• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
February 27
हर जगह


रूठे रूठे नजारे लगते हैं
अब तो हर जगह
देखो तुम
खूंटे से बंधे सहारे नजर आते हैं

खिंच लाये हम को
वो अब आपको अपनी ओर
ना मिलने वाले
क्या दो किनारे नजर आते हैं

फरेब का सिलसिला
चला है अपने आप ही
अब हर तरफ बाजार में
बिकाऊ ईमान नजर आते हैं

किस को पुकारे हम
हम किस को आवाज दें
नीलाम तो हम हो रहे
अब हर कोई खरीदार नजर आते हैं

रूठे रूठे नजारे लगते हैं
अब तो हर जगह
देखो तुम
खूंटे से बंधे सहारे नजर आते हैं

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
February 26
किस पथ पर

पन्ना पन्ना
बोल रहा
अक्षरों संग क्या
वो डोल रहा

नींव पड़ी
ना जब तू जन्मा था
शीर्ष पर नही है क्यों
किस से पंगा था

पन्ना पन्ना
बोल रहा

मांग रही है रिहाई
अपनों से दुहाई
धूल पड़ी उन पर
बिक रही फुटपाथों में

पन्ना पन्ना
बोल रहा

नीर जल का है
अब हुआ छ्ल छल
कागज कि नाव चली
अब किस पथ पर

पन्ना पन्ना
बोल रहा
अक्षरों संग क्या
वो डोल रहा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hours ago
वादा है मेरा

आप जैसे
मित्रों को छोड़ कर
मै कैसे जी पाऊँगा
आपने रोका है मुझे
दो कदम आप बिन
मै अब कैसे चला पाऊँगा

आपकी बातों ने
झंझोड़ा है है मुझे
अँधेरे से उजाले कि ओर
फिर मोड़ा है मुझे
फर्ज दोस्ती का
निभाया है आपने
ये कर्ज कैसे चुकाऊंगा मैं

ऋण आपक ये मेरे सर
लडूंगा अब मैं अपने संग
सुबह नही तो शाम कभी
दिखूंगा मैं कभी रात सही
फेस-बुक बस तेरा साथ सही
अब ना कभी आप को
मैं अब छोड़ के जाऊँगा
वादा है मेरा आपसे
आखरी साँस तक निभाऊंगा

आप सबको ध्यानी प्रणाम
फिर लौट आया

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हमें अब भी तुम से प्यार है

इतना इंतजार है
तन्हाई बेकरार है ......२
लहरों को गिनते गिनते
सागर का बुरा हाल है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

ओढ़ ली सुनहरी किरणों ने
वो कली सी अब चादर
शाम छोड़ चली है
अब मुझे वो मेरे हाल
हमें अब भी तुम से प्यार है........

टीम टीम तारे जागे
दुधेली चाँद के वो साथ साथ
अब भी खड़ा हूँ मैं वंहा
मुझे मेरे चाँद का इंतजार है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

कुछ कारण होगा
इसलिये शायद ना आयी वो
सोच सोच कर रात गुजरी
सुबह हुयी अब नई सोच का संचार है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
6 hours ago
हर बात में जी

हर बात में जी
जैसे घुली हो लस्सी में घी
मीठा रस अब ऊंचा ताना
मर्म सीधा छाती में जागा
जी शब्द अब उभर आता

दिल को अब वो केंद्र करती
सीधी रेखा मध्य भाग से उभरती
जीभ जिव्ह संग लपलपाती
मधुमेह का वो लेप लगाती
जी अब वो आवाज लगती

आत्मा, प्राण, रूह का वासा
मेहनत, कम से अब जी भागा
मनोरथ, मुराद का वो मनमौजी
गुड-चीनी कि बनी वो ढेली
जी चलने लगी अब वो मर्जी

व्यक्ति अब विशेष हुआ
माननीय और वो आदरणीय हुआ
श्रद्धेय संमानित इज़्ज़तदार है जी
महान कुलीन सज्जन भद्र में बसा है जी
हर काज में रचा है जी जी
हर बात में जी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
22 hours ago
वो मेरे मन बन जा रास्ता

बस खोज
वो अनंत सोच
कब जाके खत्म होगी
********************
अपनो से दूर कंही
या उनके पास
कंहा रास्ता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday
हमें अब भी तुम से प्यार है

इतना इंतजार है
तन्हाई बेकरार है ......२
लहरों को गिनते गिनते
सागर का बुरा हाल है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

ओढ़ ली सुनहरी किरणों ने
वो कली सी अब चादर
शाम छोड़ चली है
अब मुझे वो मेरे हाल
हमें अब भी तुम से प्यार है........

टीम टीम तारे जागे
दुधेली चाँद के वो साथ साथ
अब भी खड़ा हूँ मैं वंहा
मुझे मेरे चाँद का इंतजार है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

कुछ कारण होगा
इसलिये शायद ना आयी वो
सोच सोच कर रात गुजरी
सुबह हुयी अब नई सोच का संचार है
हमें अब भी तुम से प्यार है........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
5 hours ago
पराया धन

मेरा दर्द ,मेरे साथ
बात छिड़ी, मेरे बारे में
हर दर ,हर दीवारों में
मेरा दर्द ,मेरे साथ

माना मैं पराया धन
ना माना तुमने कभी मेरा मन
करना बहुत कुछ ना करना पाऊँ मैं
खुले आकश में उड़ना चाहूं मैं
मेरा दर्द ,मेरे साथ

अब भी बंधी हूँ मै
बातों बातों में कटी जली हूँ मैं
तानों से कभी इशारों में
अपने ही नजर में गड़ी हूँ मै
मेरा दर्द ,मेरे साथ

तोड़ना चाहूं इन ये सलाखों को
ढकोसले जंजीरों कि दीवारों को
पर अब भी कोने में पड़ी हूँ मैं
रीती रिवाजों से जुडी हूँ मैं

मेरा दर्द ,मेरे साथ
बात छिड़ी, मेरे बारे में
हर दर ,हर दीवारों में
मेरा दर्द ,मेरे साथ

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
17 hours ago
मुझे तो

मुझे तो इतना ही कहना था
कि प्यार है तुम से
नजरों को चार करना था
इंतजार है कब से
मुझे तो इतना ही कहना था
कि प्यार है तुम से

पहला पहला
वो कदम बढ़ना
कितना मुश्किल है
अब इस दिल को समझना ....२
प्यार है उनसे
बस इतना कह पाना
मुझे तो इतना ही कहना था
कि प्यार है तुम से

सोचता है
वो अब तो बहुत
जाने को वो
उसके करीब....२
करीब आते ही बिसरा जाता है
बस वो कह नही पाता है
कि उसे क्या उसे कहना था
मुझे तो इतना ही कहना था
कि प्यार है तुम से

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
March 6
आ जा
मंजिलें पास खड़ी तेरे
पर तू गलत रस्ते चला
आ लौट आ
अपने उकाल कि ओर
वो पहाड़ी मेरे
तेरा गाँव पुकारे
एक तड़पता दिल ध्यानी का
और अनगिनत आँखें
राह देखती तेरा ......आ जा