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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नि छाया तुमत इतगा
निठुर निरदई ......
कैकि लगी होलि नजर
कैल बोली होलु कुछत सही
अगे कलेज्यु भोरि निर्मोही !

ब्याल तकत गौलिमा
नि जांदु छो पाणी मी बगैर
आज सुदि सुदि झण किलै
ह्वये ग्या बिराणा अजाण सी !

--कॉपी राइट @ पराशरगौर दिनाक १७ जून स्याम ९. ३१ पर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
9 hours ago
मछली जल की रानी है .ये कु घर्या वर्जिन..

कज्याणी घर की राणी चा,
करदी अपणी मनमानी चा,
काम बतावा त चिढ़ जाणी चा,
अर
सीरियल दिखावा त खिल जाणी चा... Yepadi beka,.....

#BOLYA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 14
कोका कोला जी कोका कोला
के जाती अर के गौं का होला
दवा छन तुम कि दारु छन?
जनानी छन कि मंस्यारु छन ?
तुम्हारी मवासी मा स्याळ रोला
कोका कोला ...
पाणी सुखौन्दा अर खोंदा माटू
पाणी की चोरी करदा घाटू घाटू
तुमुक रख्युं छ टेमरु कु सोटा -
हमतैं न समझा जी कालू लाटू
तुम यख ओला त हम कख जौला
कोका कोला ...
©

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 14
खुली गेन बरसू बटी बंद मोर द्वार
गगवाड़ स्यूं मा ऐगे देखा बहार
चौक डिडली लिपै गेन घोर कुड़्यूं की
जुग- जुग तक याद राली ऐंसू रुडीयूँ की

देश प्रदेश गया मवोसो तै भी लगी पराज
घार बोड़ी गेन स्यू नई छवाई लेकि आज
रांसा लगान्दू क्वी, कैन मांगी कथा
रून्द-रून्द सुणादी रूपेणा अपणी ब्यथा

थौडा चौक मा ढोल दमौ बजण बैठी गैन
ये दीदी भुल्यूं देखा, पांडवो नचण बैठी गैन
हनी भुलान चढ़म ढोल्या काँध मा उठाई
चार रिंगोट वेन चांदणा चौक मा लगायी

कण भलू नचणान नया छवीका ग्वाल बाल
दाना सयेणो की दगड़ा मिलाणा छन ताल
धन रे तमलाग का ये जन मानस आज
सफल बणाई तुमन जू मौरी को काज

मौरी होली आखिरी या जोँकि
अगली मौरी मा याद आली तौंकी
खुद तुम्हारी हमते रुवाली
तुम्हारी दगड़ा बिताया पल याद दिलाली

प्रदीप रावत ''खुदेड़''

#BOLYA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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June 7
जाकिर हुसैन जन तबला वादक
बिस्मिल्लाह खान जन शहनाई वादक
मी भी बणी सक्दू छौ पर......
मेरी जिंदगी त
जौ की फुन्फरी अर
तेलका कनस्तर बजाण मा कटे।
धोनी अर सचिन जन
मी भी खेली सकदु छौ पर
मेरी जिंदगी त .........
वे पुरण जुलाब का बौल सिलण मा कटे।
एबरेस्ट पर चढण क्वी बडी बात नी
पर मेरी जिंदगी त........
काचा लखणू कु
बाणों अर डाळौ मा कटे।
कई मैडल दौड़ मा,
मी भी जीती सकदु छौ
पर मेरी जिंदगी त...
सारियों का बान्दर भगाण मा कटे।
शेक्सपियर जन कविता सोनेट
मी भी लेखी सकदु छौ पर,
मेरी जिंदगी त......
निगोळ की कलम अर
पाटी पर लिखणा कु
कमेणा खुज्याण मा कटे।
लेखणा कु उन त बहुत कुछ च,
पर मेरी जिंदगी त.....
सुचण मा कटे।
http://atulgusain.blogspot.in/
©अतुल जाखी(सर्वाधिकार सुरक्षीत)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi

सोच कें आपणी लिजाओ यदुग आसमान तक,
ताकि वीक आघिल बै सब तार लै झुकि जाओ।
नि बणाओ आपण सफर कें किश्तीक मोहताज,
हिटो यदुग शानैल कि तूफान लै झुकि जाओ॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
11 hours ago
हे भुल्ला तु घौर जाणी छै त,
हे भुल्ला तु गढ़वाल जाणी छै त,
द्वी मेली चाणों की एक मिठे कु
डब्बा
मेरा घौर भी पौंछे दे।
मिली जाली मेरी ब्वे त्वे
रस्ता मा
छुणख्याळी दथुड़ी होली हाथो मा
मुंड मा मुन्यसु अर
कुछ्ली गात होली।
जाणी होली सारी घासु बटी
ज्वा ब्याखुनी धौं
सबसी रात होली ।
हाँ भुला वा मेरी माँ होली
पछ्याण जाण तिन
पौछे दे मेरु मीठे कु डब्बा
अर द्वी बीज चाणों का।
पुछली त बोली दे
राजी खुसी च
अगला मैना घार आलू।।
त्वे खुण धोती अर
बाबा कु फंची ल्यालु।।
अतुल गुसाईं (जाखी)
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 17
तख सैड्डी दुनिया पर फुटबौल कु बुखार चढ्यूं च
कि "ब्राजील" जितलो कि "अर्जनटीना"..

यख हमारा गढवाल पर प्रधान का चुनौ कु बुखार चढ्युं च
कि मथ्या खोला कु "दिन्नु दरोल्या" जितलु
या बेल्या खोला कु "जग्गु जुआरि" ......... येपडि बैका

#BOLYA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 16
मछली जल की रानी है .ये कु घर्या वर्जिन..

कज्याणी घर की राणी चा,
करदी अपणी मनमानी चा,
काम बतावा त चिढ़ जाणी चा,
अर
सीरियल दिखावा त खिल जाणी चा... Yepadi beka,.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 14
कोका कोला जी कोका कोला
के जाती अर के गौं का होला
दवा छन तुम कि दारु छन?
जनानी छन कि मंस्यारु छन ?
तुम्हारी मवासी मा स्याळ रोला
कोका कोला ...
पाणी सुखौन्दा अर खोंदा माटू
पाणी की चोरी करदा घाटू घाटू
तुमुक रख्युं छ टेमरु कु सोटा -
हमतैं न समझा जी कालू लाटू
तुम यख ओला त हम कख जौला
कोका कोला ...
©


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Rajiv Nayan Bahuguna - राजीव नयन बहुगुणा