• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी ‎उत्तराखंड 

नौ माह बीते, क‌िसी ने नहीं ली धारी देवी की सुध

धारी देवी से माफी मांगेंगी उमा भारती
धारी देवी के आसन में पड़ी दरारें, माना जा रहा देवी का प्रकोप

ग्रामीणों से वार्ता हो चुकी है। शुक्रवार से धारी देवी के स्थायी मंदिर के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा। ग्रामीणों को भी मंदिर निर्माण में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- संतोष रेड्डी, अलकनंदा हाइड्रोपावर
धारी देवी मंदिर के स्थायी मंदिर का निर्माण कार्य मूर्ति को मूल स्थान से अस्थायी मंदिर में शिफ्ट करने के नौ माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया। बीते वर्ष मीडिया के समक्ष स्थायी मंदिर का विशाल मॉडल प्रस्तुत किया था।

वर्ष 2014 में बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के दिन ही स्थायी मंदिर के उद्घाटन की घोषणा भी की गई थी लेकिन अभी तक स्थाई मंदिर का निर्माण कार्य 10 प्रतिशत भी आगे नहीं बढ़ पाया है।

जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं उठाई आवाज
अक्सर चुनावों के समय भावनात्मक वोटों को अपने पक्ष में करने का साधन मठ-मंदिरों तक पहुंच तथा जहां-तहां रो पड़ने का दिखावा कई बार उत्तराखंड में भी दिखता रहा है। धारी देवी मंदिर में पूर्व में एक काबीना मंत्री द्वारा शपथ लिए जाने की घटना भी खासी चर्चित रही थी।

इसके बावजूद नौ माह पूर्व अपने वर्षोँ पुराने मूल स्थल से हटाकर अस्थाई मंदिर में स्थापित की गई धारी देवी के लिए मंदिर के सवाल पर कोई जन प्रतिनिधि ने अभी तक आवाज तक नहीं उठाई है। जबकि नवरात्र के समय हजारों की संख्या में मंदिर में श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे हैं।

ग्रामीण कर रहे विरोध
धारी देवी मंदिर के निर्माण का विरोध धारी गांव के ग्रामीण कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे गांव के लिए न तो पुल बना और न ही सभी ग्रामीणों को कंपनी ने निर्धारित मुआवजे का पैकेज दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी ग्रामीणों का भुगतान नहीं हो जाता, मंदिर निर्माण नहीं करने दिया जाएगा।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी

मेरे नेता

सीमा पर खड़े मेरे बाहुबल को उजड़ते देखा
गैरों को नही अपनों को ही धोखा देते हुये देखा
क्या हुआ इस तरह ही मैंने जब
अपने पर्वतों को ही ढहते हुये देखा

आँखों को क्यों मैंने इस तरह विचरते देखा
खाकी को ही अब बस आपस में ही लड़ते हुये देखा
पर्दे पीछे ही पीछे मैंने उन्हें गले से गले लगते हुये देखा
अपने पर्वतों को ही ढहते हुये देखा

सुरंगा के लिये कभी कंही खनिज के लिये
उस लालच में बम बम के धमाकों को उड़ते देखा
हर उन धमाकों में मैंने उनको हँसते हुये देखा
अपने पर्वतों को ही ढहते हुये देखा

ऊँचे देवदारों के पेड़ों को काटते हुये देखा
जंगल के शेरों को पिजडों में मरते हुये देखा
बस एक एक कर सभी को लूट ते हुये देखा
अपने पर्वतों को ही ढहते हुये देखा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hours ago
बापू दे दे इनके जवाब

माँ पिता का जंहा ना होता आदर
वो मेरा देश,गाँव ना वो मेरा भारत

धर्म कर्म जंहा पर होता पाखंड
उस देश को मै कैसे कह दूँ वो है अखंड

निश्छल ना बहे जँहा गंगा की धार
बोतल में बंद होके बाँटे हैं यंहा प्यार

मतलब की यंहा मन दीवार खड़ी है
बिना कारण यंहा कोई किसी का नही है

मेरे अंतर मन उठे है कई ऐसे सवाल
चित शांत कैसे हो बापू दे दे इनके जवाब

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी

भूख बढ़ती रही प्यास बढ़ती रही

भूख मिटती नही प्यास बुझती नही
ये गरीबी की लौ क्यों बुझती नही

उम्मीद कि लौ अकेली लड़ती रही
जनांदोलन दे साथ फड़फड़ाती रही

अकेली थी अकेले पथ पर चलती रही
सफेद धोखे पे धोखे वो खाती रही

डगर ना मिली उसे जिसे वो ढूॅंढती रही
भूख बढ़ती रही प्यास बढ़ती रही

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी

जय हनुमान

राम नाम धुन ये संसार
पतित पावन बोलो जय हनुमान

लगा छलांग लंका पार
हे मारुती नंदन कर दे बेड़ा पार

लूम लपेटी अहम जरावा
फूँक दो हमारे अहम को वानर राज

अंजनी पुत्र बोलो जय श्री राम
राम सीया संग विराजो ये हिर्दय भगवान

राम नाम धुन ये संसार
पतित पावन बोलो जय हनुमान

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मै आया हूँ और यंहा से चला जाऊंगा

मै आया हूँ और यंहा से चला जाऊंगा
दो पल रोक कर भी मै यंहा क्या पाऊँगा

चलती-थमती है तूने दी ये हस्ती मेरी
बस आगे ही दौड़ती है मुझ से ये जिंदगी तेरी

मोह इससे लगा कर मै यंहा तो फंस जाऊँगा
दो पल रोक कर भी मै यंहा क्या पाऊँगा

थामता हूँ जितना भी उसे वो तो छूट जाती है
हाथों की लकीरों से रेत की तरहं सरक जाती है

संवारना जितना चाहूँ उतना ही उलझ जाती है
दो पल रोक कर भी मै यंहा क्या पाऊँगा

तकदीर मेरी ऐसे ही अब तो बिखर जाती है
भटकते भटकते आहें और राहें गुजर वो जाती हैं

दीपका आस का जलना मगर तुम नही भूलती
दो पल रोक कर भी मै यंहा क्या पाऊँगा

मै आया हूँ और यंहा से चला जाऊंगा
दो पल रोक कर भी मै यंहा क्या पाऊँगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अमरुद कि दाणी हो

अमरुद कि दाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो
याद ऐगे कया लठ्याळ ....2
तेरे बिसरी कहाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

कच्चा पक्यां ऊँ डलियुं मा
कच्चा पक्यां ऊँ डलियुं मा
ढून्गू चुलुयुं ऊँ दाणीयों ....2
झँपा जख खिली हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

मीठी मीठी रशिलि दाणी हो अ हो
मीठी मीठी रशिलि दाणी हो
मेरु बाल पणा कि निशाणी....2
क्ख्क गैनि वो दिन फुर आग लगे ईं जवानी थे हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

कखक अब ढूंगा चुलु मी हो अ हो
कखक अब ढूंगा चुलु मी हो
नि रैगै यख वो गेल्या अब ....2
ऊँ कि खुद बल आन्दी जान्दी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

अमरुद कि दाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो
याद ऐगे कया लठ्याळ ....2
तेरे बिसरी कहाणी हो अ हो
अमरुद कि दाणी हो

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गेडों मा अल्जी

गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च ...२
ये जिंदगी बे-फिक्री पंडि च..... बे-फिक्री पंडि च
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

मेस दा मेस दा इन हर्ची गैई ...२
जोड़ इन वैमा पड़ि खंत रै गैई..... खंत रै गैई
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

बिचार ना कैर स्की पूछ ना स्की ...२
घूम दि रै वा भिर भिर ग्याई भिर भिर ग्याई
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च ...२
ये जिंदगी बे-फिक्री पंडि च..... बे-फिक्री पंडि च
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गेडों मा अल्जी

गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च ...२
ये जिंदगी बे-फिक्री पंडि च..... बे-फिक्री पंडि च
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

मेस दा मेस दा इन हर्ची गैई ...२
जोड़ इन वैमा पड़ि खंत रै गैई..... खंत रै गैई
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

बिचार ना कैर स्की पूछ ना स्की ...२
घूम दि रै वा भिर भिर ग्याई भिर भिर ग्याई
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च ...२
ये जिंदगी बे-फिक्री पंडि च..... बे-फिक्री पंडि च
गेडों मा अल्जी..अल्जी पंडि च

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अलखनंदा

लट लट लाटी-काटी
गारा गारा नयारों छांटी
बोग नि धारा अलखनंदा कि....३

धौली गंगा,नंदाकिनी
पिंडारी ,मंदाकिनी बोई भागीरथी
ध्यै लगा नि अलखनंदा कि ....३

विष्णु प्रयाग,नंद प्रयाग
कर्ण प्रयाग,रूद्र प्रयाग औरि देव प्रयाग
ऐकि डुबकी लगा ऐ भक्ता अलखनंदा कि ....३

पाप हरणी दुःख निवारणी
मेरा पहाड़ों की माता राणी
जयकारा लगा दे अलखनंदा कि ....३

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित