Author Topic: Tourism and Hospitality Industry Development & Marketing in Kumaon & Garhwal (  (Read 25137 times)

Bhishma Kukreti

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                      जड़ी बूटियां उत्तराखंड पर्यटन को प्राचीन  संबल देती आ रही हैं !
                      Medicinal and Herbal Plants as Source of Tourism Development in Uttarakhand

                  (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--40)

                                          उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 40 
                                                           लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ )

         सन २०१४ के गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में झांकी में उत्तराखंड में जड़ी बूटियां संबंधी चल झांकी भी दिखाई जायेगी। उत्तराखंड पर्यटन ब्रैंडिंग हेतु  झांकी महत्वपूर्ण है।
जड़ी बूटियों द्वारा उत्तराखंड की छवि महाभारत काल से पहले से ही बनती आयी है।
महाभारत , पुराणो व अन्य प्राचीन साहित्य में उत्तराखंड इलाके में ऋषियों , राजाओं का पर्यटन व कई वनस्पतियों का जिक्र मिलता है जो बताता है कि उत्तराखंड की जड़ी बूटियों ने उत्तराखंड की छवि वर्धन में कारगार योगदान दिया था।  प्लेस ब्रैंडिंग में मेड इन (निर्माण स्थान ), मेड बाइ ( किसने निर्माण किया ) का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान होता है।  महाभारत में तो उत्तराखंड की बहुत सी वनसप्तियों का वर्णन इस प्रकार हुआ है जो इंगित करता है कि अन्वेषक उत्तराखण्ड आते रहे हैं।
कालिदास के साहित्य में भी वनस्पतियों द्वारा उत्तराखंड छवि वर्धन हुआ है।
 ऐसा माना जाता है कि चरक व सुश्रुवा व  शिष्यों ने उत्तराखंड में विचरण किया था और उत्तराखंड की जड़ी बूटियों का अध्ययन भी किया था जो इस बात का द्योत्तक है कि जड़ी बूटियों ने उत्तराखंड को विशेष छवि प्रदान की थी।
अशोक व गुप्त काल में उत्तराखंड की वनस्पति व खनिज का निर्यात रोम तक होता था।  जो  बतलाता है कि जड़ी बूटियों का उत्तराखंड पर्यटन में एक विशेष स्थान था और है।  निर्यात पर्यटन सहायक माध्यम होता है।
 
                             जड़ी बूटियों व वनस्पतियों से उत्तराखंड छवि वर्धन याने प्लेस ब्रैंडिंग


जड़ी बूटियां या किसी भी अन्य वस्तु से स्थान छवि वर्धन से पर्यटन -निर्यात को लाभ होता ही है।
पहचान - जड़ी बूटियां (वनस्पतियां ) उत्तराखंड को  विशेष पहचान दिलाने में सहायक होते हैं। मेड इन या अवेलेबल (निर्मित  या सुलभता ) विशेष पहचान हेतु  आवश्यक माध्यम है।  हमेशा से ही वस्तु स्थल पहचान देने का एक औजार  सिद्ध हुआ है।
स्थान की पहचान - स्थान की पहचान  अर्थ है कि ग्राहक विशेष स्थान को किस तरह देखता है या समझता है।
वस्तु  का पहचान से क्या  संबंध  है - याने जड़ी बूटी या वनस्पतियों से उत्तराखंड की पहचान से क्या संबंध  है।  क्या यह जुड़ाव वास्तव में सशक्त छवि प्रदान कर  सकता है ? जड़ी बूटी स्वास्थ्य से संबंधित हैं. इसीलिए  जड़ी बूटी  उत्तराखंड छवि हेतु एक सकारात्मक माध्यम है और यह माध्यम धार्मिक माध्यम के साथ अवश्य ही  खाता है।
वस्तु का  जीवन व इतिहास से संबंध - वास्तु का मानव जीवन के साथ संबंध भी छवि संवर्धन को प्रभावित करता है। हिमालय में मानव हितैसी जड़ी -बूटियां मिलती हैं जैसी छवि प्राचीन काल से ही है अत: जड़ी बूटी को माध्यम बनाकर छवि वर्धन उत्तराखंड के लिए हितकारी है।
  शिवा नंद आश्रम , गुरुकुल कांगड़ी , पंतजलि आश्रम , अमृतधारा द्वारा निर्मित वस्तुएं उत्तराखंड के पर्यटन वृद्धि में  सहायक कारक व माध्यम हैं।
                  वनस्पति जनित औषधि विज्ञान व व्यापार को प्रश्रय
 
उत्तराखंड के समाज को वनस्पति जनित औषधि विज्ञान व व्यापार को सभी तरह से परिश्रय देना चाहिए।  उत्तराखंड में ऐसे निर्णय लिए जायं कि सभी लोग उत्तराखंड को आयुर्वैदिक समझने लगे।  यह मान  चाहिए कि उत्तराखंड को आयुर्वैदिक धरती बनाने से  पर्यटन व निर्यात में वृद्धि होगी ।
 
उत्तराखंड के समाज को औषधीय वनस्पति उत्पादन , वनस्पति उत्पादन , वनस्पति का औषधीकरण , वनस्पति एवं औषधियों का विपणन आदि की योजनाओं को साकार करना चाहिए।


 

Copyright @ Bhishma Kukreti 25  /1/2014

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Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series to be continued ...

उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Bhishma Kukreti

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                               बागेश्वर -जागेशवर व देव प्रयाग के धार्मिक प्रसिद्धि ह्रास व उत्तराखंड पर्यटन विकास में सेवा व कार्य विधि अनुसरण का महत्व


                                 Importance of Customer Care and Working Procedures in Uttarakhand Tourism Development

                                      (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--41)

                                                           उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 41 
                                                           लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 


                            उत्तराखण्ड पर्यटन से जुड़े व्यक्तियों ,  समाज , संस्थाओं व अन्य भागीदारों के  अतिरिक्त समस्त समाज को  बात गाँठ में बाँध लेनी चाहिए कि सभी के सभी को पर्यटकों को कोई वस्तु या सेवा देनी होती है।  पर्यटन उद्यम सेवा उद्यम है।  पर्यटन से जुड़े सभी व्यक्तियों को ग्राहक सेवा देना  मुख्य कार्य से जुड़ा है।  याने ग्राहक सेवा ही पर्यटन व्यापार है। पर्यटन क्षेत्र के व्यापारिक व अन्य गैर व्यापारी संस्थाओं का एक ही ध्येय होना चाहिए कि वे अपने ग्राहकों को उनकी आवश्यकतानुसार व चाहतानुसार सेवा प्रदान करें।  ग्राहक की देखरेख व सुरक्षा ही पर्यटन उद्योग है।  ग्राहकों की सेवा ही ग्राहकों को दुबारा पर्यटन क्षेत्र में लाता है  और पर्यटन सेवा ही  स्थल की छवि वर्धन कर प्रसिद्धि दिलाती है।  यदि ग्राहक पर्यटक स्थल की सेवा से संतुष्ट है तो वः पर्यटक अन्य पर्यटकों को उस पर्यटक स्थल की तरफदारी करता है और यह संतुष्ट ग्राहक पर्यटक स्थल का प्रचार माध्यम बन जाता है।


                        ग्राहक सेवा नीति निर्माण व ग्राहक सेवा नीतियों का निर्वाह


                             पर्यटन से जुड़े प्रत्येक संस्थान , व्यक्ति को ग्राहक सेवा नीति निर्माण कर उनका गम्भीरता  निर्वाह करना आवश्यक है। 


                                           ग्राहक सेवा के उद्येस्य

 १-ग्राहक सेवा से ग्राहक संख्या में वृद्धि होती है
२- ग्राहक सेवा  से  लाभ प्रतिशत में वृद्धि होती है
३-ग्राहक सेवा पर्यटक को पुन: यात्रा के लिए उकसाती है
४- ग्राहक सेवा प्रतियोगिता में  स्थान दिलाती है
 ५-ग्राहक सेवा वास्तव में  संस्थान या पर्यटक स्थल की छवि , प्रसिद्धि , कीर्ति वर्धन का मुख्य कारक है
 ६-ग्राहक सेवा नीति प्रतियोगी कर्मिक बुलाने में सक्षम होती है।  ग्राहक सेवा से कर्मिकों को भी संतुष्टि मिलती है।
७- ग्राहक सेवा व्यापार का राजदूत साबित होती है।

                         बागेश्वर , देव प्रयाग जैसे पर्यटक स्थलों के प्रसिद्धि में गिरावट का मुख्य कारण गृहक सेवा


नवी सदी से पहले बागेश्वर -जागेश्वर  की भारतीय धार्मिक स्थलों में गणना होती थी  और बद्रीनाथ आदि स्थलों को जाने  लिए बागेशर क्षेत्र मार्ग की अपनी प्रसिद्धि थी धीरे धीरे बागेश्वर ने पानी प्रसिद्धि खो दी।  आज बागेश्वर भारतीय धार्मिक पर्यटन में एक गौण पर्यटक क्षेत्र है।  बागेश्वर की कीर्ति ह्रास के पीछे एक मुख्य कारण ग्राहकों की चाहतानुसार  व आवश्यकतानुसार सेवा में ह्रास होना है।
इसी तरह जब से बस सेवा ऋषिकेश से सीधे बद्रीनाथ तक विस्तृत हुयी तो  देव प्रयाग का महत्व पर्यटन दृष्टि से कम हो गया ।   याने यहाँ भी ग्राहक की  चाहतानुसार व आवश्यकतानुसार ग्राहक सेवा में ह्रास ने देव प्रयाग के महत्व को कम कर दिया  .


Copyright @ Bhishma Kukreti 29  /1/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Importance of Customer Care and Working Procedures in Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Nainital Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Almora Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Champawat Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Bageshwar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Gangasalan, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Haridwar Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Dehradun Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Pauri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Importance of Customer Care and Working Procedures in Chamoli Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;  Importance of Customer Care and Working Procedures in Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;  Importance of Customer Care and Working Procedures in Tehri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development;
                     

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                                       पर्यटन व आतिथ्य व्यापार में ग्राहक संतुष्टि एवं ग्राहक आनंद ग्राहक सेवा के अन्यन्य  अंग हैं

                                    Customer Satisfaction and Delight is Part and Partial of Customer Service in Uttarakhand Tourism Development

                                      (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--42)

                                                                        उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 42 
                                                                           लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 

 ग्राहक सेवा  का अंतिम लक्ष्य ग्राहकों को संतुष्ट कर उन्हें असीम आनंद  प्रदान करना होता है।
ग्राहक संतुष्टि   केवल भौतिक सुख , भौतिक सुविधाएं तक सीमित नही होती हैं अपितु संतुष्टि का संबंध ग्राहक आनंद से भी है।
ग्राहक आनंद का संबंध निम्न इंद्रियों से है -
  १-५ पाँचों भौतिक इंद्रियां
६ मन
 ७ - बुद्धि  अथवा  तर्क शक्ति
८-अहम
९ -प्राण चेतना अथवा प्राण रक्षा
१०- उपरोक्त तत्वों को अंतर्मन से मापना
         अत: पर्यटन  आथित्य व्यवस्था में ग्राहक सेवा व संतुष्टि में उपरोक्त दस  तत्वों  का ध्यान अवश्य रखा जाता है।


                                        ग्राहक संतुष्टि

ग्राहक संतुष्टि का अर्थ है कि वस्तु व सेवा ग्राहक की आशाओं के मुकाबले  कितनी खरी उतरती हैं। कस्टमर सेटिसफैक्सन या ग्राहक सेवा का अर्थ है कि तय  गए मानकों पर अधिसंख्य ग्राहकों की संतुष्टि।
                                      ग्राहक संतुष्टि के महत्वपूर्ण कारक

१- ग्राहक से उतने  ही वायदे किये जाने  चाहिए जितना निभाये जायं और वायदों को पूरा निभाये जांय। वायदों से ग्राहकों में उतनी ही आशा जगायी जाय जितना आप आशा पूरी करने में सक्षम हों। 
 २-वायदों का  समय के साथ संबंध होता है
 ३-ग्राहक शिकायतों का  संस्थान बैठकों में विचार  होना चाहिए
 ४-ग्राहक के साथ संचार व्यवस्था व संवाद व्यवस्था का पूर्ण प्रबंध होना चाहिए और ग्राहक की शिकायतों की सुनवाई के पूरे  प्रबंध होने चाहिए
५- असंतुष्ट ग्राहकों को अपना मार्ग दर्शक बनाइये
६- इमानदारी हमेशा संतुष्टि प्रदान करती है
७- ग्राहकों के साथ हंसमुख रहना  चाहिए
८- नीति निर्धारण व कार्य निर्धारण  में ग्राहक संतुष्टि  का  सबसे ऊपर स्थान हो
९- ग्राहक व्यापारिक संस्थान में टीम भावना से प्रभावित होता है अत: टीम भावना का प्रदर्शन होना चाहिए
१०- संस्थान में शिकायत सुनने का प्रबंध होना चाहिए और शिकायत ध्यान से सुनना चाहिए
११- शिकायत निवारण में समय सीमा निश्चित होनी चाहिए
१२ -जहां तक हो सके 'ना ' शब्द को प्रयोग ना किया जाय किन्तु जो न हो सके उसे स्वीकार भी न किया जाय
१३- ग्राहक को भागीदार , दोस्त , या गुरु समझकर व्यवहार किया जाय
 १४-ग्राहक के साथ  उस समय भी व्यवहार होना चाहिए जब उसे तुम्हारी आवश्यकता नही है
 १५-व्यवहार कुशलता आवश्यक है किन्तु कुशलता का अर्थ अनावश्यक गति नही है।
 १६-आपका व्यवहार, आपकी नीति व वायदों  के बीच सामंजस्य आवश्यक है
१७- ग्राहक को लगना चाहिए कि आप ग्राहक सेवा को महत्व देते हैं।
 १८-वायदों के हिसाब से  वस्तुययें   , मानव संख्या होनी चाहिए
 १९-सेवा व संतुष्टि मानकों के हिसाब से कर्मिक  प्रशिक्षण व्यवस्था होनी चाहिए।
२० -संस्थान के अंदर व बाहर बाहर हर समय ग्राहक असंतुष्टि व संतुष्टि का अन्वेषण आवश्यक है
               

                पर्यटन उद्यम में ग्राहक संतुष्टि के मानक

१- परिवहन माध्यम
२- ठहरने की व्यवस्था
३- खान पान
४- दवाइयां या स्वास्थ्य रक्षा
५- मनोरंजन अथवा विशेष आनंद दायक व्यवस्थाएं
६- दुकानदारी
७- आकर्षण
८- वातावरण
९- सफाई
१०- सुरक्षा प्रवाधान



Copyright @ Bhishma Kukreti 2 /2/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Pauri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Chamoli Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Tehri Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Dehradun Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Haridwar Garhwal, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Nainital Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Almora Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Champawat Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Bageshwar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Customer Satisfaction is Part and Partial of Customer Service in Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand Tourism Development;

 

Bhishma Kukreti

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                               उत्तराखंड पर्यटन व आतिथ्य उद्यम विकास  परिपेक्ष्य में ग्राहक शिकायत निदान प्रबंधन

              Checklist Dealing Customer Complaints in context of Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development


                                      (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--43)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 43 
                                                                               लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 


             
        ग्राहकों की शिकायतें सुनने व उन्हें दूर करना पर्यटन व आथित्य उद्योग में महत्वपूर्ण  स्थान है।
ग्राहक शिकायत सुनने में निम्न सावधानियां वर्ती जानी चाहिए -
१- ग्राहक की शिकायत ध्यान से सुनी जाय और शिकायत सुनने वक्त रुकावट या संसय पैदा ना किया जाय।
२- क्षमा करें जैसे शब्द इस्तेमाल किये जाने चाहिए।
३- ग्राहक की समस्या के साथ सहानुभूति होनी चाहिए ना कि चिड़चिड़ापन
४-ग्राहक को विश्वासपूर्ण भरोषा दिया जाना चाहिए कि शिकायत निवारण हेतु उचित जांच पड़ताल किया जायेगा और  समय पर निवारण हो जाएगा।
५- ग्राहक शिकायत शांतिपूर्ण ढंग से सूना जाय और शिकायत को व्यक्तिगत शिकायत ना लिया जाय
६- ग्राहक की आलोचना में क्रोध पूर्ण या उदासीन प्रतिक्रिया कभी ना दी जाय
७-शिकायत की समस्या को गहराई से समझना आवश्यक है
८- समस्या का समाधान खोजकर , समझकर ग्राहक को सूचित करना आवश्यक है
९- जब ग्राहक से कोई वायदा किया जाय तो उसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए
१०- जहां तक संभव हो शिकायत को लिख लिया जाना चाहिए
११- जहां पर आवश्यक हो शिकायत को अपने उच्च पदस्त अधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए
१२- आवश्यकतानुसार ग्राहक को उच्च अधिकारी से भी मिलवाना चाहिए
१३- ग्राहक के गर्व का सदा ध्यान रखा जाना चाहिए।  ग्राहक के दर्प को हानि कदापि नही पंहुचने चाहिए
१४- कर्मचारी को अपना बयान सौम्यतापूर्ण , सभ्यतापूर्ण किन्तु दृढ़ता से ही देना चाहिए



Copyright @ Bhishma Kukreti  3 /2/2014

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1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Checklist Dealing Customer Complaints in context of Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Nainital Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Almora Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Bageshwar Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Champawat Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Chamoli Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Pauri Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Dehradun Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development; Checklist Dealing Customer Complaints in context of Haridwar Garhwal, Uttarakhand Tourism and Hospitality Industries Development;

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                                       पर्यटन व आथित्य उद्यम में कर्मिकों के आवश्यक चरित्र व गुण

                                Essential Characteristics required Working in Travel and Tourism Industries

                                      (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--44)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 44 
                                                                               लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 
 पर्यटन व आथित्य उद्यम में संलग्न कर्मिकों के  आवश्यक चरित्र व गुण इस प्रकार हैं -

१- मानसिक वा शारीरिक विनयशीलता
२- सूचना आदान -प्रदान , बातचीत में कुशलता
३- सुनने की आदत
४- टेलीफोन , वेब कोंफेरेंसिंग आदि बातचीत में प्रवीण
५- कठिन परिस्थितियों को झेलने व इन स्थितियों में  सही कदम उठाने की क्षमता
६- ग्राहकों की आवश्यकता व चाहत की समझ और ग्राहकों के साथ सकारात्मक सामजस्य बैठाने की कला
७- धैर्य
८- शांतपूर्ण चरित्र
९ लचीलापन
१०- संगठानत्मक शक्ति
११- बोलने में साफ़ किन्तु विनम्रता
१२- साफ़ -स्वछ शारीरिक विन्यास व आकर्षक उपस्तिथि
१३- अनुशाशन पूर्ण जीवन , टीम भावना से ओट प्रोत
१४- आवश्यकता व कर्म के हिसाब से शिक्षित




Copyright @ Bhishma Kukreti  5 /2/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Pauri Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Chamoli Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Rudraprayag Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Tehri Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Uttarkashi Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Dehradun Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Hardwar Garhwal Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Bageshwar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Workers required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Champawat  Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Personal required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Almora Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Workers  required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Nainital Kumaon, Uttarakhand Tourism Development; Essential Characteristics of Workers  required working in Travel, Tourism, Hospitality Industries in context Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand Tourism Development;

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                                                पर्यटकों के विभिन्न प्रकार और पर्यटन -आतिथ्य प्रबंधन में ग्राहक सेवा विधान

                                 Customer Types and Customer Care Management in Tourism and Hospitality Industries

                                (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--45)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 45 
                                                                               लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 


 पर्यटन व आथित्य उद्यम में ग्राहक सेवा हेतु पर्यटकों को समझना आवश्यक है।
ग्राहक सेवा प्रबंधन के हिसाब से निम्न तरह के मुख्य पर्यटक होते हैं -
१- व्यक्तिगत या अकेला ग्राहक
२- सामूहिक पर्यटक - परिवार अथवा पार्टियां
३- विभिन्न आयु के पर्यटक
४- विभिन्न संस्कृति व समाज से जुड़े पर्यटक
५- विशेष पर्यटक जिन्हे विशेष सुविधा चाहिए
 ६-अलग अलग  भाषा बोलने वाले पर्यटक
 उपरोक्त प्रकार के पर्यटकों की आवश्यकता  भिन्न भिन्न हो जाती हैं और पर्यटन व आथित्य उद्यम के कर्मिकों को ग्राहक या ग्राहक समूह के हिसाब से  व्यवहार या रवैया निश्चित करना होता है।
संस्थानो को भी पर्यटकों के हिसाब से  ढालना होता है और उसी प्रकार से मानव संसधान जोड़ने होते हैं मिरज (महराष्ट्र ) में अरबी पर्यटक  मात्रा में आते हैं तो पर्यटक -आथित्य उद्यम कर्मिकों को अरबी का लघुतम ज्ञान, इस्लामी संस्कृति , नॉन वेजिटेरियन भोजन का ज्ञान होना आवश्यक है।  किन्तु बद्रीनाथ में पर्यटन -आथित्य कर्मिक को धार्मिक पर्यटकों के हिसाब से अपने को ढालना होता है।  अत पर्यटकों की संस्कृति व सामजिक व्यवस्था पर्यटन उद्यम के मानव संसाधन विधान को हर समय प्रभावित करते रहते हैं।  जैसे गढ़वाल के चार धाम के यात्रिओं को मांश से  प्रभावित नही किया जाना चाहिए । 
जब पर्यटक अकेला होता है तो उसकी आवश्यकता कुछ और होती है और जब पर्यटक समूह में अथवा परिवार में होता है तो आवश्यकताओं में परिवर्तन आ जाता है।
पर्यटक की आयु भी ग्राहक सेवा को प्रभावित करती है और उद्यमियों को अपने संस्थान में बदलाव करने पड़ते हैं . इस तरह पर्यटकों के हिसाब से कर्मिको के प्रशिक्षण विधान का इंतजाम आवश्यक हो जाता है।
पर्यटकों के हिसाब से कर्मिकों के बातचीत के लहजे भी प्रभावित होते हैं। 
औली के पर्यटकों की आवश्यकताएं चार धाम के पर्यटकों से सर्वथा अलग अलग होती हैं और ग्राहक सेवा में भी अंतर हो जाता है।
मसूरी में पाश्चात्य नृत्य व शराब मान्य हो सकता है किन्तु हरिद्वार में कैबरे डांस व शराब को मान्यता नही मिल सकती है।
ग्राहकों के उपरोक्त वैशिष्ट्य  परिहवन सेवा को भी प्रभावित करते हैं
पर्यटकों के हिसाब से पर्यटन -आथित्य उद्यम को ग्राहक सेवा सुनिश्चित करनी होती है।

Copyright @ Bhishma Kukreti  6 /2/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                                                 पर्यटन  विपणन प्रबंधन में चार 'P ' का महत्व

                                              Four 'P' of Tourism Marketing Management


                        (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--46)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 46 
                                                                               लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 
विपणन प्रबंधन में ग्राहकों की आवश्यकता , आकांशा को समझकर ग्राहक को संतुष्ट किया जाता है। पर्यटन विपणन प्रबंधन में विपणन सिधान्तो द्वारा पर्यटकों को संतुष्ट किया जाता है। विपणन सेवा से ही पर्यटक व्यवसाय को लाभ पंहुचता है।

पर्यटन विपणन में निम्न  'P ' महत्वपूर्ण होते हैं -

                   टूरिज्म प्रोडक्ट या पर्यटन वस्तु

टूरिज्म प्रोडक्ट में वे सभी सेवायें या दर्शनीय स्थल आते है जो पर्यटक को लिभाते हैं।  जैसे बद्रीनाथ मंदिर पर्यटन में -मंदिर , पूजा अर्चना प्रबंध , होटल या धर्मशाला व भोजन व्यवस्था , दुकाने व दुकानो में मिलने वाली वस्तुएं , पंडे , धर्माधिकारी , ट्रांस्पोर्टेशन सेवा, आदि टूरिज्म प्रोडक्ट के मुख्य अंग हैं।

                      टूरिज्म प्राइस


 टूरिज्म प्रोडक्ट्स की कीमतें पर्यटन विपणन का एक हिज्जा होता है।  वास्तव में कीमत एक मानसिक व तुलनात्मक अनदेखा  पदार्थ है।


                  टूरिज्म प्लेसमेंट या पर्यटन का वितरण

जो भी टूरिज्म /टूरिस्ट स्थान को वितरित करता है वह टूरिस्ट प्लेसमेंट या पर्यटन वितरण का अंग होता है।  टूरिस्ट ऐजेंट  वितरण का हिस्सा होते हैं


                टूरिज्म प्रमोसन /पब्लिसिटी

टूरिज्म में  ग्राहक को पर्यटक स्थल तक लेन में जो भी व्यापारिक उत्साह वर्धक कार्य किये जाते हैं वे प्रमोसन के भाग होते है जैसे विज्ञापन व जनसंपर्कीय  कार्यकलाप आदि।

  टूरिज्म विकास में निम्न 'P ' भी आवश्यक हैं। यद्यपि ये 'P' उपरोक्त चार 'P ' के ही भाग हैं। पीपल (टूरिज्म से जुड़े लोग अथवा ग्राहक ); प्लेस या पर्यटक स्थल ; प्लांनिंग , प्रोग्रामिंग , फीजिकल एविडेंसेज आदि

         

Copyright @ Bhishma Kukreti  31  /4/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                                             पर्यटन विपणन में नवां 'P' याने पॉलिटिक्स (राजनीती) का महत्व
                     Role  Ninth 'P'- Politics in Tourism and Hospitality Marketing Management
                    (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--47)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 47 

                                                                               लेखक : भीष्म कुकरेती  (विपणन व विक्री प्रबंधन विशेषज्ञ ) 

राजनीति किसी भी स्थान के पर्यटन को प्रभावित करती है।  पॉलिटिक्स पर्यटन के विपणन पर बहुत तरह से असर डालती है।

जम्मू कश्मीर के पर्यटन को राजनीति ने ही तहस नहस किया।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर का दार्जिलिंग जैसे पर्यटक स्थल आज एक उजाड़ पर्यटक स्थल बना हुआ है और यह सब पॉलिटिक्स की वहज से हुआ।
केरल को आधुनिक समय में भी पर्यटन द्वारा ऊंचाई देने में केरल की राज्य सरकार व वहाँ के पॉलिटिसियनों का योगदान सर्व विदित है।
हॉंक कोंग को विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बनाने में ब्रिटिश राजनीती का बड़ा योगदान है।
हॉंक कॉन्ग के बगल में मकाओ को जुआ व वैश्या आधारित पर्यटन क्षेत्र विकसित करने में भी राजनैतिक व्यक्ति का हाथ है।
थाई लैंड में वैश्या वृति आधारित पर्यटन राजनैतिक कारणो से विकसित हुआ।
चीन का पर्यटन तो राजनीति प्रेरित ही है।
अशोक होटल जैसा होटल विकसित करने के पीछे नेहरू जैसे राजनीतिज्ञ का हाथ है।
यदि स्थानीय सरकार बदल जाय अवश्य ही यह राजनैतिक परिवर्तन पर्यटन योजना को प्रभावित कर सकता है।
उत्तराखंड में सरकारें बदलने से पर्यटन विकास को गहरा धक्का लगा है क्योंकि दुसरी सरकार पहली सरकार के कई पुरानी योजनाओं को लागू ही नही करती।
सरकारें ही पर्यटन विकास की रणनीति बनाती हैं जैसे नरेंद्र मोदी ने गुजरात पर्यटन के विज्ञापन को पूर्व मुख्यमंत्रियों से अधिक महत्व दिया।
अंतरास्ट्रीय राजनीति हमेशा पर्यटन को प्रभावित करती है।  2014 में UNO में श्री लंका संबंधित नियम अवश्य ही श्रीलंका पर्यटन को प्रभावित करेगा।
कहा जाता है कि भूतपूर्व केंद्रीय पर्यावरण  मंत्री श्रीमती नटराजन ने कई राज्यों के पर्यटन योजनाओं व्यक्तिगत स्तर पर प्रभावित किया। इसी तरह केंद्रीय मंत्री जय  रमेश ने भी कई पर्यटन योजनाओं को प्रभावित किया।
भारत जैसे देस जहां केंद्र , राज्य व स्थानीय सरकारें अलग अलग विचारधाराओं वाली राजनीतिक दलों की होती हैं तो ऐसी स्थिति में  पर्यटन उद्यम प्रभावित होता है।
कई तरह के पुराने नियम यदि नही बदले गए तो वे पर्यटन को प्रभावित करते हैं।
कई नये नियम भी पर्यटन को प्रभावित करते हैं।




Copyright @ Bhishma Kukreti  1 /4/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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                                 पर्यटन विपणन में वैशिष्ठ्य हेतु 24 अमर तत्व

                        24 Immutable Unique Selling Point Elements for  Tourism Marketing

                (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--48)

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 48 
             व्यवसायिक विपणन हो , व्यक्तिगत विपणन हो या अन्य विपणन हो हरेक को एक USP पर टिकना होता है अथवा एक विशिष्ठ वैशिष्ठ्य प्रदान करना पड़ता है।
भारतीय दर्शन शास्त्रियों याने भारतीय मनोवैज्ञानिकों ने 3000 साल  पहले ही वैशिष्ठ्य के 24 अमर आधारभूत कारक  खोज लिए थे।  6 भारतीय दर्शन शास्त्रों में से एक दर्शन का नाम है वैशेषिक । वैशेषिक  की रचना महर्षि कणाद या आलुक्य ने की थी , इसीलिए वैशेषिक का नाम कणाद या ओलुक्य भी है।
                    6 भागों में  विभक्त वैशेषिक का एक भाग है गुण।  इस भाग में 24 गुणो का वृतांत है जो आज के USP के भी कारक हैं।  USP का अर्थ है यूनीक सेलिंग प्वाइंट याने बेचने का विशिष्ठ तत्व .
पर्यटन एवं आथित्य विपणन में भी प्रत्येक संस्थान या व्यक्ति को अपनी विशेषता बतलाने हेतु 24 अमर तत्वों में से एक या एक से अधिक तत्वों को चुनना होता है।
निम्न 24 विशिष्ठ गुण होते हैं -
रूप - रूप आँखों से दिखता है।  अतः आँखों को जो विशेष लगे उसे रूप कहते हैं।  रंग से रूप की शिनाख्त होती है। भौतिक जगत में रूप दर्शन होते हैं। पर्यटन विपणन में रूप का बहुत प्रयोग होता है।  जैसे मसूरी या नैनीताल की सुंदरता आदि।
रस -रस मधुर (मीठा ), अम्ल , लवण , कटु (कडुवा ), तिक्त , कसैला आदि रस के अंग हैं।  पर्यटन विपणन में खाद्य पदार्थ  बेचने वाले रसों का बखान करते है।  मीठी लस्सी , श्रीनगर की मिठाई , गुमखाल के मीठे काफळ आदि।
गंध - गंध दो तरह का होता है -सुगंध व दुर्गन्ध।  पर्यटन विपणन में गंध का औचित्य बहुकोणीय रूप से प्रयोग होता है. निर्गंध होटल आदि।
स्पर्श - स्पर्श  तरह का होता है -गरम , ठंडा व अनुष्णातीत (न ठंडा ना गरम ). उत्तराखंड का पर्यटन ठंडे स्पर्श पर ही टिका है।  हमारे होटल में 24 घंटे गरम पानी का प्रबंध है जैसे स्लोगन स्पर्श वैशिष्ठ्य का एक उदाहरण है।
संख्या - संख्या भी वैशिष्ठ्य पैदा करती है। जैसे 1906 से फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट देहरादून की शान है।
परिमाण - यह इतना है भी विशेष छवि बनाने हेतु  एक तत्व है। छोटे छोटे मंदिर , बड़े बड़े देवदारु के पेड़, आदि पर्यटन में विशेषता पैदा करते हैं।
पृथकत्व -यह इससे अलग है कथन भी विशेषता पैदा करता है।  यथा -शाकाहारियों व जैन धर्मावलम्बियों के लिए ठहरने के लिए अलग से प्रबंध है।
संयोग -मिलन या संयोग अवश्य ही विशिष्ठता प्रदान करता है।  जैसे अलकनंदा नदी में 6 संगम हैं।
विभाग - संयोग के बिपरीत स्थिति से विशेषता का जन्म होता है। उदाहरण - स्कीइंग यात्रियों के लिए उत्तराखंड पर्यटन में अलग विभाग है।
परत्व-अपरत्व - यह दूर है या परे है या यह नजदीक है दोनों तत्व विशेषता पैदा करते हैं।  जैसे -शहरी कोलाहल से दूर केदारघाटी में शांत वातवरण का आनद लूटिये।  दिल्ली से निकट हरिद्वार है।
भार या गुरुत्व - गिरने या भार का निमित भी वैशिष्ट्य पैदा करता है।  यथा -हमारे यहाँ केवल पांच किलो बासमती  चावल मिलते हैं।
द्रवित्व -बहने को द्रवित्व कहते हैं।  यथा - उत्तराखंड में  कई धार्मिक  नदिया बहती हैं।
स्नेह -स्नेह गुण भी वैशिष्ठ्य पैदा करता है।  यथा - महात्माओं का स्नेहिल आशीर्वाद हेतु नीलकंठ की यात्रा कीजिये !
शब्द - शब्द याने ध्वनि , व्याकरण या अन्य साहित्य।  शब्द ही तो गुणो की व्याख्या करते हैं।
बुद्धि - तर्क को बुद्धि कहते हैं।  तार्किक ढंग से पर्यटकों को आकर्षित किया जाता है।
सुख - जैसे -आत्मिक सुख हेतु डांडा नागराजा की यात्रा कीजिये !
दुःख - जैसे दुःख निवारण हेतु चार धाम यात्रा कीजिये।
इच्छा - यथा -अपनी इच्छा पूर्ति हेतु सीम जात्रा लाभदायक यात्रा है।
द्वेष या प्रतियोगिता - उदाहरण -जब उत्तराखंड पर्यटन विभाग हिमाचल के साथ प्रतियोगात्मक विज्ञापन रिलीज करे तो इसे द्वेष आधारित विशेषता या यूनिक सेलिंग प्वाइंट का नारा कहा जाएगा .
प्रयत्न - औली में पर्याप्त बर्फ न गिरने के कारण प्रशाशन कृत्रिम बर्फ बनाकर स्कीइंग टूर्नामेंट करे तो इसे पर्यटन आधारित सेलिंग प्वाइंट कहते हैं।
धर्म -अधर्म -परम्परा गत नियम या नियमों के हटने को धर्म -अधर्म कहते हैं।
संस्कार -१- वेग २-भावना ३-स्थिति को संस्कार कहते हैं।







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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Pauri Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Chamoli Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Tehri Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Dehradun Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Haridwar, Garhwal, Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Udham Singh Nagar Kumaon ,  Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Nainital Kumaon ,  Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Almora  Kumaon ,  Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Bageshwar Kumaon ,  Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Champawat Kumaon ,  Uttarakhand; 24 Immutable Unique Selling Point Elements for Tourism Marketing of Pithoragarh Kumaon ,  Uttarakhand;


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                        पर्यटन उद्यम में भक्त ग्राहक पाने के  11 अमर सूत्र
           

          11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing
       
              (Tourism and Hospitality Marketing Management for Garhwal, Kumaon and Hardwar series--49 )

                                                                               उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन -भाग 49   
मार्केटिंग में मैंने Customer Loyalty संबंधित  कई पुस्तकें पढ़ीं किन्तु Customer Loyalty पैदा करने हेतु जो सूत्र नारद भक्ति सूत्र में हैं वे कोई भी मार्केटिंग विजार्ड आज तक नही दे पाया है।
मार्केटिंग विशेषज्ञों को नारद भक्ति सूत्र अवश्य पढ़ना चाहिए।
भक्त ग्राहक  लाभदायक होते हैं।
भक्त ग्राहकों से विज्ञापन पर बहुत कम खर्च करना पड़ता है।
भक्त ग्राहक अन्य ग्राहकों को ब्रैंड की ओर  मोड़ते हैं याने भक्त ग्राहक ब्रैंड एजेंट या दूत का कम करते हैं।


                         नारद भक्ति सूत्र पर आधारित  निम्न मार्केटिंग सूत्र ग्राहक भक्ति पाने के अमर सूत्र हैं -


ग्राहक के गुणों से अप्रतिम प्रेम - ग्राहक के चरित्र से प्रेम कर भक्त ग्राहक प्राप्ति हो पाती है।
रूप - आप अपने प्रोडक्ट की ब्यूटी, सुंदरता  या रूप से आकर्षित कर सकते हैं। 
पूजा - आप ग्राहक की पूजा कर ग्राहक भक्ति प्राप्त  कर सकते हैं।
ग्राहक स्मरण - बार बार ग्राहक स्मरण से आप अपने ग्राहक को सदा के लिए अपना बना सकते हैं।
सेवा द्वारा - विशिष्ठ  सेवा द्वारा भी भक्त ग्राहकों की प्राप्ति होती है ।
सखा भाव - सखा भाव याने ग्राहक को सम्पूर्ण संतुष्टि द्वारा भक्त ग्राहक प्राप्त हो पाते हैं।
ग्राहक को माता -पिता मानकर - ग्राहक को माता पिता मानकर उसके दुःख -सुख में शामिल होकर भक्त ग्राहक प्राप्ति होती है।
ग्राहक को प्रेमी समझना - ग्राहक को प्रेमी मानकर भक्त ग्राहक की प्राप्ति होती है।
ग्राहक के सम्मुख शरणागत होना - ग्राहक के सामने सम्पूर्ण रूप से शरणागत होने से भक्त ग्राहक  जाते हैं।
ग्राहक में मिल जाना -ग्राहक और अपने का भेद समाप्त करने से भी भक्त ग्राहकों की प्राप्ति होती है।
ग्राहक से दूर हो जाना - ग्राहक के मन में अलग या दुरी होने की भावना पैदा करने से भी भक्त ग्राहक मिलते हैं।
प्रोडक्ट , प्राइस या प्लेसमेंट के अनुसार ब्रैंड मैनेजमेंट को उपरोक्त सूत्रों में से एक सूत्र पर आधारित मार्केटिंग रणनीति बनानी  चाहिए।



Copyright @ Bhishma Kukreti  5  /4/2014

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उत्तराखंड में पर्यटन व आतिथ्य विपणन प्रबंधन श्रृंखला जारी …

                                    References

1 -भीष्म कुकरेती, 2006  -2007  , उत्तरांचल में  पर्यटन विपणन परिकल्पना , शैलवाणी (150  अंकों में ) , कोटद्वार , गढ़वाल
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11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Nainital Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Almora Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Champawat Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Bageshwar Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Pauri Garhwal, Uttarakhand;  11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Chamoli Garhwal, Uttarakhand;  11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Tehri Garhwal, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Dehradun Garhwal, Uttarakhand; 11 Immutable Laws for gaining Brand Loyalty in term of Tourism Marketing of Haridwar Garhwal, Uttarakhand;             

 

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