Author Topic: Tourism and Hospitality Industry Development & Marketing in Kumaon & Garhwal (  (Read 23727 times)

Bhishma Kukreti

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                             विश्व के पर्यटन स्थलों का वोध (समझ )
                      Understanding Features of Worldwide Destinations

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--28)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 28 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती                             
                                          (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

                      आज पर्यटन एक प्रतियोगी उद्यम हो चुका है।  ऋषिकेश में सड़क पर चना बेचने वाले को भी अंतर्राष्ट्रीय  पर्यटन का कुछ न कुछ ज्ञान होना वषयक हो गया है। चना बेचने वाले को ह ज्ञान होना आवश्यक हो गया है कि प्रवासी गुजराती पर्यटक किस मौसम में ऋषिकेश आते हैं और उनकी क्या आकांक्षाएं हैं। मसूरी के पर्यटन व्यापारी  को भी अंतराष्ट्रीय पर्यटन का बोध होना लाजमी है।

                          भू , जल और नभ मंडल


किसी भी पर्यटन व्यापारी को खुरदरे तौर पर जानकारी होनी चाहिए -
१- भूमण्डल में जल और भूमि है
२-उत्तरी भू मंडल में जमीन अधिक है
३- दक्षिण भूमण्डल में जल हे जल है।
४- बादलों के कारण मौसम परिवर्तनीय  है.
५- एसिया में हिमालय पहाड़ है।
६-यूरोप में आल्पस पहाड़ियां हैं।
७-उत्तरी अमेरिका में पथरीले पहाड़ हैं।
८- दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वत श्रृंखलाएं हैं।
९-ऑस्ट्रेलिया उपमहाद्वीप में बर्फ भरी पहाड़ियां हैं
१०-अफ्रीका में अटलस पर्वत श्रृंखलाएं है।
११- अंटार्टिक महासगरों में बर्फ होती है
१२- अंधमहासागर लम्बा व गहरा है।
१३- उत्तरी प्रशांत महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर की अपनी विशेषताएं है।
१४-हिन्द महासागर की अपनी विशेषताएं है
               सागर और पर्यटन

समुद्र ने पर्यटन उद्यम को हमेशा ही सहायता दी है। निम्न कुछ समुद्री स्थल पर्यटन में प्रसिद्ध हैं -
१- इन्ग्लिश चॅनेल - सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है और फेरी रूट के लिए जगप्रसिद्ध है।
२- उत्तरी समुद्र -फेरी और झाजी बेड़ा मार्ग के लिए प्रसिद्ध है।
३-भूमध्य सागर - बीच , रिजॉर्ट्स ,क्रूज , फेरी मार्ग के लिए प्रसिद्ध है।
४-एड्रियाटिक सागर - बीच -रिजॉर्ट्स, क्रूज , फेरी मार्ग हेतु एक जाना -पहचाना नाम है
 ५- लाल सागर बीच रिजॉर्ट्स, डाइविंग , क्रूज , जहाजी बढ़ाओं के मार्ग के लिए प्रसिद्ध है।
६-बाल्टिक सागर ,इ फेरी रूट , क्रूज और झाजी मार्ग से पर्यटन विकास हुआ।
७-काला सागर भी बाल्टिक सागर जैसा ही पर्यटक क्षेत्र है।
८-आइरिश सागर फेरी रूट्स व शिपिंग मार्ग के कारण प्रिसद्ध क्षेत्र है।
९- कैरिबियन सागर बीच रिजॉर्ट्स , डाइविंग , क्रूज के लिए एक जाना माना नाम है।
८- हिन्द महासगर क्रूज , समुद्री मार्ग व प्रशांत सागर को अटलांटिक महा सागर को जोड़ने के लिए प्रिसद्ध है।
         
                नभ  या एयर पर्यटन

निम्न एयरपोर्टों में यात्रियों का आगमन जनवरी -सितंबर 2013 में इस प्रकार था
एअरपोर्ट -----------------------------कुल यात्री आगमन करोड़ संख्या में
अटलांटा, अमेरिका  -------------------- 7. 11
बेजिंग , चीन ---------------------------6 . 31
हीथ्रो , लंदन ----------------------------5. 48
टोकियो , जापान ----------------------5. 10
लॉस ऐंजेल्स , अमेरिका ------------5. 03
ओ' हारे , अमेरिका ------------------5. 01
दुबई , UAE ------------------------4.93
पेरिस चार्ल्स , फ़्रांस -----------------4.72
डालास फोर्ट अमेरिका ,------------4.56
हांगकांग ----------------------------4.45



 अगले भाग में पढ़िए - जलवायु , समय privrtan  व कृत्रिम या मनुष्य निर्मित पर्यटक क्षेत्र

Copyright @ Bhishma Kukreti 31 /12/2013

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Bhishma Kukreti

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          पर्यटन व्यवसाय में अन्तर्राष्ट्रीय  पयटक स्थलों की जानकारियों का महत्व

                Importance of  Understanding Features of Worldwide Destinations in Tourism Development

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--29)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 29 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती     
                       
                                          (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

 आज पर्यटक व्यवसायी को जागतिक पर्यटक स्थलों  पर्यटन विपणन की मोटे तौर पर आवश्यक है।
जागतिक पर्यटन संबंधी कुछ  जानकारियां इस प्रकार हैं -
कुछ स्थान दूसरे स्थलों के लिए पर्यटन द्वार होते हैं। जैसे  दक्षिण प्रशांत एसिया चीन अदि के लिए हांगकांग पर्यटन द्वार है।  जमनोत्री ,गंगोत्री , केदारनाथ व बद्रीनाथ हेतु ऋषिकेश प्रवेश द्वार है।
प्रत्येक स्थान प्रत्येक पर्यटक के लिए सुलभ नही हो सकता है। या प्रत्येक पर्यटक स्थल की दूरी  व सुलभता अलग अलग होती है। जैसे तुंगनाथ जाने की सुलभता बद्रीनाथ से अलग व भिन्न है।
कुछ पर्यटक स्थल दूसरे बराबरी के पर्यटक स्थल से अधिक पर्यटक रिझाने में समर्थ होता है।  जैसे हिमाचल गैर धार्मिक यात्रियों को आकर्षित करने में उत्तराखंड से अधिक सक्षम है।
अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका पर्यटकों को कम आकर्षित करते हैं जब कि ये महाद्वीप /उपमहाद्वीप अपने आप में विलक्षण हैं।
एसिया की जनसंख्या अधिक होने के बाद भी दुनिया के सबसे व्यस्त 30 एयरपोर्टों में से एसिया के केवल पांच एयरपोर्ट ही हैं।

              विश्व में टाइम जोन  व जलवायु

 विश्व का कोई भाग एक जैसा नही है।  उसमे विभिन्नताएं हैं।  एक कारण टाइम जोन का वैशिष्ठ्य भी है। जैसे यदि अभी भारत में  रहे हैं तो लंदन में समय कुछ और ही होगा और कनाडा मे  कुछ और।
विश्व में समय मानक  ग्रीनविच मीन टाइम (GMT ) है।
किस पर्यटक स्थल में किन  किन देसों के पर्यटक अधिक आते है  को ध्यान में रखकर पर्यटक व्यवसायी को टाइम जोन का ध्यान रखना होता है।  बहुत से देसों में समय मानक  साल में दो बार जाता है जैसे ब्रिटेन में दो बार मानक बदले जाते हैं।
 इसी तरह अक्षांक  रेखाओं का ज्ञान भी कई पर्यटक व्यापारियों को होना आवश्यक है। जैसे
सिंगापूर - इक्वेट्रल अक्षांस है
हॉन्गकॉन्ग -टॉपिकल है
मियामी -सब ट्रोपिकल है
पेरिस -टेम्परेट है


                      जलवायु च समय

जलवायु भी पर्यटन को प्रभावित करती है।  जैसे जाड़ों में गुजराती प्रवासी इंग्लैण्ड से भारत आते हैं।
इक्वेट्रल जोन - जैसे ब्राजील -सभी मौसमों में ग्राम , वाष्पपूर्ण , आद्रतापूर्ण
ट्रॉपिकल (उष्ण कट वंधीय ) - अफ्रिका या दक्षिण भारत  जहां जाड़ों का मौसम कम ही होता है।
ट्रॉपिकल मानसून - जैसे भारत में
ट्रॉपिकल डिजर्ट - ग्राम रेगिस्तान जैसे सहारा का रेगिस्तान
वार्म टेम्परेट (गर्म )- गर्म गर्मी का मौसम , जड़ों में ठंड जैसे उत्तरी भारत व मध्येशिया
कूल टेम्पेरेट - जैसे कनाडा आदि।  बद्रीनाथ भी इसी श्रेणी में आता है

आर्कटिक - स्कैंडीवियन देस (डेनमार्क , स्विट्जरलैंड , नॉर्वे आदि ) - जाड़ों में कड़ाके की ठंड पड़ती है
ध्रुवीय जोन - बर्फीला स्थल जैसे ग्रीनलैंड

 इसी तरह वर्षा की मात्रा भी जलवायु परिवर्तित करती है और यही प्रतिवर्तन पर्यटन स्थल की विशेषता बन जाता  है
 भारतीय महाद्वीप में जलवायु परिवर्तन वर्ष में छह बार होता है जो पर्यटन को प्रभावित करता है।  यदयपि दक्षिण भारत में जलवायु में परिवर्तन अधिक नही होता है किन्तु यहाँ पहाड़ियों में जलवायु परिवर्तन होता है।
आद्रता भी जलवायु परिवर्तन की निसानी होती है।

जलवायु परिवर्तन से पर्यटक स्थल में सुविधाओं में परिवर्तन करना पड़ता है।  जैसे देहरादून के होटलों को जाड़ों में रूम हीटर की सुविधा देना व गर्मियों में ऐयरकुलिंग की सुविधा प्रदान करना । 
जलवायु परिवर्तन पर्यटकों के आकर्षण व्यवहार में परिवर्तन लाते हैं।  जैसे प्रवासियों के बुजुर्ग माँ बाप जाड़ों में मैदानो में अपने बच्चों के साथ रहते हैं और गर्मियों में पहाड़ों में आ जाते हैं। 






Copyright @ Bhishma Kukreti 1 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                 पर्यटन व्यवसाय में   अंतर्देशीय पयटक स्थलों की जानकारियों का महत्व
                Importance of  Understanding Features of Inland Destinations in Tourism Development

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--30)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 30 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती     
                       
                                          (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

 पर्यटक व्यापारी को विदेसी पर्यटक स्थलों की जानकारी के साथ साथ अंतर्देशीय पर्यटक स्थल व अंतर्देशीय  पर्यटन स्थलों की कार्यशैली का ज्ञान व मुख्य प्रतियोगी पर्यटन स्थलों का ज्ञान होना आवश्यक है।
भारत में मुख्य पर्यटक स्थलों का वर्गीकरण इस प्रकार है -

                 भारत में सांस्कृतिक पर्यटक स्थल


धार्मिक -सासंकृतिक पर्यटक स्थल
ऐतिहासिक पर्यटक स्थल
म्यूजियम
आधुनिक सांस्कृतिक एवं राजनैतिक पर्यटक स्थल
शैक्षणिक संस्थान

            परम्परा संबंधी पर्यटक स्थल

रास्ट्रीय अथवा क्षेत्रीय त्यौहर   संबंधी पर्यटक स्थल
कला संबंधी त्यौहार , मेले , प्रदर्शनी आदि
संगीत , नृत्य आदि संबंधी पर्यटक स्थल
अन्य परम्परा निभाने वाले पर्यटन

             दृश्य संबंधी पर्यटक स्थल

नभ , जल व जमीन जो पर्यटकों को आकर्षित करने वाले स्थल हैं।
पार्क , जल विचरण , रिजॉर्ट , , पहाड़िया पक्षी व वनस्पति निहारण  आदि


                मनोरंजन संबंधी पर्यटक स्थल

सिनेमा , खेलकूद , क्लब , रात्रि मनोरंजन , भोजन आदि संबंधी पर्यटक स्थल


               अन्य आकर्षक पर्यटक स्थल

जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थल , स्वस्थ्य वर्धक स्थल  , स्पा , व विशेष पर्यटक स्थल

उत्तराखंड पर्यटन को बहुत से पर्यटक स्थलों से प्रतियोगिता करनी पड़ती है विशेषकर हिमाचल प्रदेस व कश्मीर पर्यटक स्थल उत्तराखंड पर्यटन के पारम्परिक  प्रतियोगी क्षेत्र हैं।

  अपने मुख्य प्रतियोगी पर्यटन स्थल की जानकारी से ही विपणन व ब्रैंडिंग रणनीति बनाई जाती है।




Copyright @ Bhishma Kukreti 2 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                              पर्यटन स्थल व्यवस्था की रूपरेखा

                      Understanding the  Destination Management Framework

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--31)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 31 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती     
                       
                                          (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

                  अन्य प्रबंध व्यवस्था के ही अनुसार पर्यटन स्थल व्यवस्था में भी निरंतर योजना , योजना कार्यावनित करने हेतु रणनीति, ध्यान , दूरदृष्टि , उदेस्यों की अधिकतम प्राप्ति , व  पर कार्य विश्लेषण आवश्यक होते हैं. पर्यटन स्थल व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए सार्वजनिक संस्थानों व निजी संस्थानो -व्यक्तिगत व्यापरियों की आपस में भागीदारी व समन्वय आवश्यक होता है।

                            पर्यटन स्थल व्यवस्था के निम्न एक दूसरे से जुड़े स्तम्भ।/ रूपरेखा हैं
 १-सूचना प्राप्ति, विश्लेषण , व फल का विकास
२-योजना , सहभागिता पूर्ण योजनाओं को अंतिम रूप देना
३- पर्यटन स्थल का विकास
४-विपणन या सूचना निकास या सूचना वितरण

 उपरोक्त सूचनाओं का एकत्रीकरण व वितरण  में होना चाहिए जिसे सब भागीदार समझ सकें।
उत्तराखंड के परिपेक्ष में पर्यटन स्थल प्रबंधन के महत्व को केंद्र सरकारों ने महत्व देने की  बात कही है  कई पर्यटनोगामी कदम भी उठाये हैं ।
उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन को प्राथमिकता देने के लिए कई योजनांए बनाई हुईं हैं।
भारतीय सरकार ने National PPP policy 2013 में लिखा है कि -
* उत्तराखंड प्रथम राज्य है जिसने टूरिज्म बोर्ड की स्थापना की है।
** उत्तराखंड को निकट भविष्य में वैश्विक पर्यटन मैप में महत्वपूर्ण  पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित करना
*** उत्तराखंड की छवि को पर्यटन का समानवाची शब्द में परिवर्तन करना याने पर्यटन स्थल का रथ हो उत्तराखंड
**** बहु खंडीय पर्यटन माध्यमों व संसाधनो का का विकास करना
**** पर्यावरण को प्रथमिकता देकर पर्यटन में निरंतर विकास
**** सार्वजनिक व निजी भागीदारी को पर्यटन में वैश्विक स्तर पर मिसाल बनाना
******पर्यटन को उत्तराखंड का सामजिक व आर्थिक विकास का स्रोत्र बनाना
********पर्यटन को रोजगार व धन उपार्जन का मुख्य साधन बनाना
*************पर्यटन  उद्योग विकास प्रोत्साहन हेतु कई तरह के धन प्रोत्साहन देना
  इस तरह केंद्रीय व राज्य सरकारें कई तरह के पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
 केंद्रीय सरकार व राज्य सरकारों ने सैकड़ों पर्यटन विकासोन्मुखी योजनाएं  हाथ में लिए हैं जिनका जिक्र आगे आने वाले अध्यायों में किया जाएगा।

Copyright @ Bhishma Kukreti 5 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                 पर्यटक स्थल विकास प्रबंधन याने पर्यटन विकास में सूचना ,  अन्वेषण व विश्लेषण का महत्व
                 Information , Research and Analysis in Tourism  Destination Management


(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--32)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 32 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती     
                       
                                          (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )


  पर्यटन स्थल विकास प्रबंधन में सूचनाओं, विभिन्न अन्वेषणों व विश्लेषणों की निरंतर  आवश्यकता पड़ती रहती है।
 के उत्तर पर्यटन स्थल विकास के लिए आवश्यक हैं -
पर्यटन स्थल के विकास के लिए विकास विधि के बारे में खोज व निर्णय लेने के लिए बुनियादी सूचनाओं का इकट्ठा करना।
योजना निर्धारण के लिए किन किन सूचनाओं की जरूरत होगी ?
आपके पास कौन सी सूचनाएं उपलब्ध हैं ?
अन्य व्यक्तियों या संस्थानो से कौन सी सूचना उपलब्ध होगी और कैसे ?
क्या ये सभी सूचनाएं आज औचित्यपूर्ण हैं ?
क्या ये सूचनाएं निर्णय के लिए काफी हैं ?
यदि  कुछ सूचनाएं उपलब्ध न हों तो उन सूचनाओं की प्राप्ति विधि क्या है ?
इन सूचनाओं की प्राप्ति की क्या कीमत है ?
किस तरह इन सूचनाओं को प्राप्त करना है ?

           स्थान के बारे में सूचनाएं
पर्यटन स्थल के बारे में अभी कितनी सूचनाएं उपलब्ध हैं ?
पर्यटक स्थल विकास में प्रकृति का स्थान कितना है ?
पर्यटक स्थल विकास के लिए मनुस्य कृत किन किन भौतिक सुविधाओं की आवश्यकता पड़ेगी ?
पर्यटक स्थल के आस पास के समाज , संस्कृति व इतिहास से पर्यटन विकास में कितना सहयोग मिलेगा ?
पर्यटक स्थल के वासियों के विकास की क्या क्या भूमिकाएं निश्चित करनी हैं ?
पर्यावरण संबंधी किन किन सूचनाओं की आवश्यकता पड़ेगी ? पर्यटन स्थल विकास के लिए पर्यावरण सकारात्मक पक्ष है या व्यवधान ?
स्थल के प्रयोग हेतु सरकारी नियम, कायदे क्या क्या हैं ?
किन किन लाइसेंसों की आवश्यकता पड़ेगी ?
आपके व्यापार की शुरवात करने के लिए कौन कौन सी विधियां  आवश्यक हैं ?
इन विधियों के प्राप्ति साधन क्या क्या हैं और लागत कितनी है ?
         
              लोगों के बारे में सूचनाएं

 पर्यटक स्थल से कौन कौन से लोग जुड़े हैं ?
पर्यटक स्थल से भविष्य में कौन कौन से लोग /समाज जुड़ेंगे ?
स्थल से जुड़े लोगों का इतिहास क्या है ? विशेषकर व्यापार वृद्धि में
 क्या स्थानीय समाज के पास पर्यटन संबंधी   दूरदृष्टि है ?
क्या स्थानीय समाज के पास पर्यटन संबंधी उदेस्य हैं ?
क्या आपके पास ब्रैंड है ?

             पर्यटकों के बारे में सूचनाएं

आपके ग्राहक कौन हैं ?
इन ग्राहकों की मानसिकता, आय - खरीदी शक्ति , आयु विवरण , दृष्टि के बारे में क्या क्या सूचनाएं उपलब्ध हैं ?
ये पर्यटक कहाँ से आते हैं और कहाँ से आयेंगे ?
पर्यटक इस स्थल पर क्यों आते हैं या क्यों आयेंगे ?याने पर्यटकों का मुख्य उदेस्य क्या है ? पर्यटकों के आकर्षण विन्दु क्या हैं ?
पर्यटकों की रूचि देखकर यह पता लगाना वषयक है कि आपकी प्रतियोगिता किन किन से है ?
               कौशल प्रशिक्षण की सूचनाएं

आपके लिए आवश्यक सूचनाएं कौन उपलब्ध कराएंगे ?
मानव संसाधन के लिए कौन कौन से साधन उपलब्ध हैं ?
प्रबंधक , कर्मिक, अन्य सहयोगी व सप्लायर्स कहाँ से मिलेंगे ?
कर्मिकों के प्रशिक्षण हेतु क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं ?

            भागीदारों की सूचनाएं
सभी तरह के भागीदारों की सूचनाएं कहाँ और किस विधि मिलेगी ?
इन अलग अलग भागीदारों की भागीदारी कितनी व किस तरह है ?

                   टूरिज्म प्रोडक्ट की सूचनाएं
अभी पर्यटकों को क्या प्रोडक्ट मिल रहे हैं ?
आपके पास क्या विशेष प्रोडक्ट हैं ?
आपके प्रोडक्ट क्या ग्राहकों को संतुष्ट करने के लिए प्रयाप्त हैं ?
आपको क्या क्या प्रोडक्ट जोड़ने जरुरी हैं ?
आप कैसे प्रतियोगिता में खरे उतरेंगे ?

           निधि की आवश्यकता

निकट भविष्य या दूरगामी भविष्य के लिए आप धन का इंतजाम कैसे करेंगे ?
वे कौन से संस्थान या भागीदार हैं जो आपके लिए आवश्यक धन व संसाधन जुटाएंगे ?

             विपणन रणनीति

 विपणन नीति बनाने के लिए किन किन सूचनाओं की आवश्यकता है ?
सूचनाओं का स्रोत्र कहाँ है और लागत कितनी है ?
ब्रैंडिंग के माध्यम कौन कौन से हैं ?

 लाभ -हानि का अंदाजा लगाना भी आवश्यक है । यदि  व्यापार खोला जा रहा है तो कितने साल बाद संस्थान लाभ कमाने केई स्थिति में आयेगा का आकलन भी आवश्यक है। 
सूचनाओं को एकत्रित करने के कई माध्यम होते हैं और पर्यटक व्यापारी को इन सब की जानकारी लेनी आवश्यक है।





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Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                        पर्यटक  स्थल प्रबंधन योजना के मूलभूत सिद्धांत

                      Principles for Developing Destination Management Plan


(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--33)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 33 
                                                       लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )


 प्रबंध विज्ञान में पर्यटन स्थल प्रबंधन , पर्यटक स्थल या पर्यटन उद्योग समनार्थी शब्द  हैं।
 
             पर्यटक  स्थल प्रबंधन योजना  सभी भागीदारियों के उदेस्यों या इरादों का लिखित या अलिखित बयान है जिसमें किसी पर्यटक स्थल का प्रबंधन एक सीमाबद्ध समय में पूरा किया जाता है , जिसमे सभी भागीदारों की भागीदारी , अधिकार व कर्तव्य  सुनिश्चित किये गए हों, जिसमे सभी के कार्य सुनियोजित ढंग से बंटें हों और  भागीदार हेतु संसधानों का उपयोग सुनियोजित हो।
             पर्यटक  स्थल प्रबंधन योजना वास्तव में रणनीति बनाने व उस पर कार्य करना ही है।
 
                       पर्यटक  स्थल प्रबंधन योजना के मुख्य अंग

पर्यटक  स्थल प्रबंधन योजना के मुख्य निम्न अंग हैं -
 १-पर्यटन उद्यम का सम्पादन व्यवस्था  व पर्यटन का प्रभाव
२- कार्यों की रूप रेखा व सूचनाओं का आदान प्रदान विधियों की योजनाएं
३-पर्यटक स्थल के आकर्षण केंद्र, पर्यटकों के लिए सुगमता , सुविधाएं ,  इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं की योजनाएं
 ४ -विपणन , ब्रैंडिंग , विक्री , जनसम्पर्क , विज्ञापन,  प्रतियोगिता में खड़े रहने की कुशल क्षमता हासिल करने के रास्ते आदि की योजनाएं
५  -मानव संसाधन सहित टूरिज्म प्रोडक्ट्स की रचनाएं व विकास योजनाएं
६- अगले पांच वर्षों के लिए समयबद्ध रणनीति तैयार करना
७-प्रत्येक वर्ष के लिए उदेस्य निर्धारित करना और उन उदस्यों को हासिल करने हेतु भागीदारों को जुम्मेवारी देना
८- समयबद्ध वधियों व विकास के विश्लेषणो  के लिए मापदंड निर्धारित करना।
९- प्राथमिकताओं का  समयबद्ध निर्धारण
१०- दूरगामी उदस्यों का निर्धारण
निम्न आधारभूत प्रश्नो का उत्तर योजना में निहित होने चाहिए

क्यों ?
क्या ?
कहाँ ?
कब ?
कैसे ?
कौन ?
कितना व्यय ?

                           पर्यटन उद्यम योजना का आधात्री

                     १- विधि या पद्धति

अ -स्थानीय समाज की दूरदृष्टि का आकलन व समाज का  योजना पूर्ण करने में समाहित होना
आ- ब्रैंडिंग बयान
इ -पर्यटक स्थल के उद्यम जीवन चक्र पर ध्यान
ई -पर्यटन उद्यम का आकार
उ - त्रुटियां और निदान

                       २- स्थान

१- स्थान आकार का व्यापारिक दृष्टि से आकलन व निरीक्षण
२-क्या स्थान व्यापारिक व अन्य दूरदृष्टि से मेल खाता है ?
३- ब्रैंडिंग स्लोगन के साथ क्या स्थान मेल खाता है ? जैसे  यदि उत्तराखंड पर्यटन का विज्ञापन हो कि देहरादून , मसूरी , नैनीताल के होटलों में विदेशी शराब भी मिलती है तो यह विज्ञापन  उत्तराखंड पर्यटन ब्रैंडिंग "देव भूमि ' के साथ मेल नही खायेगा।
४- इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं
५-पर्यटन से स्थानीय समाज , संस्कृति , पर्यावरण , आर्थिक नीति आदि पर प्रभाव

           ३- मानव संसाधन

 स्थानीय समाज व मानव शक्ति संसाधन का आकलन व योजना

                 ४-  टूरिज्म प्रोडक्ट

वरत्मान टूरिज्म प्रोडक्ट का आकलन व नये प्रोडक्ट जोड़ने के लिए समयबद्ध योजना
भविष्य में बदलाव के कारण किस तरह नये प्रोडक्ट जोड़े जायेंगे ?

                      ५- विपणन
 विपणन की सभी बारीकियों का आकलन व योजना बनाना

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Principles  for Developing Destination Management Plan for Uttarakhand Tourism Development;Principles  for Developing Destination Management Plan for Pithoragarh, Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Champawat Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles  for Developing Destination Management Plan for Bageshwar  Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles  for Developing Destination Management Plan for Almora Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles  for Developing Destination Management Plan for Nainital Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Udham Singh Nagar Kumaon Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Haridwar Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;
Principles for Developing Destination Management Plan for Dehradun Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;
Principles for Developing Destination Management Plan for Tehri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;
Principles for Developing Destination Management Plan for Pauri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;Principles for Developing Destination Management Plan for Chamoli Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;



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                                             पर्यटन विकास में प्रभावकारी शक्तियों की भूमिकाएं

                                     Forces influencing Development of Tourism Destination
   

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--34)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 34 

                                        लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

किसी   पर्यटक स्थल के विकास में निम्न शक्तियां निर्णायक होती हैं -

 

          पर्यटन स्थल विकास में  भौगोलिक शक्ति  की भूमिका

पर्यटक स्थल विकास में भौगोलिक स्थिति कई तरह से प्रभावित करती है।  भौगोलिक स्थिति पर्यटन विकास में सहायक भी हो सकती है और व्यवधान भी डाल  सकती हैं।  उत्तराखंड में भौगोलिक पर्यटन  विकास व आपदाएं पर्यटन को प्दोनों और से रभावित करते रहती हैं. स्थानीय वस्तुओं की उपलब्धि भी भौगोलिक शक्ति का एक अंग है।

           जलवायु परिवर्तन की पर्यटन विकास में भूमिका

जलवायु परिवर्तन से पर्यटन स्थल के विकास के  जलवायु के लिए कई प्रकार के प्रोडक्ट सुनियोजित करने होते हैं।

                         पर्यावरण सुरक्षा दबाब
    उत्तराखंड सरीखे प्रदेस के पर्यटन विकास में रक्षा दबाब हमेशा बना रहेगा।  अत पर्यटन  योजना में हमेशा ही पर्यावरण सुरक्षा को समुचित स्थान  है। जैसे 2013 की आपदा से पता चला कि होटलों के निर्माण में भौगोलिक व पर्यावरण सुरक्षा की अनदेखी की गयी थी।
               
                         सामजिक व सांस्कृतिक शक्तियों की भूमिका

बहुत बार स्थल की सांस्कृतिक स्थिति ऐसी होती है कि समाज पर्यटक स्थानीय समाज का दोहन करने लगते हैं।  या अभिनव संस्कृति सुरक्षा के कारण पर्यटन विकास में कई रुकावटें  भी आती हैं। बहुत सी जगह संस्कृति ही पर्यटन का केंद्र बिंदु होता है।

                      राजनैतिक शक्तियों की भूमिका

दसियों तरह की राजनैतिक शक्तिया पर्यटन विकास को करती रहती है जैसे -
केंद्रीय राजनैतिक शक्ति
राज्य स्तर की  राजनैतिक शक्तिया जिनमे चुनाव के बाद बदलाव आता जाता रहता है।
स्थानीय राजनैतिक शक्तियां जैसे माओवादी  संगठन
प्रशासकीय शक्तियां
             स्थानीय जनसंख्या

स्थानीय जनसंख्या की  दूरदर्शिता , शैक्षणिक क्षमता , आयु , आय , आदि सभी कारक पर्यटन विकास को प्रभावित करते हैं।


              आर्थिक शक्तिया

केंद्र , राज्य व निवेशक स्थल के विकास में प्रभाव डालते रहते हैं।

                  तकनीक उपलब्धि व अनुपलब्धि

 पर्यटन विकास में सैकड़ों तकनीक की परम आवश्यकता पड़ती है।   तकनीक   उपलब्धि व अनुपलब्धि पर्यटन विकास में प्रभाव डालने में सहायक होती हैं।


                 वैश्वीकरण का प्रभाव

वैश्वीकरण के कारण सब जगह कई तरह के बदलाव आ रहे हैं जो कि पर्यटन के तरीकों को रोज प्रभावित कर रहे हैं।

              पर्यटन स्थल की योजना व कार्यवनित करने में  शक्तियों का विश्लेषण व क्रियावनीतिकरण

उपरोक सभी तरह की शक्तियों का अध्ययन के बाद ही विकास योजना व कार्यवनित करने के कदम उठाये जाते हैं।
                                               
अधिकतर उपरोक्त शक्तियां समय बद्ध उद्येस्य प्राप्ति  को प्रभावित करती हैं।


Copyright @ Bhishma Kukreti 8 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                             पर्यटन विकास नीति के मुख्य अंग
                          Areas Addressed by Tourism Policy

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--35)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 35 
                                        लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

किसी  भी पर्यटक स्थल विकास की औपचारिक नीतियों में निम्न मुख्य पक्षों  का ध्यान रखा  आवश्यक है।

१- पर्यटन उद्यम का  स्थानीय सामाजिक आर्थिक विकास में भूमिका
२-पर्यटन का वह भाग  जो मुख्य रूप से स्थानीय सामाजिक -आर्थिक विकास के लिए सम्बल का कार्य करेगा
३- पर्यटक स्थल में विभिन्न करों का प्रावाधान
४-पर्यटक स्थल के विकास में निवेश सुविधाएं व  स्रोत्र
५-पर्यटक स्थल के लिए कौन कौन से प्रोडक्ट सुनियोजिय किये जायं व  स्रोत्र  क्या हो
६-यातायात सुविधाएं व संचार सुविधाएं
७- मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर
 ८-ट्रैवेल ऐजेंसियों  जैसे कुमाऊं विकास मंडल या गढ़वाल मोटर यूनियन की भूमिकाएं
९-पर्यावरण संरक्षण नीतियां
१०-  आचार संहिता के नियमा
११-उद्यम की छवि व विश्वास वर्धन
१२-स्थानीय समाज का उदयम के साथ संबंध नीतियां
१३-मानव कार्मिक स्रोत्र , मानव संसाधन सुविधाएं व प्रशिक्षण सुविधाएं
१४- केंद्र , राज्य , स्थानीय स्वायत शासन के नियम
१५- विदेस व प्रावजन नीति एवं विदेसी निवेश नीति
१६-निवेश धन प्राप्ति के लिए व्याज दर  नीति
१७-श्रमिकों के लिए न्यूनतम दैनिक आय के नियम
 १८-संचार, सूचना, प्रसार , प्रचार नीतियां व  किन वस्तुओं के  विज्ञापन  पर रोक होगी
१९- शिक्षा नीति
२०- सांस्कृतिक -धार्मिक नीति
२१- न्यायिक प्रक्रिया व संवैधानिक नियम
२२- विनियम सुविधाएं
२३- वन संरक्षण नियम
२४- विशेष  वनस्पति संरक्षण नीतियां व नियम
 २५-विशेष  पशु पक्षी संरक्षण नियम
२६-मनोरंजन साधन के नियम
२७-व्यापार व  खरीदी के कोई विशेष नियम

 
Copyright @ Bhishma Kukreti 10 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                     उत्तराखंड पर्यटन विकास परिपेक्ष्य में दुबई का सुयोग्य अंतर्राष्ट्रीय  पर्यटक स्थल बनने के कारण Part -1

               
               Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Uttarakhand Tourism Development
Part -1

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--36)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 36 
                                        लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )


         पिछले कुछ दशकों में संसार में कुछ नये अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पर्यटक क्षेत्र विकसित हुए हैं जिनकी जानकारी प्रत्येक उत्तराखंडी को होनी चाहिए।
दुबई के पर्यटन विकास  कहानी निम्न साँखिकीय तालिका से स्पष्ट हो जाता है कि दुबई  ने एक विशेष आकर्षण पैदा किया है -
             दुबई में होटल व्यापार
----------------------------होटल अतिथि -------------2013 में विकास प्रतिशत
सन 2001 में संख्या लाख में -------300
सन 2012 संख्या लाख में ---502. 7 --------------------
सन 2013 , संख्या लाख में ---558. 3 -------------------------------11 . 1
                          रात्रि विश्राम

सन 2012 संख्या लाख में ---192 . 09  -----------------------
सन 2013  संख्या लाख में ---217 . 15-----------------------13 . 01
रात्रि प्रति अतिथि सन 2012 -------3 . 82 -------------------------------
रात्रि प्रति अतिथि सन 2013 -------3 . 89 ---------------------------13 . 01

       होटलों के कमरों से आय

सन 2012 ---------------- AED -6. 04 बिलियन
सन 2013 -------------------AED -7 . 12 बिलियन
सन 2013 में प्रतिशत वृद्धि -17 . 8 प्रतिशत

अन्य आय 2012 - AED 3 . 75  बिलियन्स
अन्य आय 2013  - AED 4 . 50 बिलियन्स
सन 2013 में प्रतिशत वृद्धि - 19 . 8 प्रतिशत

  पर्यटकों के लिए कमरों  की  उपलब्धि

सन 2002  में होटल्स संख्या --------------400
सन 2012 होटल संख्या -------------------587
सन 2013 होटल संख्या ------------------603


सन 2002  में कमरों की उपलब्धि ----------------------------31355
सन 2012 में कमरों की संख्या ----------76008
सन 2013  में कमरों की संख्या ---------81492

होटल रूम ऑक्युपेंसी
सन 2012 ----------81 . 8 %
सन 2013 --------------84 . 6 %
 होटल अपार्टमेंट ऑक्युपेंसी

सन 2012 --- 79 . 3 %
सन 2013 ----- 85 . 8 %




शेष अगले भाग में …………।

Copyright @ Bhishma Kukreti 11 /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Champawat Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Bageshwar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Almora Kumaon, Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Nainital Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Deharadun Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Haridwar Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Uttarkashi  Garhwal , Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Tehri Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Chamoli Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Rudraprayag Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Lansdowne Tehsil Garhwal , Uttarakhand Tourism Development; Development of Dubai as an International Tourism Destination an Example for Pauri Garhwal , Uttarakhand Tourism Development;


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                            उत्तराखंड पर्यटन विकास परिपेक्ष्य में दुबई का आकर्षक अंतर्राष्ट्रीय  पर्यटक स्थल बनने के कारण Part -4
               
        Development of Dubai as an Attractive International Tourism Destination an Example for Uttarakhand Tourism Development Part -4

                       (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--39)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 39 
                                                           लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )



                              दुबई  अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल बनने की यात्रा



१- १९६० में दुबई एयरपोर्ट का निर्माण
२-१९६६ में चार बड़े समुद्री तेल भंडारों की खोज
३- १९७१ रशीद बंदरगाह का निर्माण
 ४-१९७७ में  जेबल अली पोर्ट निर्माण
५- १९८५ में  एमिरिटस एयरलाइंस की स्थापना
 ६-१९८९ में दुबई टूरिज्म बोर्ड की स्थापना
 ७-१९९२  में दुबई फायनेंसियल सेंटर की स्थापना
 ८-१९९६ से दुबई आंतराष्ट्रीय शॉपिंग मेले की शुरुवात
 ९-१९९९ में   बुर्ज अल अरब की स्थापना
१०- २००१ में  वार्षिक दुबई समर सरप्राइज मेले की शुरुवात
 ११-२०१० में नये एयर पोर्ट का निर्माण
 १२-२०१० से पर्यटन प्रचार -प्रसार में  नई ऊर्जावान रणनीति
१३- दुबई वर्ल्ड सेंटर की स्थापना
 १४-कई खेलों  टूरिज्म प्रोडक्ट्स को समय समय पर शुरुवात  , विकास,  बढ़ावा



Copyright @ Bhishma Kukreti 23  /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in, Haridwar Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Dehradun Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Pauri Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Uttarkashi Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Tehri Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Chamoli Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Rudraprayag Garhwal Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Pithoragarh Kumaon Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Almora Kumaon Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Bageshwar Kumaon Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Champawat, Kumaon Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Nainital, Kumaon Uttarakhand; Birth of Dubai as International Tourist Destination in Context of Tourism Development in Udham Singh Nagar , Kumaon Uttarakhand;




         उत्तराखंड पर्यटन विकास परिपेक्ष्य में दुबई का आकर्षक अंतर्राष्ट्रीय  पर्यटक स्थल बनने के कारण Part -3
               
        Development of Dubai as an Attractive International Tourism Destination an Example for Uttarakhand Tourism Development Part -3

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--38)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 38 
                                        लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )


                      दुबई  पर्यटन विकास के मुख्य विंदु
१- सुरक्षा
२-ठोस व नजदीक
 ३-अन्य स्थानों से परिवहनीय सीधा संबंध
 ४-सस्ते में विलासता व विचरण
५- विशेष मेलाओं का  संयोजन
६- क्रूज आदि

                  दुबई का विश्व पर्यटन प्रतियोगिता में स्थान
WEF 's  T & T Competitiveness Ranking 2011
१- १३९ देसों में ३० वां स्थान
२-क्षेत्रीय पर्यटन विकास में प्रथम स्थान
३-डेस्टिनेशन मार्केटिंग कैम्पियन में प्रथम स्थान
४- वायु परिवहन में ४ था स्थान
५- सरकारी सहायता में ८ वां स्थान
६- नियमों से पर्यटकों   सहायता ३८ वां स्थान

Copyright @ Bhishma Kukreti 21 /1/2014

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Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                     उत्तराखंड पर्यटन विकास परिपेक्ष्य में दुबई का आकर्षक अंतर्राष्ट्रीय  पर्यटक स्थल बनने के कारण Part -2
               
        Development of Dubai as an Attractive International Tourism Destination an Example for Uttarakhand Tourism Development Part -2

(Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--37)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 37 
                                        लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )


   पर्यटक संख्या के मापदंड के अनुसार दुनिया में दुबई का स्थान सातवां है।
  अब दुबई  केवल ड्यूटी फ्री वस्तुओं के लिए,  आराम हेतु यात्रा के लिए प्रसिद्ध स्थान नही रह गया है अपितु अब दुबई बहु उद्येसीय पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है।
  १-  दुबई में लेजर  या आराम पर्यटन - 68  %

२- व्यापार पर्यटन -32 %
 
                            दुबई में लेजर, मनोरंजन   या आराम पर्यटन
अवकाश पर्यटन -27 %
सगे संबंधियों व दोस्तों से मिलने वाले पर्यटक -21 %
खरीदादरी -16 %
समुद्र तटीय पर्यटन - 10 %
यात्रा मध्य रुकने वाले पर्यटक - 8 %
दुबई दर्शन -4 %
समुद्री क्रूज पर्यटक - 4 %
जलवायु पर्यटन - 3 %
मनोरंजन मेले - 3 %
अन्य - 4 %

                         दुबई में व्यापार पर्यटन
१-व्यापरिक बैठकें -35%
२- MICE (मीटिंग , इंसेंटिव्स , कॉन्फेरेंसेस ,एक्जिवेसंस )- 27 %
३- FIT या खेल संबंधी - 22 %
४- वायु व जल परिहवन कर्मिक - 9 %
५- व्यापरिक प्रयोजनाएं - 5%
६-शिक्षा व प्रशिक्षण - 2%



शेष अगले भाग में …………।

Copyright @ Bhishma Kukreti 12 /1/2014

Contact ID bckukreti@gmail.com

Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल

 

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