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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चली बंसत बहार, आयी फुलूँ मा फुलार..2।
भोँरा लिगेनी लिगेनी भोँरा होऽऽ
भोँरा लिगेनी फूलूँ कू रस चोरीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
फागुण चैत को त्योहार...2,
आँदू रंयाँ बार बार.....2।
गैल्या संग खेला रंग खेला होऽऽऽ
गैल्या संग खेला रंग खेला जू होरीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
गैल्या आज अपडा हथून
अबेर गुलाल लगैजा..2।
झणी अब फिर कब हूंदी भेँट,
समलौण्या चदरी रंगैजा....2।
ऐंसू की होली मा समलौण्या चदरी रंगैजा
ऐजा आँख्यूं मा समैजा गैल्या हो.. प्रीत जोडीकी
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की.....2।
ज्यू बुनू चा प्रेम का रंगून
तेरी कोरी जुकडी रँगैद्यूँ...2।
लाल बुरूँसी का फूलून
तेरी स्यूँद पाटी सजै द्यूँ
ऐँसूँ की होली मा तेरी स्यूँद पाटी सजै द्यूँ
देद्यूँ देद्यूँ सैरी जिन्दगी निचोडी की.
ओ रंग रँगीली बहार ऐगे होली की..........

होली की ढेरों शुभकामनाएँ दगडयों।

#बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्यु मेरु कभि खास थो अब नि

मै भि वेकु खास थो अब नि

कुछ बक्त बदली कुछ बदली भाग

न स्यु जागी जरा मैसी नि हवे जाग ,

वनि मन मेरु जळी वनि वें लगै आग

वनि सुरु वेका हर्ची वनि में लुकै राग

(अजाण )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्यु मेरु कभि खास थो अब नि

मै भि वेकु खास थो अब नि

कुछ बक्त बदली कुछ बदली भाग

न स्यु जागी जरा मैसी नि हवे जाग ,

वनि मन मेरु जळी वनि वें लगै आग

वनि सुरु वेका हर्ची वनि में लुकै राग

(अजाण )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खोंदार यख , खोंदार तख
पहाड़ी, घाटियुं मा खोंदार वख

भिज्यूँ माटू च अर रिती गाड़
डांडी काठियुं अर मुल्क खाक ,

म्वोर संगवाड अर रिती ख्वौलि ,
छज्जा मा बैठीं इक बुढ्यान ,

नाख मा नथुलु , गात पाख्लु
नातू खुज्याणी चा बुढ्यान

सुणु गौं जन बथौं सि धार
बाटा खोड़ जन ह्वयूं खोंदार

तीसु धारु लगि गागर
वबरू चुलरडू फूंकदी बुढ्यान

: हिमाँशु पुरोहित "सुमाईयां"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खित खित खित खित खित खित।

कनु कमर टुटि रे तबा।
हे हरीश भैजी कनु गजब हो रहा है जों ते अपडा नाक कू #सिंपाँणा फूँजणा नी आता वो भी #propose_day मना रहे हैं।

कनु कुनस होया तबा भैजी।

इजहार दिवस की ढेरों शुभकामनाएँ दगडयों ।

बौल्या।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तै दिवारी डांडा खिलला बुरांस
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बुरांस का नाम लेते ही पहाड़ का चित्रांकन मन मस्तिष्क में इस तरह उभर आता है, जैसे देवराज इंद्र का नाम लेते ही स्वर्ग का। बुरांस पहाड़ का प्रतीक है। यह यहां का सबसे खूबसूरत फूल है। सुर्ख लाल इस फूल को कई दंत कथाओं, गीतों, गाथाओं, लोकोक्तियों और मुहावरों में उपमेय बनाया गया है। आक्रोश और सौंदर्य का उदाहरण तो बुरांस के बिना फीका पड़ जाता है। 'बुरांस जनि मुखड़ी' के न जाने कितने दृष्टांत पहाड़ी लोक और लोक साहित्य में प्रयुक्त होते हैं। उच्च क्षेत्रों मंे उगने वाले इस फूल के खिलते ही बसंत में पहाड़ की चोटियां रक्तिम वर्ण की हो जाती हैं। इस फूल के कई औषधीय गुण भी हैं। इसका जूस हृदय रोग के लिए रामबाण माना जाता है। संभवतः इसी कारण इसका अब खूब दोहन हो रहा है। युगों-युगों से बुरांस पहाड़ के सुख-दुख, हास-परिहास में सहभागी बना हुआ है। यह विरह भी उत्पन्न करता है तो प्रेम के अंकुर भी प्रस्फुटित करता है। इसे देखकर दूर गांव में व्याही युवती को मैत की खुद लगने लगती है तो युवा मन की भावनाओं को यह उदात्त स्थिति में ले जाता है। गढ़वाली गीतों में बुरांस को खूब सुशोभित किया गया है-'डांड्यों खिलणा होला बुरांसि का फूल' 'तै दिवारी डांडा खिलला बुरांस'। फोटो साभार-विनोद बर्तवाल की वाल से।
--डा.ॅ वीरेंद्र बर्तवाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi‎
सारि दुनि लौटि जै म्यार गम देखिबेर,
जसिक लौट जै लहर किनार देखि बेर।
तुम कानि झन लगाया मेरि डानि पर,
कें ज्योंन निहैजों तुमौर सहार देखिबेर॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कभित रात ब्यांली होलि सुबेर !

कभित खुलालि म्यारी खैरिकी घेड !!

कटैला एक दिन ई घोणा अँधेरा !

कभित उजालु आलू यख फेर !!

साक्यो पुराणी बादलों मा " जोन "!

कभित ऐ जाळी बोडि फिर भैर !!

बसग्याल जालू बिती यु अबत !

कभित बैणु मै बसंत मा ग्वेर !!

घुघूती बसालि मनमा कभि मेरा !

कभित आलू स्यु बक्त व बेर !!

सुपिन्यां मेरा सुपिन्याँ हि नि राला !

कभित बिजालू यों सुपिन्यों तें मैर !!

होला ई द्योयो देवता मेरा देणा !

कभित मेरा भाग कि मुडेर.......!!

प्रभात सेमवाल ( अजाण )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घटा छंटेगी,
फ़िज़ा बदलेगी |
शायद चुनाव ऐगी |

कुकर बाघ बिरोवू,
बांदर नेवला गुरोवू |
किले आज एक व्हे होला,
शायद चुनाव ऐगी |

संसद मा भ्याली तक,
लगांदा छ जू आरोप |
आज स्यू नेक किलै व्हे होला,
शायद चुनाव ऐगी |

गरीबा घार मा आज दिन मा,
किलै द्वी जग्यूचा |
सेठा का दुर्पला मा आज,
किलै झंडा टंग्यूचा |
शायद चुनाव ऐगी |

भ्याली तक गौमा,
बेरोजगारू की भरमार छै|
जनता भी पांच सालो ,
हिसाब ले की तैयार छै |
पर आज सरू गौ खाली,
शायद चुनाव ऐगी

गौ- गौमा किलै फूट व्हे होलि,
भै-भै मा किलै टूट व्हे होलि |
शायद चुनाव ऐगी |

आज स्यू लोवू स्याल,
मुंगरा किलै नि भूखाणू होलू |
आज थानेदार लोखू तै,
आँखा किलै नि दिखाणू होलू |
शायद चुनाव ऐगी

किलै आज कल हेलिकॉप्टर
उड़णान हवा मा |
शेरूदा किलै टैट बण्यु होलू
सुबेर बटी पव्वा मा |
शायद चुनाव ऐगी |

किलै आजकल क्वी उतारनू पहनू च,
शराफत कू नकाब |
किलै आजकल वैष्णो ढाबा मा,
बिकण बैठी कबाब |
शायद चुनाव ऐगी|

किलै आज दिन रात का पहर,
शैद घुमणा छन| (सफ़ेद पोशाक वाले)
किलै आज कुछ खास लोग,
गुजरों कि गुजरायण सूंघणा छन |
शायद चुनाव ऐगी |

प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ताल त सोनिया च.... मनमोन त बस ढोल च ..
सिरवाणि त सोनिया च.... मनमोन त बस खोळ च ..
कुल्फी त सोनिया च.... मनमोन त बस कटुग च ..
चटणि त सोनिया च.... मनमोन त बस सीलोट च ..
उज्यालू त सोनिया च.... मनमोन त बस बल्ब च ..
कविता त सोनिया च.... मनमोन त बस कलम च .......बगोट जी।

#बौल्या।