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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

द्वी द्वी जन्यान्यु बीच मी
खेलणु छो ह्वली
इक चाँद देशवाली
एक बांद गढ़वाली ....
एक दूधा कू घडक
ता एक जनी पेक बियर
अर एक पतनी क्य बुलदी
ता दुसरी हेल्लो डियर
एक बोई बुबा की पसंद
एक मेरी चा चखुली
एक चाँद जीन्स वली
एक बाँद गढवली..........

शुभ प्रभात।

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जुगाड़

मिन पंडितजीम हाथ दिखाई
दिखदे वो बोली......
हे पाप्पा , यु हथच कि
२०१४ को चुनाउ ,
जैमा
कुछ भी सपस्ट नीच
क्वी इन्नै जाणुच त , क्वी उनै !

जजमान तेरी हथूकी रेखा भी
एन डी ए अर यू पी ए की तरह
क्वी यख त , क्वी वख छन जाणी
पर.........
बीचमा थर्ड फ्रंट की "रेखा " भी एगे !

मिन पडित जी से बोली ...
फुन्डु फुक्का वी एन डी अर यु पी अ थै
आपन " रेखा" के बात कारी त
मेरी हथगुल्युं की रेखा अर वी रेखा कु
मेल हवे सकद किना ना
सरकार क्वी भी बनाओ , भाड़ माँ जाऊ
पर मेरी किस्मत खुल जैली कि ना !
@ पराशर गौर मार्च १७, २०१४ रात के 11. २७ पर

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चली बंसत बहार, आयी फुलूँ मा फुलार..2।
भोँरा लिगेनी लिगेनी भोँरा होऽऽ
भोँरा लिगेनी फूलूँ कू रस चोरीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
फागुण चैत को त्योहार...2,
आँदू रंयाँ बार बार.....2।
गैल्या संग खेला रंग खेला होऽऽऽ
गैल्या संग खेला रंग खेला जू होरीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
गैल्या आज अपडा हथून
अबेर गुलाल लगैजा..2।
झणी अब फिर कब हूंदी भेँट,
समलौण्या चदरी रंगैजा....2।
ऐंसू की होली मा समलौण्या चदरी रंगैजा
ऐजा आँख्यूं मा समैजा गैल्या हो.. प्रीत जोडीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
ज्यू बुनू चा प्रेम का रंगून
तेरी कोरी जुकडी रँगैद्यूँ...2।
लाल बुरूँसी का फूलून
तेरी स्यूँद पाटी सजै द्यूँ
ऐँसूँ की होली मा तेरी स्यूँद पाटी सजै द्यूँ
देद्यूँ देद्यूँ सैरी जिन्दगी निचोडी की.
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की..........

होली की ढेरों शुभकामनाएँ दगडयों।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़ भारती धाद लागोणी
कख भाषा का सल्ली छा
हर्चदी जाणी बोली भाषा
तुम राजनीति माँ टल्ली छा.....दिनेश ध्यानी......१८/२/१४.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाली, कुमाउनी होरी जौनसारी हर्ची गे

ली अब खा ले माछा
उत्तराखंड के वजट में उर्दू ,फारसी , पंजाबी भाषा के विकास के लिए वजत में समुचित व्यवस्था
ली अब खा माछा ,
गढ़वाली, कुमाउनी होरी जौनसारी हर्ची गे
ली अब खा ले माछा
Dr Pushkar Naithani from Kotdwara

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
March 30
लिक्दा रौंलू

देर-अबैर
सौन्गों बाटों कु फेर

कैल सरेन ये कैर
उकाळु ऊंदरु कु घेर

बोळ गेल्या कया करेलू तू
बोळ कया करेलू तू

लिक्दा रौंलू लिक्दा रौंलू
जो सिंयां छिन ऊँ थे उठलु

बिसयां गदन्या
रोल्युं मा ढून्गू गारों नि घैल

उजाडा डंडा कांडा
कबि छ्या यूँ कि यख देल-फ़ैल

अब हरच्यु छो ये
हर बाटू माँ अब ये फेल

बोळ गेल्या कया करेलू तू
बोळ कया करेलू तू

लिक्दा रौंलू लिक्दा रौंलू
जो गयां दूर ऊँ थे बॉडी लोन्लो

टिहरी डूबी गै
प्रताप नगर कि निच खैर

केदार मा ऐ विपदा
माँ धारी कु बोगी गै थान

उत्तराखंड सरकार
हमारी बण खड़ी रेगे लाचार

बोळ गेल्या कया करेलू तू
बोळ कया करेलू तू

लिक्दा रौंलू लिक्दा रौंलू
ओं का वोटो ऊँ थे दियूंळु जो पाड़ा बाण सोचला

देर-अबैर
सौन्गों बाटों कु फेर

कैल सरेन ये कैर
उकाळु ऊंदरु कु घेर

बोळ गेल्या कया करेलू तू
बोळ कया करेलू तू

लिक्दा रौंलू लिक्दा रौंलू
जो सिंयां छिन ऊँ थे उठलु

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरु रुमाला

छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
बिंग नि पाई यूँ नजरि कि भासा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा

नि देक पाई मि पौड़ी बहारा ,ऊ पौड़ी बजारा
बस दीकि मि न सुर्म्याली आंखी कु नजारा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा

देकि तिन कब छूटी म्यार हाथों न रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
संभली नि संभली जियु अब तेरा हवाला ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा

अंदी रैंद याद तेर मेरु छुट्यूं रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
आजा भेंटी जा मी थे दे जा म्यारु छुट्यूं रुमाला ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा

छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा
बिंग नि पाई यूँ नजरि कि भासा ,ऊ पौड़ी बजारा
छुची छूटगे मेरु रुमाला,ऊ पौड़ी बजारा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुख-दुःख

सुख-दुःख
आणा जाणा राला
गित गितेर लगाणा राला
सुख-दुःख
आणा जाणा राला

भौळ कि वा पीड़ा-खैरी
ब्याल जों बिती अपरि मा
अब नि लगनि वा गैरी
सुख-दुःख
आणा जाणा राला

देर-अबैेर हुन्द रैंदु जी
बगता कि च ई फेरी
अग्ने पिछ्ने लंगी रंगा
किरमुला विं गुड़ा कि ढेली
सुख-दुःख
आणा जाणा राला

हरी कि दुनिया च
हरी ही अब दयाखळा
सब कुच दे दे हरी मा
तेर विपदा कु थौलू
सुख-दुःख
आणा जाणा राला

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

डांडों मा हिंवालों मा ,
गंगाडे क घाटियों मा ,
धार म का बथौं मा बिरड़ी
गाड़-गदिनियों सेणौ मा ,

छ्वौडि छन प्राण मिल भि कुल्यांशी पहाड़ों मा

बूण बुरांशी कि रंगलियों मा
कुलै क गिर्दा पाथों मा
बाँझ कु रिषदु पाणी ख्वोति
मी भि कथ्येंग्यू परदेशु मा

छ्वौडि छन प्राण मिल भि कुल्यांशी पहाड़ों मा

देश छ्वौडि ,भेष छ्वौडि
डेरू कु परवेश छ्वौडि
अपणा हि घोल कु नातू तवोड़
आण-जाण मिं भि छ्वौडि

छ्वौडि छन प्राण मिल भि कुल्यांशी पहाड़ों मा

: हिमांशु पुरोहित " सुमाईयां "

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

साँची माया सदानि त्यरा
क्वार मन सी लगान्दी गै
त्वैमा अर मैमा फरक इदगी छ
मै रुन्दी गै अर तू रुलान्दी रै !

दोस त्यारू नि दोस म्यारू छै
बर्षों बीटि कुछ नि चितांदी गै
त्वैमा अर मैमा फरक इतगी छ
मै सुणदी रै अर तू सुणादी गै !

त्यरा बाना गैल कत्गों कु छोड़ी
यकुली आज गाणियों गणादी गै
त्वैमा अर मैमा फरक इतगी छ
मै झुरदी रै अर तू झुरान्दी गै !

रोई रोई ज्यू म्यारु ह्वै खारु
तू बुज्याँ खारा सुल्गांदी गै
त्वैमा अर मैमा फरक इतगी छ
मै जगदि रै अर तू जलान्दी गै !

प्रभात सेमवाल ( अजाण )