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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दुंगा कुंगला ही ज्यू होंदा
स्याल भुक्का नी मोरदा
पाड़ मा जीबन
सौगु ही ज्यू होंदु
नौन्याल देस नी पैट दा
ज़मीन की सच जणदा तुम त
सैरा पुंगड़ा डुटयाल नि बसदा
नेतो की सच जांणी की भि
हर बार किल्है ढगदा
भोल की आस मा हम
हर कै पर विस्वास
किल्है कर दा
जुकुड़ी की सच जणदा तुम त
मुखुडी कू रंग देखी नी ढगदा
.
रचना - शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु‎Shailendra Joshi
January 29 at 3:06pm ·

श्रीनगर का सैण मा,
मेरा कविमित्र,
शैलेन्‍द्र जोशी जी,
शैल पर्वतु का बीच मा,
जख अलकनंदा बग्‍दि,
सृजन यात्रा कन्‍ना छन,
भौत खुश होन्‍दु,
मेरु यू कविमन......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
29.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 29 at 11:16am ·

माया माया कन्नी माया
जग से न्यारी म्येरी माया
रंगीली माया पिंगली माया
द्वि रंगी दुन्यान नि भिंगी
म्येरी सतरंगी माया
रंगों से रंगीन म्येरी माया
धुर्सणया दुन्या नि भिंगी
चम् चमकीली म्येरी माया
गैरा हैरा समोदर से गैरी म्येरी माया
सुखा गदैरो नि भिंगी म्येरी माया
आसमान सी नीली
चौ दिसू फैली माया म्येरी
किटैस पांडा भित्रयोन
नि भिंगी माया म्येरी
हेरणु मायादारो कु बाटू
वु हि भिंगला माया म्येरी
पाखो हैर्याली सी माया म्येरी
पिंगली फ्योली लाल बुरांस सि माया म्येरी
अपणी माया अपणी मतंग
अपणी धुन मा रंगी दुन्या म्येरी
माया माया कन्नी माया
मायादार ही भिंगला माया म्येरी
रचना ....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
February 3 · Edited ·
·

मन का प्‍यारा छन मेरा,
मान्‍यवर नरेन्‍द्र कठैत,
जल्‍मभूमि मा वास छ जौकु,
जख गंगा जी कू मैत....

सौभाग्‍य मेरु कठैत जी,
कवि, लेखक अर व्‍यगंकार,
जौं फर भारी कृपा छ,
मां सरस्‍वती की अपार....

न्‍युतू दिन्‍यु छ मैकु,
ऐ जवा हमारी पौड़ी,
ऊलार मेरा मन मा भारी,
चलि जौं दौड़ी दौड़ी....

जब ऐल्‍या बल तुम,
अपणि कविता भी ल्‍हेन,
कविताओं का माध्‍यम सी,
जल्‍मभूमि का गुण गैन...

यीं कविता कू जल्‍म ह्वै,
अनुरोधकर्ता प्रिय शैलेन्‍द्र जोशी,
डरदु डरदु लिखणु छौं,
औणि छ कुछ बेहाशी....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु की अनुभूति
दिनांक 3.2.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उकाली उन्दरी

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई
ये नीलू आकास मै दगडी ऐ तू
अपरी दिसा बीच मा नि छेड तू

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

दुका पीड़ा विपदा ऐ हेर
ये देहा मा जब जब ऐ गैई
परदेश बाट तब तब
अपर पिछने पड़ गैई

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

नया सुप्निया जब जब
ईं अँखियुं पडी गैई
जीकोडी वै माया की और्री
सर ररर भर पड गैई

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

बुरंस प्योंली जब डाली भति झर गैई
ब्योलि जब बीच बाटा मील गैई
उजाड़ पुंगाड़ कुटुम दारी फंस गैई
बाल बच्चों की फौज तैर व्है गैई तब

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुरुक आंसू ऐगे व्है गे अब बरसात

लाल पिंगळी खठी मीठी
स्कुल की अब व्है गे छूटी

धाम धाम दुमका धड़का
उकलू उन्दरु मार भड़का

सुबेर दोपर ब्योखन रात
चूसले लेमन लपाक छपाक

घाम सौली ब्योलि बरात
सपोड़ा सपोड़ी की खैले दाल भात

बालपना दिन गैल्या ऐगे याद
अकस्मात दोपहरा मा बैठी की आच

बिरद जा घूम जा अब मेरु दगड
मार ले फाल अब अपरू बालपन साथ

कन रास्याण छे ऊ बीती याद
सुरुक आंसू ऐगे व्है गे अब बरसात

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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क्द्गा दिनी इनि तू अयो ग्यो ये मेरु पहाड़ा

क्द्गा दिनी इनि तू अयो ग्यो ये मेरु पहाड़ा
हैंसी ले झूमी ले गइले हो कि हो कि रंगमत ये मेरु पहाड़ा
हता भती उड़े दे ये तेरु मेरु रेशमी रुमला ये ब्यारा

पांच नाम देवा पांच परमेश्वर मेरु पांच प्रयाग
खोला गधेरा गद्नि बोगेरा यख बोई गंगा की धारा
ढुंगा गारा उन्दरु उकाळा मा हुणा मस्त ऐजा ये मेरु पहाड़ा

यख माया कु पसरयूं फैल्युं खेळ च्यु ये सारा
ऐ गैल्या ऐजा पसरी जा सब कुच यख च ऊ सबी त्यारा
डंडा कांडा ये ह्युं चलूँ छेई जा उल्यार ये मेरु पहाड़ा

ऐकी ले सुणी ले बिंगी ले यख तू ऐकि माया की भाषा
कण हैरभैरी भूमि खिला प्योंली फूल फूली बुरंस बुरंसा
ले ले सबी थे अंगवल छैईं यख फूलूं की बहारा ये मेरु पहाड़ा

देबी का मंदिर नागराजा कु ठों ये मेरा देबता बद्री-केदारा
इनि राखी राजी ख़ुशी ये पांच नाम तेरु छतर अपरू बाल गोपला
गूंजी बजी दे सदनी पंचनाम शंख घांडी घंडियाल ये मेरु पहाड़ा

क्द्गा दिनी इनि तू अयो ग्यो ये मेरु पहाड़ा
हैंसी ले झूमी ले गइले हो कि हो कि रंगमत ये मेरु पहाड़ा
हता भती उड़े दे ये तेरु मेरु रेशमी रुमला ये ब्यारा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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उकाली उन्दरी

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई
ये नीलू आकास मै दगडी ऐ तू
अपरी दिसा बीच मा नि छेड तू

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

दुका पीड़ा विपदा ऐ हेर
ये देहा मा जब जब ऐ गैई
परदेश बाट तब तब
अपर पिछने पड़ गैई

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

नया सुप्निया जब जब
ईं अँखियुं पडी गैई
जीकोडी वै माया की और्री
सर ररर भर पड गैई

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

बुरंस प्योंली जब डाली भति झर गैई
ब्योलि जब बीच बाटा मील गैई
उजाड़ पुंगाड़ कुटुम दारी फंस गैई
बाल बच्चों की फौज तैर व्है गैई तब

उकाली उन्दरी सर गैई
ऊ गद्नि खोला सागर तर गैई

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प्राण पखेरू उडी जा

मेरु मेरु मेरु
प्राण पखेरू उडी जा
उडी जा रे उडी जा रे

कया च तेरु कया च मेरु
राज ऐ मा दडयूं कित्गा गैरु
गैल्या ऐ च तेरु सैरु
परदेशा मा देशा तेरी बाट हेरु
उडी जा रे उडी जा रे
मेरु मेरु मेरु
प्राण पखेरू उडी जा

वै गद्नि का मोड़
तै सड़की का छोर
ऐ वै अमरूद की डाली बैठन
चल जोंला तै कफला की गोड़ी चखन
उडी जा रे उडी जा रे
मेरु मेरु मेरु
प्राण पखेरू उडी जा

घुमी आ तू घुमी आ
जैकी वख भेंटि की आ
बैठी हुली बोई खोई हुली खुदी मेरी
त्यूं बोई की खुठी थे चुमी आ
उडी जा रे उडी जा रे
मेरु मेरु मेरु
प्राण पखेरू उडी जा

वख छे मेरु पाड़ा
मेरु नानू छुटू सौंसार
इतगा में कैदु वै से पियार
नि दिके सक्लु मी तेथे यार काद्गा पियार
उडी जा रे उडी जा रे
मेरु मेरु मेरु
प्राण पखेरू उडी जा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मी लगलू रे धै

मी लगलू रे धै
तू झट दौड़ी की ऐ
अपरू फर्ज अपरू करम
ऐ की निभै जै
मी लगलू रे धै

अब नी रे तू लाटू काटू
किले व्हैगे तू इन छाटू
तेरु हिसा ले जा तेरु बांटो
मेरु दुधि कु छे रे तू छंटो
मी लगलू रे धै

हिकमत ना कबै हैरी हमन
बूढी कमरी तुति पटगि पटन
लागि रे तेरी सारी सरु तेर रटन
हम त ऐ बार जान गदन
मी लगलू रे धै

सुकी गै रे बेटा लकड़ु हमर
जै मशान हुमन धूं जलन
घीयु ना तर मिटटी तेल चढ़े दे
वै भान आपरी मुखडी देके दे
मी लगलू रे धै

मी लगलू रे धै
तू झट दौड़ी की ऐ
अपरू फर्ज अपरू करम
ऐ की निभै जै
मी लगलू रे धै

एक उत्तराखंडी

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