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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चूड़ाकर्म अथवा मुंडन संस्कार का एक गढ़वाली लोकगीत

नाई रे नाई रेss तू मेरो भाई
नाई रे नाई रेss तू मेरो धरम भाई हेsss
त्वै द्योलो नाई पांउ खड़ाऊ
नाई रे नाई रेss कानू कुंडल है sss
नाई रे नाई रेss शाल दुशाला
नाई रे नाई रेss जरीद कपड़ी हेsss
नाई रे नाई रेss रेशमी पगड़ी
मेरा लाडला तैं तू पीड़ा ना लाई हे sss
Internet Presentation- Bhishma Kukreti

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 22
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
तरसा गला एक बूंद पानी
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
प्रकृति प्रक्रिया थी जो पिघलते थे
हिमालय से गिलेशियर गल गल
गंगा बहे घर घर पहुंचे पानी
ये सब हो जाये गी बीती कहानी
आप्राकृतिक हो गया मानव
धर लिया रूप उस ने दानव
काट डाले वन कैसे करे झरने छन छन
मन मे रह गया पानी स्रोत सब सुखे
विश्व शव हो रहा पानी
बचे कैसे पानी अभी तो घर मे थी लड़ाई
तैयार खड़ा विश्व युध पानी
मुखडे से पानी छीन लेगे पडोसी
ज़रूरत है सब को पानी
जाहा देखेगे पानी पागल हो जायेगा आदमी
तस्वीर मे भी देखेगे नदी झरने सागर
फाड़ देगा चीर देगा
दीवाना हुआ जो पानी के लिये आदमी
पानी पानी सारे कषट कालेष घुम रहे है पानी
सारी सुख संपदा है पानी
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

चतरू (पुलिस वाला कुन )- अरे भैजी तुम लोग कख जाणा छावा सब्बी ??
पुलिस वाळ- अबे चतरू हम लाठी चार्ज करणा कुन जाणा छावा।।
चतरू -- पर भेजी तुम त चार्जर त लिजाणा हि नि छावा।।।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यज्ञोपवीत /उपनयन /जनेऊ संस्कार का गढ़वाली लोकगीत

भली -भली पुंगड्यूं मा बोइ च कबास
भाई बैण्यूं न मिलीकी गोडी च कबास
उनिया -धुनियान मिलिकी काती च कबास
माँ जी भौजीन मिलिकी काती च कबास
ब्रह्मा का बेटान बटी च कबास
बणावा ब्रह्मा जी नौलड्या जनेऊ
सुण ल्यावो ब्रह्मा जी , कायरों नि होयां , कायरों नि होयां ,
हमारो कारिज वित्त समाना ,वित्त समाना
सात स्वागिण्योन खैंडु च खीलो
सात स्वागिण्योन ग्वाडो च खीलो
सात स्वागिण्योन काती च कबास
काती कूति द्याई उन विशेश्वर का पास
विशेश्वरना तब यो सूत ब्रह्मा जी तैं द्याया
ब्रह्मा जीन चेला तैं गुरुमंत्र जनेऊ द्याया
ब्रह्मा जी को चेला आज गुरुमुखो ह्वै ग्याया
बघमरी आसण द्याया टिमरू को सोटा
काँध मा धैर्याला वैना खैरुवा की झोली
एक हाथ ल्याई वैना सूनो कमंडल
---------पुत्र द्वारा पिताजी से गुरु की खोज का आग्रह ----------
लावा मेरा बुबाजी ब्रह्मा खोजी लावा
आज चैंदो पिताजी वेदमुखी ब्रह्मा
य तो कारिज सुफल फलीन , य तो कारिज सुफल फलीन
आज च बेटा कु जनेऊ ,आज च बेटा कु जनेऊ
न्यूति आले वेद मुखी ब्रह्मा
गया पुरी मा होलो गौतिम को बेटा
गौतिम को बेटा होलो उत्तिम बरमा
जै जस दियां भूमि का भूम्याळ
जै जस दियां पितर दिबता
---गुरु द्वारा जनेऊ पहनाना और आशीर्वाद देना ---

दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
गुरुमुखी चेला छे , निरमुखी ना ह्वेई
अमर रई चेला लाख बरस
जब तलक चाँद सूरज ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
तुम करा चेला कुल को उद्धार ये
ब्रह्म ब्रत ल्याई माँ जी भिक्छा दे द्यावा
आज बटी तेरो चेला गुरु चेला ह्वे ग्याया

-इंटरनेट प्रस्तुति -भीष्म कुकरेती

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नौटू की बहार मां

कवि :स्व झब्बन लाल विध्यावाचस्पति (1934-1996)
(यह गीत स्व ने झब्बन लाल विध्यावाचस्पति ने एकेश्वर विधानसभा चुनाव लड़ते भाषणों में कहा था )

नौटू की बहार मां वोट न बिकै दिंया।
लडडू दाणी धौति मां अफु नि बिकी जन्या।।
अंयु राज आज यो रावणु का हाथ मां ।
गरीबु की हंसी कदीं बंगलों की शानि मां ।। नौटू की बहार मां ....
घूमला बजरु मा डांडी कांठी रौल्यू मां।
बखाला फौन्दरू तैं गरीबू सताण मां।। नौटू की बहार मां ....
आज भोळ आला ये बिरली का भेष मां।
दूध पेकी छिन्गुरयाला शेर का ठमाण मां।। नौटू की बहार मां ....
गांधी की धरीं ढकीं लाग्यां छन लुटाण मां।
राति जाला थाति मां पदनू का पास मां।। नौटू की बहार मां ....
बैर भोउ फैलंदी भै बंधू का बीच मां।
आरी धैरी चीरा कदीं जाति गोळ रींडा मां।। नौटू की बहार मां ....

सर्वाधिकार @ विजय मधुर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लोग अब ठट्ठा लगाणां छन
कि अच्छा दिन आणां छन।
खाली भांडी तीसी गिन,
पांच बिसी बीति गिन।
आश! त मी भी च की आला,
यु आला काचा दिन सुख मा जाला।
पर सुचणू छौ...........
कब तक आला।
कब आला ऊ दिन
जैदिन क्वी ग़रीब नि रालू
भूख का बना क्वी फ़ांस नि खालू।
कब तक बेरोजगार भटकणू रालू
कब हर हाथ मा रोजगार रालू,
कब बंद होलू
या रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार,
कब बंद होलू
बिगर बाती कि या मारामार।
बैणियों दगण छेड़खानी,
दहेज़प्रथा भ्रूण हत्या,
कब तक चलणा राला।
बोला मोदी जी?
हम गरीबों का
अच्छा दिन कब तक आला।
(अतुल गुसाईं सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यज्ञोपवीत /उपनयन /जनेऊ संस्कार का गढ़वाली लोकगीत

भली -भली पुंगड्यूं मा बोइ च कबास
भाई बैण्यूं न मिलीकी गोडी च कबास
उनिया -धुनियान मिलिकी काती च कबास
माँ जी भौजीन मिलिकी काती च कबास
ब्रह्मा का बेटान बटी च कबास
बणावा ब्रह्मा जी नौलड्या जनेऊ
सुण ल्यावो ब्रह्मा जी , कायरों नि होयां , कायरों नि होयां ,
हमारो कारिज वित्त समाना ,वित्त समाना
सात स्वागिण्योन खैंडु च खीलो
सात स्वागिण्योन ग्वाडो च खीलो
सात स्वागिण्योन काती च कबास
काती कूति द्याई उन विशेश्वर का पास
विशेश्वरना तब यो सूत ब्रह्मा जी तैं द्याया
ब्रह्मा जीन चेला तैं गुरुमंत्र जनेऊ द्याया
ब्रह्मा जी को चेला आज गुरुमुखो ह्वै ग्याया
बघमरी आसण द्याया टिमरू को सोटा
काँध मा धैर्याला वैना खैरुवा की झोली
एक हाथ ल्याई वैना सूनो कमंडल
---------पुत्र द्वारा पिताजी से गुरु की खोज का आग्रह ----------
लावा मेरा बुबाजी ब्रह्मा खोजी लावा
आज चैंदो पिताजी वेदमुखी ब्रह्मा
य तो कारिज सुफल फलीन , य तो कारिज सुफल फलीन
आज च बेटा कु जनेऊ ,आज च बेटा कु जनेऊ
न्यूति आले वेद मुखी ब्रह्मा
गया पुरी मा होलो गौतिम को बेटा
गौतिम को बेटा होलो उत्तिम बरमा
जै जस दियां भूमि का भूम्याळ
जै जस दियां पितर दिबता
---गुरु द्वारा जनेऊ पहनाना और आशीर्वाद देना ---

दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
गुरुमुखी चेला छे , निरमुखी ना ह्वेई
अमर रई चेला लाख बरस
जब तलक चाँद सूरज ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
तुम करा चेला कुल को उद्धार ये
ब्रह्म ब्रत ल्याई माँ जी भिक्छा दे द्यावा
आज बटी तेरो चेला गुरु चेला ह्वे ग्याया

-इंटरनेट प्रस्तुति -भीष्म कुकरेती

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

गढ़वाली -कुमाउनी प्रेम लोकगीतों में उपमा

सिर धौंपेली लटकाई कनी?
संदर्भ : डा नन्द किशोर हटवाल
इंटरनेट प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती

सिर धौंपेली लटकाई कनी,
काला सर्प की केंचुली जनी !
सिंदुर से भरी मांग कनी,
नथुला मा गड़ी नगीना जनी !
सी आँखि सरमीली कनी ,
डांडू मा खिलीं बुरांसी जनी !
मुखडी को रंग कनो ,
बाल सूरज को रंग जनो !
ओंठु का बीच दांतुड़ी कनी ,
गंठ्याई मोत्यूं माल जनी !
स्वर मिठास कनी ,
डांड्यों मा बासदी हिलांस जनी

Thanking You .
Jaspur Ka Kukreti

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रिटारिट

-महाकवि : कन्हैयालाल डंडरियाल

पैलि त मि सिरफ़ सुणदु छयो

पर अब द्यखणु छौं

कि दुन्यs रिटणीं च

जिकुड़ी चौछवड़ि गाणी (इच्छा ) रिटणी छिन

नेतौंक चौछवड़ि नीति रिटणीं च

फूलूं फर म्वारि रिटणीं च

पुंगड्यूंम ब्वारि रिटणीं च

कीली फर बाछि रिटणी च

बजारुम पैसा रिटणु च

आंख्युं अगनै जैंगण रिटणीं छिन

मि द्यखणू छौं

रिटदी असहाय जिंदगी तैं

रिटदा आस्था बिश्वास तैं

हर प्राणी चौछवड़ी रिटदी मौत तैं

Copyright@ H.K Dandriyal, Delhi

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपुण ही गुळादंगी (बेमानी ) कैरिगे
लोकप्रिय कवि : हरीश जुयाल 'कुट्ज'

झूठा सौं खैकि भग्यान गुळादंगी कैरिगे
दूध मा पाणि मिलैक भग्यान गुळादंगी कैरिगे

योजनों परसाद बजट की तौलिंद खैंडी -खुंडिक
कमीशनै दबुळ घुमैकि परधान गुळादंगी कैरिगे

हमरा नौ का इंदिरा आवासा बदल हम खुणि
सड्यां फड़िका छैंकि बेमान गुळादंगी कैरिगे

अत्यड़ा खाणु च ईमानदारी कु लिंडर्या छ्वारा
जाळी घुंघरी काकी हैवान गुळादंगी कैरिगे

पौणौं आदिर खातिर कनक्वै ह्वैलि छुचौ
भंडार भितर जैकि परवाण गुळादंगी कैरिगे

खबर सै च सरगन बैठण हड़ताल मा
लगणु च भुय्यां ऐकि असमान गुळादंगी कैरिगे

लासी छूटि गेन चटगा पौड़गे 'जुयाळ ' फर
केस उल्टू बणैकि पुलिस गुळादंगी कैरिगे

Copyright @ Harish Juyal, Malla Tasila, Badalpur , Pauri Garhwal

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