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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 25
सपोड़ा-सपोड़

मर्चायाणा कददू -भात, जरा जरा छाछ भी
हथ से खाणु कु मज़ा ही कुछ होर च य़ार
सपड़ाक - सपड़ाक
बौंली मा पूंजो सींप
अर लग्याँ रा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 24
प्रधनी बौ द्वी मैना मा माला माल ह्वे गे,
सोना इथगा सस्तू भी नि ह्वे...
नाका की फुल्ली ज्वान, बुलाक ह्वे गे।।
ब्याली तक दिन कटेणा छा सीला वोबरी।
माटा कुड़ी आज लैन्टरदार ह्वे गे।
ब्याली तक गलणों फर छाया पुणीं छै,
आज बौ लाल चचग्वार ह्वे गे।
परसी ई बात फर गाऊ मा बबाल ह्वे गे।
ये अतुलल जरसी क्य बोली कि
मेरु कपाळ लाल ह्वे गे।
सर्वाधिकार सुरक्षित(अतुल गुसाईं)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
7 hrs · Edited ·

मेरी बेटी हो तुम

मेरी बेटी हो तुम
सुनहरी धूप हो नीम के छांव तक
मेरे ममता के साथ चल उन बादलों के गांव तक
बन मेरा सहारा
बेटी तू ही मेरा किनार
मेरी बेटी हो तुम

मेरी बेटी हो तुम
जीवन का आदि.अन्त तुम्ही से
सतरंगी इन्द्रधनुष की दुनिया तुम्ही हो
कोरा कागज हो तुम
भव सागर की तारक हो तुम
मेरी बेटी हो तुम

मेरी बेटी हो तुम
धन कामना का जोड़ हो
मंदिर और साधु-संत की दौड़ हो
गृहस्थ की मेरी पहली कुंजी
आनन्द बेल की तू पूंजी
कुल के दात्री हो तुम
मेरी बेटी हो तुम

मेरी बेटी हो तुम
दो कुटुम्ब का जोड़ हो तुम
मधु-अमृत और सम्मान का मोड़ हो तुम
सुख-दुःख की बाती
मेरे सुबहा मेरी रात्रि
मेरी लाडी मेरी बेटी
मेरी बेटी हो तुम

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 25
सपोड़ा-सपोड़

मर्चायाणा कददू -भात, जरा जरा छाछ भी
हथ से खाणु कु मज़ा ही कुछ होर च य़ार
सपड़ाक - सपड़ाक
बौंली मा पूंजो सींप
अर लग्याँ रा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 24
प्रधनी बौ द्वी मैना मा माला माल ह्वे गे,
सोना इथगा सस्तू भी नि ह्वे...
नाका की फुल्ली ज्वान, बुलाक ह्वे गे।।
ब्याली तक दिन कटेणा छा सीला वोबरी।
माटा कुड़ी आज लैन्टरदार ह्वे गे।
ब्याली तक गलणों फर छाया पुणीं छै,
आज बौ लाल चचग्वार ह्वे गे।
परसी ई बात फर गाऊ मा बबाल ह्वे गे।
ये अतुलल जरसी क्य बोली कि
मेरु कपाळ लाल ह्वे गे।
सर्वाधिकार सुरक्षित(अतुल गुसाईं)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 11
आज सभी दरोळो तै धरना देण चैंद।
दरोळो तै सरकार कु पुतला फुकण चैंद।
आखिर दारू पेण भी त
हमरू जन्मसिद्ध अधिकार च।
चला हडताल करा सब दरोला।
आखिर सरकार की हम फर क्य खार च।
दरोलो कु भी आम बजट हूण चैंद।
अगर क्वी दरोळो पी के मोरी गे।
वे कू फेमली पेंसन हुण चैंद।
अतुल गुसाई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


आब नई पीढ़ी बटिक मिलणे पीड़ भरी सौगात,
च्यलकुणों आपण बाप हैं तेरि केछु यां औकात।
आब तो आपण (च्यल ) खून लै करणौ कमाल,
ब्वज समझ बेर मै बाप कें घरबै दिणौ निकाल॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday
ऐजा भेंटि जा

कन छे तू कख छे.... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे
नि भलु लगनू
तै बिगैर यख यक्लु .... २
ऐजा ऐजा भेंटि जा .... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे

क्द्गा दिन ऐनी इनि गैनी .... ऐ छोरी पुष्पा
क्द्गा दिन ऐनी इनि गैनी
धरियूं च सम्भली तेर माया
ये सफा मा गुंडालिक
ले जा लेजा तू मेर ये जियु माया .... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे

गोल मुखडी प्याज की टोकरी
बुरांसी डाली मा सेबा की जीकोडी
कौदू की बाड़ी दगडी ये चुना की रोटली
ऐजा खिले जा ऐजा .... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे.... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे

प्रीति का रंग छन
तै दगडी हे रंगी छन
ये छला पल छला तल माथा मथ माथा
तेर माया संगी सजी छन .... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे.... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे

कन छे तू कख छे.... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे
नि भलु लगनू
तै बिगैर यख यक्लु .... २
ऐजा ऐजा भेंटि जा .... ऐ छोरी पुष्पा
कन छे तू कख छे

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 2
अब्द द देर व्हैग्याई

बस्ग्याल ऐंदु
जीयु धक व्है जांदू बोई धक व्है जांदू
बस्ग्याल ऐंदु

कै डारा कै घारा काल ऐजांदू
बादल चिरडयाना किले किले की ये फटना बोई किले की
बस्ग्याल ऐंदु

कैकि नजर लागि
किले की विपदा की इन घड़ी ऐ ये पाडा बोई किले की
बस्ग्याल ऐंदु

उचण्डू उकेरु
भगवती की मंडाण जागेवों कै देब्तों थे मनऊं बोई कै देब्तों थे
बस्ग्याल ऐंदु

अब्द द देर व्हैग्याई
पाडा ते बमों धामोंन सुरुंगुन खैनु गैल कै द्याई बोई गैल कै द्याई
बस्ग्याल ऐंदु

बस्ग्याल ऐंदु
जीयु धक व्है जांदू बोई धक व्है जांदू
बस्ग्याल ऐंदु

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
July 31
यु जियु दगडी मिथे

कया हुनु कया हुनु
यु जियु दगडी मिथे
ऊ मी दगडी बचान लगे
मी ये दगडी बचान लग्युं

बादल जनि पंख लगि
ऊ यूँ उकाल उड़णु लग्युं
गद्न्युन जनि वेग आण लगि
ऊ ये ऊंदार बोगणयूं लग्युं

कया हुनु कया हुनु
यु जियु दगडी मिथे
ऊ मी दगडी बचान लगे
मी ये दगडी बचान लग्युं

कबि जानू यख कबि वख
ये जियु बौल्या बथा कया तू खोजनु लगे
इनि बी कया तेर चीज खवाई
जै थे में दगडी ही छुपानु लगे

कया हुनु कया हुनु
यु जियु दगडी मिथे
ऊ मी दगडी बचान लगे
मी ये दगडी बचान लग्युं

रंग आणु लगे फूली खिल्ना लगे
यकुलु हास्नु लगे यकलु रुनु लगे
कंन ये जियु थे रोग लागि
माया माया थे अब बुलानी लगे

कया हुनु कया हुनु
यु जियु दगडी मिथे
ऊ मी दगडी बचान लगे
मी ये दगडी बचान लग्युं

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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