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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 बुरांस खिल्‍युं....
डांड्यौं मा,
बणांग लगौणु छ,
तुम भी हैंसा मेरी तरौं,
बात बतौणु छ.....

बुरांस की बात बिंगि,
मन खुश होणु छ,
सच छ जिंदगी कू यू,
ऊलार औणु छ.....

किलै औन्‍दु होलु बुरांस,
हमारा मुल्‍क मा,
कुतग्‍याळि सी लगै जान्‍दु,
हमारा मन मा......

आलु मौळ्यार जाला भग्‍यान,
प्‍यारा पहाड़ मा,
हेरला अपणि आंख्‍यौंन,
बुरांस खिल्‍युं छ......

पाख्‍यौं मा हैंस्‍दि फ्यौंलि भी,
मैत अयिं छ,
तै बौळ्या बुरांस हेरिक,
रंगमत होयिं छ.....

फूल्‍युं फूल बुरांस कू,
पहाड़ की पछाण छ,
ज्‍यु मा यनु औणु छ,
बुरांस हेरण जाण छ.....

जुगराजि रै बुरांस तू,
हमारा मुल्‍क औन्‍दु रै,
खित्‍त हैंसि हैंसिक,
कुतग्‍याळि लगौन्‍दु रै....

डांडयौं मा खिल्‍युं बुरांस,
बणांग लगौणु छ,
खुश हि रणु जिंदगी मा,
यनु बतौणु छ.......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
30.1.2015, दोपहर 1 बजे
सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 मेरा लाल.....

उत्‍तराखण्‍ड की,
धरती बोन्‍नि छ,
ह्वैग्‍यन मेरा कुहाल,
नि लेन्‍दा जल्‍म तुम,
मेरी सजीली गोद मा,
नि होन्‍दा मेरा यना हाल,
निराशेक बणि छ बिकराळ,
बांदर सुगंर कन्‍ना छन राज,
बांजी पुंगड़ि टूट्यां कूड़ा,
यू हि रैग्‍यन अब यख,
बंजेणु छ कुमाऊं गढ़वाळ,
कुछ त सोचा,
हे मेरा लाल.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
रचना स्‍वरचित एवं ब्‍लाग पर प्रकाशित
दिनांक 11.11.14

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 प्‍यारा दगड़्यौं.....
कुलदेवी माँ चन्‍द्रबदनी की,
अषीम कृपा सी,
आपकी दुआ सी मैं,
30 नवम्‍बर, 2014 कू,
प्रिय नाती का,
दादा बणिग्‍यौं,
जल्‍म लेण का कारण,
बोला त बुढ़या ह्वैग्‍यौं,
जन कि लाेग बोल्‍दा छन,
भारी खुश होयुं छ,
यू मेरु कविमन,
खुशी कू रैबार अपणु,
आप सब्‍यौं तक,
पौंछौणु छौं,
प्‍यारा दगड़्यौं.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु",
दिनांक: 01.12.2014

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 ह्युंद का दिन लग्‍यां छन.....
ह्युंद का दिन लग्‍यां,
हरि बोला जी,
जाडडु भौत होणु छ,
आंखा कंदूड़ खोला जी....
लत्‍ता कपड़ा खूब पैरा,
शरील ढ़कै रखा जी,
चुल्‍ला की आग तापा,
मोटी रजै ओढा जी....
गरम सरम खूब खवा,
थोड़ी थोड़ी पेवा जी,
ढिक्‍याण मुख रखिक,
फंसोरिक सेवा जी....
आलु मौळ्यार जब बौड़ि,
ह्युंद तैं अड़ेथा जी,
हर ऋतु कू अपणु मजा,
भला भाग हमारा जी.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु",
मेरा कविमन कू कबलाट कविता का रुप मा
दिनांक: 6.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
Yesterday · Edited ·
·

मन का प्‍यारा छन मेरा,
मान्‍यवर नरेन्‍द्र कठैत,
जल्‍मभूमि मा वास छ जौकु,
जख गंगा जी कू मैत....

सौभाग्‍य मेरु कठैत जी,
कवि, लेखक अर व्‍यगंकार,
जौं फर भारी कृपा छ,
मां सरस्‍वती की अपार....

न्‍युतू दिन्‍यु छ मैकु,
ऐ जवा हमारी पौड़ी,
ऊलार मेरा मन मा भारी,
चलि जौं दौड़ी दौड़ी....

जब ऐल्‍या बल तुम,
अपणि कविता भी ल्‍हेन,
कविताओं का माध्‍यम सी,
जल्‍मभूमि का गुण गैन...

यीं कविता कू जल्‍म ह्वै,
अनुरोधकर्ता प्रिय शैलेन्‍द्र जोशी,
डरदु डरदु लिखणु छौं,
औणि छ कुछ बेहाशी....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु की अनुभूति
दिनांक 3.2.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
February 2 at 12:04pm · Edited ·

पहले खबरों का कारोबार
फकीरों के था हाथ
आज खबरों का कारोबार
अमीरों के है हाथ
किन्तु खबरों की दुनिया मे
मुलाजिम तो आज भी
है फकीर
किन्तु है मालिक अमीर
ऐसा क्यों है फ़क़ीर दूर है
खबरों के कारोबार से
अमीर आये जा रहा है
दिन प्रतिदिन
कही मालिक है फुलफैल्स
कही है होल्डर शेयर
हे प्रभु
इन से कितनी
सच की गुंजायीस करू
रचना ...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

श्रीनगर का सैण मा,
मेरा कविमित्र,
शैलेन्‍द्र जोशी जी,
शैल पर्वतु का बीच मा,
जख अलकनंदा बग्‍दि,
सृजन यात्रा कन्‍ना छन,
भौत खुश होन्‍दु,
मेरु यू कविमन......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
29.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऊँकि चिद चा
वुन बीड़ा उठे
बोली भासा
संसकिरती
बचाणा कु
वु दुन्या समाज मा
एक अलख जगे
दुन्या समाज जत्गा बिंगी
होली पर ऊँका जिकुड़ा पीड़ा
तब सरे जब अपणा बाल बच्चों
पर फरके उन एक नजर
मि यख पाड़ का रंग मा रंगियु
और तुम भी देसी ह्वे ग्या
पीड़ा कु रोग नासूर हवेगे
वि दिन बीटी
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 10 at 7:49pm ·

म्येरा मन का
दंदोल जब तलक
नि बण जाला
म्येरा गिच्चा का
बोल
तब तलक छिन
दीदा त्येरा सबाल
जन ही ह्वे भीतरे
बात लिक तब द्यखा
त्येरा बबाल
जण द्यु छौ दीदा
त्येरी सार तार
तू छेय पत्रकार
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्येरा सुरों मा बसी
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
कृपा रखी सरसुती
कंठ गौला मा म्येरा
त्येरी किरपान सुणदा
लुग गीत म्येरा
गौला मा बिराजी रै तू
यी जलम आखिर साँस तक
साधना सुरों बिटी करदु रालु
सरसुती माँ भगबती
गंगा सुरों कि जमुना गीतू कि
बगदी रा समोदर दुन्या मा
बसी रै तू बस म्येरा गौला मा
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
रचना .........शैलेन्द्र जोशी