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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti


यहां कोई ज़िंदा नहीं बचेगा [इख कैन ज़िंदा  नि बचण ]
[नाटक -केवल प्रशिक्षण हेतु ]
अनुवाद - भीष्म कुकरेती

अंक 2  का दृश्य 10   से अग्वाड़ी

---------------------------------------------अंक 2 , दृश्य    - 11    Scene   11 -----------------------------------------

[जज आलोक कुर्सी मा छन।  द्वी छवाड़ मोमबत्ती जळणि छन।  उंक  विग उतरीं च ]
[नंदा चिल्लांद।  डा मदन सब तै दूर रौणो इशारा करद।  अफु अलोक का पास जांद ]
मदन - रिवाल्वर की गोळी से हत्या।
बृजमोहन - रिवाल्वर ?
मदन - सीधा सर पर एक हि सेकंड माँ काम तमाम -धागा का गोळा का थ्रू , बेआवाज ?
नंदा -कोमल की स्वेटरक धागा अर इख ?
बृजमोहन - अर टेबलक्लॉथ -
धूमल - अब आलोक जी कबि न्यायधीश की गद्दी मा नि बैठ सक्दन।  अब
नंदा - अर सुबेर तुम आलोक जी पर शक करणा छया।
धूमल - हूँ मीन गलत आदिम पर शक कार ।  हत्यारा हम मादे च जैपर शक नि गे।
[धूमल अर बृजमोहन लाश तै स्टेज से भैर लिजांदन अर  डा मदन , नंदा ,ऊंक पैथरा पैथर ]

----------------------------------------------अंक 2 , दृश्य  12   -    Scene  12  -----------------------------------------
---------------------रात्रि ------------------------------------
[एक काळो कपड़ों मा आदिम जमीन मा [स्टेज मा ] सरकणो च। बृजमोहन अपण कमरा से भैर आंद।  चिल्लांद ]
बृजमोहन - पकड़ो , पकड़ो।  यु भागणु च , भागणु च। धूमल मदद को आ।
[धूमल अर नंदा अपण अपण कमरा से भैर आंदन ]
धूमल -कु छौ ? तीन द्याख च ?
बृजमोहन - ना सूरत त नि देखि।  तेज छौ।  पर वैन बड़ी गलती कर दे।  हम छंवां चार अर यदि एक कमरा खाली हो तो ? मतलब डा मदन ?
[बृजमोहन
धूमल - मदन ? अब कै पर बि भरवस नि करे सक्यांद। [  डा मदन का कमरा का दरवज पर जांद दरवज खटखटांद , देर तक पर क्वी उत्तर नि आंद।  फिर की हॉल से दिखणो कोशिस ] की हॉल मा चाबी नी च।  आज सब पता चल जाल। हम वैक खोज मा जाँदा अर मिस नंदा ! डा मदन आल बि तो कमरा नि खुलण।  कतै नि खुलण।  जब तक मि अर बृजमोहन आवाज नि दींदा कमरा कतै नि खोलिन हाँ।  दरवज बिलकुल बंद। हम द्वी वैक खोज मा जांदवां।
नंदा -ठीक च [वा स्टेज का एक छवाड़ से भैर जांद अर हैंक छ्वाड़ से वु द्वी भैर ]


----------------------------------------------अंक 2 , दृश्य    -   13  Scene   13 -----------------------------------------

--------------------------डा मदन की खोज , चादनी रात ---------------------------------
[रात  मा धूमल अर बृजमोहन चलणा छन ]
बृजमोहन - सावधानी से हाँ।  वैक पास रिवॉल्वर बि च।
धूमल - अहो रिवॉल्वर मीमा च।  ड्रावर मा मिल गे छे।
[बृजमोहन डरिक धूमल का तरफ दिखुद ]
धूमल - बेवकूफी नि कर।  मि तेरी हत्या नि करण वळ छौं। मि मदन की खोज मा जाणु छौं।  आणु छे ?
बृजमोहन - ठीक च आणु छौं।
[दुयुंन ज़रा द्वीप खोज पर मदन नि मील।  रिजॉर्ट मा ऐक नंदा का कमरा खटखटाइ ]
धूमल - नंदा नदा ! सब ठीक ना ?
नंदा -हाँ।  क्या ह्वे ?
धूमल - हम तै भीतर तो आण दे।
[नंदा कमरा खुलद ]
नंदा -क्या ह्वे ?
धूमल - मदन गायब च।
नंदा - नहीं !
धूमल - द्वीप मा समाप्त ।
बृजमोहन - हाँ खतम किस्सा।
नंदा - ना ना ! इन ब्वालो कखि लुकि गे।
बृजमोहन - नही! हमन सब जगा द्याख।  दिनक सा उज्यळ चादनी रात मा च।  कखि नि मील।
नंदा - दुबर रिजॉर्ट मा घुस गे हो।
बृजमोहन - हमन स्वाच च अर रिजॉर्ट मा बि ख्वाज।
नंदा -मि तै विश्वास नी च।
धूमल - नंदा जी ! बृजमोहन सही बुलणु च। रिजॉर्ट की खिड़की टूटीं च।  अर टेबल मा अब केवल तीन सैनिकुं मिनिएचर छन।

  ----------------------------------------------Act अंक 2 , दृश्य    14 -    Scene  14  -----------------------------------------
-----------------------------नास्ता ---------------------------------------------
[नंदा , धूमल , बृजमोहन नास्ता करणो बैठ्याँ छन ]
नंदा - मदन कु क्या ह्वे ?
धूमल - केवल एक सुराग च।  अर वाच कि अब तीन सैनिकों मिनिएचर छन।  मतलब मदन की इहलीला समाप्त।
नंदा - पर वैक मृत शरीर किलै नि मील ?
बृजमोहन -ह्वे सकद च कि वैक शरीर समुद्र मा फिंके गे हो ?
धूमल - कु फिंकदु ? तू मी या नंदा ? हमम समय छौ क्या ?
बृजमोहन - मि नि बोल सकुद।  पर यु साफ़ च कि पैल त्यार रिवॉल्वर हरच अर फिर ड्रावर मा ऐ गे। अफिक हरच अर अफिक ऐ गे।
धूमल - हाँ पर हमन सब जगा खोज तो कार  छे ना ?
बृजमोहन - अर तीन चालाकी से हर समय लुकआइं राइ।
धूमल - अरे मी बि खौंळयौं जब रिवॉल्वर मेरी ड्रावर मा ऐ।
बृजमोहन - वो तो हम तै विश्वास करण पोड़ल हैं ? हत्यारा त्वे तै रिवॉल्वर देक चल गे। किलै ?
धूमल - मि तै किलै पता ? फजूल की बात च।
बृजमोहन - क्वी विश्वसनीय कथा सुणा भै।
धूमल - मि सच बुलणु छौं।
बृजमोहन - मि तै नि लगद कि -
धूमल - मि -
बृजमोहन -यदि तू ईमानदार छे तो फिर -
धूमल - मीन कब ब्वाल कि ईमानदार छौं ? अर मीन कबि दर्शाइ बि नी च।
बृजमोहन - ईमानदार छै या ना अब मतलब इ नी च। जब तक तीम रिवाल्वर च मि अर नंदा खतरा मा छंवां। तेरी मेहरबानी मा छंवां।  अब रिवाल्वर बि दवा आदि का इ साथ रखे जाण चयेंद।   ... अर तीम अर मीम चाबी राली।
धूमल  - मूर्खतापूर्ण हाँ !
बृजमोहन - हूँ तो तू स्वीकार नि करिल हैं ?
धूमल - अरे मेरी रिवॉल्वर च मेरी रक्षा का सवाल च।
बृजमोहन -  अब तो यही निर्णय  निकल्दु कि -
धूमल - कि मि अनजान किसनदत्त  छौं।  अरे मि किसनदत्त हूंद तो ब्याळि इ तुमर कामतमाम कर द्युंदु। मीम बीस अवसर छया।
बृजमोहन - मि नि जाणदू कि क्या कारण छौ पर -
नंदा - तुम द्वी मुर्खुं तरां व्यवहार करणा छंवां।
  धूमल -क्या ?
नंदा - हाँ जरा कविता तो याद कारो ?
चार सैनिक समुद्र मा गेन
एक तै शार्कन निगळ दे अर  तब तीन  रै गेन
यु बड़ो सुराग च।   मदन मोर नी च। वु मिनिएचर अपण दगड लेकि गे कि हम समजवां कि वैकि हत्या ह्वे गे। वु द्वीप मा इ च।
धूमल -हाँ शायद तू सही छे।
बृजमोहन - हाँ पर छ ?  हमन द्वीप मा सब जगा खुजाखोज कार।
नंदा - हाँ पर रिविोल्वर बि इनि नि मीलि छे।
धूमल - पर आदिम अर रिवॉल्वर कु साइज मा अंतर हूंद।
नंदा -मि नि जणदु -पर मि सही छौं।
बृजमोहन -समुद्र मा हिलसा मछली  न खै दे।  है ना ?
नंदा -हाँ पर वु पागल च। ज़रा कविता कु विचार ही पागलपन च। अर कखी ना कखि हरेक हत्या कविता का हिसाब से फिट हूणि च।
बृजमोहन -हाँ पर क्या किसनदत्त न इख चिड़ियाघर रख्युं च कि हिलसा ऐ जाली।
नंदा - ब्याळि बिटेन हम ही खुद चिड़ियाघर बण्या छंवां।

----------------------------------------------Act -2 अंक 2 , दृश्य   15  -    Scene  15  -----------------------------------------

----------------------------समुद्र का किनारा -------------------------------------
[नंदा , बृजमोहन अर धूमल समुद्रौ किनारा पर आईना दिखेक सिगनल दीणो कोशिस करणा छन ]
नंदा [रिजॉर्ट का तरफ देखिक ]- इख हम जादा सुरक्षित छंवां।  हम तै उख नि जाण चयेंद।
धूमल -बुरु विचार नी  च। इखम हम सुरक्षित छंवां।  इखम जु बि आलू हम वै तै कनि बि देख ल्योला।
नंदा -हम इखमि रौला।
बृजमोहन - हम तै रात तो कखि व्यतीत करण इ पोड़ल। फिर से रिजॉर्ट भितर।
नंदा [कम्पदि ]- मेसे उख भितर रात नि कटेण।
धूमल -बंद कमरा जादा सुरक्षित च।
बृजमोहन - द्वी बजणा छन।  लंच कु क्या ह्वाल ?
नंदा - मि उख नि जाणु छन।  मीन इखमि रौण।
बृजमोहन - नंदा जी।  धीरज राखो।  तागत राखो। ताकत रखण जरूरी च।
नंदा -डब्बाबंद खाणा देखिक मि तै उलटी आंद।
बृजमोहन - मि बगैर भोजन का नि रै सकुद।  त्यार क्या विचार च ?
धूमल - डब्बाबंद खाणक से मि तै बि मजा नि आंद। मि नंदा का साथ रौलु।
[बृजमोहन घबरान्द ]
नंदा - मि तै इखम गोळी नि मार सकुद।
बृजमोहन - ओके। यदि तुम बुलणा छंवां तो -  पर हमन निर्णय लियुं च बल हम तै दगड़ि रौण चयेंद।
धमूल - तू जाण इ चाणु छे तो मि दगड़ आंदु।
बृजमोहन - ना ना तू इखि रौ।
धूमल - मतलब तू अबि मे  से डरणि छे ? मि तै मारणी इ हो त मि अबि गोळी मार सकुद।
बृजमोहन - हाँ पर योजनाबद्ध तरीका से इ हत्या हूणि छन।
धूमल - तू सब जाणदि।  है ना ?
बृजमोहन - हाँ अकेला रिजॉर्ट मा जाण खतरा से खाली नी च।
धूमल - तो मि अपण रिवॉल्वर दे सकुद।  पर ना !
[बृजमोहन कंधा हलांद अर चल जांद ]
धूमल -[बृजमोहन तै दिखणु रौंद ]- चिड़ियाघर का जानवर जन।  खाणो समय ह्वे गे अर जानवर अपर  आदत  हूंदन !
नंदा - क्या यु खतरा नी च ? भितर क्या करणो जाणु च ?
धूमल-मैं नि लगद कि डा मदन मा रिवॉल्वर नि होली। वु इथगा तागतवर नी च।  मि तै पूरो विश्वास च कि मदन भितर नि  ह्वालु।
नंदा -पर हमम समाधान क्या छन ?
धूमल-तीन वैकि कथा सूणी आल । यदि वु सही च तो बात साफ़ च। देख वैन ब्वाल कि मीन पदचाप सुणिन अर एक आदिम तै तौळ जांद द्याख ।  अर यदि वैन झूट ब्वाल त वैन डा मदन का काम तमाम एक द्वी घंटा पैल कर याल छौ ।
नंदा - कनकैक ?
धूमल-पता नी पर मै लगद कि बृजमोहन हमकुण खतरा च।  हम वैक बारामा  कुछ बि नि जाणदा।  रति भर बि ना। वी इ अपराधी ह्वे सकद। वैनि सब कुछ कौर हो तो!
नंदा -अर कदाचित वु हमर पैथर ह्वावो तो ?
धूमल-मि कोशिस करुल कि वु हमर विरुद्ध कुछ नि कौर साकु। मि पर विश्वाश च ना ? मि त्वे पर बंदूक नि चलै सकुद ना ?
नंदा - मि तै कैप्र तो विश्वास करणी पोड़ल। मि तै लगद बृजमोहन का बारामा तुम्हारी गलत धारणा च।  यु मदन ही होलु। पता च ना कि क्वी हर समय हम पर नजर लगाणु च अर प्रतीक्षा करणु च। है ना ?
धूमल-यु चिंता का विषय च।
नंदा -तो तुम तै  बि ? मीन एक कथा सूणी छे कि द्वी न्यायधीश एक कस्बा मा ऐन अर वूंन बिलकुल सही फैसला कार।  बिलकुल सही फैसला अर उ द्वी न्यायाधीश ये संसार का नी छया।
धूमल-स्वर्ग से न्यायधीश ! पर यी कतल बिलकुल मणिखन करिन।
नंदा - कबि - मि ठीक से नि बोलि सकुद -कुछ पता नी -
धूमल-वै त आत्मा ह्वे। तीन वु बच्चा नि डुबाइ ना ?
नंदा -नै नै। त्वे तै इन बुलणो क्वी अधिकार नी च।
धूमल-तीन ही कार।  मि तै लगणु च।  अवश्य ही क्वी मरद  तो छौ।  है ना ?
नंदा - हां एक मर्द -
धूमल-बस।  युइ जाणण छौ।
[एक धक्का की आवाज आंद ]
नंदा -क्या च ? क्या भ्यूंचळ ?
धूमल-ना - मै लगद यु कैक किरणों आवाज छे।  भितर जाण चयेंद।
नंदा - ना मि नि जाणु छौं।
धूमल-ठीक च।  मी इ जांदु।
नंदा -तब तो मी बि आंदु।
[नंदा अर धूमल आंदन अर दिखदन कि ब्रजमोगं पड़्यूं च।  वैक पास एक गरुड़ अर रीछ कि घड़ी च। सर पर खून ही खून ।
धूमल[मथिन द्याख ]-मथिन कैक खिड़की च ?
नंदा -मेरी -अर या घड़ी बि म्यार कमरा मा छे।
[धूमल नंदा का  थपथपांद ]
धूमल-यु सिद्ध करद की मदन इख कखि ये घरम लुक्युं च। मि वै तै खुज्यांद।
नंदा -ना ना।  अब हम द्वीइ छंवां।  वु इ चाणु ह्वालु कि हम वै तै खुज्याणो जौंवाँ। अर उ -
धूमल-हाँ बात मा दम च।
नंदा - मतलब मि सही छौ कि डा मदन -
धूमल-हाँ।  पर हमन तो घरका कूण्या कूण्या ख्वाज।
नंदा -तुमन ठीक से नि ढूंढी ह्वाल जन।  मंदिर का अंदर।
धूमल-ना ना हमन सब जगा द्याख च अर वा  जगा -इन जगा नी च।
नंदा - क्वी जगा त छैं च।
धूमल-हूँ दिखण पोड़ल -
नंदा -हाँ ! अर वांकी ताक  मा व्हाल कि हम उख जौंवा।
धूमल[रिवॉल्वर भैर गाडद ] -मीम रिवाल्वर च।
नंदा - तीन बोली कि मदन बृजमोहन से कमजोर च।  पर जै पर बौळ चढ़ीं हो वै पर रागस की शक्ति ऐ जांदी।
धूमल[रिवॉल्वर कीसौंद धरद ]-तो रात होली तो क्या करे जावु ? कुछ स्वाच च क्या ?
नंदा -हम कर क्या सकदां ? मि तै डर लगणी च -
धूमल-हम समुद्र का किनारा रात बितौला।  चांन्दनी रात छन।  बैठ्या रौला।  स्योला ना सुबेर तक। यदि क्वी आल तो मि गण चलै द्योलु। इतना महीन कपड़ों मा त्वे तै ठंड लग जाली।
नंदा - हाँ पर मोरणो बाद हौर बि ठंडी।
धूमल-अच्छा चल भैर -
नंदा -हाँ चल -
धूमल-चल समुद्रक किनारा की ऊंचाई पर -
----------------------------------------------Act -2 अंक 2 , दृश्य    - 16    Scene 16   -----------------------------------------
[नंदा  धूमल समुद्रकऊंचा  किनारा पर छन। मदन की लाश पड़ीं च पर क्वी नि दिखुद। ]
धूमल-हैं क्या च वु ?
नंदा -कैक कपड़ा ?
धूमल-या समुद्री घास ? दिख्दा छंवां ! चलो।
[द्वी जांदन अर उखम जांदन जखम मदन की लाश पड़ीं च ]
नंदा - बूट ? कैक ? कपड़ा ? कैक ?
धूमल-कपड़ा ना मदन का शरीर अर  हाँ या च लाश -
नंदा -लाश [द्वी एक हैंक तै दिखदन ]
धूमल-हूँ अब हम द्वी इ -
नंदा - हाँ केवल हम द्वीइ  -
धूमल-अब सचाई समिण ऐ गे।
नंदा -एकी लाश  भीतर लिजौंदा।
धूमल-ना ना। इन समय मा की जरूरत नी च।
नंदा - हाँ पर समुद्र से भैर तो गाडि लीन्दां
[द्वी लाश निकलणो संघर्ष करदन। नंदा धूमल की जेब से रिवॉल्वर निकाळदि जू धूमल तै पता नि चलद ]
धूमल-सरल काम नी च।  अब संतुष्ट ?
नंदा - हाँ
धूमल घुमद तो दिखद कि नंदा का हाथ मा रिवॉल्वर च अर निशाना च धूमल ]
धूमल- रिवॉल्वर निकाळणो बान दया ढँट नाटक करणी रै ? 
नंदा - हूँ।
धूमल-रिवाल्वर वापस कौर।
नंदा [हंसदि ]
धूमल-रिवॉल्वर दे
नंदा[सर हलांकांदी ]-
धूमल-रिवॉल्वर वापस कौर छोरी !
[नंदा  रिवॉल्वर चलांदी अर धूमल ढेर ह्वे जांद ]
नंदा -सब कुछ खतम।
[नंदा वापस रिजॉर्ट मा आंद अर सैनिक मिनिएचरुं तै दिखदि ]
नंदा [स्वतः ]-तू समय से पैथर छंवां । [द्वी मिनिएचरुं तै भैर फिंकदि अर एक तै अपर हाथ मा लीन्दी ]। तू अब म्यार दगड़ ऐ सकदी। हम जीत गेवां।  हम जीत गेवां।  [मथिन आदि, हुक पर एक फंदा लग्युं च ]। अब केवल एक सैनिक अकेला बच्युं च। क्या पंक्ति छे ? वु क्या शादी कार ? ना अमरनाथ  च व कमरा मा ? वु मेरी प्रतीक्षा करणु च। वैन मि तै माफ़ कर याल  ... वु चाँद कि मि फांस खै द्यूं   ... । एक सैनिक बच गे    .... वु अकेला ग्याई अर वैन फांस खै दे    ... [वा जांदी अर अपण गौळुन्द फंदा डाळदि , कुर्सी मा खड़ी हूंदी अर कुर्सी खस्कान्दी अर झूल जान्दि।   


   




अनुवाद - भीष्म कुकरेती
---------------------------यहां कोई ज़िंदा नहीं बचेगा [इख कैन ज़िंदा  नि बचण ]नाटक कु शेष भाग अंक 2 दृश्य  17  माँ पौड़ो ------------------
------------------------------ यहां कोई ज़िंदा नहीं बचेगा [इख कैन ज़िंदा  नि बचण ]Next Part of Play in Act 2 Scene  17 -------------------


Bhishma Kukreti


यहां कोई ज़िंदा नहीं बचेगा [इख कैन ज़िंदा  नि बचण ] 
नाटक
अनुवाद - भीष्म कुकरेती
नाटक का अंक 2 दृश्य 16 से अग्वाड़ी पढ़ो

----------------------------------------------Act -2 अंक 2 , दृश्य    - 17     Scene 17    -----------------------------------------


------------------------उपसंहार ---------------------------------------
[इस्पेक्टर जनरल राय चौधरी अर इंस्पेक्टर मनोज घंघतोळ मा बैठ्यां छन। ]
राय चौधरी -इंस्पेक्टर मनोज ! अजीब आश्चर्यजनक घटना ह्वेन बीकाबार द्वीप मा। दस मनिखों हत्या ह्वे अर द्वीप मा एक बि माख नि मील। यु कुछ समज मा नी आणु च।  कैन ना कैन तो हत्या कौर इ च। डाक्टर की रिपोर्ट से बि कुछ पता नि चलणु च। 
मनोज-[रिपोर्ट पढ़द ] -यस ! आइ जी राय चौधरी साब ! पर साब ! आलोक अर धूमल की हत्या गन से ह्वे। एकाक सर पर फायर करे गे दुसरक हृदय पर गोळी मारे गे। मिस कोमल  अर मैकमोहन की हत्या साइनामाइड से ह्वे। तो मिसेज सर्यूळ की मौत निंद कीअधिक मात्रा गोळी से ह्वे। सर्यूळ कु सर फुडे गे। बृजमोहन का सर फुडे गे। मदन की हत्या डुबैक ह्वे। महेशा की हत्या पैथर बिटेन सर फोडिक ह्वे। अर नंदान तै फांसी पर लटकाये गे।
राय चौधरी -हूँ।  स्थानीय लोग क्या बुलणा छन ?
मनोज -कुछ न बल एक किसनदत्तन बीकाबार द्वीप खरीद छौ।
राय चौधरी -यूँ लोगुं तै लिजाणो काम कैन कौर ?
मनोज -कै प्रदीपन कौर छौ पर वू अब दुन्या मा नी च।
राय चौधरी -वैक बारामा क्वी जानकारी च ?
मनोज -उ छ तो गुनाहगार छौ।  चरस गांजा का धंदा करद छौ।  पर प्रूफ नि करे सक्यांद छौ। तीन साल पैल एक फ्रॉड केस मा बि फंस पर प्रमाण का अभाव  मा छूट गे। भौत इ सावधान मनिख छौ।
राय चौधरी -अर वु द्वीप ब्यापार मा शामिल छौ ?
मनोज -हाँ।  पर वैन साफ़ बतै छौ कि द्वीप वु तीसर पार्टी कुण खरीदणो च।
राय चौधरी -हूँ।  फिनेन्सियल प्वाइंट से दिखण जरूरी च कि पैसा कनै लग ?
मनोज -ना सर ! प्रदीप इतना चालाक छौ कि हुस्यार चार्टेड अकाउंटेंट बि हार मानि जांदन। फ्रॉड केस मा बि हम कुछ नि कर सक्यां। वु किसनदत्त का प्रतिनिधि बौण अर कखि बि किसनदात का सुराग साथ मा नि राख वैन।  अर वैन ही मृत मनिखों तै पटाइ कि एक हफ्ता का वास्ता बीकाबार द्वीप चलो जख एक हफ्ता शान्ति ही शान्ति राली । भैर से संबंध खतम करे गे छा।
राय चौधरी -पर ऊँ लोगुं तै धोखा कु पता नि चौल ? गंध बास ?
मनोज -ये द्वीप मा पैल बि इन प्रयोगिक अर शानदार पार्टी ह्वेन।  याने दीं दुन्या से कटण अर मजा करण।
राय चौधरी -हूँ या बात सही च।
मनोज -आनंद ! बोत ड्राइवर ! वैन बताइ कि इन साधारण लोगुं तै देखिक वु खौंळे बि च।  वै तै आश्चर्य  ह्वे की यी लोग पैल पार्टयूं जन लोग नि छया। सब साधारण प्रकृति का छया। प्रदीप कु वै तै हिदैत छे कि लोगुं तै द्वीप मा छोड़िक उख एक मिनट बि नि रौण। 
राय चौधरी -फिर कै तै  द्वीप का बारा मा कुछ पता बि चौल ?
मनोज -हाँ जब ऊख द्वीप बिटेन सिगनल मील। 
राय चौधरी -कब ?
मनोज -एक लड़कों ग्रुपन 11 तारीककुंण सिग्नल देखि छौ पर वु उना जैइ सकद छ।बड़ो तूफ़ान छौ।   वु लोग बारा को इ जै सकिन।  वूंक पक्को बुलण च बल वूंक पौंछण से पैल क्वी हौर नि पौंछि छ। अर क्वी तैरिक बि मुख्य जमीन मा नि ऐ सकद छौ।
राय चौधरी -अर तीन ग्रामफोन बि पाइ।  क्या विचार च ? वांसे कुछ सहायता मिल सकिद ?
मनोज -एक नाटक कम्पनीन प्रदीप का द्वारा यु ग्रामफोन रिकॉर्ड किसनदत्त कुण भ्याज। प्रदीप कु बुलण छौ कि नाट्य प्रशिक्षणों कुण ग्रामफोन चयेणु छौ। ये द्वीप मा सबसे पैल सर्यूळ अर वैकि कज्याण पौंचीन। वांसे पैल दुई मिस ऐलिस की नौकरी करदा छ।  जैंक अचानक मृत्यु ह्वे। डाक्टर बि नि बतै सौक कि अचानक क्या ह्वे।  यु निश्चित च कि दुयुंन विष नि दे छौ। हाँ संदेह च कि ऊंकी असावधानी से मृत्यु ह्वे पर प्रमाणित नि करे सक्यांद।
जस्टिस आलोकन टोनी तै फांसीक सजा सुणै छौ।  वैक विरुद्ध पूरा प्रमाण प्रमाणित ह्वेन।  फांसीक बाद पता चल कि प्रमाण गलत छ।  बाद मा दस मादे दसुंक मनण छौ कि टोनी निर्दोष छौ अर जज साबन कै ईर्ष्या मा टोनी तै सजा दे।
नंदा एक घरम कबि आया छे।  अर वुक  से बच्ची डूबिक मोर ।  यद्यपि वींन बचाणो पूरी कोशिश कार अर अफु बि डुबद डुबद बच।
डा मदन कु अपण नर्सिंग होम थौ। बड़ो खरो डाक्टर। नियम कु पक्को।  वैक एक मरीज छौ प्रसन्ना जू ओपरेसन टेबल मा ओपरेसनो बगत इ खतम ह्वे। ह्वे सकद तब अनुभवहीनता रै होलि या सटापोंड़ी मा मृत्यु ह्वे गे।  पर सटापोड़ी क्वी अपराध नी च।
कोमल की एक नौकरानी छे।  वा गर्भवती ह्वे तो कोमलन नौकरी से निकाळ दे।  नौकरानीन डूबिक आत्महत्या कर दे।  बर्खास्त करण अमानवीय च पर नौकरी से बर्खास्त करण क्वी अपराध नी च।
राय चौधरी -इन लगणु च कि किसनदत्तन वो इ केस लेन जौं मा अपराध्युं तै  न्यायिक प्रक्रिया से डंड  नि मील।
मनोज -मैकमोहन एक अनाड़ी ड्राइवर छौ।  वै से एक दैं कार का तौळ कुछ बच्चा ऐ गेन अर ऊंन उखमी तडम दम तोड़ी दे।  ऐक्सिडेंट मानिक मैकमोहन कोर्ट से छुट गे।
जनरल महेश कु आर्मी रिकॉर्ड भौत बढ़िया छौ।  अपण असिस्टेंट तै इन जगा भ्याज कि बचण मुस्किल इ छौ।  पर मिलिट्री मा ये तै अपराध नि मने जांद।
अब रै गे बृजमोहन।  तो बृजमोहन हमर इ औफिस मा छौ।  घाघ जासूस छौ पर वैकि अपणी इज्जत छे।
राय चौधरी - अरे बदमाशी इज्जत छे वैकि।
मनोज -आपकी या रे च ?
राय चौधरी -अरे मि हमेशा से जाणदु छौ कि वु बदमाश च।  मीन वैक पैथर एक जासूस बि लगै छौ पर कुछ साबित नि ह्वे सौक।  बड़ो घाघ छौ वो। प्रदीपन आत्महत्या कार मि मानि नि सकुद।  बृजमोहन ही इखमा फँस्युं रै होलु।
मनोज -आपकी राय अर।
राय चौधरी -सबसे अजीब चकरघनी या च कि एक खाली द्वीप मा दस आदिम्युं हत्या ह्वे अर हमम क्वी सुराग नी च कि ह्वे क्या च।
मनोज -जी क्वी पागल आदिम यूँ हत्याक पैथर च। वैन ऊं अदिमों कु चुनाव कार जु न्यायिक प्रक्रिया से भैर  ह्वेन अर चाहये ऊंन अपराध कार च कि ना।
राय चौधरी -हूँ बोल बोल क्लू मिलणु च।
मनोज -हत्यारा यूँ तै अपराधी समझिक डंड दीण चाणु छौ। अर कै ना कै तरां वु अदिखळ राइ अर अबि बि अदिखळ च।
राय चौधरी -हाँ पर घटनाओं तै तर्क पर खरा बि उतरण चयेंद।
मनोज -एकी बात च कि हत्यारा बि द्वीप मा छौ पर अदिखळ रै।  नंदा की डायरी से पता चलद कि हत्या कु क्रम च - मैकमोहन , मिसेज सर्यूळ , महेश ,सर्यूळ ,कोमल , आलोक।  आलोक की हत्या का बाद नंदा की डायरी बतांदी कि रात मा डा मदन ना घर छोड़ी छौ अर ब्रजंमोहन  व धूमल वैक पैथर गेन।  फिर सुबेर मदन की लॉस समुद्र मा मील। अर आश्चर्य या च कि मदन की लाश ज्वार भाटा मा किलै नि बौग ? फिर बृजमोहन की हत्या ।  धूमल की मृत्यु रिवाल्वर की गोळी से ह्वे अर नंदा क गौळ मा फांसी का फंदा छौ। बृजमोहन की हत्या सर पर एक खिड़की से गिरिक भारी घड़ी गिरण से ह्वे।
राय चौधरी -कैक खिड़की छे ?
मनोज -नंदा की। इख्मा द्वी तीन अंदाज लगाये जै सक्यांदन।  यदि धूमलन बृजमोहन तै  मार अर फिर नंदा तै फांसी चढ़ाई अर फिर अफु पर गोळी मार तो ?
राय चौधरी -रिवाल्वर पर अंग्ल्युं निसान कैक छन ?
मनोज -नंदा का।
राय चौधरी -तो यु सिद्ध नि हूंद कि धूमलन गोळी से एटीएम हत्या कार इ होलु।  बड़ो जटिल केस च मेरी जिंदगी को -
मनोज -जी।
राय चौधरी -तो क्या नंदा हमारी अपराधीन च जैंन नौ खून करिन अर अंत मा स्वयम बि फांसी ?
मनोज -तर्क अर कुतर्क से -
[एक मच्छीमार आंद ]
मच्छीमार - साब एक प्लास्टिक मा बंधी बोतल मील जख पुटुक प्लास्टिक भितर कुछ पर्चा च। समुद्र का छाल  पर मील सैत च आपक क्वी कामक हो।
[मच्छीमार बोतल दींदु अर चल जांद ]

राय चौधरी [बंद बोतल खोलिक पर्चा निकाळदु।  पर्चा मनोज तै दींदु ] - बड़ी मेहनत करीं च।  एक रति भर पाणी नि गे बोतल भितर।  जरा पौढ़ क्या लिख्युं च धौं !
मनोज -
हाँ तो सूणो ! युवावस्था से इ मेरी प्रकृति विरोधाभासी छे। मि हमेशा सपना दिखुद छौ कि कबि मि क्वी रहस्य बोतल पुटुक धौरुं अर वै रहस्य बड़ी कीमत ह्वावो।  रहस्य भरीं बोतल समुद्रौ लहरों माँ रावो अर ये रहस्य तै सही जगा पौंछणो अवसर केवल एक टका ही रावो ।
इनि मि तै दुःख दिखण खासकर हत्या दिखणो बड़ो बिगरौ छौ अर मि ईं इच्छा पूर्ति बगीचा मा चिमल्ठ , मधुमक्खी , तितली मारिक करदो छौ। बचपन से ही म्यार दिमाग मा हत्या करणो जनून बसि गे छौ।
पर दगड मा विरोधाभास यु छौ कि मि तै अन्याय पसंद नि छौ , बिलकुल बि ना। मि तै निर्दोषों पर अत्याचार बिलकुल पसंद नि छौ।
मीन अपण प्रकृति समझिक इ वकालात व्यवसाय अपणै। वकालात व्यवसाय मेरी द्वी विरोधाभासी प्रकृति दगड़ मेल खांद छौ , अपराध से दिखणो मौक़ा , अपराध से मुलाक़ात अर जुल्मियों तै डंड !
अपराध अर डंड मि तै आकर्षित करदो छौ और मि संतुष्टि का वास्ता अपराध साहित्य अर जासूसी किताब मा मसगूल रौंद छौ।
अभिनव अपराध करणो मीन सोची याल छौ।
जब मि न्यायाधीश बण ग्यो तो भौत सा छुपीं प्रवृति बि विकसित हूंद गेन। अपराध्युं पर यंत्रणा से मि तै आनंद आन्दु छौ। पर यदि म्यार समिण क्वी निर्दोष आवो अर उ यंत्रणा झेलणु हो तो में से सहन नि हूंद छौ। द्वी दै मीन जब द्याख कि निर्दोष फंसणु च तो मीन केस बंद कर दे।  पुलिस की चौकसी से निर्दोष तै अपराधी बणैक म्यार समिण नि लये गेन।  अधिकतर अपराधी वास्तव मा अपराधी इ छया।
एक बार मीम कीर्ति अपराधी का केस आई अर वैक व्यवहार बड़ो धोखा दीण वळु छौ।  वैक निर्दोष व्यवहार से न्यायालय , पुलिस प्रभावित ह्वे गे छे , तथ्य बि वैक समर्थन करदा दिखेणा छा पर मेरी अपराधी पछ्याणणो प्रवृति धोखा खाणो तयार नि छे। मीन वै तै सजा सुणाई किले कि वैन एक मासूम बुढ़िया को खून कार ज्वा बूडडी वै पर विश्वास करदी छे।
मि तै फांसी दीण वळ जज कु नाम दिए गे छौ पर मि हमेशा अपराधी तै सही डण्ड कु समर्थक रौं।
मि हमेशा अपराधी द्वारा इमोसनल ब्लैकमेल से दूर रौं अरअपराधी द्वारा इमोसनल ब्लैकमेल तै पछ्याँणण मा कामयाब बि रौं।
धीरे धीरे मीमा बदलाव आई कि न्यायाधीश की जगा मी तै स्वयं कुछ करण चयेंद।
मि स्वयं कत्ल करण चाणु छौ। कतल करणै इच्छा दिन प्रतिदिन प्रबल हूंद गे। इच्छा प्रबल से प्रबल हूंद गे जन एक कलाकार का अंदर सुंदर कृति रचना करणै प्रबल इच्छा जागृत अर प्रबल हूंद।
किन्तु मि साधारण तरां से कतल नि करण चांदु छौ।
म्यरो द्वारा कतल एक अनोखा कतल हूण चयेंद , अप्रतिम , दुनिया से अलग अनोखा कतल ! कलयुक्त कतल - अणसुण्यूं , अकल्पनीय काल !
मि तै लगण लग गे कि कतल करण चयेंद , मि  कतल करण चाणु छौ  , कतल   करण चाणु छौ ...
पर मेरी भीतरी प्रवृति बीच मा अवरोध पैदा करणी छे कि कै बि निर्दोष  अत्याचार , यंत्रणा नि हूण चयेंद , निर्दोष तै दुःख नि दिए जाण चयेंद।
अचानक एक दिन एक साधारण डाक्टर से मुलाक़ात ह्वे अर बातोंबातों मा वैन बताइ कि कन कतल ह्वे सक्दन अर न्यायालय बि कुछ नि कर सकदन। वैन एक वाकिया सुणै जखमा एक बुढ़िया को कतल एक पति -पत्नी द्वारा दवा से करे गे अर दुयुं तै  बुढ़िया की मृत्यु से लाभ हूण वाळ छौ।  किन्तु दवा क्वी विष नि छौ तो वे युगल पर न्यायालय की नजर नि गे।  डाक्टरन कुछ किस्सा सुणैन जखमा जुर्म अवश्य हूंद किन्तु न्यायालय की हद मा इ जुर्म माने इ नि सके छया।
अर बस मि तै अग्नै बढ़णो सूत्र , दिशा, रस्ता  मिल गे छौ।
म्यार दिमाग मा बचपन मा सुणी गीत आइ कि ---नौ सैनिक कमरा मा देर रात तक छया
अर म्यार दिमाग मा अनोखी कल्पना आंद गेन , आंद गेन बस कल्पना मा विकास हूंद गे।
मि तरकीव से छुपीक अपण शिकार खुज्याण पर लग ग्यों।
मि अब ज्यादा समय बर्बाद नि करुल अर सीधा मूल कथा पर आन्दु
एक नर्सिंग होम से मीन डा मदन  मा पता चौल। मतलब एक डाक्टरन पियां मा ऑपरेशन कार अर मरीज मोरि गे।
द्वी मिलिट्री सैनिकों से जनरल महेशा की कारस्तानी पता चौल।
इनि धुमल का चाल चलन का बारा मा जानकारी मील।
मिस कोमल की नौकरानी की हत्या का बार मा पता चौल।
रिट्यर्ड इंस्पेक्टर बृजमोहन दगड़यों बदौलत  में से जुड़ . बृजमोहन वास्तव मा कातिल ही तो छौ जैन अपराध रुकण छौ वैन अपराध छुपाई !
नंदा का बार मा एक यात्रा मा जानकारी मील।
मीन एक डॉक्टर की सहायता से जाण याल छौ कि कैं दवा से अचानक हृदय गति रुक सकदी।  अपण मृत्यु का इंतजाम मीन अफिक कर यल छौ।
सर्यूळ अर मिसेज सर्यूळ कु अपराध बि कम नि छौ।
फिर बख्तवार मील अर वै से मीन भौत काम लेन।
जब सर्यूळ अपण घरवळि कुण ब्रैंडी लाइ तो मीन चुपके से क्लोरल हाइड्रेट मिलै दे छौ। कै तै बि शक होणो गुंजाइश तब नि छे।
जनरल महेशा की हत्या बड़ी सरलता से ह्वे।  महेशा तै म्यार आणो पता इ नि चौल। हाँ मीन टैरेस से उतरण मा बड़ी सवधानी बरत अर सब कुछ ठीक ठाक राइ।
मि तै पता छौ कि द्वीप की खोज होलि अर खोज ह्वे बि च पर हम सात का अलावा मूस नि मिलण छौ सो सात का अलावा क्वी  नि दिखे।
मीतैं एक सहायक की जरूरत छे तो डा मदन काम आइ। वै तै मेरी खसियत अर इज्जत भरी जिंदगी का बारा मा पता छौ तो वैक संदेह में पर हवाइ नी च बल्कि वु बृजमोहन पर संदेह करणु राइ।  मीन वैक विश्वास जीत अर वै तै हत्यारा खुज्याणो स्कीम बताई जू वु मेरी बात मानि गे।
फिर खोज करे गे किन्तु खोज मा ज़िंदा लोगुं कमरों खोज नि ह्वे। मि तै यांकी संभावना छैं इ छे।
मीन सर्यूळ तब मार जब वू लखड़ काटणु छौ अर वैन म्यार आणै आवाज नि सूण।  मीन वैक खीसा  बिटेन डाइनिंग रूम की चाबी ल्याइ जै रूम तै वैन रात बंद करी छौ।
गंजमजी , घपरोळ माँ मि बृजमोहन का कमरा मा खिसक अर मीन वैक रिवाल्वर चुराई।
ब्रेकफास्ट का समय पर मीन क्लोरल  चाय मा मिलाइ अर वा आधा सुप्तावस्था मा ऐ गयी। फिर मीन वींक बांह मा सरलता से बच्युं -खुच्युं साइनामाइड कु इंजेक्सन घुसेड़ दे।
जब खोज शुरू ह्वे तो मीन रिवाल्वर छुपै दे अर क्लोरल व साइनामाइड तो खतम ही ह्वे गे छा।
मदन से बोल कि मि तै मोर्युं घोषित करण जरूरी च।
पर लाल रंग कु माटु लपोड़ अर काफी छौ बाकी काम तो डा मदन तै घोषित करण छौ कि मेरी मृत्यु ह्वे गे।
मीन मिस नंदा का कमरा मा समुद्री घास डाळ दे छौ अर घास देखिक वा किराण लग गे छे।
अर इथगा मा मि मीन मृतावस्था कु नाटक कार।  गहमागहमी मा मी तै वु लोग म्यार कमरा मा छोड़िक ऐ गेन।
फिर म्यार अर डा मदन कु क्लिफ पर मिळणो योजना बणी इ छे।
मीन क्लिफ से डा मदन तै धक्का दे वु समुद्र जोग ह्वे गे।
मि बंगलो में औं अर मिस नंदान म्यार पदचाप सुणिन । मि डा मदन का कमरा मा औं अर इन शोर कार कि क्वी सूण ल्यावो। मीन द्वार ख्वाल भैर होऊं अर कैन मेरी छाया जांद द्याख।
एकाद मिनट बाद उ म्यार पैथर ऐन तब तक मि कूड़ो कुलिण पैथर औं अर खुलि छुड़ीं खिड़की  रस्ता डाइनिंग रूम मा औं। खिड़की मीन बंद कार। फिर मीन खिड़की कांच त्वाड अर अपर कमरा मा ऐ ग्यों।
मि तै अंदाज छौ कि वु लोग डर मकान की तलाशी ल्याल  अर ऊनि ह्वे।
मि बतांद बिसर ग्यों कि मीन धूमल कु रिवाल्वर जगा मा धर दे छौ अर मीन यु रिवाल्वर डिब्बाबंद  भोजन  डिब्बा तौळ चिपकैक छुपै छौ।
मि तै भर्वस छौ कि टूटा फूटा डब्बौं मा  यूंन नि खुज्याण।
लाल पर्दा तै मीन डाइनिंग रूम का कुर्सीक गद्दी तौळ छुपै दे छौ।
अब आन्दु मि क्लाइमेक्स पर !
मीन खिड़की से द्याख कि तीन मनिख  से घबरायां छया , कुछ बि ह्वे सकद छौ।   उंमादे एकमा रिवाल्वर छे। 
जब बृजमोहन भितर आयी तो मीन मार्बल घड़ी लमडैक वैको अंत कार।
फिर नंदान रिवॉल्वर से धूमल की हत्या कर दे।  निथर दुयुंक अच्छी जोड़ी बण सकद छे।
फिर मीन जू सोछ छौ वी ह्वाइ।  नंदा भीतर आइ अर मनोविज्ञान का तहत वींन अफु तै फांसी लगै दे।  अपराध बोध बड़ो निर्दयी जि हूंद। मीन वींक रिवॉल्वर जु कमरा मा पोड़ गे छौ रुमाल से उठाइ अर उखपर नंदा का उंगलयूँ निसान लेन।
फिर मीन यु सब ल्याख अर बोतल पुटुक घटना विवरण डाळ अर समुद्र मा बौगै  दे।
कुछ सवाल छन कि मीन इन किले कार ?
सबसे बड़ो कारण  हत्या अनोखी हत्या होली जु म्यार अलावा कैन नि करिन। मेरी तमन्ना छे कि मि मौलिक हत्या तरीका खोजूं अर अंजाम द्यूं।
मि अफु तै सबसे होशियार बताण चांदु।
फिर हत्या प्रतीकात्मक बि छन।
फिर मीन अपणी हत्या बि अफिक करण।
रिवॉल्वर ट्रिगर म्यार रुमाल लग्युं हथ से दबल  कि गोळी सीधा म्यार कपाळ पर लग जावो अर मि सीधा बिस्तर मा पौड़ी जौं। अर रिवाल्वर दूर छटक जालु।  रिवाल्वर पर नंदा का हथु निसान मिलल।
जब समुद्र शांत ह्वे जाल तो मुख्य भूमि से नाव आली अर तब पता चौलल कि इख दस हत्या ह्वेन पर हत्या कु रहस्य तब तक पता नि चौलल जब तक कि या बोतल नि मीलली।
            आपका जज न्यायधीश आलोक (द्स्त्ख्त )


इंस्पेक्टर मनोज रायचौधरी का तरफ दीखुद।

मनोज -हूँ कै तै पता चलद कि खून इन ह्वेन     .... पागल आदिम
राय चौधरी -म्यार हिसाबन जज महेशा पागल नि छौ। हाँ वो कुछ पागल अवश्य छौ पर बुद्धिमान छौ।  फिर न्यायप्रियता मा वु कम नि छौ। बेशकीमती मस्तिष्क का मनिख ! वाह क्या कत्ल करिन वैन काबिलेतारीफ !
मनोज -?जी
राय चौधरी -हाँ काबिलेतारीफ ! हत्यारा , बुद्धिमान हत्यारा , न्यायप्रिय हत्यारा !
     

------------------------समाप्त  ----------










अनुवादक  - भीष्म कुकरेती
-

Bhishma Kukreti

                           Religious Tour Memoir for Nagraja Puja
                                            रेल टिकेट बुकिंग त धुकधुकी (संसय  ) की ब्वे च                                         मुंबई बटें जसपुर तक नागराजा पूजा जात्रा 54                                         अविस्मरणीय धार्मिक -सांस्कृतिक यात्रा वृतांत                   
                                   
                                                           जत्र्वै - भीष्म कुकरेती

              जब बिटेन रेल की इजाद ह्वे अर मुंबई से ऋषिकेश , कोट्द्वारा रेल सेवा शुरू ह्वे तब से लेकि अब तक मुंबई से दिल्ली या हरिद्वार रेल बुकिंग याने धुकधुकी अर धुकधुकी बस ! ये साल जब हमर परिवार मा निर्णय ह्वे गे कि हमन 12 मनिखोंन   ड्यार नागराजा पुजै मा जाण तो रेल टिकेट बुकिंग की उहापोह , संसय शुरू ह्वे गे।  निर्णय ह्वेई कि मुंबई से सीधा हरिद्वार की ही गाड़ी की बुकिंग करण।  मुंबई से हरिद्वार जाणो अब चार गाडी ह्वे गेन।  पैलि कोच्ची हरिद्वार  गाडी च पर या गाड़ी केरल से आदि तो इखमा 12 सीट मिलण कठण ही होलु।  कुर्ला हरिद्वार का बारा मा अनावश्यक धारणा च बल इखमा खाणो त राइ दूर ईं गाडी मा पाणी बि नि मिल्द।  एक गाडी बलसाड़ गुजरात से हरिद्वार जांद किन्तु १२ मनिखोंक बलसाड तक जाण एक परेशानी तो छैं इ च।  चौथी गाड़ी च बांद्रा हरिद्वार।  बांद्रा गाड़ी हमकुण सबसे सुविधाजनक च।  सबि गाड़ी हफ्तावार गाडी छन।  तो निर्णय ह्वाइ कि 20 मई का टिकेट लिए जावो। याने यीं गाड़ीक टिकेट बुकिंग 20 मार्च से ही शुरू ह्वाल।
   अब २० मार्च तक हृदय माँ संसय की धुकधुकी मचीं  ही राइ। छुटि अर सुविधा देखिक आणो कुण तीन दिन अलग अलग समूह मा आण निश्चित ह्वे।

                    सन 1963 की धुकधुकी अर 2015 की धुकधुकी !

    संसय की धुकधुकी तो मीन सन 1963 मा बि मुंबई से कोटद्वार रेल बुकिंग मा बि अनुभव कौर छौ।  तब से अब तक धुकधुकी मा अंतर नि आयि। सन 1963 मा मि आँख दिखाणो मुंबई ऐ छौ अर चूँकि फ़रवरी मार्च मा शिरोमणि भैजि की शादी छे तो तब बि छै सात आदिमुँक ड्यार आण निश्चित छौ अर रेल से कोटद्वार वाया दिल्ली आण छौ तो सबसे बड़ी मुसीबत रेल बुकिंग ही छे।  तब बी अब बी।
  तब एक दिन निश्चित ह्वे या रेल नियमों से निश्चित ह्वे कि कै दिन टिकेट लीण।
   भोळ सुबेर सात टिकेट से मुंबई सेंट्रल से टिकेट मिलण छौ तो पैल दिन टिकेट रिक्वेस्ट स्लिप बडा जी स्व चक्रधर प्रसाद जीन स्लिप भरिक धरी दे छे।  फिर तीन बीर युवाओं   का  अलग अलग चोर किसाओं मा रुपया गौणिक धरे गे अर स्लिप पकड़ाए गे अर आज रात बारा बजे ही मुंबई सेंट्रल भिजे गे।  तब टिकेट की लाइन मा सात आठ घंटा खड़ हूण लाजमी छौ।  इख तक कि चालु टिकट का वास्ता बि तीन घंटा पैल लाइन मा खड़ो रौण आम बात छे।
दुसर दिन बारा बजेका करीब यी युवा (बुद्धि भैजि अर कठूड़ कु आनंद चचा याद छन ) इन वापस ऐन जन बुलया यी क्वी जुद्ध जीतिक ऐ ह्वावन धौं।  यूंन कन्फर्म टिकेट ले छौ तो यूंकि बड़ी आदिर खातिर ह्वे।  यदि यी वेटिंग टिकेट लांद तो यूंकि खैर नि छे।

                सन 2015 रेल बुकिंग की धुकधुकी

  अब रेल बुकिंग सरल अवश्य ह्वै गे।  इंटरनेट बुकिंग मा आप तै स्वयं रेलवे स्टेसन नि जाण पोड़द किन्तु बुकिंग एक तनावपूर्ण कार्य अब बि च।
अब निश्चित ह्वे कि हमन 10 लोगुंन एक साथ 20 मई कुण जाण  . बकै द्वी हैंक ट्रेन से जाला।  म्यार भतिजु आशु 20 मारचौ कुण इंटरनेट पर आधा घंटा पैल बैठ गे अर परिवार वळ बि वैक आस पास बैठ गेन।  बस जनि नेट से टिकेट मिलण शुरू ह्वाल तनी आशु टिकेट ले ल्याल।  इंटरनेट मा टिकेट लीणो yes ह्वाइ आशुन टिकेट बुकिंग कि फोर्मलिटीज भरण शुरू कार अर आधा घंटा की मेह्नत का नतीजा यु आयि कि हमर नाम वेटिंग लिस्ट 41 से शुरू ह्वे अर 50 तक समाप्त ह्वाइ।
द्वी मैना पैलि 10 बारा आदिम्युं वेटिंग लिस्ट 41 हो तो आप समझ सकदां कि हमर चिंता , फ़िक्र , तनाव से क्या कुहाल ह्वे ह्वाला।
फिर इना उन हौर गाड्युं टिकेट टटोळे गेन तो पाये गे कि 20 या 19 तरीको कुण दिल्ली तक टिकेट वेटिंग मा चलणा छन।

                                रोज वेटिंग लिस्ट की चेकिंग से तनाव बढ़दो गे

अब परिवार मा जै जै मा इंटरनेट सुविधा उपलब्ध छे वैको रोज कर्तब्य ह्वे गे छौ कि वु जब बि खाली हो ट्रेन टिकेट की सूचना नेट मा दिखणु रावो।  हर दिन हरेक नेटधारी ब्रेकिंग न्यूज दींद छौ कि अबि बि वेटिंग लिस्ट 41 से 50 इ च।
तकरीबन एक मैना बाद सबि नेटधारयुंन ब्रेकिंग न्यूज दे कि वेटिंग लिस्ट 31 से 40 तक पौंछि गे।
फिर रोज नेट पर वेटिंग लिस्ट दिखे जांद छौ।  मंहगाई कम ह्वे गे छे किन्तु हमारी वेटिंग लिस्ट कम हूणो नाम नि लीणी छे।
                                      प्रीमियम ट्रेन ही सहारा छौ
अब धीरे धीरे मुंबई से सीधा हरिद्वार ट्रेन की आशा खतम हूण मिसे  गे छे।  तो अन्वेषण तेज करे गे अर पता चल कि 20 मई कुण मुंबई से दिल्ली तक फ़ास्ट प्रीमियम ट्रेन चलण वाळ च।  तो मंहगा ही सै निश्चित ह्वे कि प्रीमियम ट्रेन का टिकेट ही लिए जाल।
प्रीमियम ट्रेन याने टिकटूँ नीलामी।  प्रीमियम ट्रेन  का टिकेट पंदरा  दिन पैल नि मिल्दन तो पांच मई की प्रतीक्षा शुरू ह्वे।
बांद्रा हरिद्वार ट्रेन की हमन आस छोड़ आल छे।
पांच मई कुण प्रीमियम ट्रेन का मंहगा टिकेट मिल गेन अर अब सुनिश्चित ह्वे गे कि हमन नागराजा पुजाई मा जाण इ च।
जख तलक बांद्रा -हरिद्वार का टिकेट कु सवाल च अंत मा 20 मई कुण बि वेटिंग 24 से 33 ही राइ।
धुकधुकी कनफर्मड ट्रेन बुकिंग से बंद नि ह्वे।  अब समस्या छे दिल्ली से ऋषिकेश पौंछण अर यदि देर ह्वे गे तो ऋषिकेश मा ठैरणै अर ऋषिकेश से जसपुरौ कुण टैक्सी का इंतजाम।  २२ मई से हमर पारिवारिक पाठ पूजा कु इंतजाम कर्युं छौ तो 22 मई कुण 11 बजे से पैल ड्यार पौंछण आवश्यक छौ।

अग्नै  बांचो कि हम यात्रा सिद्धांतों की अवहेलना कै तरां से करदां ? ......
अविस्मरणीय धार्मिक -सांस्कृतिक   नागराजा पूजा जात्रा वृतांत का बाकी  भाग 6  में पढ़िए

Copyright @ Bhishma Kukreti 17 /6/15
bckukreti@gmail.com

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Bhishma Kukreti

 Warfare Management, Skill, campaign, Salary of Gurkha Army in Kumaon, Garhwal and Himachal

History Discussion on Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal - 57
History of Gorkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) -120   
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -641
                          By: Bhishma Kukreti (A History Student)
                  Warfare Skill of Gurkha Army
            In Kathmandu, army administration used to have drill for soldiers and there was arrangement for training soldiers for discipline and warfare management. Such management raining was not accomplished in other parts of Gurkha Kingdom that is in Kumaon, Garhwal and Himachal. The real power of army did not depend on combined force of Nepali army but individual Gurkha soldier's courage and do and die for King Attitude (John Premble).  Gurkha soldier was guerilla soldier by birth. Gurkha soldiers used to surround enemy by three fronts and used to believe cut the food supply and create scarcity in forts.
The Gurkha soldiers were fast in building temporary shade by cut trees, mud and stone. From that temporary shade, Gurkha used to attack suddenly and were perfect in  defending the enemy force.
               Due to regular war and campaign, Gurkha became expert in making strategy immediately as per need.  Gurkha soldiers did not care for small or big difficulties. The soldiers were never afraid of death for protecting King's interest. King's prestige and Kingdom was main priority of each soldier.
                     Temporary Shades and Gadhi /Fortress
                There was no police system in Gurkha regime. The army used to look after local administration, judiciary too. Higher cadres used to keep soldiers in Gadhi or fort after winning the place. Most of fort in hills of Garhwal and Kumaon were normal house built by mud, stone and wood. Most of Gadhi used to be ninety feet long and twelve feet high. There was protecting structure on courtyard. .In many Gadhi water source used to be far and water was fetched from nearby water source (Nauli/Dhara). There used to less food grains etc than the need and looting nearby villages was the custom for satisfying the needs of soldiers.
                            Gadhi in Kumaon
In Kumaon, there were following forts or Gadhi-
Pithoragadhi
Champawat
Lalmandi and
Naithana
Lalmandi was built by Gurkha and 400 soldiers used to be there. In Naithana Gadhi (Ramganga bank), there used to be around 150 soldiers.
                     Gadhis in Garhwal

In Garhwal major Gadhis were Lobha
Chandpur
Gujdu
Painkhanda
Shrinagar
Langurgadh, etc.
Atkinson reported that 150 soldiers used to be in Lobha and 100 soldiers in Langurgarh.
               Gadhis in Doon Valley
  There were following major Gadhis (Fort) in Dehradun
Dhamagarhi near Guru Ram Rai Durbar
Khalanga or Nalapani gadhi at Song River bank
Gurkha soldiers used occupy Moranigadhi in Sirmaur (that time old Garhwal).
          Gadhis or Forts of Gurkha in Himachal Pradesh
Following major forts were there in Himachal occupied or built by Gurkha-
Dhar Mountain Fort built by Gurkha
Malan Mountain Fort built by Gurkha
Banasar for t built by Gurkha
Sabathu fort
Knagra Fort temporary fort
Parwanoo fort
Arki fort, Solan
              Campaign System of Gurkha Army
The officers and soldiers used to take minimum requirements with them in army campaign, Besides, arms the soldiers used to take three time food materials, minimum of mattresses etc. The soldier used to have slave, chhokra –chhokri for transporting campaign materials. Soldiers and officer could rest /sleep under temporary camp made by three for legs and leaves.
There was a system that the food need would be satisfied by taking foods from won villages.
The gun and gun fire machines were transported by slaves.
        Salary System of Soldiers of Gurkha Army
The positioning in Gurkha army was adapted from Bengal army of East India Company. Army chief, or commander in chief, captain commander, colonel, mejhar, kaptan, laftan, subedar, dafedar, faujdar and sardar were positions of army personnel in Gurkha army.
The captain of battalion used to get salary for rs 5005.
Usually 100 soldier used to get salary of annual Rs 8672.
The reocord of Dhangu Kamin shows that the salary of each soldier was not same and the reord is as under (dr Dabral)-

Shri ISht Devta Sharan Bhakti Thapasy Mudra
Shri Durga 1 Swastishri Sardar Bhakti Thapsy patram age Dhangu ka Kamin Ghamdu Kalya Raut Gablu Sovanu Bhagdeu Bisht ke Jathochit prant ... tesma hamile tanushagari pthanko chh heri frda vamojin deun –
Muktiram adhikar samet jana ---------------- 3 ke bali Ru 113
Prabal Thapa ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru 101
Chamu Thapa ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru 101 chatu patri ke 23
Lachiman Thapa ke samet jana -------------------1 ke bali Ru 21
Nari Shtri ke samet jana ------------------- 2 ke bali Ru 76
Indubhan Shatri ke samet jana ------------------- 3 ke bali Ru 185
Ramkrish Bhandari ke samet jana -------------------1 ke bali Ru 42
Shiv Choshal ke samet jana -------------------  1ke bali Ru 21
Ramasi Rana ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru 21
Bhyun Raj Thapa ke samet jana ----------------- 1 ke bali Ru 21
Arjun Sahi ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru57
Ransur Uchai ke samet jana -------------------1 ke bali Ru 57
Sundar Ghati  ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru 31
Banshidhar 6 ki sal 63 ko bali -------------------1  ke bali Ru 34
Sarvjit Thapa ke samet jana ------------------- 1 ke bali Ru 49
Bandeu Thapa ke sal 63 ko bli -------------------1 ke bali Ru 21
Pareshwar Rana Tularam sarv 63 Kaithai ------------------- ke bali Ru 181
                                                               Javan 25 ke bali ru 1152 sal 63 ke
Bharibahrai Leshya mafik Vuktigari deu iti sambat 1864 sal ka chaitr ka 14 gate shubh
(From Awatar Singh Rawat Personal collection)
                   Bad behaviors of Soldier s with Citizens

              Gurkha solders had very bad behaviors with citizens. The soldiers and officers knew only exploitation of citizens only. They used to take citizens for transportations, and other works. In Garhwali King period, Brahmins were not used for transportation and Gurkha soldiers had argument that the foot of Brahmins are worshipped not the heads. The soldiers used to loot food materials without any compensation. Soldiers used to take house furniture to burn and making meal. The army men used to cut fruit trees to harass people. Fear conscious was the game of Gurkha soldiers.













** Most of references and details were taken from Dr Dabral

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 17/6/2015
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued... Part -642
*** History of Gorkha/Gurkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) to be continued in next chapter 

(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
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                    Reference

Atkinson E.T., 1884, 1886 , Gazetteer of  Himalayan Districts ...
Hamilton F.B. 1819, An Account of Kingdom of Nepal and the territories
Colnol Kirkpatrik 1811, An Account of Kingdom of Nepal
Dr S.P Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 5, Veer Gatha Press, Dogadda
Bandana Rai, 2009 Gorkhas,: The Warrior Race
Krishna Rai Aryal, 1975, Monarchy in Making Nepal, Shanti Sadan, Giridhara, Nepal
I.R.Aryan and T.P. Dhungyal, 1975, A New History of Nepal , Voice of Nepal
L.K Pradhan, Thapa Politics:
Gorkhavansavali, Kashi, Bikram Samvat 2021 
Derek J. Waller, The Pundits: British Exploration of Tibet and Central Asia page 172-173
B. D. Pande, Kumaon ka Itihas
Sharma , Nepal ko Aitihasik Rup Rekha
Chaudhari , Anglo  –Nepalese Relations
Pande, Vasudha , Compares Histriographical Traditions of Gorkha Rule in Nepal and Kumaon
Pradhan , Kumar, 1991, The Gorkha Conquests , Oxford University  Press
Minyan Govrdhan Singh , History of Himachal Pradesh
A.P Coleman, 1999, A Special Corps
Captain Thomas Smith, 1852,Narrative of a Five Years Residence at Nepal Vol.1
Maula Ram/Mola Ram  , Ranbahadurchandrika and Garhrajvanshkavya
J B Fraser , Asiatic Research
Shyam Ganguli, Doon Rediscovered
Minyan Prem Singh, Guldast Tabarikh Koh Tihri Garhwal
Patiram Garhwal , Ancient and Modern
Tara Datt Gairola, Parvtiy Sanskriti
John Premble, Invasion of Nepal
Chitranjan Nepali, Bhimsen Thapa aur Tatkalin Nepal

XXX
History Gurkha /Gorkha Rule over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand; Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; Sirmour Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; Kangara Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; Baghat Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Tehri Garhwal, Champawat Kumaon, Uttarakhand; Punar Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Uttarkashi Garhwal, Bageshwar Kumaon, Uttarakhand;  Nahan Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Dehradun Garhwal, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand; History Himachal; 
Nepal Itihas, Garhwal Itihas, Kumaon Itihas, Himachal Itihas;  Gurkha/Gorkha ka Kumaon par  Adhikar Itihas , Gurkha/Gorkha Garhwal par Shasan Itihas;  Gurkha/Gorkha Rule in Kumaon, Garhwal Uttarakhand; History Gurkha/Gorkha  Rule in Himachal,
Xx
Warfare Management, Skill, campaign, Salary of Gurkha Army in Kumaon, Garhwal and Himachal; Warfare Management, Skill, campaign, Salary of Gurkha Army in Kumaon, Garhwal and Himachal; Warfare Management, Skill, campaign, Salary of Gurkha Army in Kumaon, Garhwal and Himachal

Bhishma Kukreti

Why Aswal Community and Kandar Leaves are not allowed in Tadkeshwar Dham

                     (Folk Tales /Community from Garhwal Series-117)
                                           Collected by Bhishma Kukreti
                   Due to strict custom, Aswal community, Kandar Leaves ( Shorea rubusta) and mustard oil are not allowed into Tadkeshwar Temple Premise. Tadkeshwar Temple is situated in Badalapur Patti, Pauri Garhwal.
          There are many versions for the reasoning of disallowing Aswal community, Kandar Leaves into Tadkeshwar Temple primes.
          Dr Shiva Nand Nautiyal offers following folk story about non allowing of Aswal Community, and Kandar into temple.
             An Aswal Thakur was plowing field. It was after noon time and Bolanda (Caller) Tadkeshwar deity called Aswal Thakur to free bulls from plowing. Plowing bulls after noon is called cruelty. Aswal Thakur did not accept the cautious calling of Bolanda Tadkeshwar Deity. Tadkeshwar Mahadev took the form of a farmer and went before Aswal Than kur and requedted him to free bulls from plow. Instead of freeing bulls from plow, Aswal Thakur ran after the farmer to beat him. Tadkeshwar in Farmer form slipped due to Kandar leaves. Tadkeshwar Mahadev became angry on Aswal and Kandar Leaves. Tadkeshwar Mahadev cursed that from that day   neither Aswal person nor Kandar leave to be allowed in his temple at Tadkeshwar.
There is a Saying –
'Aswal ki Jat ar Kandar ko Pat , Yakh ni Chaindi , yonki Jat '
The above saying  means that in this temple, neither Aswal community nor Kandar leave are required.

Reference of Present Story, Dr Shiva Nand Nautiyal (Garhwal Darshan) and Dr Khyat Singh Chauhan, Prachin Siddhpeeth Tadkeshwar Dham
Copyright@ Bhishma Kukreti 16/6//15, Mumbai, India
bckukreti@gmail.com
References

1-Bhishma Kukreti, 1984, Garhwal Ki Lok Kathayen, Binsar Prakashan, Lodhi Colony, Delhi 110003, 
2- Bhishma Kukreti 2003, Salan Biten Garhwali Lok Kathayen, Rant Raibar, Dehradun
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Bhishma Kukreti


      Judiciary of Gurkha Regime in Uttarakhand, Himachal

History Discussion on Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal - 58
History of Gorkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) -121   
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -642
                          By: Bhishma Kukreti (A History Student)

                                 Adalath of Vichari
   There were three courts (Adalath) in Garhwal established by Gurkha regime (Asiatic Research vol 20)  –
Shrinagar
Langur
Chandpur
There used to be a Vichari (Judge) in each Adalath.
The following army officers were there to help Vichari (Judge)-
Kardar-1
Mehjar-1
Jamadar-1
Amaldar-1
Havladar-
Sipahi -1
According to Chitranjan Nepali, the annual salary of court officials was as under –
Employees -------Numbers-----------------Annual Salary -----------------Total
Vichari-----------------2---------------------------350---------------------------700
Vahidar(Record keeper)-----2----------------144-------------------------------288
Tahvildar------------------------2----------------150------------------------------300
Tahluva (Peopn)--------------1------------------36-------------------------------36

            Responsibilities and Duties of Vichari (Judge)
                 It was expected from Judge that he would not be influenced by any force, would not be greedy and affiliated. The judge was supposed to treat the person as per his deeds and not by perception (Jasta ko tasto, tit for tat). However, due to non availability of proper work force, the judge never followed their duties properly.
           Different army officials at different places used to act as judges. In Shringar , Almora, or nearby region of capitals the Subba used to follow judiciary system. The army officials used to help Subba.
Usually Faujdar were busy in army campaign therefore, he used to appoint his subordinate to follow judiciary deeds. Such officials were also called Vichari' or Judges. The Faujdar used to collect money from accuser or accused through contract basis and the money was collected in Treasury.
  The judiciary was just for the sake of judgment.
                       Judicial Inquiries
             No written system of complaints was there. Only verbal complaint system existed in Gurkha regime. As soon as accuser used to complaint verbally the inquiry used to start. No advocate was allowed from accuser and accused sides.
               A Harivansh pothi was kept on the head of accused or accuser for truth saying. If the judge found the crime and accused did not agree the sipoy used to beat the criminal by bet or by other punishments.
                Compromise was First Step
            Usually, Vichari used to try compromise between accused and accuser. If that was not possible, the case was submitted to Gram Pamchayat or village council. Village council used to make judgment most of the time.
           Easy and Simple way of Judgment

        No doubt, Gurkha were cruel but the way they used judiciary it was easy and simple. The judgment was offered before accused and accusers. Usually the written procedure was not used and only for important disputes the written procedure was used and that is again rarely. The winner was given written statement with stamp of Vichari. The looser was informed immediately and punishment was offered at the instance as financial punishment was collected immediately.

               Deity based (Dip Nyaya) Detection of Crimes
In case of complex disputes, when detection of crime was not easy the Gurkha Vichari used aged system of detecting the crimes. This system was called 'Dip' or Deity based system. That got more loss that was called criminal.
Goldip System of Detecting Criminal- The accused and accuser were handed over red hot iron rod and they were ordered running. Whoever got the burn more he was called criminal.
Taraju Dip- The criminal was weighed by balance by stones. Those stones were kept in a place. Second day, the criminal or accused or accuser was weighed again by those stones. If the weight of man /woman was more than the stones the person was called non criminal and whose weight would be less was called criminal.
Kadhai Dip- The hand of accused was dipped into hot oil vessel (Kadhai) and if the hand was burnt the person was called criminal and if there was no burn the person was declared innocent.
Teer ka Dip-The accused one was ordered to dip into a pond. An arrow was thrown and other Epson was ordered to go to the arrow site and returned. If the person returned back before other person sank the person was called innocent or if a person did not sink before other person ruturn the person was called innocent.
Jal ka Dip- the small child of accused and accuser were thrown into pond. Whose child sunk first that person was called criminal.
Vish ka Dip- Both the accused and accuser were offered poisonous herbs to eat. Who died that was criminal and who was unaffected that was innocent.
Mandir ka Dip- The stones for naming the accused and accuser were kept in the temple. If there was a death or natural or other disaster in a family either of accused or accuser the person was named as criminal.
In many cases, there used to write names of accused and accuser on separate paper. The temple Priest used to pick apaer and that person used to be called criminal.
              Punishment
The punishment was told as per crime. For the serious criminals as big theft, the nose or ear were cut of criminals. Many times the criminals were beaten, wounded and a body part /parts were cut and then salt and pepper was put on wound.
Subba used to declare judgment for very serious charges.
                Death Sentence
Death sentence was very rare. Even in case of murder the murderer was fined for heavy financial punishment.  The death sentence was given by hanging the person on a tree branch.
Death sentence was given only to nation deceivers. That kills bulls or caws, a Harijan who takes Hukka of Brahmin or Rajput or rapes an upper caste woman. For such woman her nose was cut. If anybody indulged on *ual crime the husband could punish wife and her lover.
                   Financial Punishment
In most of the cases, Gurkha declared financial punishment. In case of *ual indulgence with other's wife or husband the crime was more rigorous especially the *ual relationship with close kins as relation between aunt and nephew etc. Such criminals were called Jari. There were two financial punishments for Jari. One was Jari punishment and additional punishment was Shudhi Jurivana or making pure punishment. Only the criminal Brahmin (indulging *ual crime) was sent for exile but not other caste people. The financial punishment was collected with force and in case the person could not pay the punishment his property was sold. If a person did suicide or ran away his immediate relatives had to pay punishment. Even the punishment was not paid the property was auctioned immediately.

                  Harassing ordinances from Gurkha Officers
   The financial punishment was offered not by the quality of crime but by financial status of person that state got more revenues. Judiciary became the source of state income.
The higher officials used to create new ordinances those benefits to the treasury and not citizens. Once, there was an ordinance that the women should not come on the house roof. The woman was caught coming on the house roof she would be punished.  In hills it was a must for people to come on roof for various deeds. Gurkha local officers took advantage of that ordinance by insulting the women and punishing them.
                    False Accusations 
  Gurkha officials usually used to accuse common people, traders falsely. Reper described (Asiatic Research vol 11) an even that person came to sell Ghee to soldiers. Gurkha soldiers accused him for malpractices of selling adulterated Ghee. Soldiers bate him and took his Ghee as punishment. The Ghee seller was punished for rupees twenty five.
                           Corrupt Officials
  Corruption was very common in Gurkha time. The gift offers were exempted and were given support from Gurkha officers. Since, there was no hearing for lower cadre officials people preferred to pay tribute to the officials for every deed.
                    Iron Rule
  The main ruling tactics of Gurkha was to make people afraid and rule over them. Punishing the citizens was main criteria of administrating the region. For Gurkha, to get money from accused and accuser was the source of money or treasury filling.  There was back biting, corruption , selfishness everywhere in the Gurkha rule. No real judiciary was seen anywhere in Kumaon, Garhwal and Himachal under Gurkha rule.
** Most of references and details were taken from Dr Dabral

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 18/6/2015
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued... Part -643
*** History of Gorkha/Gurkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) to be continued in next chapter 

(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
XX
                    Reference

Atkinson E.T., 1884, 1886 , Gazetteer of  Himalayan Districts ...
Hamilton F.B. 1819, An Account of Kingdom of Nepal and the territories
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Dr S.P Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 5, Veer Gatha Press, Dogadda
Bandana Rai, 2009 Gorkhas,: The Warrior Race
Krishna Rai Aryal, 1975, Monarchy in Making Nepal, Shanti Sadan, Giridhara, Nepal
I.R.Aryan and T.P. Dhungyal, 1975, A New History of Nepal , Voice of Nepal
L.K Pradhan, Thapa Politics:
Gorkhavansavali, Kashi, Bikram Samvat 2021 
Derek J. Waller, The Pundits: British Exploration of Tibet and Central Asia page 172-173
B. D. Pande, Kumaon ka Itihas
Sharma , Nepal ko Aitihasik Rup Rekha
Chaudhari , Anglo  –Nepalese Relations
Pande, Vasudha , Compares Histriographical Traditions of Gorkha Rule in Nepal and Kumaon
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Minyan Prem Singh, Guldast Tabarikh Koh Tihri Garhwal
Patiram Garhwal , Ancient and Modern
Tara Datt Gairola, Parvtiy Sanskriti
John Premble, Invasion of Nepal
Chitranjan Nepali, Bhimsen Thapa aur Tatkalin Nepal

XXX
History Gurkha /Gorkha Rule over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand; Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; Sirmour Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; Kangara Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; Baghat Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Tehri Garhwal, Champawat Kumaon, Uttarakhand; Punar Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Uttarkashi Garhwal, Bageshwar Kumaon, Uttarakhand;  Nahan Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Dehradun Garhwal, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand; History Himachal; 
Nepal Itihas, Garhwal Itihas, Kumaon Itihas, Himachal Itihas;  Gurkha/Gorkha ka Kumaon par  Adhikar Itihas , Gurkha/Gorkha Garhwal par Shasan Itihas;  Gurkha/Gorkha Rule in Kumaon, Garhwal Uttarakhand; History Gurkha/Gorkha  Rule in Himachal,
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Bhishma Kukreti


Mustard Oil is not permitted in Tadkeshwar /Tadashar Temple Premise 

                     (Folk Tales /Community from Garhwal Series-118)
                                           Collected by Bhishma Kukreti
        It is true that till date Aswal Community, , Kandar /Sal Leaves ( Shorea rubusta) and mustard oil are not allowed entry into Tadkeshwar, Tadkeshwar/Tadashar Temple of Badalpur. There are four five sayings for explaining banning of mustard oil, Aswal community and Kandar /Sal Leaves ( Shorea rubusta) into Tadkeshwar temple.
Dr ranvir Singh Chauhan provides a folk story as under –
  Once, by conspiracy, Aswal community wanted to capture Badalpur Rajjagadhi. One of traitor of Badalpur Rajjagadhi met Aswal community. However, Tadkeshwar was calling deity of Badalpur Garh Chieftain. Tadkeshwar was 'Bolanda Dibta' for Badalpur region. Tadkeshwar Mahadev used to call people of Badalpur region at the time of distress or bad happenings. Aswal community thought of lessening the power of calling Tadkeshwar Mahadev. For lessening the power of calling, Aswal pasted Haluva, Mustard oil on Shivling of Tadkeshwar temple and put Kandar /Sal leaves on Ling. However, Badalpur people came to know the tactics of Aswal community. From that day, Aswal community, Kandar, Sal leaves and mustard oil are not allowed entry into Tadkeshwar Temple.


Reference of Present Story, Dr Ranvir Singh Chauhan  and Dr Khyat Singh Chauhan, Prachin Siddhpeeth Tadkeshwar Dham
Copyright@ Bhishma Kukreti 16/6//15, Mumbai, India
bckukreti@gmail.com
References

1-Bhishma Kukreti, 1984, Garhwal Ki Lok Kathayen, Binsar Prakashan, Lodhi Colony, Delhi 110003, 
2- Bhishma Kukreti 2003, Salan Biten Garhwali Lok Kathayen, Rant Raibar, Dehradun
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Bhishma Kukreti

बौ सुरीला का चार पति (गढ़वाली में अनुदित  एकालाप नाटक )


मूल लेखिका -- लौरा एम . विलियम्स
अनुवाद --  भीष्म कुकरेती

चरित्र
बौ सरीला
रणधीर - एक बिगरैलु जवान
गोविन्दु -जवान अर सौम्य ड्रेस वळ
छैला - कलाकार लम्बो बाळ वळ
बर्मा - दाड़ी  वळ सबसे बुड्या
(पति  चरित्र एकी मनिख निभांद अर हर दृश्य मा झुल्ला बदलिक आंद )
स्थान - लिविंग रूम
                                             बौ सुरीला
-उफ़ ,  फिर वै बात ह्वे गे।  म्यार फिर से तलाक ह्वे गे। मि सबसे भाग्यहीन जनानी छौं। भौत से एकी खसम से खुस रौंदन या खुस हूणों नाटक करदन।  अर मीन चार बदल देंन पर। [खांसद अर अखबार पढ़न लगद ]. उंह सौ प्रति माह। आदिम  स्वार्थी हूंदन।
म्यार चौथू खसम ! यु संभव नी च। हम चित्तार्षक जनान्युं तै इथगा भुगण पड़द।  हूँ
( पैलु फ्रेम मा रणधीर प्रकट हूंद , सुरीला पिक्चरक पास जांद ) आह ! रणधीर ! बांका सजीला जवान पति ! मि त्वे तै कबि नि बिसर सौकु।  बिसरण बि किलै छौ ? सजीला , बिगरैला पति भुलणै चीज हूंद क्या ? रणधीर तू ख़ूबसूरत छौ अर प्यारो।  मि प्यार मा त्वे तै प्यारे प्यारे करिक  भट्यान्दु छौ। तब मि सोळा की छौ अर तू चौबीस को।  त्वै तै मेरी जवानी अर मूर्खता माफ़ करण चयेंद छौ। पर मरद जात अपण अलावा कैक बारा मा कख सुचदि ? तीन मि तै भगणो सलाह दे कि तीम पैसा नि छन । तीन मि तै गलत समझ।
क्या एक जवान लड़की का काम सब्जी काटण , आटु उलण इ रै जांद ? [रणधीर दुःख मा हंसद ] पर सबसे बड़ी गलती तेरी या छे कि तू गोविंदु तै घर लै गे। अर मि अपण आकर्षण कम थूका कौर सकुद छौ ? तू क्या चांदी छे कि मि अपण आकर्षक बाळ काटिक नंगमुंडी ह्वे जान्दि ? क्या मि अपण सफेद दाँतपाँटी पर क्वीलतार फेरी दींदु ? [हंसदी ] हाँ तू इनि विश्वास करदु छे कि मि अनार्षक ह्वे जौं। तू कथगा जल्थमार छै हैं [गंभीर ] हैं ? यु त्यारि दोष छौ त्वै तै वै तै ड्यार नि लाण चयेणु छौ। पता नि कब मरद सीखल कि यदि वैकि कज्याणि खबसूरत हो तो दोस्तों तै घर का आस पास बि नि आण दीण चयेंद।
रणधीर तब तू असह्य ह्वे गे छै हाँ ! गोविंदु अर म्यार दगड होटलम डिन्नर पार्टी मा नि आन्दु छौ।  जब बि गोविंदु मि तै वा चीज भेंट करदो छौ जु तू नि दे सकद छौ तो तो जळीक म्वास  ह्वे जांद छौ। त्यार फोकट का घमंड से सब कुछ बर्बाद ह्वे।  अरे गोविंदु मि तै कान का फूल आदि इ त भेंट माँ दींदु छौ। अर वा घड़ी ? गोविन्द द्वारा मि तै घड़ी दीणो बाद तो सब कुछ समाप्त ह्वे गे। हम अलग हुवाँ।  तयार फोकट का घमंड अर स्वार्थी प्रवृति का कारण मि तै भौत भुगण पोड।


                                          बौ सुरीला [गोविंदु दुसर  फ्रेम मा आंद आर वा गोविंदु की तस्वीर जिना देखिक ]
गोविंदु भौत आलोचनात्मक दृष्टि से नि देख।  यु सब तेरी गलती च। जब मि प्यार से नाखुश छौ तो त्वै तै कुछ नि सुणण चयेणु छौ बल्कि में से दूर रौण चयेंद छौ।  तुम सब मर्द भावनात्मक मुर्ख हुँदा। मि अबि बि त्वे अर प्यारे तै नि बिसर सौकुं। अहा क्या दिन छया हैं ! इना रणधीर अर उना तू याने गोविंदु। रणधीरन ब्वाल , "गोविंदु ! मेरी कज्याण नाखुश च किलैकि मि वीँ तै सब कुछ नि दे सकुद। "
तीन ब्वाल , " त्वै तै सुरीला तै व सब कुछ दीण चयेंद जांक वा ख्वाइस करदि। " अर फिर मीन रणधीर से तलाक ले अर त्यार दगड़ ब्यौ कर। इख्मा म्यार क्वी दोष नि छौ।
त्वी बि मानली कि मि एक पतिव्रता नारी छौ। शिकैत की कखि जगा नी  च । तीन बोलि छौ कि सब कुछ मीम रालो। वा सुफेद मोटर बड़ी बिगरैलि छे। तीन बेकार शिकायत कार। मि तै नि पता छौ बल तू इथगा काईयाँ प्रवृति कु ह्वेल। जब मि क्वी चीज खरीदद छौ तो तू नराज ह्वेक कुणकुण ,  गुरगुर करदो छौ। तू असह्य प्राणी साबित ह्वे जब बि मीन क्वी जवारात खरीद। असह्य !
            इन मा मेरी तब्यत खराब हूणी छे सो ह्वे। क्वी बि भली जनानी इन वातावरण मा नि रै सकदी। मि तै त्वे से पीछा छुड़ानो बान यात्रा करण पोड। (उफ़ ) स्वार्थी मनिख ! मीन अब त्वै तै क्षमा कर याल।
खैर तीन म्यार तलाक की भरपाई का वास्ता का खूब दे।  पर मि तै सामंजस्य पसंद च। मि तै तड़क भड़क पसंद छौ अर त्वै तै सरलता बस या ही परेशानी छे।  तू मि तै नि समझ सकी। अरे इन दौलत का क्या करण जु दुसर पर रौब नि मारे सक्या ? गोविंदु सैत च इथगा धनी हूणों बाद बि तू एक साधारण मनिख ही छौ।
                    बौ सुरीला [छैला  तिसर फ्रेम मा आंद आर वा छैला की तस्वीर जिना देखिक ]

अहा छैला अर तेरी तुलना करीं बगैर मि नि रै सकदु।   शादी से पैल वैन मेकुण अजीब अजीब अलंकृत भाषा मा ल्याख।  छैला एक भावुक जानवर छौ। वैक लम्बा बाळु अर स्वप्नीली/  सुपनेळी  आंख्युं मि तै धोखा दे। मि तै भरवस छौ बल उ मि तै समजल। पर ना।
मि  लगद कि एक हैंक तै इलै नि समज स्कड किलैकि स्वार्थ बीच मा ऐ जांद। 
छैला ! मीन त्यार दगड ब्यौ करणो बान आलिशान मकान छवाड़। तीन या बात कबि नि समज।  ठीक च मीम गोविंदु का दियां घना छ अर पैसा छौ। पर मि तै यु असह्य छौ कि तू उखमादे इक पैसा  बि ले।
मि तै लगद छौ कि तू प्रसिद्ध ह्वेलि। पर ना - जब मि स्टडी रूम मा आंद छौ तो तू या तो लिखणु रोंद छौ या पढ्नु रौंद छौ। तू रात भर लिखणु रौंद छौ अर म्यार आराम माँ खलल पड़दु रौंद छौ।  फिर त्वै तै जबरदस्ती कखि भैर लीजाण पड़द छौ। तू तब बि लेख सकद छौ जब में तै तेरी जरूरत नि हूंदी छे कि ना ? पर यांसे मेरी खबसूरती मा कमि आंद गई। तू अफु मा इ व्यस्त रै।
मि तै आशा छे कि तू म्यार व्यक्तित्व समजिल पर सब बेकार। मीम नाटक का एक बढ़िया कहानी छे। हाँ याद आई कथा छे कि एक लड़की रात रात स्टेज मे काम करदी छे अर एक रात   वा प्रसिद्ध ह्वै गे। फिर व तबि घर लौट जब ठीक समय पर वींक गरीब मा तै वींक जरूरत छे।  पर तीन मेरी सहायता नि कार।
तू अफु मा व्यस्त छै अर जु बि तू लिखद छौ मेर समज मा कुछ नि आंद छौ।
अब तू धनी अर प्रसिद्ध ह्वे गे पर जब हम दगड छया तो तेरी आय कुछ ख़ास नि छे।  सब तै लगद  छौ कि तू  धनी छौ अर तबी मि इथगा सुंदर ड्रेस पैरदु । मीन तेरी सहायता करण चाहि पर तीन मना कर दे छौ। फिर हम द्वी अलग ह्वे गेवां।  वेक बाद क्वी युवा नि मील अर युवा स्वार्थी अर महत्वाकांक्षी जि हूंदन।
त्वै छुडनो दुःख तो छैं च।
                        बौ सुरीला [ चौथू फ्रेम मा वर्मा बुड्या आंद वा वैक दगड बात करदी ]
जब मि बर्मा तै मील तो इथगा धोका मीन कबि नि खै। मीन समज बल उ एक सज्जन आदिम च। अब बथावदी एक सौतेली मा कनकैक दूसरौ बच्चों तै अपण मानी ल्यावो ? मि बर्माक बच्चों तै अपण मानि नि सौक ! ठीक च शादी से पैल मि ऊँ तै कथा सुणान्दु छौ पर शादी बाद में से कथा तो क्या उंक दगड़ बात करणो ज्यु बि नि बुल्याइ। बर्मा तीन बि मि तै समजण मा गलती कार।  अरे में पर कुछ खर्चा पर्चा करण मा त्यार क्या जाणु छौ।  सब कुछ बच्चा ही नि हून्दन । बच्चो पर खर्चा अर मेपर कुछ ना।  तीन वूं तै बिगाड़न ही च तो बिगाड़।
ऊख बर्माक दगड बि दाल नि गौळ।  कैन बि मि तै सही तरां से नि समज।
अब मि स्टेज माँ काम करण चांदु अर एक मर्द की तलास च जु मि तै स्टेज मा चमकाण मा मदद कर साको।
हे सब पतियों ! वु तुम सब पर भारी पोड़ल अर फिर मि टॉम तै शायद याद नि बि करुल !
अर वु म्यार पंचौं खसम ह्वालु।


मूल लेखिका -- लौरा एम . विलियम्स
अनुवाद -भीष्म कुकरेती जून 2015

Bhishma Kukreti


                                         Religious Tour Memoir for Nagraja Puja
                                        यात्रा सिद्धांतुं अवहेलना करण हमर जन्म सिद्ध अधिकार च   
                                        मुंबई बटें जसपुर तक नागराजा पूजा जात्रा -6                                         अविस्मरणीय धार्मिक -सांस्कृतिक यात्रा वृतांत -6                   
                                   
                                                           जत्र्वै - भीष्म कुकरेती

           रेल टिकेट की उहा पोह, धुकधुकी ,  संशय लग्युं राइ अर ये दौरान जैं गाँव (अजमेर , पौड़ी गढ़वाल ) का बिष्ट परिवार भौत सालुं से एक ब्यौ अर दिबता  पुजै नीबत ड्यार जाण वळ छ किन्तु टिकेट कनफर्म नि ह्वे तो बिचारा नि जै सकिन। हम बि हताश हूणा छया कि क्या ह्वाल।  तो प्रीमियम ट्रेन को सहारा हम तै ढाढ़स दिलाणु छौ।
         प्रीमियम ट्रेन की बुकिंग 15 दिन पैल इ खुलद तो पांच मई कुण भतीजो आशु सुबेर से इ कम्प्यूटर पर ग्याइ अर नौ दस या ग्यारा बजि वैक फोन आयि बल प्रीमियम ट्रेन की बुकिंग ह्वे गे।  याने दिल्ली तक ट्रेन की बुकिंग ह्वे गे छे।  प्रीमियम ट्रेन याने अधिक किराया किन्तु एबारी किराया की चिंता नि छे 22 मई ग्यारा बजे से पैल ड्यार पौंछण अधिक महत्वपूर्ण छौ।  टिकेट बुकिंग ह्वे नी कि घरवळि पर खरीददारी की चिंता लग गे।  हम सांस बगैर ज़िंदा रै सकदां किन्तु चिंता , फिकर , मन मा झंझट का बोझ लियां बगैर नि रै सकदा।
मी सन 75 -76 से 2009 तक लगातार हर मैना 20 दिनों टूर करणु रौ अर टूर , यात्रा , जात्रा कु सबसे पैल सिद्धांत हूंद कि कम से कम सामन अपण दगड़ रखे जावो।  किन्तु परिवार मा इन नि हूंद।  घरवळि 5 मई से सामन बढ़ाणो इंतजाम पर लग गे।
जन कि मेकुण चार कुर्ता पैजामा खरीदे गेन।  तीन कुर्ता पैजामा अपण कुल पूजा का वास्ता अर एक अलग से कुर्ता पैजामा नागराजा क पूजा का आखरी समापन दिवस का खातिर।  अर यांक पैथर सामाजिक भावना च कि लोग क्या ब्वालल ? मतलब हमारी सरा खरीददारी का आधार बिंदु हूँद लोग क्या ब्वालल।  अर ये लोग क्या ब्वालल का चक्कर मा एक सैंडल , एक जुतुं जोड़ी , एक साधारण स्लीपर आम काम का वास्ता , एक फैशनेबल सैंडल गाँव घुमणो वास्ता धरे गेन। इनि हरेक समय का ध्यान धरिक पेंट कमीज बि रखे गेन।  मि बुलणु बि रौंवु कि इतना सामन नि धारो किन्तु भीष्म कु कथन महत्वपूर्ण नि रै गे छौ अपितु 'लोग क्या ब्वालल' महत्वपूर्ण भूमिका अदा करणु छौ।
           कुछ सामान आवश्यक छौ जन कि इमरजेंसी लाइट।  मीन बोल बल द्वी इमरजेंसी लाइट रखो तो परिवार मा उत्तर छौ बल इथगा सामन कनकैक लीजाण ?
खैर सुबेर घरवळि कु कुणकुणाट शुरू हूंद छौ बल खरीददारी कब पूरी ह्वेलि अर दिन मा या संध्या काल मा खरीददारी का बाद कुंकुणाट उनि रौंद छे कि खरीददारी पूरी नि ह्वे।
19 तारीक पता चल कि परिवार का हर सदस्य का पास दुदु बड़ा बड़ा बैग ह्वे गेन।  फिर फोन पर कोन्फेरेंस द्वारा यु निश्चित ह्वे कि प्रति सदस्य मा एक या डेढ़ बैग से अधिक नि हूण चयेंद। 19 तारीक रात हम सब भाइयुं का इख यात्रा सामान कम करणो कार्य चलणु राइ।  यात्रा सामान कम करणो अर्थ ह्वे कि अरमानो पर पाणी  फिरण !
           खैर मन बांधिक हरेक सदस्य का यात्रा सामन कम करे गे।
               मीन 20 गढ़वाली नाटकुं पाण्डुलिपि की फोटोस्टेट अर 10  म्यार गढ़वळी मा अनूदित नाटकुं प्रतिलिपि का द्वी बंडल लिजाण छौ -एक तो दीण छौ  श्रीनगर विश्व विद्यालय तै अर हैंक दीण छौ गढ़वाल सभा देहरादून  तै।  यात्रा सामान कटौती मा गढ़वाल सभा का बंडल कैंसिल करे गे।
            खैर 20 मई सुबेर तक फोन से पता चौल कि फिर बि हरेक सदस्य का  पास डेढ़ बैग तो ह्वाली।
भतीजो आशुन दिल्ली से ऋषिकेश द्वी टैक्स्युँ इंतजाम बि कर याल छौ।  द्वी इलैकी सामान जि इथगा छौ।



भोळ पढ़ो ऋषिकेश पौंछण  पर हौर खरीददारी क्या कौर ?


अविस्मरणीय धार्मिक -सांस्कृतिक   नागराजा पूजा जात्रा वृतांत का बाकी  भाग 7  में पढ़िए

Copyright @ Bhishma Kukreti 19 /6/15
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Bhishma Kukreti

          झाली माली देवी  जागर या कैंतुरा पूजा वार्ता

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

( रणवीर सिंह चौहान , चौरस की धुंयाल से साभार जिन्होंने द्युसी , मन्यार्स्युं केजागरी से यह जागर प्राप्त किया )
झाली माली देवी
पहली ओंकार पैदा होइहुंकार से फुंकार
जै से धौं धौं कार -धौं धों कार से जलंकार
जलंकारम शक्ति पैदा होइ
अष्ट भुजा चार नेत्र हातमा शक चक्र अर गज शक्ति
हल -हल नुस्ल खटक खपर -हे भगवती कुमाऊं
माँ झाली कुण्ड पर ये देवी पैदा ह्वाया हे मेरी माता
ये झाली कुण्ड मा चमोलों का वंश मा पैदा ह्वाया
हे देवी कैंतुरा की झाली माली जैका साथ में
अष्ट भैरों चौसठ काली और नौ बीर नारसिंग
खैकदास -उदास गुरु शाकम्बरी युकु जमाण चलद
सोलह भाई सौड़ बारह भाई पड़ियारी ई झाली
माली की डोली चलदना