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"Tile Dharu Bola": Connecting Line - उत्तराखंडी गानों का सूत्र: "तिले धारु बोला"

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 23, 2007, 11:00:36 AM

Dinesh Bijalwan

Mehtaji. jo aap kah rah hain wo ho sakata hai.  Par jis gaane ka jikr  Pande ji ne kiya hai  uska mool roop ya poora gana aaj moujood  bhi hai ye nahi. jahan tak maine til dharo bola type gane sune hai wo sab  saamuhik nirtya geet hai aur  parnay geeto se lekar  dharmik type ke bhi hain.  ab agar Mami til dharo bola  ka sabdik arth dhoondhe to kya kya  vyakhyain ho sakte hain.  Agar Tilotama padhani ko viram dev dwara jabardasti  apne ghar bitha le  ki ghatna se  he  " til dharo bola" gano  ki suruaat hui to  yeh bichitra hi hai ke ek taraf yah sutra vakya  chedchaad wale raseli ghatnao ka  sutradhaar bana to doosri taraf dharmik gano mei bhi hua hai.  isliye jaab tak koi naya thatya  saamne nahi aata tab tak tilotama aur biram dev ko hi   is sutra vakya ko  aarambh karne ka  shreya jata hai.

Vinod Jethuri

धन्यबाद मेहता जी और दोस्तो तीले धारू बोला के बारे मे बिस्तरित जानकारी के लिये..
दोस्तो ईसी तरह से आपने "छो छ्म्म" सब्द भी  बहुत गानो मे सुना होगा..
आओ छो छ्म्म के बारे मे चर्चा करें और छो छ्म्म के बारे मे अपने अपने बिचार प्रस्तूत करते है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
Know More about

Teele Dharu Bola from this Story of Dodigarh
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कैन्तुरी इतिहास में प्रीतम देव /पृथ्वीपाल /पृथ्वीशाही का भी उल्लेख मिलता
है जो आसन्ति - वासंती देव पीड़ी के ७ वे नरेश अजब राय (पाली पछाउ ) के पुत्र
गजब राय (द्वाराहाट का कैन्तुरी राजा ) के पुत्र सुजान देव का छोटा भाई था
जिसने रानीबाग के भयंकर युद्ध में तुर्क सेना को परस्त किया था
| पिथोरागढ़
उसका एक प्रमुख गढ़ था और उसकी एक पत्नी मान सिंह की बेटी गांगला देई,दूसरी
धरमा देई और तीसरी धामदेव की माता और हरिद्वार के निकट के पहाड़ी भूभाग के
मालवा खाती क्षत्रिय राजवंशी झहब राज की पुत्री थी जिसे "रानी जिया " और
"मौला देई " के नाम से जाना जाता था
| प्रीतम देव शत्रु का विनाश करने वाला
प्रतापी राजा था जिसका वर्णन जागर गीतों में *( "जै पृथ्वीपाल ने पृथ्वी हल
काई " ) *मिलता है
| रानी जिया पृथ्वीपाल की मृत्यु के पश्चात गौला नदी के समीप सयेदौं से हुए युद्ध
में विजय के पश्चात मृत्यु को प्राप्त हुई थी जहाँ आज भी उसकी समाधि
"चित्रशीला " नाम से उत्तरायणी मेले के दिन पूजी जाती है
| जिया रानी का पुत्र
धामदेव था जो बड़ा प्रतापी और शक्तिशाली राजा था और कत्युरी राज के इतिहास
में उसके शासन काल को स्वर्णिम युग की संज्ञा दी जाती है
| राजुला - मालूशाही
की प्रसिद्ध लोकगाथा का नायक मालूशाही , राजा धामदेव का ही पुत्र था
| प्रसिद्ध गीत " तिलै धारू बोला " जो तिलोतमा पर विरमदेव के बलपूर्वक अधिकारकी गाथा को अपने गर्भ में लिये हुए है भी डोटी गढ़ से ही सम्बन्ध रखती हैक्यूंकि तिलोतमा दुलू पधानी और रिश्ते में विरम देव की मामी थी| विरमदेव और चन्द राजा विक्रम के बीच का जवाड़ी सेरा का युद्ध जिसमे विरम देव
ने धामदेव के साथ मिलकर चन्द राजा के पुत्र की बारात जो की डोटी की राजकुमारी
विरमा डोटियालणी का डोला ले कर आ रही थी जवाड़ी सेरा में लुट ली थी क्यूंकि
विक्रम चन्द ने उसकी अनुपस्थिति में उसका गढ़ लखनपुर लुटा था और विरमदेव की
सात वीरांगना पुत्रियाँ उससे युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थी
|
विरमदेव विरमा डोटियालणी का डोला लुट कर लखनपुर ले आया था और युद्ध में
चन्दराजा की हार हुई जिसका उल्लेख लोकगीतों में मिलता इस प्रकार से मिलता है
:
"जै निरमा ज्यू को आल बांको ढाल बांको
तसरी कमाण बांकी -जीरो (जवाड़ी) सेरो बाको "
इतिहासकारों के अनुसार संन १७९० के गोरखा विस्तार के दौरान सेती नदी के तट का
नरी डंग क्षेत्र में नेपाली सेना का और धुमाकोट क्षेत्र गोरखाली के विरुद्ध
डटी डोटी सेना का शिविर था

Anil Arya / अनिल आर्य

महिपाल दा भौत -२ धन्यवाद बहुमूल्य जानकारी दिनाक लिजी .:)


Hisalu

1 more tile dharu bola song

Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...
O Bakari Ko Basaa.. Tweel Aaj laggi Maaja Kaas Karo Kaajaa..

O Ghughuti Ka Ghol.. Ghuguti Ko Ghol...
Tweel Kari Jindagi me baadi bhaga daud...
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

O Nathuli Ko Chaain.. Nathuli Ko Chain..
Din ki ne dekhi bhookh.. Raat ki na neeen...
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Ekchaalsih me paid bhaye kisaan kai ghar mein..
Chaandikhet ganai mein.. Chaukhutiya Bajarrr....
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Mahant goswami ghar janam lhi ber..
Tweel karo sangarsh bahote.. dukh bahote bhogaa..
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Siksha ko abhaav chhi yo... Kam re ge padai..
Fir samaajal pade likhe.. Degree dilaai...
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Saar bharat ghumo fir... pet ka kaaraana le..
Naukari kaduk kari.. Kai ni paayi chain......
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Naan chhin be shauk chh yo.. Kalakaaari rogaa...
Kaduk tweele geet lekha... kaduk khela paath
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

San unisau adsath me aakaswani kendra..
Shri brijendra laal shah le.. karaaaye tu paass....
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Tweel bhai geet lekha.. fir banai dhunnaaa...
Geeto ka record karne... Khoob mache dhoomaa.
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Sarkari prachar karo.. sanskriti vikaasss...
Pahadak sanskriti pujaayi.. Desh videsh me...
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...

Jat dharm khetrapal me door tera vichaar...
Deskak vichaar me tu likhe chhe geetaa...
Saba(s) Re Myer Gopiya Launda.. Tile Dharu Bola...










एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



राजुला - मालूशाही की प्रसिद्ध लोकगाथा का नायक मालूशाही , राजा धामदेव का ही पुत्र था | प्रसिद्ध गीत " तिलै धारू बोला " जो तिलोतमा पर विरमदेव के बलपूर्वक अधिकारकी गाथा को अपने गर्भ में लिये हुए है भी डोटी गढ़ से ही सम्बन्ध रखती हैक्यूंकि तिलोतमा दुलू पधानी और रिश्ते में विरम देव की मामी थी| विरमदेव और चन्द राजा विक्रम के बीच का जवाड़ी सेरा का युद्ध जिसमे विरम देव ने धामदेव के साथ मिलकर चन्द राजा के पुत्र की बारात जो की डोटी की राजकुमारी विरमा डोटियालणी का डोला ले कर आ रही थी जवाड़ी सेरा में लुट ली थी क्यूंकि विक्रम चन्द ने उसकी अनुपस्थिति में उसका गढ़ लखनपुर लुटा था और विरमदेव की सात वीरांगना पुत्रियाँ उससे युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुई थी | विरमदेव विरमा डोटियालणी का डोला लुट कर लखनपुर ले आया था और युद्ध में चन्दराजा की हार हुई जिसका उल्लेख लोकगीतों में मिलता इस प्रकार से मिलता है
:
"जै निरमा ज्यू को आल बांको ढाल बांको
तसरी कमाण बांकी -जीरो (जवाड़ी) सेरो बाको "
इतिहासकारों के अनुसार संन १७९० के गोरखा विस्तार के दौरान सेती नदी के तट का  नरी डंग क्षेत्र में नेपाली सेना का और धुमाकोट क्षेत्र गोरखाली के विरुद्ध
डटी डोटी सेना का शिविर था