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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुलायम सिंह इथगा मुलायम किलै।
बलात्कारीयों फर यु बयान किलै।।
ब्याली तक त तू नरभक्षी बणी छै।
इथगा दया दान आज किलै।।
बलात्कार की सजा मौत च, त्वे खाज किलै।
तेरा यू पी मा हुयुं यू गुण्डा राज किलै।।
बलात्कारी पापी होंद त्वे नाज किलै।
वोट का खातिर यु बयान आज किलै।
मी थै त त्वे फर भी सक हुणू च।
निथर फ़ोकट कु यु नाच किलै।।

Atul Gusain (jakhi)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आवा च्या पे जावा
फेसबुक का ये बैठाग मा
द्वी छुई गपी लगे जावा।
द्वी चार हम सुणोला
द्वी चार तुम सुणावा
आवा फेसबुक का ये
बैठाग मा
कंछडी लगे जावा।
गढ़वाली छुई गपी लगाणा खुण क्य आपन यु पेज लाइक कैरियाली.....
@@Atul gusain(jakhi)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मैन कैसी कबि माया नि लगाई

लोग बोल्दा तू मयालू नि

मैन कबि अंख्यों आंसू नि बगाई

लोग बोल्दा तू दयालू नि

मैन कबि कैतें पीड़ा नि बताई

लोग बोल्दा तू दुख्यारू नि

मै कबि बाटों मा पोंछी नि पाई

लोग बोल्दा त्वै अयारु नि

मै कबि कैसी बच्याणु नि आई

लोग बोल्दा येकू बोल्दारू नि

पर मैन कबि यों लोंगो नि बताई

जिन्दगी यों बिना गुजारु नि

प्रभात सेमवाल ( अजाण )सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बहुत दिनों बाद आज कुछ नई पंक्ति लिखी अपडा मन का हाल कन लगी जरुर बतायाँ ?
मी जग छोड़ी द्योलु
तू मैतेन न छोड़ी
मी दुन्या जोड़ी द्योलु
तू मैतेन न तोड़ी
तेरा बिगर यकुली अब
नि रै सकदु
जख तलक नजर जांदी
त्वै तें द्यखदु
अख्यों मा आस छ
मन मा विश्वास
कबि न कबि तू आलि बोड़ी
मी जग छोड़ी द्योलु
तू मैतेन न छो.........
बक्त गैल आज म्यरा नि
कबि न कबि त आलु
आज संग मी त्यरा नि
कबि न कबि त रोलु
वे बक्त का ओण तक
एक हेका का होण तक
कखि मुख न तू मोड़ी
मी जग छोड़ी द्योलु
तू मैतेन न छो.....
प्रभात सेमवाल (अजाण )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
20 hours ago · Edited
मिल ते हैं आंसूं

मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो इतना
किसी से अब कोई शिकवा नही होता
मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो

रोज छूटती है वो मोती बन के आँखों से
अब उसके टूटने का अहसास नही होता
मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो इतना

खार जल समाया मुझ में इस कदर इतना
मीठे जल का मुझ पर अब तो असर नही होता
मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो इतना

मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो इतना
किसी से अब कोई शिकवा नही होता
मिल ते हैं आंसूं हर जगह अब तो इतना

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
April 21 · Edited
नेगी जी का गीत कुराण छन भुला।
ये गढ़भूमी पहाड़ मा पुराण छन भुला।।

नेगी जी का गीत रुवांद छन भुला।
देश बटी देवभूमि मा बुलांद छन भुला।।

नेगी जी का गीत हमरी संस्कृती बचांद छन भुला
नेगी जी का गीत भ्रष्ट नेतावों हिलांद छन भुला।

नेगी जी का गीत पहाड़े रिवाज-रीत छन भुला
नेगीजी का गीत तेरा भी मेरा भी मीत छन भुला।

नि ह्वे सकद क्वी गढ़रत्न नेगी जी जन।
ह्वे भी जालू त ऊ नेगी जी का छींट छन भुला।
( सर्वाधिकार सुरक्षित )
Atul Gusain (jakh)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जाखी च सौहदेर
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खुजे द्या क्वी
एक लैन्दी गौडी
पैलाण हो दुसराण हो
देसी हो या गंगपर्या
गुठ्यारे हो या बणचर्या।
खुजे द्या क्वी
एक लैन्दी गौडी,
दूध
एक माण द्यो
द्वी माण द्यो
बसsss
जरा च्या मई कू
एक कुसिंडो द्यो।
खुजे द्या क्वी
देसी हो या घर्या,
गुठ्यारे हो या बणचर्या।
रंग
ललरंग हो कलरंग हो
कैलाण हो भैलाण हो
चललु.......
देसी हो या गंगपर्या
बस नि चैणी
लताण अर मरगुल्या।
खुजे द्या क्वी
यु जाखी सौहदेर च ।
अतुल गुसाईं जाखी ( सर्वाधिकार सुरक्षित )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुरण से पैली कैन एक च्या गिलास तक नि पूछी।
मुरणा का बाद चाई पत्ती, चिन्नी ले के आणा छन लोग।।
मुरण सी पैली द्वी गफ्फा अन्ना का प्यार से नि मिलिन।
मुरणा का बाद मेरा बांटे चुंची डांग मा धना छन लोग।
मुरण सी पैली कैन कभी हल्दी ज्यूँदाल नि लगे माथा
मुरणा का बाद खान्द फर पित्र पिठै लगाणा छन लोग।
मुरण से पैली क्वी मेरा हाल पुछण तक नि आई कभी
मुरणा का बाद बुले बुले की मी थै भूत नचाणा छन लोग।
मुरण सी पैली ये अतुल जाखिल कैकु बलु बुरु नि बोली।
मुरणा का बाद पित्र दोष लग्यू बल, छुई लगाणा छन लोग।।
जब बच्यू छौ, ज्यून्दू छौ सबोन नफरत ही कौरी।
मुरणा का बाद फेसबुक फर भी like कना छन लोग।
अतुल गुसाईं (जाखी)
सर्वाधिकार वंचित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

साथ कैकु सदानि नि रैंदु गैल्यों पर याद ऐ जांदी अर एक बक्त बाद याद बि नि ओंदी
यों बातों तें मन राखिक यक सरल कविता लिखना कि कोसिस करी कन छ मितें जरुर
बताया मि जाग्यों रोलु

न मैन तेरा गैल सदनी राण
न त्वेन मेरा गैल सदनी राण
बस रै जाण इ बोल्या बोल
जू त्वे भि याद आण अर मै भि याद आण .

न मैन अंख्यो आंसू रुकी पाण
न त्वेन अंख्यों आंसू रुकी पाण
एक हेका की खुद मा खुदेक
योन कभी त्वे रुलाण अर कभी मै रुलाण

न मेरा मन मा मोळ्यार आण
न तेरा मन मा मोळ्यार आण
एक दूसरा सी दूर -दूर रैकी
त्वेन भि सुखि जाण अर मैन भि सुखि जाण

न मैन कभि येतें रुकी पाण
न त्वेन कभि येतें रुकी पाण
यु बक्त छ कैका रुकी नि रुकुदु
फिर त्वेन भि बिसरी जाण अर मैन भि बिसरी जाण

प्रभात सेमवाल .( अजाण )सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुलायम सिंह इथगा मुलायम किलै।
बलात्कारीयों फर यु बयान किलै।।
ब्याली तक त तू नरभक्षी बणी छै।
इथगा दया दान आज किलै।।
बलात्कार की सजा मौत च, त्वे खाज किलै।
तेरा यू पी मा हुयुं यू गुण्डा राज किलै।।
बलात्कारी पापी होंद त्वे नाज किलै।
वोट का खातिर यु बयान आज किलै।
मी थै त त्वे फर भी सक हुणू च।
निथर फ़ोकट कु यु नाच किलै।।

Atul Gusain (jakhi)