• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 16 · Edited
आहा बोडी जी क्या नाच च आपकू।
कखि न हो गोली चली जो और बोड़ा थें की जेल हवे जो तब कलू बोड़ा।
घिन घिना घिन घिन्जा नाकड़ी##

Sanjay singh"अन्जान

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चौमासा कु मज़ा बल बुग्यालों मा !
त साब यो छ बेदनी बुग्याल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
July 17
एगो हरेला ऐ ऊकाल

जी रया जागि रया
एगो हरेला ऐ ऊकाल

आषाढ़ एगो हरेला छैगो
जस ऊँच्चा आक्स

गौं घार माथा बिरजो हरेला
कपाल हल्दू चवलों साथ

सिल पीस भात खैई
लकड़ु कु टेका खुठों साथ

दुब जस पसरी जैई
मेरा मुल्का कु रीती रिवाज

जी रया जागि रया
एगो हरेला ऐ ऊकाल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
July 17 · Edited
ले जा दगडी मेरु उत्तराखंड मेरु पहाड़

मेरु गौंऊ मुल्कू
माया कू सौंसार
यख मिलालू तेथे दगड्या
प्रेमा कू भंडार

ऐजा यख तू ऐजा इक बार
देख ले मेरु उत्तराखंड ये च मेरु पहाड़

बगदि छ्ल छ्ल गंगा धारा
ढुंगा ढुंगा मा बस्या देबता हमारा
बद्री- केदारा यख मेरा नरंकार
माँ भगोती कू लगा दे जै कारा

ऐजा यख तू ऐजा इक बार
पौड जा मथा हो जालु तेरु ऊधार

लाल खिली बुरंसा हैंसी ते देखेली
पिंगला रंगा की नार फ्योंली ते देकि की लज्जेली
किन्गुडा काफल का ये डंडा कांठा मा
देके जाली ते थे सरया धरती ई नटेली

ऐजा यख तू ऐजा इक बार
ऐगै ई यख तू जब जैलू मी जुलों तेरु साथ

मायादार लोग मिळाल
माया की ही ऊ छुईं ल्गाला
बिखरी पड़ी च सरया धरती मा माया
उकरी सकी उत्गा उकरी की ले जा

ऐजा यख तू ऐजा इक बार
ले जा दगडी मेरु उत्तराखंड मेरु पहाड़

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
July 19
जीकोडी गीत गाणी लगी

जीकोडी गीत गाणी लगी
कै थे बुलानि लागि ...... हो
कै थे बुलानि लागि ...... हो

माया लगानि लागि
माया दिखाण लागि
माया माया दगडी ,ब्चान लागि
बैठी छ्या वा यकुली कख जान लागि ...... हो
जीकोडी गीत गाणी लगी
कै थे बुलानि लागि ...... हो

भितर ,भैर आन लागि
मुखडी मा वा छान लागि
मायादार छुईं लगान लागि
कु व्हाली वा जीं थे जीकोडी जीकोडी मा छिपान लागि ...... हो
जीकोडी गीत गाणी लगी
कै थे बुलानि लागि ...... हो

आपरी मा वा रैन लागि
सुप्नियों गैंना गठ्यान लागि
कैंकी खुद विंथे आन लागि
बैठी बैठी कबी हैसेंन कबी रुलाण लागि ...... हो

जीकोडी गीत गाणी लगी
कै थे बुलानि लागि ...... हो
कै थे बुलानि लागि ...... हो

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
July 20
हे भूली आणु छों मि घारा

हे भूली आणु छों मि घारा ते थे क्या लान
बोली दे तू बोली दे झट अपरा गीची खोली दे
हे भूली आणु छों मि घारा

भैजी काय बोलणा आपन क्या चीज आप लान
सिन्कोली ऐ जावा भैजी सुखान लगी बोई बाबा जी का परान
भैजी काय बोलणा आपन क्या चीज आप लान

जब भ्तेक आप गयां भैजी ऐ पाड़ थे छोड़ि कि
ना नींदि आंदी ना राति जांदी खटलु कु बोई कू सिरनु अब छुईं लगान्दी
भैजी काय बोलणा आपन क्या चीज आप लान

उजाड़ा पुंगड़ी भैजी यकुली किले की बिरानी वहैगे
गढ़देश कु पाणी भैजी हम दगड हे किले बैमानि वहैगे
भैजी काय बोलणा आपन क्या चीज आप लान

ना क्वी शौक रेगे भैजी किले हमरी शान हर्ची गे
आलू प्याज टमाटर हो भैजी अब पाड़ा मा भैर भतिक ऐंन लगे
भैजी काय बोलणा आपन क्या चीज आप लान

हे भूली आणु छों मि घारा ते थे क्या लान
बोली दे तू बोली दे झट अपरा गीची खोली दे
हे भूली आणु छों मि घारा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hours ago
जब अपरा अपरा नि राई

जब अपरा अपरा नि राई....... २
कै मुख से मि करूँ अपरू किं बड़ाई

देख्दा विपदा दूर खड़ा रैगैनि आंखी
टिप टिप पौड़ी कै बाना
किले कन जिकड़ी तिन इन बैमानी

जब अपरा अपरा नि राई....... २
कै मुख से मि करूँ अपरू किं बड़ाई

सुख मिली सब दौड़ी ऐना
जब दुःख ऐ सब बौडी गेना
बाप दादों गंठया बिकी गैनी सब गैना

जब अपरा अपरा नि राई....... २
कै मुख से मि करूँ अपरू किं बड़ाई

एक तू ही छे ना दुजु नि क्वी ई
जीकोडी मेरी बेटी तू ही मेरी भूली
छोड़ी गैंन सब तिल मी थै नि छोड़ी

जब अपरा अपरा नि राई....... २
कै मुख से मि करूँ अपरू किं बड़ाई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
11 hours ago
प्रधनी बौ द्वी मैना मा माला माल ह्वे गे,
सोना इथगा सस्तू भी नि ह्वे...
नाका की फुल्ली ज्वान, बुलाक ह्वे गे।।
ब्याली तक दिन कटेणा छा सीला वोबरी।
माटा कुड़ी आज लैन्टरदार ह्वे गे।
ब्याली तक गलणों फर छाया पुणीं छै,
आज बौ लाल चचग्वार ह्वे गे।
परसी ई बात फर गाऊ मा बबाल ह्वे गे।
ये अतुलल जरसी क्य बोली कि
मेरु कपाळ लाल ह्वे गे।
सर्वाधिकार सुरक्षित(अतुल गुसाईं)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

झणी कख हरचिन सी चोंफला। झुमेलो। रान्सु। थडिया। बग्डवाल। कौथिग। रामलिला। आजकल त बस बिना मुंड खुटा का गीत बणग्येन। जो कु मतलब त लेखण वाला थें भी नि पता बस पट मिलण चेंद। तब लबरा छोरी कु लबराट हो या सिल्की कखी बिल्की हो बस नोट आण चेन्दा।
सभि लग्याँ जुगाड़ मा चा जनता जाओ भाड़ मा।

Sanajay singh"अन्जान"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

इस्कुल्या !
अरे पाटी-बोल्ख्या का जमाना वाला कतगा छन रे यख ?
छन त कख छन ? जरा हम थें भी त पता चलु। निथर हमारा गों मा लोग मित्हें बोल्दन बल कि"अबे तेरा ज़माना का त ढुंगा तक गोळी गेन"
जरा शेयर करा धौं !
क्या पता मिली जो कखी मेरा स्कुल्या दगडया।।