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Niyoli-Hunkiya Baul, Bhagnual-न्योली, हुनकिया बौल, भगनौल,लोक संगीत के हिस्से

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 13, 2009, 10:14:16 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


दोस्तों,

उत्तराखंड के लोक संगीत में आज न्योली, हुनकिया बौल, आठो, भगनौल आदि ख़तम होने की कगार पर है! न्योली उत्तराखंड संगीत के वह विधा है जिसमे आमतौर से संगीत नहीं होते है लेकिन यह एक उदासी का प्रतीक है! जिसे आमतौर से महिलाये ही ज्यादे गाती थी! वही हुनकिया बौल जो की खेतो में काम करते समय विशेषकर धान रोपाई के वकत आदमी गाते थे, परन्तु यह भी अब काफी कम दिखाई देता है!

भगनौल, आठो लोग नंदा अष्टमी के दिन खासकर महिलाये गाते थे लेकिन हमारी नयी पीड़ी को आने वाले समय में इन चीजो के नाम पता नहीं रहेगा!

मेरापहाड़ में हम हमारी संस्कर्ती के विलुप्त होती एसे विधाओ की फिर से जीवित करने और उनको बचाए रखने का प्रयास में जुड़े है !

आशा है की आप भी हमारे इस कार्य में हाथ बटायेंगे!

एम् एस मेहता     

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Our Senior Member Mohan Singh Bisht (theth pahadi) ji has posted this video about Huniya Baul from Garur area of Bageshwar.

The video is self explanatory.

[youtube]ynhxYowH304


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


I am writing the lyrics of Exclusive Niyoli which i believe,you perhaps not listen earlier.
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ये नियोली.. गोपाल बाबु गोस्वामी और चन्द्रा बिष्ट के आवाज में एक प्रकार का जुगल बंदी

चन्द्रा बिष्ट.
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हे  काटनिया -२ पौई उन्छे
चौमासी का बाना..
हे  बग्निया पानी थमी जा छो
म्यार नी थामिन मन...

गोस्वामी जी:
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ये झुन्गरी का बोटा ओह....सिया..
ये झुन्गरी का बोटा.  

हे मुखडी दगने के कुंछी
ये सुवा पात लागी ओटा

चन्द्रा बिष्ट
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हे किल्खायाना रंगी कई.  
कए करी रोखिया.. ले.
हे आसू पूछी रुमाल ले .हिय
को सुना ले इ..

गोस्वामी जी.
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घस्यारी ले घास काटो ये. चाकोरा
शेरी का मीन न ले
तेरी याद येंछे वी. .हे रूपसी
मेरी हिरदय मा

चन्द्रा बिष्ट
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हे निगाल की मानी सुवा.
पे निगाल के मानी
तेरी जसी मेरी हेछी
यो प्राणी

गोस्वामी जी
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हे आसमानी जहाज उदो
ये रंगून डाको
हे पे पंछी हनी उडी उन.
हे मी बिना पाख क

चन्द्रा बिष्ट :

हे.. दितारी को saar सुवा.
आखो में रेती रेछे
तेरी आनार

गोस्वामी जी :
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हे हिस्याली का रेट
आचुयी ले पानी पीयो
हे दूर का मामूल हे गयो रूपसी
पे कब होल भेट



http://www.esnips.com/doc/ef97f138-98f0-474d-b8fb-597bb49f021f/NIYOLI-GOPAL-BABU-GOSWAMI
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



ये ऋतू रेणा आप यहाँ पर सुन सकते है
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ऋतू रेणा भी उत्तराखंड के लोक संगीत विधा है जिसमे में उदासीनता झलकती है, यह ऋतू रेणा बड़ी मुस्किल मिला है जिसे आपने के लिए यहाँ पर प्रस्तुत है !


http://www.esnips.com/doc/64e1c0fb-8418-46d2-a834-ea9fae35d52c/ritu-raina#