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Tribute To Movement Martyrs - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, October 03, 2007, 02:14:22 PM

पंकज सिंह महर

पिथौरागढ़। स्वतंत्रता संग्राम की 150 वीं वर्षगांठ पूरे होने के अवसर पर चल रहे कार्यक्रमों का शनिवार को समापन होगा। इस अवसर पर जिले के कारगिल शहीदों के परिजनों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया जायेगा।

कार्यक्रम आयोजन समिति के सदस्य गोपू महर ने बताया कि समापन कार्यक्रमों की शुरूआत प्रभात फेरी से होगी। प्रभात फेरी में नगर के स्कूलों के बच्चे भाग लेंगे। दोपहर सद्भावना दौड़ का आयोजन किया जायेगा। मुख्य कार्यक्रम अपराह्न में रामलीला मैदान में शुरू होंगे। कार्यक्रमों की शुरूआत सांस्कृतिक कार्यक्रमों से होगी। इसी कार्यक्रम में जनपद के कारगिल शहीदों के परिजनों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया जायेगा। इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के समाज कल्याण राज्य मंत्री अजय टम्टा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री सुरेश जी भी भाग लेंगे।

श्री महर ने बताया कि समापन पर 1857 की क्रांति के शहीदों की याद में रामलीला मैदान में 1857 दिये जलाये जायेंगे। आयोजन समिति के ललित पंत, तारा चंद, राजेन्द्र रावत, बसंत जोशी, बसंत वर्मा, विनोद पाण्डे लारा आदि ने नगरवासियों से शहीदों की याद में दिये जलाने के लिए रामलीला मैदान पहुंचने का आह्वान किया है।

पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों का जिक्र हो और बाबा मोहन उत्तराखण्डी का जिक्र न हो, ऎसा संभव नहीं है। बाबा मोहन उत्तराखण्डी ने गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की नीति बनाने और उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिये सम्यक नीति बनाने की मांगों को लेकर ९ जुलाई २००४ को ३९ दिन के आमरण अनशन के बाद अपने प्राण त्याग दिये थे।

     मेरा पहाड़ परिवार  की ओर के उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

हेम पन्त

"उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन" के दौरान सरकारी उत्पीडन व दमन का परिहास करती गिरीश तिवारी "गिर्दा" की यह पंक्तियां आम लोगों के मन पर अंकित हो गयीं.

गोलियां कोई निशाना बांधकर दागी थी क्या?
खुद निशाने पर आ पङी खोपङी तो क्या करें?

खामख्वां ही तिल का ताङ बना देते हैं लोग,
वो पुलिस है, उससे हत्या हो पङी तो क्या करें?

काण्ड पर संसद तलक ने शोक प्रकट कर दिया,
जनता अपनी लाश बाबत, रो पङे तो क्या करें?

आप जैसी दूरद्रष्टि, आप जैसे हौंसले,
देश की ही आत्मा गर सो गयी तो क्या करें?

दिनेश मन्द्रवाल

उत्तराखण्ड आन्दोलन में शहीद हुये आन्दोलनकारियों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन।

पंकज सिंह महर

आज खटीमा गोली कांड की १४ वीं बरसी है, इस गोलीकांड में उत्तराखण्ड के ८ क्रांतिकारी पुलिस की गोली का शिकार बने थे।

१ सितम्बर, १९९४ - खटीमा

अमर शहीद स्व० श्री प्रताप सिंह
अमर शहीद स्व० श्री भुवन सिंह
अमर शहीद स्व० श्री सलीम
अमर शहीद स्व० श्री भगवान सिंह
अमर शहीद स्व० श्री धर्मानन्द भट्ट
अमर शहीद स्व० श्री गोपी चंद
अमर शहीद स्व० श्री परमजीत सिंह
अमर शहीद स्व० श्री रामपाल

धन्य हैं आप लोग, आपने हमारे सुरक्षित भविष्य के लिये अपना वर्तमान कुर्बान कर दिया।

मेरा पहाड़ परिवार की ओर से इन अमर शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

जय उत्तराखण्ड!

Risky Pathak

Un Logo Ko Sat Sat Naman Jo Uttrakhand Rajya Bnaane Ke Khaatir Shaheed Ho Gye.

पंकज सिंह महर

आज मसूरी गोलीकांड की १४ वीं बरसी है। दिनांक २ सितम्बर, १९९४ को मंसूरी में निम्नांकित लोग पुलिस की कायरतापूर्ण चलाई गई गोली के शिकार बने।

अमर शहीद स्व० श्रीमती बेलमती चौहान
अमर शहीद स्व० श्रीमती हंसा धनाई
अमर शहीद स्व० श्री राय सिंह बंगारी
अमर शहीद स्व० श्री धनपत सिंह
अमर शहीद स्व० श्री मदन मोहन मंमगांई
अमर शहीद स्व० श्री बलबीर सिंह नेगी
अमर शहीद स्व० श्री उमाशंकर त्रिपाठी (पुलिस उप-अधीक्षक)
अमर शहीद स्व० श्री गुड्डू




मेरा पहाड परिवार इन अमर शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देता है और नमन करता है, कि इन लोगों ने हमारे बेहतर भविष्य के लिये अपना वर्तमान कुर्बान कर दिया।

जय उत्तराखण्ड!


पंकज सिंह महर

एक सितंबर को खटीमा गोलीकांड के खिलाफ आंदोलनकारी शांतपूर्ण जुलूस निकालना चाह रहे थे। आंदोलनकारी मसूरी झूलाघर पर एकत्रित हुए। झूलाघर में पहले से ही पांच आंदोलनकारी क्रमिक अनशन पर बैठे थे, जिन्हें पुलिस रात को उठाकर ले गयी और सुबह-सबेरे 47 आंदोलनकारियों को वाहन में बिठाकर बरेली जेल के लिए रवाना कर दिया। नगर की युवाशक्ति पौड़ी मंडल मुख्यालय पर प्रदर्शन के लिए गयी थी। शहर में बुढ़े आंदोलनकारी व महिलायें ही ज्यादा तादाद में थीं। आंदोलनकारियों को नही पता था कि मुलायम की फौज उनकी टोह में है। सुबह से ही पुलिस ने झूलाघर के आसपास भारी संख्या में अश्रु गैस व अन्य सामग्री रख दी। हाल में दाखिल होते ही पीएसी ने बर्वरतापूर्वक महिला आंदोलनकारियों पर गोलियां चला दीं। मौके पर ही आंदोलनकारी हंसा धनाई व बेलमती चौहान के सिर के चिथड़े उड़ गए और दोनों वहीं ढ़ेर हो गयी। युवा बलवीर सिंह नेगी को एक पुलिस कर्मी ने संगीन घोप कर घायल कर दिया। धनपत, राय सिंह बंगाारी व सुमेरचंद कुमाई पुलिस की गोली से घायल हो अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ गए। नगर में यह सूचना आग की तरह फैल गयी। एक पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी की भी पुलिस की गोली से मौत हो गई। चंद मिनट में ही सात जिंदगियां तबाह हो गयी। पूरे नगर में हाहाकार मच गया। गोलीकांड की खबर से आला अधिकारी व नेता मसूरी पहुंचने लगे। लेकिन तब तक सब कुछ तबाह हो चुका था। उसके बाद पुलिस व पीएसी ने आंदोलनकारियों के घरों में दबिश व बेवजह यातनायें देनी शुरू कर दी। वयोवृद्ध स्व. कलम सिंह रावत को थाने में बुरी तरह पीटा गया और नगर के चौदह लोगों पर सीबीआई ने पुलिस उपाधीक्षक की हत्या का मुकदमा दर्ज किया। शहर में पंद्रह दिन का कफ्र्यू लगा दिया गया। हैं।   

पंकज सिंह महर

जागरण कार्यालय, खटीमा: उत्तराखंड आंदोलन के दौरान एक सितंबर 1994 को खटीमा में हुए पुलिस गोलीकांड के शहीदों की चौदहवीं बरसी पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने का संकल्प लिया गया। शहीदों की स्मृति में सोमवार को तहसील परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। आचार संहिता के चलते इस बार शहीदों की बरसी सादगी से मनाई गई। सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत बचदा, राज्य आंदोलनकारी कल्याण परिषद की अध्यक्ष सुशीला बलूनी, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष गजराज सिंह बिष्ट, उक्रांद के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी आदि दिग्गजों ने शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया।


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

In amar shaheedon ka Mera Pahad parivaar ki taraf se shat shat naman.