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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
2 hours ago
टरकणि हे टरकणि......

पकणा होला आम,
मेरा प्‍यारा गौं मा ,
खांदु तोड़ी तोड़ी,
ज्‍यु ज्‍युकड़ि जिबाळ मा,
जिंदगी बितणि यख,
रुप्‍या जोड़ी जोड़ी,
बोला दौं मेरा दगड़यौं तुम,
क्‍या मैं सच बोन्‍नु छौं......

-कवि जिज्ञासु की कलम सी
मेरी प्रकाशित रचना कू एक अंश
15.7.2014

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
3 hours ago
ढुंगा छौं.....

पर ढुंगा निछौं,
कूड़ा अर पठाळ बणिक,
घाम बरखा सी बचौन्‍दा,
किलै मनखि तुम हमतैं,
तौ भि ढुंगा बोल्‍दा.....
-कवि जिज्ञासु की कलम सी
मेरी प्रकाशित रचना कू एक अंश
15.7.2014

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Rajendra Bahugunaposted to‎जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
July 11
बजट का गजट
दश रूपये में पूडी,सब्जी हर स्टेशन मे दिलवादेते
अच्छा पानी हर गरीब को स्टेशन में पिलवा देते
थर्डक्लास के वेटिंग रूमो में भी झाडू लगवा देते
जिन डिब्बों में फटी सीट है उनको थोडा सिलवा देते
थोडा सा चूना पुतवाते जंहा-जंहा धब्बे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें हैं
       
माया के हाथी की पूंछे तुम सब मिलकर तोड रहे हो
तुम भी तो बल्लभ भाई को मूर्ति से ही जोड रहे हो
पहले मूर्ति चन्दे पर थी अब है सरकारी छाथी पर
क्या अन्तर है मोदी में और मायादेवी के हाथी पर
बाहर से सब श्वेताम्बर हैं भीतर सब पूरे काले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
       
नंगे भूखे अगडे़ पिछडे के पैसेन्जर सबको ढोती है
बलात्कार में मध्यवर्ग की जोरू भिंच-भिंचकर रोती है
बुलेट ट्रेन, सपनों में नंगे ,चांद सितारे देख रहे हैं
ट्रेनो के इन्जन की गर्मी में सब रोटी सेंक रहे हैं
अब तक जो भी जुडे रेल से, सबके माले पर माले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
       
सूखा पडने वाला है अब सौ करोड से सींचोगे
मैली गंगा का मेकप कर के घाटों से भींचोगे
जमुना का कंही नाम नही है जो तेरे घर से बहती है
कान खोल कर सुनलो बहरों जनता रो-रो कर कहती है
उद्योगपति के ही हरदम गंगा में बहते नालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
       
मंहगायी कम कैसे होगी जमाखोर कैसे पकडोगे
चन्दा देने वाले चेलों के कैसे - कैसे जकडोगे
लोकतन्त्र के मेरूदण्ड में ये ही कीडे डाल रहे हैं
शदियों से ये चाल,चरित्र ओर चेहरों को खंगाल रहे हैं
सत्ता में कोइ भी बैठे,इनके गडबड घोटालें हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
       
आटा,चावल,शब्जी,दाले,नमक तेल और मिर्च मशाले
आलू.लहशुन,प्याज ने ही तो हरदम नंगे, भूखे पाले
सत्तर फीसदी नंगे,भूखों के मूंह पर रोटी डलवाते
हम को कोइ फिक्र नही थी,फिर चाहे तुम भारत खाते
कवि'आग' के छन्द हमेशा शोले भडकाने वाले हैं
मोदी जी मै कैसे बोलूं अच्छे दिन आने वालें है
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

इस्कुल्या !
अरे पाटी-बोल्ख्या का जमाना वाला कतगा छन रे यख ?
छन त कख छन ? जरा हम थें भी त पता चलु। निथर हमारा गों मा लोग मित्हें बोल्दन बल कि"अबे तेरा ज़माना का त ढुंगा तक गोळी गेन"
जरा शेयर करा धौं !
क्या पता मिली जो कखी मेरा स्कुल्या दगडया।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

आहा बोडी जी क्या नाच च आपकू।
कखि न हो गोली चली जो और बोड़ा थें की जेल हवे जो तब कलू बोड़ा।
घिन घिना घिन घिन्जा नाकड़ी##

Sanjay singh"अन्जान

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
July 11
आज सभी दरोळो तै धरना देण चैंद।
दरोळो तै सरकार कु पुतला फुकण चैंद।
आखिर दारू पेण भी त
हमरू जन्मसिद्ध अधिकार च।
चला हडताल करा सब दरोला।
आखिर सरकार की हम फर क्य खार च।
दरोलो कु भी आम बजट हूण चैंद।
अगर क्वी दरोळो पी के मोरी गे।
वे कू फेमली पेंसन हुण चैंद।
अतुल गुसाई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 25
नौनी : भोल मेरू बर्थडे चा।
नोनू : अच्छा, अडवांस हैपी बर्थडे।

नौनी- (मुस्कुराते हुए): गिफ्ट क्या देली मैं?
नोनू : क्या चायेणूचा?

नौनी : एक रिंग।
नोनू : में दुई दीलू, पर ते अपडी बोई का सौं छन उठई न हो... वो क्या कन लाटी जरा बैलेंस कम चा।!

#BOLYA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 23
हरीश दा का गौळा मा
हक़डाक पुणी च बल
दगड मा चसग
दफाग भी हूणी च बल
घौर कूड़ा मा
भिबडाट भी हूणु च बल
आपदा त बहुगुणा न खाई छै
यख असगार
किले हुणु च बल।
कुज्यणी भै कुज्यणी
दुवा त मी भी कनु छौ
फिर भी एक मुख्यमंत्री
तयार कौरी ल्या ति तब।
अतुल गुसाईं@atulgusain

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
June 20
न त सरग,न सरकार बरखणी।
ज्युन्दा आदिमा कि आत्मा च भटकणी।
कले दे होलू भला दीन का चक्कर मा वोट
आज बात दिल मा च खटकणी।।
मनमोहन का राज मा कंस जन राज देखी,
ये राम राज्य मा भी,जिंदगी लटकणी।
वाss मैंगे की मार, जिंदगी उदार
जिकुड़ी डौरा कु धक धक धडकणी।

अतुल गुसाईं(सर्वाधिकार सुरक्षित)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
Yesterday
"हरेला"
हरेला कुमाऊ का एक प्रसिद्ध त्यौहार है जो सावन के महीने मे कर्क संक्रांति को मनाया जाता है| इस दिन से ठीक दस दिन पहले सात अनाजों को मिला कर बांस की टोकरी, लकड़ी की फट्टी या गत्ते का डिब्बा जो भी मौके पर उपलब्ध हो उस मे रेत बिछा के बोया जाता है| रोज सुबह शाम ताजा जल लाकर उसमे डाला जाता है | इस खेती को घर के अँधेरे कोने मे रख्खा जाता है ताकि इसका रंग पीला रहे| कर्क संक्रांति के दिन घर मे सामर्थ के मुताबिक तरह तरह के पकवान बनाए जाते है| फिर सुबह को पुरोहित जी आ कर हरेले को प्रतिष्ठित करते हैं|फिर पुरोहित जी हरेले को पहले घर मे भगवान् जी को चढाते हैं और इष्ट देब के मन्दिर मे चढाते हैं| जो भी पकवान बनाए होते है सब का भगवान को भोग लगता है| पुरोहित जी के भोग लगाने के बाद घर के बड़े बुजुर्ग बच्चों को एक साथ बैठा कर हरेला लगाते हैं | हरेले को दोनों हाथों मे पकड कर पैरों पर लगाते हुए सर की और लेजाकर सर मे रख देते हैं और मुह से बोलते हैं|
लाख हर्यावा, लाख बग्वाई, लाख पंचिमी जी रए जागि रए बची रए |
( भाव तुम लाख हरेला, लाख बग्वाली, लाख पंचिमी तक जीते रहना)
स्यावक जसी बुध्धि हो, सिंह जस त्राण हो|
(भाव लोमड़ी की तरह तेज बुध्धि हो और शेर की तरह बलवान हो )
दुब जैस पनपिये, आसमान बराबर उच्च है जाए, धरती बराबर चाकौव है जाए|
(भाव दुब की तरह फूटना , आसमान बराबर ऊँचा होजाना, धरती के बराबर चौड़ा हो जाना|)
आपन गों पधान हए ,सिल पीसी भात खाए|
(भाव अपने गांव का प्रधान बनना और इतने बूढ़े हो जाना की खाना भी पीस कर खाना|)
जान्ठी टेकि घुवेंट जाये , जी रए जागि रए बची रए |
(भाव छड़ी ले कर जंगल पानी जाना, इतनी लम्बी उम्र तक जीते रहना जागते रहना.|)
सब को हरेला लगाने के बाद भगवान को लगाया गया भोग सब बच्चों मे बाँट दिया जाता है| लड़के हरेले को अपने कान मे टांग लेते हैं और लड़कियां हरेले को अपनी धपेली के साथ गूँथ लिया करती हैं|

आज मुझे भी अपना बचपन याद आ गया है जब हमारी आमा (दादी) जिन्दा हुआ करती थीं | हम छोटे छोटे बच्चे थे जब खाने पीने की कोई चीज घर मे बनती थी तो पहले हम बच्चों को ही दी जाती थी| पर हरेले के दिन जब तक पुरोहित जी नहीं आते थे किसी को कुछ नही मिलता था|जब हम आमा से खाने को मांगते थे तो आमा कहती थीं '"इजा लुह्न्ज्यु कै ओन दे, हर्याव लगे बेर फिर दयूल| कहने का मतलब था कि पुरोहित जी जोकि लोहनी थे उनको आलेने दे हरेला लगाकर फिर खाने को दुगी | काश ! कि वो बचपन फिर लौट आता?
आप सब को हरेले की शुभ कामना |
के: आर: जोशी (पाटली)

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