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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 13
बिंदी मेरी

बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी
कपला ये हिंवाल पहाड़ मा तू कन दमकी
बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी

बिन्सरी बेला की रीत ये अबोला की
उजाळु ऐंदू जांदू जी अंधेरु छैटू जांदू जी
अदमुख इनि लागि वा बद्री-केदार का घारा जी
बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी
कपला ये हिंवाल पहाड़ मा तू कन दमकी
बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी

फूलों फुलेरा जी गद्नियों बगेरा जी
डंडी कंठी हैरी चमकनी खोलों तक चमकेरा जी
उठी जा जागी जा सियां रे ऐगे सुबेरा देबता जी
बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी
कपला ये हिंवाल पहाड़ मा तू कन दमकी
बिंदी बिंदी बिंदी मेरी चम चमकी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 15
बस्ग्याल को मैना किले तिल काल रूप धैरा

बस्ग्याल को मैना किले तिल काल रूप धैरा
कंन उथल पुथल मची च ऐबार ये मेर पहाड़ा
किले की उठनी च इनि ये बोई गंगा की धारा

बादल कीले बीरडया किले की इन चिरडया व्हाला
फटना छन बोई किले ऊ ऐकी ये मेर पहाड़ा
किले की उठनी च इनि ये बोई गंगा की धारा

कु जैन कै बगता कब कै कु काल ऐ जैई
नि ठिकाण नि खबर कैथे अब ये मेर पहाड़ा
किले की उठनी च इनि ये बोई गंगा की धारा

डरी डरी जिकोड़ी च सिन्कोली ऐ जा डेरा
डेरा की बी च खैर निच कया व्हैजालु ये मेर पहाड़ा
किले की उठनी च इनि ये बोई गंगा की धारा

बस्ग्याल को मैना किले तिल काल रूप धैरा
कंन उथल पुथल मची च ऐबार ये मेर पहाड़ा
किले की उठनी च इनि ये बोई गंगा की धारा


एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 10
ऐसु बरस म्येरा मुल्क नंदाजात होली
बाराबरस मा नंदाजात अपणा मुलूक बौड़ाली
दीदी भूली नंदा का गीत गाली
ध्याणी अपणा मैत जाली वख नाचली गाली
मै कनी अभागी छोऊ रमियु देस मा मन मेरु पौच्यु हिमालय
नौटी कासुवा ईधा बधाणी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
चौसिंघ्या खाडू का पैथर छातोलियो तै लेकी जात्रा का जत्रोई जाला
सेम कोटी भगोती कुलसारी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
मेरु मन पौच्यु वख
चैपड़ो नन्दकेसरी फल्दिया गोउ मुन्दोली
कण भैटुली होली अपणी मैत बैटूली
कुरुड़ बाधण वाला भी पौचिया होला नन्दकेसरी
नंदा जात कु कनु मिलन देखा
कुरुड़ दसोली दसमद्वार डोली
गैरोली पाताल पातर नाचोणिया
सिलासमुद्र च्न्दनियाघाट
वख बुग्यालो लोग हिटणा होला
मेरु मन पौचियु वख
घाट माँ कानी भारी करुणा
नंदा मैत से विदा होली
मि अभागी यख परदेश मा खुदेणु छोऊ
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यु त हर भाषा मा होंदी चा
गीत कबिता गजल
जब लोक भाषा मा होंदी
क्वी गीत कविता गजल
त वा बस होंदी अपणी
छवीबथ
ज्यू जुकुदी कर देंदी तर
रचना........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 10
ऐसु बरस म्येरा मुल्क नंदाजात होली
बाराबरस मा नंदाजात अपणा मुलूक बौड़ाली
दीदी भूली नंदा का गीत गाली
ध्याणी अपणा मैत जाली वख नाचली गाली
मै कनी अभागी छोऊ रमियु देस मा मन मेरु पौच्यु हिमालय
नौटी कासुवा ईधा बधाणी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
चौसिंघ्या खाडू का पैथर छातोलियो तै लेकी जात्रा का जत्रोई जाला
सेम कोटी भगोती कुलसारी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
मेरु मन पौच्यु वख
चैपड़ो नन्दकेसरी फल्दिया गोउ मुन्दोली
कण भैटुली होली अपणी मैत बैटूली
कुरुड़ बाधण वाला भी पौचिया होला नन्दकेसरी
नंदा जात कु कनु मिलन देखा
कुरुड़ दसोली दसमद्वार डोली
गैरोली पाताल पातर नाचोणिया
सिलासमुद्र च्न्दनियाघाट
वख बुग्यालो लोग हिटणा होला
मेरु मन पौचियु वख
घाट माँ कानी भारी करुणा
नंदा मैत से विदा होली
मि अभागी यख परदेश मा खुदेणु छोऊ
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुक उत्तराखंड
July 7
मन कु म्याला
मेरु लठयाला
आज अचणचक
ऐगे त्येरु खयाला
मेरु लठयाला
चल पिरेम की
दुन्या बसौला
गीत प्यार का गौला
कै डांडा मा बैठिकी
बांसुली बजाला
झुमकी झुमैला नचला
छवी मायादारो की लगौला
हे म्येरा लठयाला
रचना ..............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday · Edited
जोंला पल्या डंडा पार मा

बोबा मेरु क्ख्क छे तू
ऐजा घार मा
बोगान लग्युं अपरू पाडा
ये बगदी न्यार मा

बादल फ़टी
रौड़ी ले गैयाँ गौं गोठ्यार थे
बोई की जिकोड़ी धक व्हाई
ये बात व्हाई पल्या डंडा पार मा

कन आपदा विपदा छे या धरा
थमना को नौउ नि लेणी
अपरा खुठी अपणा ही हिटण
कैल नि आण हत लगाण मा

दोई आंस दोई बोल ही
भैर भ्तेक बल ऊं गिच फुटण
हरी बारी ये उकाल बार मा
क़मरी मेर कस ले जोंला पल्या डंडा पार मा

बोबा मेरु क्ख्क छे तू
ऐजा घार मा
बोगान लग्युं अपरू पाडा
ये बगदी न्यार मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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Girish Tiwari

रात उज्याली, घाम निमैलो
डान-कानन् केशिया फूलो
शिवज्यु कैं मारी मुठ्ठी रंगे की
सारो हिमाल है गो छौ रंगिलो
हुलरी ऐगे बसंत की परी
फोकी गो जां-तां रंग पिंघलो
पिंघली आज नानों की झगुली
पिंघला ठुलों का टांक पिंघला
पिंघल पूर धरती पिछौड़ी
पिंघला आज अकासा बदला
हुलेरी ऐगे बसंते परी।
ध्यान टुटो छार फोक्का जोगी को
आज बिभूत जांलै पिंघली गे
मुल-मुल हंसै हिमालै की चेली
सुकिली हंसी थोलनै अनमनी गे
हुलरी ऐगे बसंतै की पारी।
बंण-बोटन फुटी गई पूङा
कैरू-किल्मोड़ी कांन मौलीणा
हरिया सार में पिंघलो दैंणा
हुलरि ऐगे बसंतै की परी।
सुर-सुर हवा पड़ी फगुने की
ठुम-ठुम बण परी नाचण फैगे
फर-फर उड़ो बसंती आंचल
सुर-बुर ही में कुरकुताली लैगे
आनुवाद
रात जुन्याली कि दिन गुनगुने हैं
केशिया-बुरांश ऐसे फ़ूल खिले हैं
मारी हो शिबजी ने मुट्ठी रंगों की
की हिमाला में न्यारे रंग बिखरे हैं
उतर रही है परी बसंती

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
30 minutes ago
माँ भगोती

माँ नंदा नंदा माँ माँ भगोती
मेर लाडो झट ऐजा तेरा मैती माँ बाट जोहोती

बारा बरस ते थे हेरदी अांखा माँ
ये हिंवाळु कैलाश छोड़ी दरस दे जा माँ
देक सबुन हात जोडी

माँ नंदा नंदा माँ माँ भगोती
मेर लाडो झट ऐजा तेरा मैती माँ बाट जोहोती

उत्तराखंड पह्ड़ा की बेटी माँ
देक त्यार स्वागत मा सजी गे माँ डंडी कंठी
तू टक ऐजा दौड़ी

माँ नंदा नंदा माँ माँ भगोती
मेर लाडो झट ऐजा तेरा मैती माँ बाट जोहोती

देक भेंटि जा अपरा मैती बोई बाब
दादा भुलु अपरू ये समाज थे ये बोई माँ
खेली जा यक हैंसी खेली

माँ नंदा नंदा माँ माँ भगोती
मेर लाडो झट ऐजा तेरा मैती माँ बाट जोहोती

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
August 22
कैना सपोड़ा सपोड़ी

ऐ जावा ...२
कैना सपोड़ा सपोड़ी
ढुंगु खुटु कपाल थे फोडी

किले की झट खानु वहलू
कै उछेदी काम रैगे व्हालु

दाल भात घीयु की जोडी
कैरयाल मिन लपोड़ा सपोडी

ककुर जात बनि की घोड़ो
उंबरा कन सज आनि ऐ बौडी

बालपण की देक ले खोडी
गीची को गफा ओरे बोबा की याद ऐगे तेथे

ऐ जावा ...२
कैना सपोड़ा सपोड़ी
ढुंगु खुटु कपाल थे फोडी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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