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Muni ki reti Rishikesh Uttarakhand,विश्व का योग केन्द्र है। मुनि की रेती

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, December 09, 2009, 11:29:23 PM

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लक्ष्मण झुला



प्राचीन मत के अनुसार लंका विजय के बाद जब भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ हिमालय की तीर्थ यात्रा पर निकले तो लक्ष्मण ने प्रार्थना स्थान के रुप में इसी जगह को चुना तथा विशाल गंगा को पार करने के लिए रस्सी का उपयोग किया। उनके सम्मान स्वरुप रस्सी के एक झुला का निर्माण किया गया जो वर्ष 1809 तक मौजुद था।

कलकत्ता के निवासी सेठ सुरजमल के दान शशि से एक अन्य रस्सी के पूल का निर्माण कराया गया। जो कि 1924 की बाद में बह गया वर्ष 1930 में एक अन्य लोहे के तारों से बने 140 मीटर लम्बे पुल ने उसकी जगह ले ली, इसे ही आज लक्ष्मण झुला कहते हैं।

जब आप झुला पार कर रहे हों, आप झुला के नीचे बहती गंगा नदी के सुंदर दृश्य का आनंद लें लेकिन आप विचारों में न खो जाएं बल्कि अपने सामानों का भी ध्यान रखें क्योंकि इस क्षेत्र में फैले बन्दर आपको परेशान कर सकते हैं।

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लक्ष्मण मंदिर




प्राचीन लक्ष्मण मंदिर, लक्ष्मण झुला के करीब स्थित है। सालों भर यात्री इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। यह ऋषिकेश से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस मंदिर में लक्ष्मण की पौराणिक प्रतिमा है जो लोगों को धीरज देती है। लोकमत के अनुसार इस मंदिर का पुनरुद्वार वर्ष 1885 में हुआ। इसके पौराणिक महत्व के कारण लक्ष्मण झूला आने वाले तीर्थ यात्री, यहां भी आते हैं।

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नीलकंठ महादेव



नीलकंठ ऋषिकेश में स्वर्ग आश्रम के ऊपर एक पहाड़ी मे 1,675 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है। मुनी की रेती से यह सड़क मार्ग से 50 कि.मी. और नाव द्वारा गंगा पार करने पर 25 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित है।

नीलकंठ महादेव क्षेत्र के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। यह कहा जाता है कि नीलकंठ महादेव वह स्थान है जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष पीया था।

उनकी पत्नी, पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे कि विष उनके पेट तक नहीं पहुंचे। इस तरह, विष उनके गले में बना रहा। इस कारण उनका गला नीला पड़ गया। नीलकंठ नाम इसी पर आधारित है।

अत्यन्त प्रभावशाली यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी नक्काशी देखते ही बनती है। अत्यन्त मनोहारी मंदिर शिखर के तल पर समुद्र मंथन का दृश्य चित्रित किया गया है ; और गर्भ गृह के प्रवेश-द्वार पर एक विशाल पेंटिंग में भगवान शिव को विष पीते भी दिखलाया गया है।

गर्भ गृह में फोटोग्राफी करने पर सख्त प्रतिबंध है। मंदिर के निकट एक लघु जल प्रपात भी है।नीलकंठ महादेव के रास्ते में गढ़वाल मंडल विकास निगम एक छोटे से सुविधा-केन्द्र का परिचालन भी करता है जहां आप अपने आप को तरोताजा कर सकते हैं। सामने की पहाड़ी पर शिव की पत्नी, पार्वती को समर्पित मंदिर है।