• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 13 · Edited
चाँद से बतियाने का मजा रात मे है
ये बात तारे जानते है
पर घर मे जुगुनू और भी बहुत है
चाँद से बतियाने को
तारो को घर से निकलना पड़ता है
घर पर चाँद से डेटिंग हो सकती नहीं
तारे सब आवारा है
लेकिन संस्कार भरे इनमे बहुत
जानते है चाँद से बतियाना है
तो तारो को घर से निकलना पड़ेगा
वो लड़के जानते है
वो खुबसुरत लड़की कब नहाके
बालो को झटकने के लिये
छत पर कब आयेगी
इसलिये वो किताबो को
लेकर छत पर टहलते है
तारे सब होश्यार है जानते है
घर से चाँद की चाँदनी देखेगी नहीं
इसलिये चाँद से बतियाने को
तारो को घर से निकलना पड़ता है
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 11 · Edited
माया सी चार द्यब्ता सी
ह्वेकी बि दिखेंदी नि
माया भरम चा
स्या क्वी जादू
पिरेम माया कु बोल्दन
त पिरेम क्या माया चा
स्या बस ठगौणीया छवी
सबाल मन मा स्यु चा
माया मा मनखी ठगदू अफ्वी
स्या ठगांदु क्वी
माया जन भगवानै माया
हर कैका समझ मा नि आंदी
पर विकी माया सैरी दुन्या चल्दी
पिरेम माया बि इन्नी चा
हवेकी बि हर कैका बिंगणा मा
नि आंदी स्या माया
माया सी चार बिंग सकदु
वू ही ज्यू ठगै माया मा
अब्ब मैमा क्या पुछणा लग्या
विस्बास नि होंदु पुछ ल्या कै मायादार मा
रचना ............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 9
दोई आखर बचा दे

दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे
अपरी अपरी मा रमजा
यख वख इन ना तू गमजा
दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे

कैल नि आन अब
घैल कै की तेथे ये जियू मेरु
बरसी कै की तप तज
यकलु रैगे तू टप टापरानु
दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे

छम छम भैगे धारा
इन निर्भगी आंख्युं थे दे दे तू ठारा
सदनी चकलता रैगे
कै की ये परानु तू बाट हेरदी रेगे
दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे

दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे
अपरी अपरी मा रमजा
यख वख इन ना तू गमजा
दोई आखर बचा दे
जिकोड़ी मेरी मेसे तू छुईं लगादे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday
ह्युं चलूं

देक देकि ले ये गोरी कंठी
छजा बैठी की हैरी डाली
देबता म्यारा सुनि लिंवा
मनखी थे मेर बिंगी लिंवा
ह्युं चलूं..... ३

स्वेत रंग रंगी ये डंडी कंठी
क्द्गा स्वाणी देकें दी ये ह्युं चांटी
मेरा घर मेर पाडा बिजी जावा
फजल ऐगे यख झट ऐ जावा
ह्युं चलूं..... ३

देकदा देकदा हर्ची जैंऊँ
ये उकाला मा बिसी जैंऊँ
राती की झौल पोड़ण से पैल
म्यार अपड़ा परती आवा
ह्युं चलूं..... ३

देक देकि ले ये गोरी कंठी
छजा बैठी की हैरी डाली
देबता म्यारा सुनि लिंवा
मनखी थे मेर बिंगी लिंवा
ह्युं चलूं..... ३

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 8
देकि ले

देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले
ये मेरा हिमाल यख पसरयाँ
ये हैरा भैरा बुग्याल
देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले

झट अंदि झट जांदी ये ब्यार
झट अंदि जांदी ब्यार कया तुम थे बी ये खैयाल
कैल रचे हुलु कैल रंगे हुल
इनि रंगमत बहार ये पहाड़
देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले

जख देक वख हैरी हैरी
मळमळी मयाल्दी घास
टुकु नीलू सरग ह्युं चलूँ को घार
भेंटि जा ऐन स पैल यख मौल्यार
देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले

देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले
ये मेरा हिमाल यख पसरयाँ
ये हैरा भैरा बुग्याल
देकि ले देकि ले
गेल्या आ देकि ले

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 7
गारा तू ढुंगा बण जा

रै जाली कण कै
यख सदनि कू तेरु निशाण
गारा तू ढुंगा बण जा
अपरी ही एक दिनी ऊ बण जालु पहाड़
रै जाली

खते जा यख ये माटा मा तू इनि
बीज ब्याणा बण पसर पसरी की
हैरा भैरा बोग्याळ बण जा
अपरी ही एक दिनी फूली पाकी वो जाला
खते जा

जयादा नि सोची
भौल कया यख तिल खोजी
हर्च्यनु मा ही यख मौज च भैजि
भौल ना बोल की मिल ना बोली
जयादा नि

रै जाली कण कै
यख सदनि कू तेरु निशाण
गारा तू ढुंगा बण जा
अपरी ही एक दिनी ऊ बण जालु पहाड़
रै जाली

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आवा दिदो भुलो आवा..
नांग धरती की ढकावा ..
डाली बनी- बनी लगावा...

डाली पृत्रो की नो की .
डाली रोपा पूण्ण कमावा..
हिटा रम झम चला भेय ठम ठम .....

दर्शल मा दगड्यो मी ए वालू गीत इले सुणाणू छो .कि 12 अगस्त खुण नेगी जी कू जन्मदिन च .अर हम लोग वेदिन थेय प्रेरणा दिवस का रूप मा मनाणा छो | जेम उत्तराखण्ड का अलवा भारत अर भेर देशो मा भी लोगून व्याक्तिगत रूप से वृक्षा रोपण करण जनकि .सतपोली, पौडी,कोटद्वार, देहरदून, नैनिताल, दिल्ली, मुबई, अमेरिका, दुबई, व कतगे जगो एक छ्वाटू सी स्तर पर डाला र्वापणी .नेगी जी का गीतो मा कुछ न कुछ प्रेरणा जरूर छुपी हुन्द .यदि आप भी नेगी जी का गीतो से प्रेरित छो त एक डाली टक लगे की लगया | उन भी आपन सुण्यो होलू बल एक डाली दस पुत्र समान हुन्द | त बिसर्या न हो 12 अगस्त गढरतन नेगी जी कू जन्मदिन फर एक डाली लगाण .चाहि तुम एक गमला उन्ध लगया |

विशेष आभार- समस्त एडमिन आँफिसियल ग्रुप आँफ नरेन्द्र सिंह नेगी |

दगड्या अनूप पटवाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 28
गो माता, बैल अर सांड
पहाड़ का कस्बों की पहचान
अर हमारा पाखण्ड का स्पष्ट हस्ताक्षर
आप कुछ भी ब्वाला
यु ठीक नि हुणु च

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 12 · Edited
नेगी दा का जन्म दिवस मा मिल भी मने प्रेरणा दिवस डाला लगैकी...................शैलेन्द्र जोशी

तिन लगे डाली गीतू की
तिन लगे डाली बिचारो की
तिन लगे डाली संस्कीर्ति की
तिन लगे डाली लोकभासा की
आन बान शान की
ऐशू लगाला जलमदिबस मा
त्येरा नौकी डाली नेगी दा हम भि

रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 23 · Edited
कविता----------------- शैलेन्द्र जोशी
भै नरु
हरु करियु भारु करियु त्वेन गढ़ गीतों तय भै नरु
हे त्वे जनि गितैर नि ह्वे सक दू फेर
गढ़ कवी गढ़ रफ़ी गढ़ कविन्द्र हे नरेन्द्र सिंह नेगी
सब्दो कु कोठार चा गढ़वाली भासा खुनी मौलियार चा
भै नेगी महान छाया गढ़ गीतों की जान छ्या
गीतों की गंगा सदनी तयरा मुख बीटी बग दी
हैसदी हैसदी गा दी गीत मुड मा टोपला हाथ मा बाज़ा
बहुत स्वाणु लग दू जब गांदी जब कुई पहाड़ी गाना
जब तू ढौल मा ऐकी ढौलैर हुवीकी
यु गीतों की छालार बैकी डैरो डैरो पौंच जादी
उत्तराखंड की समस्या मा रचय बस्य तयारा गीत
त्यरा नयु कैसीट जब बाज़ार मा अन्दु ता धरा धडी बिक जादू
त्यरा नया गीतों की जग्वाल मा लूग रैदन
जनि गीत बाज़ार मा अदन ता समलोणीया ह्वे जादन
कालजय गीतों कु रचनाकार गढ़वाली गीतों कु सिंगार
मखमली भोंन कु जादूगर भै नेगी
हिवाले संसकिरती तय हिवाला ऊँचे देंन वाला अपणु तोर कु कलाकार
गढ़ गीतों कु हीरा भी तू छे नवरतन छे तू गढ़ कु गढ़ रतन छे तू
बात बोदू गढ़ की मन की गढ़ गौरव छे तू
नौसुरिया मुरली जनि सुरीली गौली छा तेरी
गंगा जनि शीतलता चा तेरा गीतों मा
मायालु गीत तेरा मायालु भोंण चा
गीतों कु बाट की लेंन पकड़ी की गीतों का बटोई बणी की
गीतों का बाट ही बणी ग्या
ये मुलुक का सुर सम्राट बनी ग्या
गीतों कु पियूष जुगराज रया सदनी संसकिरती पुरुष