परदेश मा.............. Mukesh singh

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मूसौँ की एक टोली तलवार लेकी भगणी छाई।
तबरी बागल पूछी है मूसौँ कख जाणा छँया रे तुम सब्।
एक मूसू बोली यार बाग भैजी उना हाथी की नौनी थे कैल परपोज कैरी अर नाम हमरू ऐ ग्या।

ब्यै (माँ) का सौँ आज तो लाँसेँ बिछा देँगे लाँसेँ।

#बौल्या।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कैन बोली कैल बोली

कैन बोली कैल बोली
यकुल छों मि यख
म्यार दगडी छन म्यारा गेल्या छन
मेरा डंडा कांठा ये पाड़ा
मेर भूमि मेर माय भूमि
ये जल्म भूमि

रीता रीता दिख्यां तुम थे यख
मनखी तुमरि रीती व्हाली
लगदी मि ठीक नि देकेंदु तुम थे
या तुमरि नजरि मा खोट

झर झर बगदा गद्न्या झरदा
विनी रौंतेला मुल्क रौंतेला लोक
नि पछाण पाई नि जाण पाई तू
तेर मन छुप्युं व्हालु क्वी लोभ

देक माया पसरीच
ढुंगा गार गार छाल मा अटकी च
न देकि बोई बोबा का जोग
कंन क्ख्क भोगलो ये भोग

कैन बोली कैल बोली
यकुल छों मि यख
म्यार दगडी छन म्यारा गेल्या छन
मेरा डंडा कांठा ये पाड़ा
मेर भूमि मेर माय भूमि
ये जल्म भूमि

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 29
क्ख्क धरियूंच बल

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२

माया तेरी आंखियों कि
दिके ना दिकेई दे ,दिके ना दिकेई दे
हाथ खुठा कि पैजनी चूड़ी
किले बल तिल लुकेई दे ,किले बल तिल लुकेई दे

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२

बथे दे ना तू लुके
सुरुक ये आंखियों थे ना झुके तू
पुड़न देईं बल यूँ आंखियों थे बी
सु नींदि ऐन दे ये जिकोड़ी करार

क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२
खोजी खोजी थाकी गीयुं
मैटी मैटी पाकी गीयुं
क्ख्क धरियूंच बल
संभलिक तिल ......२

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 30
पौड़ी मा

पौड़ी मा मनस्वाग ल्ग्युं चा
रै बेटा क्खी यकुली ना जैई

ईं जिकुड़ी मा फ़िक्र दढी चा
रै बेटा बोल्यूं मेर मानी

खानि-पीनी यख मेरी हर्ची चा
रै बेटा इनि जिंदगी मेरी

पाड़ा मा सारू सोर ल्ग्युं चा
रै बेटा कंन कटना वाला तुम कुटमदरी

उत्तराखंड सरकार निरजक सीेंईं चा
रै बेटा मेर यख निंद उदी चा

पौड़ी मा मनस्वाग ल्ग्युं चा
रै बेटा क्खी यकुली ना जैई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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