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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
February 13
प्रीत डाली मौल्यार की बिन पाणी का सुखि जाँद...।
प्रीत गेड नि बन्धण खुसकोण्या खट्ट खुलि जाँद....।
प्रीत ॠितु चा बसंती पतझड कतै नि स्वाँद।
प्रेम, प्रीत, माया ही मनिख ते सच्चू जीणू सिखाँद......बौल्या।

शुभ प्रभात मित्रों।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
February 12
खोंदार यख , खोंदार तख
पहाड़ी, घाटियुं मा खोंदार वख

भिज्यूँ माटू च अर रिती गाड़
डांडी काठियुं अर मुल्क खाक ,

म्वोर संगवाड अर रिती ख्वौलि ,
छज्जा मा बैठीं इक बुढ्यान ,

नाख मा नथुलु , गात पाख्लु
नातू खुज्याणी चा बुढ्यान

सुणु गौं जन बथौं सि धार
बाटा खोड़ जन ह्वयूं खोंदार

तीसु धारु लगि गागर
वबरू चुलरडू फूंकदी बुढ्यान

: हिमाँशु पुरोहित "सुमाईयां"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
February 10
जै जै ते टेड्डी चयेणूचा वो अपडा डैडी बटी माँगा।
हम नौनो ते किलै छों तंग कना। टेड्डी दी टेड्डी दी
सुण ल्या सभि नौन्यूँ हम ते तंग न कारो
नथर कंदूड उपाडी दिला हां। खित खित खित खित खित खित।

बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
February 10
ए गनपत चल दारु ला..
भैजी छों मै भैजी तेरु फिकर नि कर

कुड़ी फुकी दयुलू वेकि जू देखलू त्वे पर!
थोड़ी कुक्कड़ी की टंगड़ी भड्ये दे न यार!

थोडा सलाद माँ लोण राली दे न यार!
ए मंगतू चल दारु ला
थोड़ी कच्ची थोड़ी पक्की
थोडा पाणी मिला

ए गनपत चल दारु ला
ए गनपत चल दारु ला........

शुभ दुफरा दगडयों।

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
February 10
बच्चाः सेमानि बोडा..
बोडाः बच्युं रै बुबा..
बच्चाः बोडा कुछ लेण च तुमुन?
बोडाः हां बेटा..
बच्चाः ठंडु या गरम?
बोडाः ठंडु ले दि बुबा..
बच्चाः पप्सि, मिरिंडा या गन्ना कु जूस?
बोडाः फुंड पेप्सि हि पिलै दि..
बच्चाः गिलास मा, कप मा या लुट्या मा?
बोडाः गिलास पर पिलैदे यार..
बच्चाः अच्छा यन बतवा कि कांच का गिलास
पर या स्टील का?
बोडाः अरे यार त्वेन सचि पिलौणी त कांच
का गिलास पर पिलैदे..
बच्चाः "डिजैन" वाला पर या सादा वाला पर?
बोडाः अबे उल्लु का पट्ठा, डिजैन वाला पर
पिलौ..
बच्चाः कना डिजैन वाला पर बौडा,"फूल"
वाला पर या "धारि धारि" वाला पर?
बोडाः अबे मास्त, फूल वाला परई पिलै दि..
.
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बच्चाः बौडा जि, गलत "औप्सन"
चुण्यालि तुमुन त, यनु क्वे गिलास हमारा घौर
मा छैई नि च, चल भाग यखन फुंड अब..

शुभ प्रभातम् मित्रों।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई" shared a link.
16 hours ago
रौंत्यालु टोक्यो भि सुनु लगणु

त्वे सि मिलणा का बाद

बोड़ी आई फिर त्वे छोड़ी तें मै

यकुली जब यख आज .



इ ऊँची -ऊँची ईमारत भि छोटी छ

लगणि तेरी खुद का ऐथर ,

इ रोशनि भि फिखि छ दिखेणी अँख्यों

बासिं तेरी तसबीर का पैथर .



हवा सि छिविं लान्दी इ लंबी लंबी रेल भि

धीमी छ लगणी तेरा क्वाब मा

समंदर की लहरों मा खेलणा इ खैल भि

नि रसा छ लगणा तेरी याद मा



लगणा सकुरा का खिल्यां चोदिशो फुल भि

तेरी आंख्यों फुलार सि कम

लगाणि बर्फ सि बरीं फुजी सान की डंडी भि

तेरा मयला उलार सि कम



योंकू अथिति सत्कार बोलण बच्याण कु प्यार भि

कुछ नि तेरा प्यार समणी

हर बक्त मुख मा हेंसी योंकु मन मा विचार भि

कुछ नी तेरा विचार समणी .




प्रभात सेमवाल ( अजाण )सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
22 hours ago
जीवन का बाटा सौंगा हो त

ज्यूण मा स्य रस्याण नि ओंदी

भाग जोग मा खैरी न हो त

भला बुरा की पछाण नि होंदी .

( अजाण )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

येपडी बेका :
आज सुबेर मिल एक बोडि थे पुछि कि ऎसू साल एक नयु नेता अर्विन्द केजरीवाल अयु च अर वु बोलणु च कि भोत गन्दगी ह्वे गे त मिल सब साफ केर दिण, बोडि क्या बोलणी..
" बुबा सुण त मिल बि च ये क्यशरी बार म पर मिथे त इन लगणु च ब्यटा कि यु
पदण गीज ग्या अर हगण बिसरि ग्या",
त कुजाण भारे ज्य ह्वाल तब..

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"

प्रीत डाली मौल्यार की बिन पाणी का सुखि जाँद...।
प्रीत गेड नि बन्धण खुसकोण्या खट्ट खुलि जाँद....।
प्रीत ॠितु चा बसंती पतझड कतै नि स्वाँद।
प्रेम, प्रीत, माया ही मनिख ते सच्चू जीणू सिखाँद......बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खोंदार यख , खोंदार तख
पहाड़ी, घाटियुं मा खोंदार वख

भिज्यूँ माटू च अर रिती गाड़
डांडी काठियुं अर मुल्क खाक ,

म्वोर संगवाड अर रिती ख्वौलि ,
छज्जा मा बैठीं इक बुढ्यान ,

नाख मा नथुलु , गात पाख्लु
नातू खुज्याणी चा बुढ्यान

सुणु गौं जन बथौं सि धार
बाटा खोड़ जन ह्वयूं खोंदार

तीसु धारु लगि गागर
वबरू चुलरडू फूंकदी बुढ्यान

: हिमाँशु पुरोहित "सुमाईयां"