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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घटा छंटेगी,
फ़िज़ा बदलेगी |
शायद चुनाव ऐगी |

कुकर बाघ बिरोवू,
बांदर नेवला गुरोवू |
किले आज एक व्हे होला,
शायद चुनाव ऐगी |

संसद मा भ्याली तक,
लगांदा छ जू आरोप |
आज स्यू नेक किलै व्हे होला,
शायद चुनाव ऐगी |

गरीबा घार मा आज दिन मा,
किलै द्वी जग्यूचा |
सेठा का दुर्पला मा आज,
किलै झंडा टंग्यूचा |
शायद चुनाव ऐगी |

भ्याली तक गौमा,
बेरोजगारू की भरमार छै|
जनता भी पांच सालो ,
हिसाब ले की तैयार छै |
पर आज सरू गौ खाली,
शायद चुनाव ऐगी

गौ- गौमा किलै फूट व्हे होलि,
भै-भै मा किलै टूट व्हे होलि |
शायद चुनाव ऐगी |

आज स्यू लोवू स्याल,
मुंगरा किलै नि भूखाणू होलू |
आज थानेदार लोखू तै,
आँखा किलै नि दिखाणू होलू |
शायद चुनाव ऐगी

किलै आज कल हेलिकॉप्टर
उड़णान हवा मा |
शेरूदा किलै टैट बण्यु होलू
सुबेर बटी पव्वा मा |
शायद चुनाव ऐगी |

किलै आजकल क्वी उतारनू पहनू च,
शराफत कू नकाब |
किलै आजकल वैष्णो ढाबा मा,
बिकण बैठी कबाब |
शायद चुनाव ऐगी|

किलै आज दिन रात का पहर,
शैद घुमणा छन| (सफ़ेद पोशाक वाले)
किलै आज कुछ खास लोग,
गुजरों कि गुजरायण सूंघणा छन |
शायद चुनाव ऐगी |

प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ताल त सोनिया च.... मनमोन त बस ढोल च ..
सिरवाणि त सोनिया च.... मनमोन त बस खोळ च ..
कुल्फी त सोनिया च.... मनमोन त बस कटुग च ..
चटणि त सोनिया च.... मनमोन त बस सीलोट च ..
उज्यालू त सोनिया च.... मनमोन त बस बल्ब च ..
कविता त सोनिया च.... मनमोन त बस कलम च .......बगोट जी।

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पाड़ मां बसन्त
Uma Bhatt , Rudraaprayag Jila

बिना पते चिट्ठी मां रैबार जन
ऐगी मेरा पाड़ मां बसन्त यन
बण -बणो का वोंठ ह्वेग्या अति -मति लाल
बुराँसि ललाङ सुलगे ग्ये यन
जीतू बाँसुली इन भोण लगे ग्ये
छेंड -छेंड जिकुड़ी ऊंकी
जोंका स्वामी परदेश

रोंचुलियों बि हिलाँस न्यूतू आयूं च
परदेशयों घोर आवा यीं भोण कै बींगों ?
निकमा ह्वेग्या यख का पो - पराणी सब
फुल्यारी ब्स्न्याल मां टप्प - टपरिगयाँ
सेरू बथों यख फूलों न हुरसेलि
बगछट हुयुं यनों डाँडी -काँठी सरमेली
बुरांसों न बणों दगड़ करि यनु मजाक
कि सरमैक बणों की गल्वड़ी ह्वेन लाल

माया की गाड यख हुईं च अतर
कुजाणि कतगा पार कतगा बगि गैन यख
लाज का पोहरा अज्काल टूटणा अचणचक
जिकुड़ियों की माया का सौदेर आयाँ छन
रूप ,रस ,गंध सब लूछि लिगिन
यीं उमेली बार का इन द्वार खोल्यां छ
घिंदुड़ी बी बिंगाण बैठी अपणी रीत -भाँत
कि आंडरू की आस मां अबि घ्वाल रीता छन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


कई रिश्त यास हौनी जो बणण है पैली टुटि जानी,
यैक लिजि कै कणी हद है ज्यादा परखण नि चैन।
के पत्त य जिन्दगीक कां और कब ख़तम है जाओ,
यैक लिजी दिलमें कैकै लिजी गांठ धरण नि चैन॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi‎ 

कई रिश्त यास हौनी जो बणण है पैली टुटि जानी,
यैक लिजि कै कणी हद है ज्यादा परखण नि चैन।
के पत्त य जिन्दगीक कां और कब ख़तम है जाओ,
यैक लिजी दिलमें कैकै लिजी गांठ धरण नि चैन॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा म्यारा डाँडों-कांडों मा
घिर घिर झिर झिर ऐगे म्यारा आँखिंयों मा
चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

बैठी छ सौंजड्या मेर बाटों माँ मेरा सान्युं मा
हेर् दी घेर दी माया मेर बाँध राखि विं न ऊँ माया कि गेड़ीयों मा
चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

ऐ जांदी कबि सुरक कबि झणमण म्यारा स्यारों मा म्यारा डालियों मा
चाखल पाखाल कै जांदी सैरभैर गढ़देश कु ढुंगा गारों मा
चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

जिकुड़ी कि कैल सुणि जिकुड़ील काब कया पाई म्यारा ध्यानियों मा
धैल फ़ैल पाणा कुन छुड़गे तू ई बरखा थे यख यूँ रूलणयों मा
चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा म्यारा डाँडों-कांडों मा
घिर घिर झिर झिर ऐगे म्यारा आंखोयुं मा
चौमासी बरखा मेरा पाड़ों मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अमरुद कि दाणी हो

अमरुद कि दाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो
याद ऐगे कया लठ्याळ ....2
तेरे बिसरी कहाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

कच्चा पक्यां ऊँ डलियुं मा
कच्चा पक्यां ऊँ डलियुं मा
ढून्गू चुलुयुं ऊँ दाणीयों ....2
झँपा जख खिली हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

मीठी मीठी रशिलि दाणी हो अ हो
मीठी मीठी रशिलि दाणी हो
मेरु बाल पणा कि निशाणी....2
क्ख्क गैनि वो दिन फुर आग लगे ईं जवानी थे हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

कखक अब ढूंगा चुलु मी हो अ हो
कखक अब ढूंगा चुलु मी हो
नि रैगै यख वो गेल्या अब ....2
ऊँ कि खुद बल आन्दी जान्दी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

अमरुद कि दाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो
याद ऐगे कया लठ्याळ ....2
तेरे बिसरी कहाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड
तेड-मेड सड़की बणि ऊ बणि गे डामु का अब गढ़
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

प्रगति का बाटा बणयाँ सीमेंट मा ऊँ लिप्यां
माटा कूड़ों को देकि ले ऐकी यख ऊँ का बौणा
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

डिश-ऐंटिना कुडू मा लगयाँ ऊँ का उलटु छातू कु भार
हाथ हाथमा मोबाईल, गिच लगानु फुर्की बांदो गीतों का गीतरा
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

सिलकनी कि सिटी जियु थे करनि छे धक-धक
स्कुल-कॉलेजा का छोरा छोरि हाथ मा हाथ धरी फिरणा च मस्त
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

कै कि कै थे अब फीक्र ना सब अपरा मा त्रस्त
सरकार ऐ कया गै बल पंचवर्षी यौजना जस का तस
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

गैर थे गैर कि रैगे अब अस्थाई ये गढ़
दिन आला दिन जाला इनि लग्युं रालो यु परपंच
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड
तेड-मेड सड़की बणि ऊ बणि गे डामु का अब गढ़
आच बदलणू म्यारु उत्तराखंड

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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तिमळा पाकि,मेरु पहाड

तिमळा पाकि,मेरु पहाड
मेरु गढ़ देश मेरु गढ़वाल
कुमाऊ कु अल छाळा पल छाळा
पाकि पाकि तिमळा
जौनसार सड़की किनारा

तिमळा पाकि,मेरु पहाड
मेरु गढ़ देश मेरु गढ़वाल

चल जौंला टीपणा कु गेल्या तिमळा
अपरा पहाड़ा अपरा उत्तराखंडा
देकि ओंला चैत कि रंगमत बहारा
कख्क कौथिग क्ख्क फागुन होल्यार
धूम लगी वख ब्योह,बारा तियोहारा

तिमळा पाकि,मेरु पहाड
मेरु गढ़ देश मेरु गढ़वाल

भेंटि ओंला दाणु स्याणु थे
पूजी ओंला अपरा कुल देबतों कु थानु थे
अदमुख वहैकि लूंला आशीष
बरखलि बरखा माया जिकडू घार
तृप्त व्है जालू जियु अपरु अपरु कु

तिमळा पाकि,मेरु पहाड
मेरु गढ़ देश मेरु गढ़वाल
कुमाऊ कु अल छाळा पल छाळा
पाकि पाकि तिमळा
जौनसार सड़की किनारा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रीतु ...

रीतु आंदी जांदी रैन्दी
दिन राती बदल दि ऐ रैन्दा जी ऐ रैन्दा
रीतु आंदी जांदी रैन्दी

एक सा नि रैन्दा क्वी बि यख
कुच ना कुच फरक ऐ जांदू जी ऐ जांदू
रीतु आंदी जांदी रैन्दी

आस का टिप्ड जुड़दा छिन
जुड़ला कबि ३६ गुन ऐ मिलदा जी ऐ नि मिलदा
रीतु आंदी जांदी रैन्दी

माया दोई तरफी हुंदी बल
चित बि मेर बल पट ऐ बि मेर जी ऐ बि मेर
रीतु आंदी जांदी रैन्दी

रीतु आंदी जांदी रैन्दी
दिन राती बदल दि ऐ रैन्दा जी ऐ रैन्दा
रीतु आंदी जांदी रैन्दी

एक उत्तराखंडी

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