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Story Of Miracles - उत्तराखंड के देव भूमि देवताओं के चमत्कार की कहानिया

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 02, 2009, 02:58:05 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



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उत्तराखंड के देव भूमि देवताओं के चमत्कार की कहानिया  
GODS & GODDESS MIRACLES STORIES IN UK

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दोस्तों,

हमारी राज्य उत्तराखंड जिसे दूसरे शब्दों में देव भूमि ने नाम से भी जाना जाता है ! वह भूमि जहाँ देवी देवता का निवास स्थान है ! उत्तराखंड के धरती के पग पग मन्दिर है! यह वही भूमि है वहां पर शिव शंकर भोले नाथ ने महा सती पार्वती माता से शादी की !

देवी देवताओं ने भी अलग -२ जगह पर समय -२ पर कई चमत्कार दिखलाये है जिसकी वजह से उनके मन्दिर भी उन जगहों पर अभी भी विद्यमान है !

इस थ्रेड में हम अपने सदस्यों के अनुरोध कर रहे ही वे अपने सथानो पर अपने ग्राम देवताओं के चमत्कार की पौराणिक कहानी का ब्यौरा यहाँ पर दे और किसी के साथ कही पर चमत्कार हुवा है वो वहां पर share सकता है

आपका प्रिय,

एम् एस मेहता [/b] [/color] [/size]

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हमारे ईष्ट देव श्री मूल नारायण जी की यह चमत्कारिक कहानी
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हमारे गाव के सबसे ऊपर है श्री १००८ मूल नारायण भगवान जी का मन्दिर जो की नंदा देवी के भतीजे भी है ! लोग कहते है कि वे गाव वासियों कि मदद ले लिए समय समय पर आकाशवाणी किया करते थे!  जहाँ से भगवन मूल नारायाण जी यह आशाश्वानी किया करते थे वहां के बहुत बड़ा पत्थर है जिसे धरती शील कहते है !

एक बार एक आदमी हर चला रहा था, बार बार उसका लेकिन बार बार उसका हल का joint से खुल जा रहा था ! भगवान् मूल नारायण जी यह प्रकरण को इस पत्थर से देख रहे थे ! भगवान् ने वहां से इस आदमी की कहा "

अरे किरमोदी का टहनी का पात (लकड़ी का उपकरण) हर पर दाल तब तेरी यह समस्या दूर जायेगी ! इस आदमी यही काम किया तब उसका काम सुचारू दंग से चला !


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यह कहानी हमारे परिवार से है:

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मेरी माता जी बताती थी कि एक बार पहाड़ घास काटने जंगल मे गयी थी वहां से हिमालय बिल्कुल नजदीक एव सामने दिखायी देता है ! जब वो पहाड़ कि सुनदरता को गौर से देख रही दी तो उनको हिमालय की ओर से एक दुपट्टा उडाता हुवा उनको ओर आता दिखा थोडी देर मे माता जी बेहोश हो गयी !

यह कसी औलिकिक शक्ति आना था ! बाद मे माता घर आयी तो काफ़ी लंबे समय तक स्वास्थ्य अच्छा नही रहा! काफ़ी इलाज कराने के बाद भी उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नही आया !

पिताजी दिल्ली मे आर्मी मे सर्विस करते थे बे माँ को इलाज के लिए दिल्ली लाये लेकिन वहां भी कोई फायदा नही हुवा !  हमने घर के सारे देवता पूज लिए थे ! लेकिन कोई फायदा नही

अब होना था भगवान् का अवतार
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माँ की तबियत काफ़ी हो गयी ! हॉस्पिटल ने करीब - २ माँ को मृत घोषित कर दिया था ! पिताजी ने अपने आर्मी से एंबुलेंस को बुला लिया था ! आर्मी वार्ड सभी पड़ोसी भी वहां आने लगे !  सब को लगा माँ अब दुनिया मे नही रही !

तबी हमारे ईष्ट देव चंडी देवता जैसे की नाम से प्रतीत है ये देवता माथे पर चंदन केवल लगाते है , उनका अवतार हुवा और माँ के शरीर मे फिर से श्वास आ गयी और देवता माँ शरीर मे अवतार हो गए !

देवता मेरे पिताजी को कहा की अब तेरे दुःख की सारी घडिया ख़तम हो चुकी है और मे तुम्हारे घर मे ईष्ट देवता के रूप मे अवतार ले रहा हूँ !  माँ एक दम स्वस्थ्य हो गयी और लोग इस चमत्कार की महिमा को बया करते नही थके ! आर्मी केंट के पदोशियो में की कुछ दक्षिण भारत के दे, जब उन्होंने ये देखा अपने दरवाजे बंद कर लिए और कहने लगे भूत आ गया -२..

लेकिन यह था देवता का अवतार होना ! तब से ईष्ट देव चंडी देवता हमारे ईष्ट देवता के रूप मे हमारी रक्षा करते आ रहे है !

चंडी देवता : एक बाण देवता है जों कि भगवाती माता के डोली को ले जाते है ! जब भी हम उनको पूजा करते है, ईष्ट देवता पहने भगवाती माँ की पूजा करते है !

ईष्ट देवता का वास हिमालय में है !

हलिया

अच्छा हो महाराज! ये तो चमत्कार ही ठैरा फ़िर.

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बागेश्वर जिले के लोहारखेत (पिंडारी की तरफ़) हुँकारा देवा का मन्दिर है !

कहा जाता है की इस इलाके का एक गाव में पहाड़ की ओर से हुंकार की आवाज आती थी ! हूँ हूँ  जिसे वहां के शाब्दिक अर्थ में हूँ हूँ (आने का संकेत है) !  यह आवाज काफ़ी तक उस पहाड़ से आती रही ! इस गाव के बूदी औरत ने अपनी भाषा मे है !

को होऊ त डान हूँ हूँ करनी, रोज उ उ (आना के कहाँ) की आवाज करती है आती क्यो नही

फिर क्या वह पूरा पहाड़ टूद कर उनके गाव की तरफ़ आ गया ! क्यो की माता भगवती को शायाद यह जगह पसंद होगी ! गाव में मध्य में माता होंकारा का मन्दिर विद्यमान बताते है !


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हमारे उत्तराखंड के गडवाल मंडल में सित्पुली नामक जगह पर एक महाबीमारी हुयी थी ! कहा जाता है देवी माता ने वहां पर एक चमत्कार दिखाया था जिसे वह बीमारी एक दम सही हो गयी थी !


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THIS IS WHAT YOU CALL A MIRACLE.
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This is a real story. There is a village called Vaikudi ahead of Reem District Bageshwar. The Narsing Gardevi of the Ist Devi of the village. It is said that time to time Devi Mata has shown several miracles there. Once upon a time, a women of the village thought that somebody is cutting grass in her field which was about 2 –3 slightly visible distance. Firstly, she gave a voice to her stating that " she should immediately stop cutting grass from her field" but there was no response. She tried it many times but no again. Finally, the lady lost cool and requested to divine help.

She urged "Narsing Gardevi" that the person who is not following her instruction "should die immediately. The next day when the lady went there, she found a fox lying dead in her field.

In the local language" the lady said " Agar Narsing Gardevi Mai Shakti holi, too jo mero khet mai bhe nee hatni, wo wahi mar jo"
 

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भगवान् मूल नारायण जी यह चमत्कारिक एव सच्ची कहानी

नंदा देवी के भतीजे सही मूल नारायण भगवान् का मंदिर बागेश्वर जिले शिखर नामक स्थान पर है जहाँ की हर साल कार्तिक पूणिमा मेला लगता है! 

चमत्कारिक कहानी
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एक बार मेरी दीदी और चाची इस मेले में गए थे !  आरती के समय पर डंगरिया ( जिस पर भगवान् की आत्मा आती है) सबको आशीर्वाद दे रहे थे ! मेरी दीदी एव चाची दूर काफी दूर कह रहे थे कि " देखो ये देवता" हमें कुछ कहता है कि नहीं ?

ये लोग काफी दूर खड़े थे डंगरिया ने चावल और फूल फेक कर कहा वहां पर खड़े दो महिलाओ को बुलाओ !

ये लोग चकित रह गए और उनसे डंगरिया ने पुछा कि " आप लोग आपस में ये बाते कर रहे थे कि ये भगवान् हमे पास बुलाते है कि नहीं" !

तब डंगरिया ने इनको भी फूल फल आदि देकर आशीर्वाद दिया !

उत्तराखंड को यो ही नहीं देव भूमि नहीं कहते है ?
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मुझे आशा है कि आप लोगो के व्यक्तिगत जीवन मी भी इस प्रकार के चमत्कार हुए होंगे ! जिन्हें आप यहाँ पर share करना चाहिंगे !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Our Dev Bhoomi Uttarakhand where there is temple of God and Godess at step to step.

Devi Devta has shown several mircles times to time. if any of our members have witnesses any such mircles, he /she can share the same here.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


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मां पूर्णागिरि के चमत्कार से रुबरु हुए थे जिम कार्बेटApr 02, 01:58 am

टनकपुर (चंपावत)। देश के सुविख्यात मां पूर्णागिरि धाम की शक्ति व महत्ता के कारण हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्घालु मां के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मां की शक्ति की अलौकिक अनुभूति सुविख्यात शिकारी जिम कार्बेट को भी हुई थी। यूं तो मां पूर्णागिरि धाम में अब पूरे बारह महीने श्रद्घालुओं की आवाजाही रहती है लेकिन होली पर्व के तुरंत बाद सरकारी तौर पर चलने वाले मेलावधि में श्रद्घालुओं की संख्या काफी बढ जाती है। मेलावधि में जिला पंचायत, नगर पालिका व प्रशासन संयुक्त रुप से मेले की व्यवस्थाओं को अंजाम देता है। इसे मां की शक्ति व महत्ता कही जायेगी जिसके कारण हर वर्ष लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने से श्रद्घालु मां पूर्णागिरि धाम में पहुंचते हैं। मां पूर्णागिरि की शक्ति व महिमा का अलौकिक अनुभव से सुप्रसिद्घ शिकारी जिम कार्बेट भी रुबरु हुए थे। इस अनुभव को जिम ने अपनी प्रसिद्घ पुस्तक टैम्पल टाइगर में बांटा है। पुस्तक के अनुसार चंपावत जिले के तल्लादेश में लोगों को आदमखोर टाईगर से निजात दिलाने के लिए जिम कार्बेट ने 5 अपै्रल 1929 को पूर्णागिरि क्षेत्र से लगे भारत नेपाल सीमा को जोडने वाली नदी किनारे अपना पडाव डाला था। रात्रि में विश्राम के दौरान नदी के दूसरी ओर पहाड पर उन्हें तीन रोशनियां दिखाई दी। इन रोशनियों को जिम के साथ चल रहे उनके सहयोगियों ने भी देखा। अगले दिन जब जिम अपने मिशन को आगे बढे तो रात्रि में जहां उन्हें रोशनियां दिखाई दी वह खड़ी चट्टान थी। जहां किसी मनुष्य का पहुंचना संभव नही था। नौ दिन के मिशन समाप्ति के बाद जिम ने उनके साथ चल रहे सहयोगी गंगा राम को इस अद्भुत दृश्य से अवगत कराया। तो गंगा राम ने बताया कि काफी समय पहले साधू मां की अनुमति बिना देवी स्थल पर चढ़ा तो नाराज होकर मां ने उसे नदी की दूसरी ओर पहाड़ पर फेंक दिया। अब वहीं साधू रोशनी जलाकर मां की आराधना करता है। बाद में जिम कार्बेट से उत्तरी प्रांत के तत्कालीन गर्वनर मैल्कम हेली ने भी उनसे उस चमत्कारिक प्रकाश पुंज स्थल को दिखाने का अनुरोध किया था।